“नंगी तस्वीरें माँगूँगा और नंगी तस्वीरें भेजूँगा, लेकिन सरकार को NRC डाक्यूमेंट्स नहीं दिखाऊँगा” — वामपंथी लेखक वरुण ग्रोवर

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मेरे पिछले लेख में मैनें अश्लील स्टैंड अप कॉमेडी के महाविद्वान कुनाल कामरा जी के बारे में आप लोगों को बताया था | यदि आपने वो लेख न पढ़ा हो तो यह लिंक क्लिक करके पढ़ लें : ठरकीयों और चरित्रहीनों के परम मित्र कुनाल कामरा देंगे भारतीयों को लोकतंत्र और राजनीति का ज्ञान

आज मैं उसी क्षेत्र के एक और महाविद्वान के बारे में आप लोगों को बताने जा रहा हूँ | इन महाशय का नाम है वरुण ग्रोवर | ये भी AIB – आल इंडिया बकचोद उर्फ़ (Send Nudes ग्रुप) के सदस्य थे | वामपंथी विचारधारा के हैं | मोदी को गालियाँ देना इनका पसंदीदा शौक है | वामपंथी मीडिआ के आशीर्वाद से काफी लोकप्रिय भी हुए हैं | इनका ट्विटर देखेंगे तो पता चलेगा कि जोकर से राजनेता और समाजसेवी बनने की तरफ अग्रसर है | हर मामले में देशवासियों को ज्ञान देने में लगे हैं |

वरुण ग्रोवर जी ने अभी-अभी एक कविता लिखी है – “हम काग़ज़ नहीं दिखाएँगे।” कागज़ नहीं दिखाने से इनका तात्पर्य है सरकार द्वारा कराई जानेवाली NRC में यह अपने कानूनी कागज़ नहीं दिखाएँगे | सही बात है, दिखाएँगे भी कैसे ? इनको डर है कि कागज़ दिखाते ही इनका सही नाम लोगों को पता चल जाएगा | तो वरुण जी आपको डरने की कोई जरुरत नहीं | लोगों को पहले से मालूम है कि आपका असली नाम विश्वकर्मा है | अपने कॉलेज के समय से ही कन्याओं को तिलोत्तमा अप्सरा बनाकर आपने उनके साथ जो अश्लील हरकतें की थी, उसकी जानकारी #MeToo के दौरान सबके सामने आ गयी थी | फर्क सिर्फ इतना है कि आप वामपंथी मीडिया के प्यारे-दुलारे हो तो आपको कुछ भुगतना नहीं पड़ा और कन्या के आरोपों से ज्यादा आपकी सफाई समाचार पत्रों में छपी |

वैसे वरुण ग्रोवर जी को राजनीति, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र का बड़ा तगड़ा ज्ञान है | हर मामले में वो सरकार की ऐसी तैसी कर देते हैं | महाविद्वान शब्द भी वरुण जी के लिए छोटा है | स्त्रियों के शरीर के हर हिस्से के बारे में ऐसे-ऐसे जोक्स बनाते हैं कि अब क्या बताऊँ ! अभिनेत्री आयशा टाकिया पर इन्होनें जो अश्लील स्टैंड अप कॉमेडी किया था, उसे वामपंथिओं ने सर्वश्रेष्ठ स्टैंड अप कॉमेडी घोषित किया हुआ है |

बस एक ही कमी है वरुण जी में, जहाँ वो खुद काम करते हैं, वहाँ क्या सही गलत हो रहा है, इसका पता उनको नहीं चलता | AIB – आल इंडिया बकचोद उर्फ़ (Send Nudes ग्रुप) में कई साल काम किया | वहाँ उनके साथी, उनके बॉस लड़कियों से नंगी तस्वीरें माँगते रहे, उनके साथ अश्लील हरकतें करते रहे, पर वरुण जी को कुछ पता नहीं चला | उनके एक बॉस ने तो ट्विटर पर यह भी लिख दिया कि “छोटी बच्चियों को रेप में मजा आता है” | इतने सीधे-सच्चे आदमी है कि बेचारे यह बात भी नहीं पढ़ पाए | चुपचाप AIB – आल इंडिया बकचोद उर्फ़ (Send Nudes ग्रुप) में काम करते रहे, और पैसा कमाते रहे | हाँ जैसे ही #MeToo के मामले सामने आये, HIGH MORAL GROUND लेते हुए अपने सब साथियों को डाँट जरूर दिया | स्त्री सशक्तिकरण में ऐसा योगदान शायद ही किसी ने दिया हो !

वरुण ग्रोवर जी के व्यक्तित्व से हम सबको यह सीखने मिलता है कि स्त्रियों का शोषण, चरित्रहीनता यह सब छोटे-मोठे मुद्दे हैं | इन मामलों में पैसा कमाने के लिए हम चुप रह जाएँ तो चलेगा | लेकिन सरकार को NRC डाक्यूमेंट्स दिखाना मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है | इस मामले में चुप नहीं रह सकते | इसलिए वरुण ग्रोवर जी द्वारा दिए गए महान नारे – “नंगी तस्वीरें माँगूँगा और नंगी तस्वीरें भेजूँगा, लेकिन सरकार को NRC डाक्यूमेंट्स नहीं दिखाऊँगा” का मैं पूरा-पूरा समर्थन करता हूँ |

ठरकीयों और चरित्रहीनों के परम मित्र कुनाल कामरा देंगे भारतीयों को लोकतंत्र और राजनीति का ज्ञान

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पता नहीं आप लोगों में से कितने लोग कुनाल कामरा को जानते हैं ! थोड़ा बहुत मैं बता देता हूँ | कुनाल कामरा जी स्टैंड अप कॉमेडियन हैं | वही स्टैंड अप कॉमेडी जिसमें स्टेज पर अश्लील बातें और गन्दी-गन्दी गालियाँ देकर लोगों को हँसाया जाता है | कुनाल जी कॉमेडी के साथ-साथ पार्ट टाइम राजनेता भी है | कट्टर मोदी विरोधी हैं | अपनी कॉमेडी से समय-समय पर मोदी और भाजपा पर व्यंग्य कसना इनका पसंदीदा काम है | वामपंथियों के बीच काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं |

कुनाल कामरा जी आज कल राजनीति में बहुत ज्यादा सक्रिय हैं | अपने ट्विटर हैंडल द्वारा और दूसरे मीडिया स्रोतों के द्वारा वो हम भारतीयों को बताते रहते हैं कि मोदी सरकार ने कश्मीर में गलत किया | मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून [ Citizenship (Amendment) Act, 2019 ] बनाकर गलत किया | और भी दुनिया भर का मोदी विरोध में रोना उनका हमेशा जारी रहता है |

मुझे बड़ी ख़ुशी है कि कुनाल कामरा जैसा परम बुद्धिमान और चरित्रवान व्यक्ति लोकतंत्र और राजनीती के क्षेत्र में हम भारतीयों का मार्गदर्शन कर रहा है | तन्मय भट्ट, गुरसिमरन खम्भा, उत्सव चक्रवर्ती, अदिति मित्तल जैसों के साथ रहकर कुनाल कामरा जी अच्छे और बुरे को पहचानना सीख गए हैं | अब आप सोचेंगे कि यह नए चार लोग कौन है ! यह चारों स्टैंड अप कॉमेडी के गन्दी नाली (AIB – आल इंडिया बकचोद उर्फ़ Send Nudes ग्रुप) से निकले वो जीव हैं जिन्होनें कुछ सालों में ऐसी गंदगी फैलाई कि MeToo Movement के दौरान त्राहि-त्राहि मच गई थी |

जिन पाठकों को MeToo Movement के बारे में पता न हो उनकी जानकारी के लिए बता दूँ – MeToo Movement में लड़कियों और लड़कों ने अपने साथ हुए अश्लील हरकतों और और शारीरिक शोषण का खुलासा किया था | इस खुलासे के दौरान AIB – आल इंडिया बकचोद (उर्फ़ Send Nudes ग्रुप) नामक स्टैंड अप कॉमेडी ग्रुप पर इतने आरोप लगे कि उन्हें अपना ग्रुप बंद कर देना पड़ा | यह ग्रुप उस समय तक काफी सफल था | तन्मय भट्ट, गुरसिमरन खम्भा, उत्सव चक्रवर्ती, अदिति मित्तल आदि महारथी उसी ग्रुप से है | दूसरों को नंगी तस्वीरें भेजना, बच्चियों के बलात्कार की बातें करना, जबरदस्ती किस्स करना आदि-आदि आरोप इन महारथियों पर इनके ही साथियों ने लगाए थे |

कुनाल कामरा जी ने इनके साथ काम किया | खूब पैसा बनाया, नाम कमाया | इन चारों की गंदी हरकतों के बारे में भी उन्हें पूरा पता था | कुनाल जी ने कानोंकान किसी को खबर नहीं होने दी | इसे कहते हैं सच्चा दोस्त ! दोस्ती के अलावा कुनाल जी व्यावहारिक मनुष्य हैं | उन्हें पता है कि बाप बड़ा न भैय्या, सबसे बड़ा रुपैय्या | इसलिए कमाई पर आँच आने नहीं दी | लेकिन फिर MeToo Movement में इनके साथियों का नाम आने लगा | यह भी पता चला कि इन्हें मामले की पूरी जानकारी थी | अब कुनाल जी पड़े मुसीबत में | उन्होंने तुरंत मीडिया को बुलाकर बयान दिया कि आरोप तो सच हैं और जब भी उन्हें इन आरोपों के बारे में पता चलता, वो AIB – आल इंडिया बकचोद वालों को खूब डाँटते | इसी वजह से AIB ने इतने वर्षों में सिर्फ ३०-४० लोगों का शोषण किया | यह न होते तो ३००-४०० लोगों का शोषण हो जाता | उनके इतने बयान देने भर की देर थी, वामपंथी मीडिया ने इन्हें दुबारा हीरो बना दिया |

अब आप ही सोचिये कि AIB – आल इंडिया बकचोद (उर्फ़ Send Nudes ग्रुप) जैसे गंदे नाले में जाकर पैसा कमाकर साफ़ निकल जाने की कला जाननेवाले कुनाल कामरा की बात हम लोगों को माननी चाहिए या नहीं ! इसमें हमारा ही फायदा है | मैनें तो तय कर लिया है कि अपना अगला वोट इनके सुझाव के अनुसार ही दूँगा | आज से कुनाल जी ही मेरे राजनैतिक गुरु हैं | आप लोगों की अतिरिक्त जानकारी एक लिए बता दूँ कि छोटी बच्ची के बलात्कार की बात करनेवाले तन्मय भट्ट के साथ काम करना कुनाल कामरा जी ने MeToo Movement के बाद भी जारी रखा है | आखिर – बाप बड़ा न भैय्या, सबसे बड़ा रुपैय्या |

पी एम सी बैंक डूबने के बाद कितना सुरक्षित है आपका पैसा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में !

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आपके और मेरे जैसे लाखों मध्यमवर्गियों के लिए अभी कुछ दिनों पहले एक बड़ी बुरी खबर आयी है | देश की सबसे सफल को ऑपरेटिव बैंकों में से एक पीएमसी बैंक लगभग डूबने के कगार पर है | लाखों लोगों की जिंदगी भर की कमाई इस बैंक में थी जो वापस मिलना लगभग नामुमकिन सा हो गया है | हर दिन पीएमसी बैंक से जुडी कोई न कोई नयी जानकारी सामने आ रही है और यह लगभग निश्चित हो गया है कि बैंक अब दिवालिया हो जायेगी | अब ऐसे में गरीबों के पैसे का क्या होगा यह भगवान को ही मालूम है | सरकार बैंक की जिम्मेदारी वापस लेते हुए लोगों को उनके पैसे की गारंटी देगी या नहीं, पता नहीं |

मुंबई में ऐसा हाल हो गया है कि लोग ऑपरेटिव बैंक में पैसा रखने से डरने लगे हैं | जिन ऑपरेटिव बैंकों के बारे में अब तक कोई गलत खबर नहीं है, लोग वहाँ से भी पैसा निकाल रहे हैं | कई ऑपरेटिव बैंकों के पास पैसे की इतनी कमी हो गई है कि वो अगले दस दिन तक पैसा नहीं दे सकते | इसका मतलब यह कि यदि कल को इन ऑपरेटिव बैंक के किसी खाताधारक को इमरजेंसी में पैसे की जरुरत पड़ गयी तो भी उसे पैसा नहीं मिलेगा | लोगों को ऑपरेटिव बैंक के नाम से डर लगने लगा है |

पीएमसी बैंक के बारे में सोचते-सोचते मेरे ध्यान में नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक आया | यह भी पीएमसी की तरह कोऑपरेटिव बैंक है | आपको तो पता है कि इस बैंक के मैनेजमेंट पर लंबे समय से नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों (NEU) का कब्जा है | पी.बी. पाणिग्राही पूरे बैंक पर कुंडली मार कर बैठे हुए हैं | समय-समय पर अपने फायदे और यूनियन के फायदे के लिए बैंक का गलत तरीके से उपयोग करने का आरोप इन पर लगता रहा है | नोटबंदी के समय जिस तरह खुलेआम नौसेना अधिकारियों के काले धन को सफ़ेद करने की कोशिश की गई थी वो सबको याद होगा | बैंक के पदाधिकारी भले कितनी भी सफाई दे, लेकिन आपको और हमको तो पता ही है कि इसी काले धन के मामले की वजह से उस समय नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट रहे संजीव काले का करियर बरबाद हो गया |

नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक के पदाधिकारी जब नौसेना को इस बात का भरोसा नहीं दिला पाए कि नोटबंदी के समय के आरोप झूठे थे, तो हम कैसे मान लें ? यदि आरोप सही नहीं थे तो संजीव काले की दुर्गति क्यों हुई ? ज़रा से कमीशन के लिए, नेवल मैनेजमेंट को खुश करने के लिए पूरे बैंक को रिस्क पर डाल दिया गया था | सोचिये उस समय यदि RBI जाँच के लिए बैंक सील कर देती तो ? या प्रवर्तन निदेशालय की रेड पड़ जाती तो ? पैसा तो आपका और हमारा अटकता | भले कुछ दिन के लिये ही सही, पर अटक तो जाता |

नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक और संजीव काले का संबंध डाकयार्ड कर्मचारियों से छुपा नहीं है | कुछ वर्ष पहले यूनियन का एक पदाधिकारी अपने रिटायरमेंट के कार्यक्रम में संजीव काले के पैर छूकर धन्यवाद देता है कि आपकी मेहरबानी से मेरा बेटा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में नौकरी पर लग गया | अब बताइये संजीव काले को धन्यवाद देने का क्या मतलब है ? नियम के हिसाब से तो बैंक में नौकरी लगवाने में काले का कोई संबंध नहीं होना चाहिए | लेकिन संजीव काले नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारी पी.बी. पाणिग्राही की सहायता से वहाँ लोगों को गैरकानूनी रूप से नौकरी पर भी लगवाते और अपना काला धन सफ़ेद भी करवाते थे |

ऐसे में मुझे तो नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक के मैनेजमेंट पर बिलकुल भरोसा नहीं रहा | कुछ दिनों पहले तक सबको लगता था कि पी एम सी बैंक से बढ़िया बैंक कोई नहीं | रोज बारह घंटे, साल के ३६५ दिन काम करनेवाला इकलौता बैंक | अब पता चला कि मैनेजमेंट अंदर ही अंदर सब सत्यानाश कर चुकी है | नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक का मैनेजमेंट भी सज्जन लोगों के हाथ में नहीं है | पता नहीं अंदर क्या चल रहा हो ? २-३ दिन में अपने परिवार मित्रों से चर्चा कर, सारे अकाउंट बंद करके अपना-अपना पैसा हम लोग बाहर निकाल रहे हैं | आप लोग अपना-अपना सोच लें |

फिल्मसिटी को हाँ पर मेट्रो कारशेड को ना, आरे बचाओ के नाम पर समाज को गुमराह करने की कोशिश

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आजकल मुंबई में मेट्रो कारशेड का मामला गर्म है | हर छुट्टी के दिन आंदोलन हो रहा है | रोज किसी न किसी प्रसिद्द व्यक्ति का इसपर बयान आ रहा है | पूरा दिन एयर कंडीशन में बिताने वाले, दिन भर कार में घूमने वाले कई लोग आरे बचाओ कार्यकर्ता बन गए हैं | सोशल मीडिया में नए-नए पोस्ट डालकर इस मामले में पूरी दुनिया को ज्ञान देना उनका नया शौक बन गया है | यदि कोई आरे में मेट्रो कारशेड का समर्थन कर दे तो उसे गालियाँ देना इन्होनें अपना जन्मसिद्ध अधिकार मान रखा है | इन लोगों ने प्रोपेगंडा की पूरी मशीनरी तैयार कर रखी है | कान्वेंट स्कूलों से मासूम बच्चों को आंदोलन में ले जाकर लोगो को भावनात्मक ब्लैकमेलिंग करना इनका मुख्य हथियार है | उन मासूम बच्चों को इन आरे बचाओ कार्यकर्ताओं की दोग़लापंती की समझ कहाँ !

अब आइये आपको कारशेड से फिल्मसिटी पर ले चलता हूँ | फिल्मसिटी भी उसी आरे के जंगलों के बीच है | उसका आकार भी मेट्रो कारशेड से काफी बड़ा है | उसको बसाने के लिए काफी जंगल काटना पड़ा था | आप कहेंगे यह तो पुरानी बातें है, उसका वर्तमान के आरे आंदोलन से क्या लेना देना ! तो आपको बता दूँ कि आज भी फिल्मसिटी के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं | फिल्मसिटी वाले इसके लिए किसी महानगरपालिका से अनुमति भी नहीं माँगते | दो स्थानीय ठेकेदार शिवा शेट्टी और सुनील देसाई को पैसा देकर हर वर्ष हजारों पेड़ गैरकानूनी रूप से कटवा दिए जाते हैं | उन जगहों पर नया निर्माण कर दिया जाता है | प्रस्तुत दो चित्रों से यह बात पूरी तरह साफ़ हो जाती है |

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दोनों तस्वीरों की तुलना कीजिये | एक है वर्ष २००० की फिल्मसिटी | एक है २०१९ की | देखिये किस तरह से हरियाली गायब हुई है | आज के समय में इमारतों के अलावा कुछ दिख ही नहीं रहा है | खुलेआम हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर ड़ाका डाला जा रहा है | वो भी किसके लिए ? ५० से १०० करोड़ रुपये खर्च कर फिल्म निर्माण करेवालों के लिए | जो फिल्म निर्माता इतना पैसा खर्च करने का सामर्थ्य रखते हैं वो दूसरी जगह किराए पर लेकर भी फिल्मों की शूटिंग कर सकते हैं | लेकिन इनके पेड़ काटने से किसी को शिकायत नहीं है | किसी भी नेता, अभिनेता या तथा कथित आरे बचाओ कार्यकर्ताओं ने आज तक फिल्मसिटी के विरुद्ध बयान नहीं दिया | उनके खिलाफ कोई आंदोलन नहीं हुआ | और होगा भी नहीं | फिल्मसिटी की मीडिया में इतनी पकड़ है कि उनके खिलाफ प्रोपेगंडा फैलाना मुश्किल है | फिर वो सही जगह रिश्वत देकर मुँह बंद कराने से पीछे भी नहीं हटते |

आप लोग कभी इन आरे बचाओ कार्यकर्ताओं से इस मामले में बात कर के देखिये | इनका असली रंग तुरंत सामने आएगा | इन आंदोलन के आयोजकों से बस इतना बोले कि मेट्रो कारशेड भी आरे में, फिल्मसिटी भी आरे में | वहाँ तक जाकर आंदोलन की इतनी मेहनत कर रहे हो तो बस अपने पोस्टर में फिल्मसिटी का नाम भी जोड़ दे | फिल्मसिटी द्वारा हो रहे गैरकानूनी निर्माण को रोकने से, वहाँ चल रही फिल्मसिटी को बंद करने से आरे के जंगल का कई गुना ज्यादा भला होगा | वैसे भी फिल्मसिटी विलास की वस्तु है, मेट्रो ट्रैन की तरह लोगों की जरुरत नहीं | लेकिन जैसे ही आरे बचाओ कार्यकर्ताओं को यह सब बातें बताने लगोगे वो आपको गालियाँ देना, आपकी औकात बताना आदि-आदि शुरू कर देंगे | उन्हें फिल्मसिटी द्वारा पेड़ काटने से कोई शिकायत नहीं, लेकिन मेट्रो कारशेड से परेशानी है | अब आप ही सोचिये कि ये तथाकथित आरे बचाओ कार्यकर्ता समाज के हित में काम कर रहे हैं या अहित में |

आरे बचाओ के नाम पर असामाजिक तत्वों द्वारा मुंबई का विकास रोकने की साज़िश

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आप में से कई लोगों ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया तथा समाचारपत्रों द्वारा आरे बचाओ मुहिम के बारे में सुना होगा | जंगल को बचाने के नाम पर खूब बयानबाज़ी और प्रदर्शन हो रहा है | ऊपरी तौर पर देखने पर यह लगता है कि यह लोग मुंबई के शुभचिंतक है | शहर का जंगल बचाने के लिए मेहनत कर रहे हैं | लेकिन यदि मामले का गहराई से अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि पूरा आंदोलन एक छलावा मात्र है | इसमें शामिल तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता मुंबई का भला करने के बजाय उसका नुकसान ज्यादा कर रहे हैं | 

हम सब जानते हैं कि मुंबई की इस विशाल आबादी की वजह से हमारे यातायात के साधनों पर प्रचंड दबाव है | हर वर्ष औसतन दो हजार लोग सिर्फ और सिर्फ लोकल ट्रेन की दुर्घटनाओं में मर रहे हैं | इसके अलावा तीन हजार से चार हजार लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है | इन आंकड़ों से आप लोग साफ़ समझ सकते हैं कि हम लोगों को यातायात के नए साधनों की कितनी ज्यादा जरुरत है | हमकों जल्दी से जल्दी शहर में यातायात के नए साधनों का निर्माण करना ही करना है | 

ऐसे में मेट्रो रेल का प्लान बना | बाकी सरकारी कामों की तरह इसकी रफ़्तार भी काफी धीमी रही | जैसे-तैसे अँधेरी से घाटकोपर के बीच एक लाइन का काम पूरा हुआ | अभी चार और लाइन का काम चल रहा है | लेकिन जबसे यह मेट्रो का काम शुरू हुआ है, तब से इसपर कुछ तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्रहण लगाना शुरू कर दिया | कुछ कार्यकर्ताओं ने कोर्ट में केस कर दिया कि मेट्रो को काम दिन में नहीं होना चाहिए, इससे यातायात बाधित होता है | कुछ ने केस कर दिया कि मेट्रो का काम रात में नहीं होना चाहिए क्योंकि शांति भंग होती है | सोचिये इन कार्यकर्ताओं के मूर्खता की हद कितनी है ! मेट्रो का काम दिन में नहीं, रात में नहीं, तो होगा कब ? इस चक्कर में एक वर्ष काम अटका रहा | 

वहाँ से मामला निकला तो इन तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक और शिगूफा छेड़ दिया कि आरे में मेट्रो कारशेड न बनाया जाए | मेट्रो कारशेड तथा अन्य कारणों से वहाँ २७०० पेड़ काटने पड़ रहे हैं | उसी मुद्दे को भावनात्मक तूल देकर वो मेट्रो कारशेड का काम रुकवाने पर तुले हुए हैं | कारशेड आरे में नहीं तो कहाँ बनाया जाए, इसका उन मूर्खों के पास कोई जवाब नहीं है | वो सिर्फ और सिर्फ आरे में हो रहे मेट्रो कारशेड को रुकवाना चाहते हैं | उनसे ज्यादा जोर देकर पूछो कि आरे में नहीं तो कहाँ कारशेड बनाया जाए ? तो उनमें से कुछ दबी जबान में कहते हैं कि कांजुर मार्ग खाली जमीन पर कारशेड बनना चाहिए | पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि यह तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता कांजुर मार्ग की जिस जमीन पर कारशेड बनाने के लिए कह रहे हैं वो व्यक्तिगत संपत्ति है | उसपर कोर्ट में केस चल रहा है | कोर्ट ने उसपर किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगाया हुआ है | यदि सरकार कारशेड के लिए वो जमीन लेने भी जाए तो भी दो से तीन साल लग जाएँगे | ऊपर से पांच हजार करोड़ से ज्यादा का मुआवजा देना पद जाएगा | इसके अलावा आरे में कारशेड बनाने के लिए जो ग्यारह हजार करोड़ खर्च हुआ है, वो भी बर्बाद समझिये | 

आरे बचाओ के नाम पर यह मुर्ख कार्यकर्ता चाहते हैं कि सोलह हजार करोड़ फूँक दिए जाएँ | २७०० पेड़ की बजाय दूसरी जगह पाँच हजार पेड़ लगाकर दस वर्ष उसकी देखभाल करने पर भी सौ करोड़ खर्च नहीं होगा | लेकिन ऐसा करने से इन नकली कार्यकर्ताओं को नाम और शोहरत कहाँ से मिलेगी ? इनके अहंकार की संतुष्टि कैसे होगी ? इसलिए यह लोग अड़े हैं कि किसी भी तरह कारशेड का काम रुकवाया जाए | मेरी सरकार से प्रार्थना है कि ऐसे नकली समाजिक कार्यकर्ताओं के फेर में न पढ़कर जल्दी से जल्दी मेट्रो का काम शुरू करे ताकि हमारे यातायात के साधनों पर बोझ कम हो | आज के लिए इतना ही | फिलहाल इतना ही, लेख बड़ा हो रहा है | अगले लेख में इन नकली समाजिक कार्यकर्ताओं की मूर्खता का और विस्तार से पर्दाफ़ाश करूँगा |