डाकयार्ड कॉलोनी में गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट बेचने पर लगी रोक

no-smokingआप लोगों की जानकारी के लिए बता दूँ कि डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट आदि बेचने पर रोक लगा दी गई है | डाकयार्ड प्रशासन ने कुछ दिनों पहले यह निर्णय लिया है | जिन दुकानों में ये सारी चीजें मिलती हैं, उन्हें नोटिस दी जा चुकी है | अब बस इस बात का इंतज़ार है कि किस दिन से यह निर्णय वास्तव में लागू होगा |

मैं डाकयार्ड प्रशासन के इस निर्णय से पूरी तरह सहमत हूँ | यह निर्णय प्रशासन के किस स्तर पर लिया गया है, इसका मुझे पता नहीं | पता लगाने की मैनें कोशिश भी नहीं की | जिसने भी यह निर्णय लिया है, अच्छा निर्णय है | वो व्यक्ति यदि यह लेख पढ़ रहा है तो उसके लिए एक सुझाव है | उसे कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर जी को यह निर्णय कम से कम पाँच बार पढ़कर सुनाना चाहिए | हमारे कमांडर साहब शौक़ीन व्यक्ति हैं | वैसे तो उन्हें तरह- तरह के शौक हैं, पर जो चीज उन्हें सबसे अधिक प्रिय है, वो है तंबाकू | अपने कार्यालय में बैठे-बैठे ड्यूटी के दौरान ही सबके सामने मजे से तंबाकू मलते रहते हैं | उनसे बात करने जाओ तो शायद ही कभी ऐसा हो कि उनके मुँह में तंबाकू न हो | मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी सेहत के लिए बहुत फिक्रमंद हूँ | उम्मीद है कि तंबाकू बंदी का नियम लगने के बाद उनकी इस आदत में सुधार होगा |

कॉलोनी में गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट पर रोक का एक और फायदा है | जैसा कि आप सब जानते हैं डाकयार्ड कॉलोनी को चरसियों और गर्दुल्लों ने नशे का अड्डा बना रखा है | कॉलोनी में कई ऐसे कोने-कोपचे हैं जहाँ नियमित रूप से चरस-गाँजे का दौर चलता है | इस निर्णय के बाद गुटखा, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट न मिलने पर उनमे से कई लोग अपने लिए कॉलोनी के बाहर नया अड्डा खोजेंगे | इससे कॉलोनी में चरसियों और गर्दुल्लों की संख्या कुछ हद तक कम होगी |

यदि आप में से किसी को लगता है कि हमारा सुरक्षा कार्यालय कॉलोनी से चरसियों और गर्दुल्लों को हटाता है तो आप गलतफहमी में हैं | सुरक्षा कार्यालय से कोई उम्मीद न रखें | वहाँ कार्यरत कई लोगों की तो गर्दुल्लों से दोस्ती है | सुरक्षा कार्यालय के कर्मचारी निजी ठेकेदारों ( Private Contractors ) से पैसा वसूलने में व्यस्त रहते हैं | सुरक्षा अधिकारी तो छोडिये, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले सिक्यूरिटी सुपरवाइजर तक वसूली में लगे रहते हैं | उन्हीं में से एक टुच्चा सा सिक्यूरिटी सुपरवाइजर है – शिवा | उसने भी एक कांट्रेक्टर से ५००० रुपये वसूल लिए थे रात को उसके सामान का ध्यान रखने के नाम पर | शिवा कॉलोनी के महाठग गोपाल का काफी करीबी है | गोपाल की चापलूसी करके उसकी हिम्मत काफी बढ़ गयी थी |

यह हाल है हमारे सुरक्षा कार्यालय का | चीमन लांबा जी आजकल वहां के इंचार्ज हैं | मजे से दारू पीते हैं और सुरक्षा कार्यालय के जिस कमरे में कैमरा नहीं लगा है, वहां पैर पसार कर सोते हैं | जिंदगी के ऐश कर रहे हैं |

चलिए, आज का लेख यहीं समाप्त | कल सुबह फुर्सत में हूँ | जरूर कुछ न कुछ लिखूँगा |

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