रिश्वतखोर पुलिस इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगांवकर ने गैरकानूनी पार्किंग कराने के लिए विद्यार्थियों के आने-जाने का रास्ता बंद कराया

Inspector Narendra Talegaonkar
इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगांवकर

वो कहावत है न “ जब पैदा हुई पुलिस तो खुश हुआ इब्लीस, अब हम भी साहिबे औलाद हुए | ” अर्थात जब पुलिस पैदा हुई तो शैतान खुश हुआ कि मेरा बेटा पैदा हो चुका है | मुंबई पुलिस के इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगांवकर पर यह कहावत बिलकुल सही बैठती है | तलेगांवकर फिलहाल ट्रैफिक डिपार्टमेंट में काम कर रहे हैं और वो गांधीनगर जंक्शन, लालबहादुर शास्त्री रोड, विक्रोली पश्चिम, मुंबई-८३ में स्थित बीट चौकी के इंचार्ज हैं |

पाठकों को पता ही होगा, सडकों पर जहाँ भी फ्लाईओवर बने होते हैं, उसके ठीक नीचे की जगह खाली पड़ी होती है | ऐसी जगहों पर कभी पार्किंग होने लगती है तो कभी अवैध निर्माण | कई बार आम लोग ही सड़क पार करने के लिए फ्लाईओवर के नीचे की जगह पसंद करते हैं क्योंकि फ्लाईओवर के अंतिम छोरों के नीचे की जगह खाली पड़ी होती है | जिससे वहाँ से सड़क पार करना आसान होता है |

इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगांवकर द्वारा तैयार कराये गए गैरकानूनी बैरिकेड
इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगांवकर द्वारा तैयार कराये गए गैरकानूनी बैरिकेड

गांधीनगर जंक्शन पर बने फ्लाईओवर के अंतिम छोर के एक तरह केंद्रीय विद्यालय है तो दूसरी तरह चंदन नगर | चंदन नगर से कई विद्यार्थी केंद्रीय विद्यालय जाते हैं और फ्लाईओवर के नीचे से ही सड़क पार करते हैं | वो जगह भी अभी तक खाली ही पड़ी थी | लेकिन पुलिस इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगाँवकर की बुरी नजर लंबे समय से उस जगह टिकी हुई थी | फ्लाईओवर के नीचे ज्यादातर जगहों पर उन्होंने गाड़ियों की गैरकानूनी पार्किंग कराकर खूब माल कमाया है | किसी भी दिन, किसी भी वक्त वहाँ जाओ तो सैकड़ों गाड़ियाँ खड़ी मिलेगी, कुछ पार्किंग की, तो कुछ भंगार होती हुई | यह सब ट्राफिक पुलिस की उस बीट चौकी के ठीक सामने है जिसके इंचार्ज इंस्पेक्टर तलेगाँवकर हैं | सिर्फ एक कोना बाकी रह गया था जहाँ से विद्यार्थी सड़क पार करते थे | तलेगाँवकर ने विद्यार्थियों का आना जाना रोकने के लिए वहाँ गैरकानूनी रूप से लोहे की शीट लगाकर बैरिकेड बनवा दिए | गैरकानूनी पार्किंग को तो वो हटवा नहीं सकते क्योंकि वहाँ से रिश्वत मिलती है, तो उन्होंने विद्यार्थियों पर ही अपना जोर दिखाया |

गैरकानूनी पार्किंग
गैरकानूनी पार्किंग

तलेगांवकर की इस हरकत से विद्यार्थी और उनके माँ-बाप परेशान | उन्हें अब गांधीनगर जंक्शन से सड़क पार करना पड़ रहा है जो काफी खतरनाक है | वहाँ गाड़ियों की आवाजाही कुछ ज्यादा ही है | इसलिए सब अभिभावक इकट्ठा होकर बीट चौकी गए और तलेगांवकर से माँग की कि बैरिकेड को हटा दिया जाये | तलेगांवकर ने उनकी बात मानना तो दूर, उलटे कुछ को अपनी बीट चौकी में बंद करा दिया | साथ में पुलिस में FIR कराने की धमकी भी दी | कई घंटे बंद रखने के बाद जब स्थानीय राजनेताओं का फ़ोन आने लगा तो उन्होंने अभिभावकों को जाने दिया |

इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगाँवकर की इस गुंडागर्दी से परेशान होकर कई अभिभावकों ने भाजपा कार्यकर्ता सुधीर सिंह से सहायता माँगी | सुधीर सिंह ने मामले की जानकारी स्थानीय सांसद मनोज कोटक को दी | साथ ही साथ उन्होंने तलेगाँवकर के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी की शिकायत मुंबई पुलिस कमिश्नर से की | इसके अलावा तलेगाँवकर द्वारा किये गए अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए मनपा के S वार्ड में भी शिकायत दर्ज करा दी है | उम्मीद है उन्हें दोनों कार्यों में सफलता मिलेगी और चंदन नगर के विद्यार्थियों की असुविधा दूर होगी | लगता है इंस्पेक्टर नरेंद्र तलेगांवकर को उनके कुकर्मों की सजा मिलने का दिन आ गया है |

नौसेना का सिक्यूरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी निकला ठग, पुलिस वाला बनकर 90 लाख लूटे

आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ

वैसे तो यह खबर abinet.org में छप चुकी है | आप लोगों में से कई लोगों ने पढ़ भी लिया होगा लेकिन हिंदी में पढने-लिखने का अलग ही मजा है | इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ |

मामला नौसेना के कुख्यात अधिकारी सुरेश अवस्थी उर्फ़ आमचोर अवस्थी उर्फ़ बीवीचोर  अवस्थी का है | अवस्थी जी भारतीय नौसेना के आँख के दुलारे और विक्रोली, मुंबई के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) शेखर तावड़े के आँख के सितारे हैं | जब भी अवस्थी कोई कुकर्म करता है, और उसके विरुद्ध शिकायत पुलिस स्टेशन जाती है, तो नौसेना के अधिकारियों का फ़ोन तुरंत उस पुलिस स्टेशन पहुँच जाता है | जरुरत पड़ी तो दो नौसना के अधिकारी पुलिस स्टेशन भी पहुँच जाते हैं अवस्थी को बचाने | अब हमारे नौसेना के अधिकारी वैसे ही बीवीओं की अदला-बदली (Wife Swapping) के लिए कुख्यात है | अवस्थी है ही बीवीचोर, तो वो नौसेना के अधिकारियों के बीच लोकप्रिय तो होगा ही |

पर मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि ACP शेखर तावड़े को आमचोर/बीवीचोर अवस्थी से इतना प्रेम क्यों है ? वैसे तो तावड़े जी खुद अव्वल दर्जे के भ्रष्टचारी हैं किंतु अवस्थी से उनका गुप्त प्रेम समझ नहीं आता | कोई भी अवस्थी के विरुद्ध शिकायत करने पुलिस स्टेशन जाता है तो ये महाशय भी १५-२० मिनट में वहाँ पहुँच जाते हैं | लेकिन कब तक बचाएँगे ? चोर आज नहीं तो कल फँसेगा ही न | आमचोर/बीवीचोर अवस्थी भी फँस गया |

और कोई छोटी-मोटी ठगी नहीं है ! पूरे नब्बे लाख है नब्बे लाख | अवस्थी जी बने मुंबई पुलिस के एंटी नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी | घाटकोपर में रहने वाले एक व्यक्ति को उन्होंने अपने साथी के साथ मिलकर झाँसा दिया कि उसे नवी मुंबई में दो फ्लैट सस्ते में दिला सकते हैं | मामला एक करोड़ चालीस लाख पर तय हुआ – एक करोड़ रजिस्ट्रेशन से पहले और चालीस लाख रजिस्ट्रेशन के बाद | बेचारे ने नब्बे लाख नकद दे भी दिया लेकिन जब महीनों तक रजिस्ट्रेशन का मामला आगे नहीं बढ़ा तो उस व्यक्ति को शक हुआ और उसने अपने पैसे वापस माँगने शुरू किये | अवस्थी और उसके साथी ने उस व्यक्ति का नंबर ब्लॉक कर दिया और अवस्थी के साथी ने तो अपना घर भी बदल लिया |

वो बेचारा, अवस्थी और उसके साथी को ढूंढते-ढूंढते श्रीमती पराशर से मिला | श्रीमती पराशर ने बताया कि अवस्थी और उसके साथी ने उन्हें भी उसी तरीके से लूटा है | और कितनों को लूटा होगा पता नहीं | मुझे तो दो का ही पता लगा है तो आपको बता रहा हूँ | ACP शेखर तावड़े की वजह से पार्क साईट विक्रोली पुलिस स्टेशन में FIR नहीं हो पाया था | लेकिन न्यायालय के निर्देश पर पुलिस को FIR लेना पड़ा | जिस को इस मामले की पूरी जानकारी चाहिए वो यह लिंक क्लिक करके पढ़े : FIR for cheating registered against Navy’s chief security officer Suresh Awasthi, Awasthi claimed that he was officer of Anti-Narcotics Cell in Mumbai Police

इस पूरे मामले से एक बात तो साफ़ है | चोर कितना भी चालाकी दिखाये – जोर लगाये, आज नहीं तो कल पकड़ा जाएगा ही जाएगा | और जितने भी अवस्थी के साथी हैं, जिन्हें लगता है अवस्थी उन्हें बचा लेगा या वो अवस्थी को बचा लेंगे, तो वो समझ जाएँ, न अवस्थी बचेगा न उसके साथी | सबका नंबर आएगा, आज नहीं तो कल | चाहे नरक में जा छुपे, लेकिन वहाँ से भी ढूंढ़कर उन्हें सबक सिखाया जाएगा |

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

विक्रोली मुंबई : पैसे और नौसेना की मुफ्त शराब के लिए बिक गया पार्क साइट पुलिस का इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत

Inspector Ambaji Sawant
Inspector Ambaji Sawant

आज आप लोगों के सामने खाकी वर्दी में छुपे एक और बेईमान पुलिस कर्मचारी की पोल खोल रहा हूँ | ये महाशय विक्रोली पश्चिम में स्थित पार्क साइट पुलिस स्टेशन में निरीक्षक (इंस्पेक्टर) पद पर कार्यरत हैं, नाम है अंबाजी सावंत | नाम देखिये कितना पवित्र ! देवी माता का नाम | लेकिन ईमान उतना ही ज्यादा कलंकित |

अंबाजी सावंत को डाकयार्ड कॉलोनी के भूतपूर्व सिक्योरिटी इंचार्ज आमचोर/बीवीचोर सुरेश अवस्थी के विरुद्ध जाँच का जिम्मा दिया गया था | आमचोर अवस्थी के विरुद्ध उसी के मातहत काम करनेवाले एक सिक्योरिटी गार्ड ने चरित्रहीनता का आरोप लगाया था | आरोपों के अनुसार अवस्थी ने गार्ड की पत्नी को गैरकानूनी रूप से डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में रखवाया हुआ था और दोनों के बीच गलत संबंध भी थे |

सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी को अवस्थी ने डाकयार्ड कॉलोनी के एम ई एस क्वार्टर क्र P/१३ में किसी मनोज कनोजिया के घर ठहराया हुआ था | इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत ने जाँच के लिए जब सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी को बुलाया तो उसने पुलिस स्टेशन में यह स्वीकार किया कि वह डाकयार्ड कॉलोनी में रह रही है और आमचोर/बीवीचोर अवस्थी उसे सिक्योरिटी सुपरवाइजर शिवा के जरिये पैसा भी देते रहते हैं |

जिन पाठकों को पता न हो उनको बता दूँ कि डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग, नौसेना के अंतर्गत आता है | यहाँ सिर्फ डाकयार्ड तथा एम ई एस के कर्मचारी और उनका परिवार ही रह सकता है | ऐसे में सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी का यह बयान कि वह डाकयार्ड कॉलोनी में रह रही है, आमचोर/बीवीचोर अवस्थी को डाकयार्ड कॉलोनी का सिक्योरिटी इंचार्ज होने के कारण मुसीबत में डाल देता | इसलिए आमचोर/बीवीचोर अवस्थी ने बचने के लिए तुरंत इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत से संपर्क किया |

अवस्थी को पता है कि अपना जमीर बेच कर पैसा कमाने के मामले में मुंबई पुलिस के कर्मचारी नौसेना के अधिकारियों को जोरदार टक्कर देते हैं | इसलिए उसने तुरंत अंबाजी सावंत की सेवा में नौसेना की कैंटीन में मिलनेवाली मुफ्त शराब की बोतलें और दस हजार रुपये हाजिर कर दिए | फिर क्या था, शराब की बोतलें देखकर अम्बाजी सावंत के मुँह से लार टपक पड़ी | उसने तुरंत अवस्थी को अपना माई-बाप मान लिया और पुरानी रिपोर्ट कचरे के डब्बे में डाल दी | तुरत-फुरत में मनोज कनोजिया को बुलाया गया, साथ में उसे कहा गया कि अड़ोस-पड़ोस के दो ख़ास मित्रों को भी ले आये | मनोज कनोजिया से बयान लिखवाया गया कि सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी उसके घर नहीं रहती | बाकी दोनों को गवाह बनाया गया | शराब और पैसा मिलने के बाद इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत की काम करने की तेजी देखते ही बनती थी |

सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी डाकयार्ड कॉलोनी में लंबे समय से रह रही थी | एम ई एस क्वार्टर में रहनेवाले किसी भी व्यक्ति को पूछो तो वो तुरंत बता देगा | सब उसे जानते हैं | अब बताइये एक शादीशुदा स्त्री पराये पुरुष के साथ एक ही कमरे वाले घर में रहे तो आधी दुनिया में प्रचार हो ही जाएगा न | लेकिन अंबाजी सावंत उस आधी दुनिया के लोगों में नहीं आते | उनके कान तक बात नोटों के रास्ते पहुँचती है | आमचोर/बीवीचोर अवस्थी के नोटों ने उनके कान में कह दिया था कि सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी वहाँ नहीं रहती, मतलब नहीं रहती | सच्चाई क्या है, दुनिया क्या कहती है, इन सब झमेलों में वो नहीं पड़ते | उन्होंने बढ़िया सी रिपोर्ट बना दी और अवस्थी को मुसीबत से बचा लिया | आखिर पुरानी कहावत को भी तो सच साबित करना था : चोर-चोर मौसेरे भाई |

(आप लोगों की अतिरिक्त जानकारी के लिए बता दूँ कि इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत पार्क साइट पुलिस स्टेशन के सबसे कुख्यात कर्मचारियों में से एक है | पार्क साइट पुलिस स्टेशन के जितने दलाल है वो इन्ही के द्वारा पैसों का लेन- देन करते हैं और बाकी पुलिसवालों तक हिस्सा पहुँचता है |)

नौसेना प्रशासन की लापरवाही से डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग, मुंबई में एक और मजदूर की मौत

Construction site at Dockyard Colony kanjur Marg Mumbai where 2 labours died
Construction site at Dockyard Colony kanjur Marg Mumbai where 2 labours died

भारतीय नौसेना गरीब मजदूरों का आर्थिक शोषण करने के लिए कुख्यात तो थी ही अब वो उनकी मौत बनकर उनके सर पर नाचने का काम भी कर रही है | पिछले एक वर्ष में डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग मुंबई-78 में ही तीन मजदूरों की मौत हो चुकी है | अभी हाल ही में घटी एक घटना का उदाहरण देकर मैं पाठकों को पूरा मामला समझाता हूँ |

डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में कई इमारतों के निर्माण कार्य चल रहे हैं | इमारत क्र. 54 के सामने भी एक निर्माण कार्य चल रहा है | यह निर्माण कार्य तमाम तरह की गैरकानूनी गतिविधियों का अड्डा बन चुका है | यहाँ बाल मजदूरों का प्रयोग खुलेआम हो रहा है | गैरकानूनी आर एम सी प्लांट लगाया गया है | चौबीसों घंटे काम चलता है जबकि नियम के अनुसार सूर्यास्त के बाद काम बंद हो जाना चाहिए |

इन सारी गैरकानूनी गतिविधियों की जानकारी नौसेना तथा रक्षा विभाग को दी गयी थी | पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की | कमांडर मुजावर तथा सिक्योरिटी इंचार्ज अवस्थी को भी पूरा मामला बताया गया था | कमांडर मुजावर ने अपने उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराया किंतु अवस्थी जी ने तो कोई भी कार्रवाई करने से साफ़ इंकार कर दिया |

नौसेना प्रशासन की इस लापरवाही का नतीजा दो दिन पहले शनिवार की रात ( ०२/०६/२०१८ ) को एक गरीब मजदूर पुष्पराज सुरेंद्र (उम्र २२ वर्ष) को भुगतना पड़ा | आप सब को पता है शनिवार की रात मुंबई में बारिश हुई थी | अब कम से कम बारिश के समय तो काम बंद करना चाहिए था | किंतु लालची ठेकेदार ने काम चालू रखा | अवस्थी जी का आशीर्वाद तो था ही | बारिश के गीलेपन की वजह से electrocution हुआ और उस बेचारे गरीब मजदूर की मौत हो गई | गाँव से रोजी-रोटी कमाने आया था, लाश बनकर वापस गया |

अब हंगामा मचा हुआ है | पुलिस को पैसा खिलाकर झूठा एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट बनवाना, मजदूर के परिवार को झूठ बोलना, उन्हें उनके हक़ का पैसा न देने का तरीका खोजना इन सब कामों में ठेकेदार, सुरक्षा इंचार्ज अवस्थी जी और नौसेना के अधिकारी लगे हैं | अब वहाँ नौसेना ने रात को काम बंद कर रखा है | एक मजदूर की लाश गिरने के बाद | उसी जगह ५-६ महीने पहले डेमोलिशन के समय एक मजदूर की मौत हुई थी | वर्ष भर पहले न्यू कॉलोनी के पास बने टावर से गिरकर एक मजदूर की मौत हुई थी | तीन मौतों की जानकारी तो मुझे है | हो सकता है और भी मौतें हुई हो और मुझे पता न चला हो | मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जिन मजदूरों की मौत हुई थी न उन्हें उनके हक़ का पैसा मिला है और न शनिवार की रात को मरे गरीब मजदूर पुष्पराज सुरेंद्र को मिलेगा | नियमों के तहत इन्सुरन्स तथा पी ऍफ़ अकाउंट भी नहीं बना होगा उनका | न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलती होगी | नौसेना की सफ़ेद वर्दी गरीब मजदूर को अपने जूतों तले रौंद रही है |

आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
इन सब हंगामों के बीच हमारे सिक्योरिटी इंचार्ज अवस्थी जी क्या कर रहे हैं ? कॉलोनी की सुरक्षा का जिम्मा तो उनके सर है न ! लेकिन वो बेचारे व्यस्त है | बहुत ज्यादा व्यस्त | निम्नलिखित कामों के कारण उन्हें फुर्सत ही नहीं है |
१) कॉलोनी के पेड़ों पर लगे आमों और नारियलों को सिक्योरिटी गार्डों से तुड़वाकर बेचना और उसका पैसा अपनी जेब में डालना | इसलिए अब से अवस्थी जी का नाम आमचोर अवस्थी लिखा जाएगा |
२) नौसेना के अधिकारियों को रिश्वत दिलवाकर फर्जी बिल पास कराना |
३) PCDA के ऑडिटरों को रिश्वत दिलवाकर फर्जी बिल पास करवाना | उदाहरण के तौर पर डायनामिक सिक्योरिटी वाले से 3% PCDA के ऑडिटरों को दिलवाते हैं |
४) सिक्योरिटी गार्डों की नकली अटेंडेंस लगाकर पैसा कमाना |
५) डाकयार्ड कॉलोनी के स्विमिंग पूल में गैरकानूनी तरीके से चल रहे अकादमी के लिए ग्राहक जुटाकर पैसे कमाना |
६) कॉलोनी के खेल मैदान को गैरकानूनी तरीके से किराए पर दिलवाकर पैसे कमाना |
७) ठेकेदारों को गैरकानूनी कामों की अनुमति देकर उनसे पैसे कमाना |

और भी ऐसे बहुत से मामले हैं | कभी विस्तार में लिखूँगा | बस समझ लीजिये कि आमचोर अवस्थी डाकयार्ड कॉलोनी में भारतीय नौसेना के कलंक संजीव काले जी के प्रतिनिधि है | भ्रष्टाचार में कैसे पीछे रह सकते हैं ?

घाटकोपर के रिश्वतखोर पुलिस कांस्टेबल ताजने ने आरोपी को पुलिस स्टेशन से भगाया

ghatkopar-police-stationआज पढ़िए मुंबई पुलिस के भ्रष्ट कर्मचारियों का एक नया कारनामा | जैसा कि पाठक गण जानते हैं कि रिश्वतखोरी में मुंबई पुलिस पहले ही सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है | पहले वो बेईमानी का काम परदे के पीछे से किया करते थे | आजकल उनकी इतनी हिम्मत बढ़ गयी है कि खुले आम रिश्वत खोरी करने लगे हैं | आपको सात जून को घटी ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ |

विद्याविहार के स्टेशन रोड के आस-पास एक रिक्शा चालाक ने अपनी लापरवाही से बाइक सवार को ठोकर मार दिया और फिर बिना रुके अपनी रिक्शा घुमाई और ट्राफिक की विपरीत दिशा में रिक्शा चलाकर भागने लगा | वो लगभग १०० मीटर ही भागा होगा कि आस पास के लोगों ने उसे दौड़कर पकड़ लिया | कांस्टेबल ताजने भी वहीँ आसपास थे | वो तुरंत मौके पर पहुँचे और उन्होंने रिक्शाचालक को पकड़ लिया | दुर्घटना में बाइक सवार कृष्णा पुजारी को चोट लगी और बाइक को भी काफी नुकसान पहुँचा |

कांस्टेबल ताज़ने ने बाइक सवार को पुलिस स्टेशन आने को कहा और खुद उस रिक्शाचालक के रिक्शा में बैठकर पुलिस स्टेशन की तरफ निकले | बाइक सवार ने ताजने जी से कहा कि रिक्शाचालक एक बार भागने की कोशिश कर चूका है | दोबारा कर सकता है | तो वो बोले “मैं कोई हिजड़ा हूँ क्या जो ये मुझ से छूटकर भाग जाएगा ?”

उसके बाद बाइक चालक, कांस्टेबल ताज़ने और रिक्शाचालक तीनों पुलिस स्टेशन पहुँचे | पुलिस स्टेशन के बाहर कांस्टेबल ताज़ने ने रिक्शाचालक से कुछ बातचीत की और वो वहीँ से चला गया | उसे पुलिस स्टेशन के अंदर कदम तक रखने की जरुरत नहीं पड़ी | इसके विपरीत बाइक सवार को घंटों पुलिस स्टेशन में बिठाए रखा | सब इंस्पेक्टर पारधी ने बाइक सवार को कहा कि वो FIR कराने के झंझट में न गिरे | इससे उसकी बाइक महीनों तक पुलिस के कब्जे में रहेगी | उसे बार-बार पुलिस स्टेशन आना पड़ेगा, कोर्ट जाना पड़ेगा | वो बाइक सवार को लगातार FIR न करने का सुझाव देते रहे |

लेकिन फिर भी बाइक सवार FIR कराने पर अड़ा रहा | तो उसे मेडिकल के लिए भेजा गया | मेडिकल कराकर आने के बाद सब इंस्पेक्टर पारधी ने यह कहकर FIR करने से मना कर दिया कि सीनियर इंस्पेक्टर ने FIR लेने से मना किया है | इससे नाराज होकर बाइक सवार ने पारधी जी से पूछा कि “आरोपी को तो आप लोगों ने छोड़ दिया है, कार्रवाई कैसे करेंगे ?” तो वो बोले कि “उसका रिक्शा यहीं है | कभी तो लेने आएगा | तब उसे दुबारा पकड़ लेंगे |”

यह सब होते-होते बारह से चार बज गए | आरोपी पुलिस स्टेशन से गायब और पीड़ित व्यक्ति परेशान होता रहा | इस तरह से हमारी घाटकोपर पुलिस काम करती है | कांस्टेबल ताजने ने कहा था वो हिजड़ा नहीं है | अब उनका बिना मेडिकल कराये इस बात की पुष्टि तो नहीं हो सकती | पर वो एक नंबर के रिश्वतखोर हैं इसमें कोई शक नहीं है | दिन दहाड़े आरोपी को पुलिस स्टेशन से भगाकर माल कमा रहे हैं | उनके साथ-साथ सब इंस्पेक्टर पारधी को भी सरकारी तनख्वाह कम पड़ रही है | बेचारे रिश्वत के पैसे से घर चला रहे हैं | भगवान ही बचाए घाटकोपर की जनता को ऐसे भ्रष्ट पुलिसवालों से |