नौसेना के रिश्वतखोर कप्तान भूपेश अनुजा ने सीसीटीवी कैमरों का नकली बिल पास किया, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए फाइल चुराया

कप्तान भूपेश अनुजा / Captain Bhupesh Anuja
कप्तान भूपेश अनुजा / Captain Bhupesh Anuja

मेरे पुराने लेख पढ़कर आप लोगों को पहले ही पता लग गया होगा कि किस तरह भारतीय नौसेना के अधिकारी हमारे देश को लूट रहे हैं | ऐसे कई मामले मैं पहले ही छाप चूका हूँ | आज एक नया उदाहरण आप लोगों के सामने रख रहा हूँ |

आज से लगभग साल भर पहले नेवल डाकयार्ड मुंबई के उस समय के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट संजीव काले के सिर पर भूत चढ़ा कि डीजीएम (कॉम) के कार्यालय को स्थानांतरित किया जाए | वैसे भी उनका ध्यान युद्धपोतों के रखरखाव पर कम, कमर्शियल काम करने पर ज्यादा रहता था | उसीमें तो कमीशन मिलता था | उन्होंने अपने कार्यालय के पास ही डीजीएम (कॉम) का नया कार्यालय बनवाया | निर्माण कार्य के कई कामों का ठेका लक्ष्मी सेल्स नामक कंपनी को दिया गया है |

आपको लक्ष्मी सेल्स के बारे में बता दूँ | इस कंपनी को डाकयार्ड के बड़े-बड़े ठेके मिलते हैं | इसकी पेमेंट की फाइल भी बड़ी जल्दी नौसेना और फिर पीसीडीए से पास हो जाती है | छोटे-मोटे ठेकेदार जहाँ महीनों अपना बिल पास कराने के लिए परेशान रहते हैं | इनका काम कुछ दिनों में ही हो जाता है | नौसेना और पीसीडीए के कई बड़े अधिकारियों को इस कंपनी ने अपने पगार पर रखा हुआ है | ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट मिलना और उनका बिल पास होना बड़ी मामूली बात है |

लक्ष्मी सेल्स ने डीजीएम (कॉम) कार्यालय के निर्माण कार्य के दौरान बहुत सारा फर्जीवाड़ा किया है | काम में लगनेवाली बहुत सारी चीजों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया है और बिल पास करा लिया है | इसमें से सीसीटीवी कैमरे के बारे में मुझे जानकारी मिली है | नए कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे असल में पुराने कार्यालय से लाकर लगाए गए हैं | लेकिन लक्ष्मी सेल्स ने बिल में यह दिखाया है कि उसने कार्यालय में नए सीसीटीवी कैमरे इनस्टॉल किये हैं | इन कैमरों का बिल लगभग १०-१५ लाख का बना था | रियर एडमिरल सुपरिंटेंडेंट संजीव काले के दबाव में भूपेश अनुजा ने उस फाइल को पास कर दिया | जबकि मामला उनके ही डिपार्टमेंट का है | वो रोज देख रहे थे कि पुराने सीसीटीवी कैमरे ही लगे हैं लेकिन संजीव काले का दबाव था; और लक्ष्मी सेल्स से मिली रिश्वत ने उनके जमीर को खरीद लिया था | बिल पास |

वैसे तो पूरा मामला दब जाता लेकिन डीजीएम (कॉम) कार्यालय के कर्मचारियों में पिछले कुछ महीनों से आपस में झगड़ा काफी बढ़ गया है | वो लोग दुसरो से अपने सहकर्मियों की बुराई कर रहे हैं | इससे यह मामला धीरे-धीरे दुसरे डिपार्टमेंट के कर्मचारियों को पता चलना शुरू हो गया और मेरे कान तक पहुँचा | डिपार्टमेंट के एक कर्मचारी ने तो इसी भ्रष्टाचार के मामले का सहारा लेकर नौसेना प्रशासन को ब्लैकमेल किया; और अन्य मामलों में अपने ऊपर हो रही अनुशासन की कार्रवाई को भी स्थगित करवा लिया |

कप्तान भूपेश अनुजा को भी आनेवाले खतरे का अंदाजा लग गया | उन्होंने चुपचाप डिपार्टमेंट से मामले की फाइल चुरा ली | उस फाइल को लेकर कहाँ छुपाया है यह मुझे नहीं पता; लेकिन इतना जरूर पता है कि यदि भ्रष्टाचार के मामले की जाँच कोई ईमानदार संस्था या व्यक्ति करे तो रियर एडमिरल संजीव काले और कप्तान भूपेश अनुजा का जेल जाना तय है |

इस पूरे मामले को जानने के बाद मुझे मन में बहुत हँसी आयी, वो भी कप्तान भूपेश अनुजा पर | ईमानदारी की बड़ी-बड़ी डींगें मारता था लेकिन चोर निकला | इसलिए अबसे भूपेश अनुजा को मैं कैमरा चोर / फाइल चोर भूपेश अनुजा लिखा करूँगा |

नौसेना का कमांडर आय एस कुमार निकला साइकिल चोर

बीवी चोर सिक्योरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी के बाद अब पढ़िए साइकिल चोर कमांडर आय एस कुमार की कहानी

Commandar I S Kumar
Commandar I S Kumar

अभी-अभी एक मजेदार घटना का पता चला है तो सोचा तुरंत आप लोगों को बता दूँ | डाकयार्ड का एक कर्मचारी जो किसी वजह से आज काम पर नहीं गया, ऐसे ही टाइम पास करने मुझसे मिलने आ गया था | बातों-बातों में काफी मजेदार चीजें बता गया है | उसे भी पता नहीं है कि मैं छापनेवाला हूँ लेकिन घटना मजेदार है | इसलिए आप लोगों के सामने हाज़िर है |

आप लोगों को तो पता ही है कि हमारी नौसेना के ज्यादातर अधिकारी भ्रष्टाचार के दलदल में आकंठ (गले तक) डूबे हुए हैं | सब एक से बढ़कर एक लूटेरे हैं जो देश की रक्षा की आड़ में अपनी तिजोरी भरने का काम कर रहे हैं | इस बार की घटना उससे भी एक कदम आगे हैं | नौसेना के अधिकारियों ने अब सीधे-सीधे चोरियाँ करनी भी शुरू कर दी है |

मामला नेवल डाकयार्ड मुंबई का है | वहाँ के AGM कमर्शियल के कार्यालय में, आय एस कुमार नाम के एक व्यक्ति कमांडर के पद पर कार्यरत हैं | एनकोड डिपार्टमेंट में ठेकेदारों से पैसा खा-खाकर इन्होनें खूब माल बनाया है | भूतपूर्व DGM कमर्शियल भूपेश अनुजा के कहने पर फर्जी बिलों पर कमीशन लेकर हस्ताक्षर किये हैं | लेकिन वो पैसा अब इन्हें कम पड़ने लगा है | इसलिए अब चोरियाँ शुरू कर दी हैं |

डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग पश्चिम मुंबई-७८ में रहनेवाले रामप्रवेश नामक व्यक्ति ने अपने डिपार्टमेंट की साइकिल DGM मटेरियल के पार्किंग में रखी थी | यह जगह एडमिरल सुपरिंटेंडेंट के कार्यालय के नीचे स्थित है | ४-५ दिन से साइकिल वहीँ पड़ी थी | कमांडर आय एस कुमार ने भी यह बात नोट किया कि साइकिल पार्किंग में पड़ी है | कोई ले जा नहीं रहा | अक्टूबर ८ को कुमार ने वो साइकिल चुपके से वहाँ से निकाल ली और अपने डिपार्टमेंट ( AGM कमर्शियल ) के स्टोर रूम में लेकर छुपा दी |

रामप्रवेश ने जब देखा कि साइकिल गायब है तो परेशान हो गया | उसने पता लगाया तो मालूम पड़ा कि साइकिल तो कमांडर आय एस कुमार चुरा ले गए हैं | ९ अक्टूबर को अपने चार्जमैन को लेकर वो AGM कमर्शियल के कार्यालय में पहुँचे | वहाँ सबसे पहले स्टोर रूम में पहुँचकर उन्होंने साइकिल की फोटो खींची | फिर AGM कमर्शियल के कार्यालय में पहुँच कर जोर से घोषणा की कि जिसने भी मेरा साइकिल चुराया है वो चुपचाप ले जाकर साइकिल पुरानी जगह रख दे नहीं तो LPM के पास चोरी की शिकायत की जायेगी | उसके बाद वो AGM कमर्शियल (मुझे अब तक इनका नाम नहीं पता) से भी मिले और उन्हें मामले की पूरी जानकारी दी |

जब से यह घटना सामने आई है तब से कमांडर आय एस कुमार किसी से बात नहीं कर रहे हैं | उनके कार्यालय में काम करनेवाले सिविलियन उनके पीछे चोर-चोर की आवाजें निकाल रहे हैं | कमांडर आय एस कुमार वैसे भी अपने काले कारनामों के लिए कुख्यात हैं | पिछले महीने (सितंबर २०१८) के अंत में उनके कार्यालय के ही विनोद सिंह नामक किसी सिविलियन ने उन्हें धमकी भी दी थी कि एडमिरल सुपरिंटेंडेंट संजीव काले और भूतपूर्व DGM कमर्शियल भूपेश अनुजा के साथ मिलकर उन्होंने जो CCTV घोटाला ( पुराने CCTV इनस्टॉल कर उन्हें नया CCTV दिखाना) किया है, उसकी शिकायत दिल्ली में कर वो उन्हें जेल भिजवा देगा | इस धमकी से नाराज होकर कमांडर आय एस कुमार ने विनोद सिंह की शिकायत AGM कमर्शियल से कर दी | मामला फिलहाल M Legal के पास है |

आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी मसाला किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

नेवल डाकयार्ड मुंबई से २० किलो चाँदी गायब, नौसेना के रियर एडमिरल संजीव काले ने मामले को दबाया

Rear Admiral Sanjeev Kale
Rear Admiral Sanjeev Kale

बात लगभग वर्ष भर पहले की है | जुलाई २०१७ या अगस्त २०१७ | नेवल डाकयार्ड मुंबई के सिस्टम डिपार्टमेंट, सेंटर क्र. ३७ के कंट्रोल सेल से अचानक २० किलो चाँदी गायब हो गई | यह चाँदी वेल्डिंग के लिए लाया गया था | आश्चर्य की बात है कि इतनी बड़ी मात्रा में चाँदी गायब हो गया वो भी नेवल डाकयार्ड मुंबई से | जिस जगह की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं भारतीय नौसेना की हो वहाँ से चोरी ? बड़े आश्चर्य की बात है !

उससे बड़े आश्चर्य की बात यह है कि इस बात को एक वर्ष से ऊपर हो गया है किंतु अब तक न चोर का पता चला न ही पुलिस में इस मामले की कोई शिकायत दर्ज की गई |

चोरी की घटना का जैसे पता चला तो सिस्टम डिपार्टमेंट में हँगामा मच गया | इतनी चाँदी नेवल डाकयार्ड से बाहर गई कैसे ? वहाँ के सुरक्षा प्रबंध बहुत कड़े हैं | सिविलियन्स की इतनी कड़ाई से जाँच होती है कि सुई भी निकालना मुश्किल है | २० किलो चाँदी कहाँ से निकलेगा ? मैनें डाकयार्ड कर्मचारियों से बातचीत की तो पता चला की नौसेना के अधिकारियों की गाड़ियों को बिना जाँच के ही नेवल डाकयार्ड में आने-जाने दिया जाता है | एक संभावना तो बनती है | लेकिन फिर मैनें सिस्टम डिपार्टमेंट के ही एक कर्मचारी से बात की | तो उसने मुझे असली राज बताया |

जुलाई २०१७ या अगस्त २०१७ के आस पास ही कभी नौसेना के रियर एडमिरल तथा नेवल डाकयार्ड के उस समय के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट संजीव काले की पुत्री का विवाह था | उस विवाह के लिए नेवल डाकयार्ड से कई चीजें बन कर गई | उन चीजों में से कुछ के निर्माण में इस चाँदी का उपयोग हो गया | अब काले जी ने पूरे मामले को कैसे दबाया यह तो पता नहीं | नौसेना के उच्च अधिकारियों को इस मामले के बारे में कुछ मालूम है या नहीं वो भी पता नहीं | पर इतना तो पक्का निश्चित है कि नेवल डाकयार्ड की सुरक्षा गलत हाथों में है |

सिस्टम डिपार्टमेंट के उसी कर्मचारी ने मुझे एक बात और बताई | किसी प्राइवेट कांट्रेक्टर से भी संजीव काले जी ने अपनी पुत्री के विवाह के समय बहुत सहायता ली थी | उस के बदले उन्होंने उस कांट्रेक्टर का नकली बिल पास करवाया है और इस काम में उनकी मदत कप्तान भूपेश अनुजा ने की है | पूरे मामले की जानकारी अब तक नहीं मिली है | कांट्रेक्टर का नाम भी पता नहीं चल पाया है | जल्दी ही पता लगाकर आप लोगों की जानकारी में लाऊँगा |

नौसेना प्रशासन की लापरवाही से डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग, मुंबई में एक और मजदूर की मौत

Construction site at Dockyard Colony kanjur Marg Mumbai where 2 labours died
Construction site at Dockyard Colony kanjur Marg Mumbai where 2 labours died

भारतीय नौसेना गरीब मजदूरों का आर्थिक शोषण करने के लिए कुख्यात तो थी ही अब वो उनकी मौत बनकर उनके सर पर नाचने का काम भी कर रही है | पिछले एक वर्ष में डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग मुंबई-78 में ही तीन मजदूरों की मौत हो चुकी है | अभी हाल ही में घटी एक घटना का उदाहरण देकर मैं पाठकों को पूरा मामला समझाता हूँ |

डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में कई इमारतों के निर्माण कार्य चल रहे हैं | इमारत क्र. 54 के सामने भी एक निर्माण कार्य चल रहा है | यह निर्माण कार्य तमाम तरह की गैरकानूनी गतिविधियों का अड्डा बन चुका है | यहाँ बाल मजदूरों का प्रयोग खुलेआम हो रहा है | गैरकानूनी आर एम सी प्लांट लगाया गया है | चौबीसों घंटे काम चलता है जबकि नियम के अनुसार सूर्यास्त के बाद काम बंद हो जाना चाहिए |

इन सारी गैरकानूनी गतिविधियों की जानकारी नौसेना तथा रक्षा विभाग को दी गयी थी | पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की | कमांडर मुजावर तथा सिक्योरिटी इंचार्ज अवस्थी को भी पूरा मामला बताया गया था | कमांडर मुजावर ने अपने उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराया किंतु अवस्थी जी ने तो कोई भी कार्रवाई करने से साफ़ इंकार कर दिया |

नौसेना प्रशासन की इस लापरवाही का नतीजा दो दिन पहले शनिवार की रात ( ०२/०६/२०१८ ) को एक गरीब मजदूर पुष्पराज सुरेंद्र (उम्र २२ वर्ष) को भुगतना पड़ा | आप सब को पता है शनिवार की रात मुंबई में बारिश हुई थी | अब कम से कम बारिश के समय तो काम बंद करना चाहिए था | किंतु लालची ठेकेदार ने काम चालू रखा | अवस्थी जी का आशीर्वाद तो था ही | बारिश के गीलेपन की वजह से electrocution हुआ और उस बेचारे गरीब मजदूर की मौत हो गई | गाँव से रोजी-रोटी कमाने आया था, लाश बनकर वापस गया |

अब हंगामा मचा हुआ है | पुलिस को पैसा खिलाकर झूठा एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट बनवाना, मजदूर के परिवार को झूठ बोलना, उन्हें उनके हक़ का पैसा न देने का तरीका खोजना इन सब कामों में ठेकेदार, सुरक्षा इंचार्ज अवस्थी जी और नौसेना के अधिकारी लगे हैं | अब वहाँ नौसेना ने रात को काम बंद कर रखा है | एक मजदूर की लाश गिरने के बाद | उसी जगह ५-६ महीने पहले डेमोलिशन के समय एक मजदूर की मौत हुई थी | वर्ष भर पहले न्यू कॉलोनी के पास बने टावर से गिरकर एक मजदूर की मौत हुई थी | तीन मौतों की जानकारी तो मुझे है | हो सकता है और भी मौतें हुई हो और मुझे पता न चला हो | मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जिन मजदूरों की मौत हुई थी न उन्हें उनके हक़ का पैसा मिला है और न शनिवार की रात को मरे गरीब मजदूर पुष्पराज सुरेंद्र को मिलेगा | नियमों के तहत इन्सुरन्स तथा पी ऍफ़ अकाउंट भी नहीं बना होगा उनका | न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलती होगी | नौसेना की सफ़ेद वर्दी गरीब मजदूर को अपने जूतों तले रौंद रही है |

आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
इन सब हंगामों के बीच हमारे सिक्योरिटी इंचार्ज अवस्थी जी क्या कर रहे हैं ? कॉलोनी की सुरक्षा का जिम्मा तो उनके सर है न ! लेकिन वो बेचारे व्यस्त है | बहुत ज्यादा व्यस्त | निम्नलिखित कामों के कारण उन्हें फुर्सत ही नहीं है |
१) कॉलोनी के पेड़ों पर लगे आमों और नारियलों को सिक्योरिटी गार्डों से तुड़वाकर बेचना और उसका पैसा अपनी जेब में डालना | इसलिए अब से अवस्थी जी का नाम आमचोर अवस्थी लिखा जाएगा |
२) नौसेना के अधिकारियों को रिश्वत दिलवाकर फर्जी बिल पास कराना |
३) PCDA के ऑडिटरों को रिश्वत दिलवाकर फर्जी बिल पास करवाना | उदाहरण के तौर पर डायनामिक सिक्योरिटी वाले से 3% PCDA के ऑडिटरों को दिलवाते हैं |
४) सिक्योरिटी गार्डों की नकली अटेंडेंस लगाकर पैसा कमाना |
५) डाकयार्ड कॉलोनी के स्विमिंग पूल में गैरकानूनी तरीके से चल रहे अकादमी के लिए ग्राहक जुटाकर पैसे कमाना |
६) कॉलोनी के खेल मैदान को गैरकानूनी तरीके से किराए पर दिलवाकर पैसे कमाना |
७) ठेकेदारों को गैरकानूनी कामों की अनुमति देकर उनसे पैसे कमाना |

और भी ऐसे बहुत से मामले हैं | कभी विस्तार में लिखूँगा | बस समझ लीजिये कि आमचोर अवस्थी डाकयार्ड कॉलोनी में भारतीय नौसेना के कलंक संजीव काले जी के प्रतिनिधि है | भ्रष्टाचार में कैसे पीछे रह सकते हैं ?

नौसेना द्वारा गरीब सिक्योरिटी गार्डों को लूटने का क्रम जारी, कई गार्डों ने नौकरी छोड़ी

Picture for representation only
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जैसा कि ईभारत पाठकों को पहले ही बता चुका है कि किस तरह नौसेना के अधिकारी डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग, मुंबई-७८ के गरीब सिक्योरिटी गार्डों को लूट रहे हैं | विस्तार में जानने के लिए ईभारत का पुराना लेख नेवल डाकयार्ड, कांजुर मार्ग, मुंबई प्रशासन ने सिक्यूरिटी गार्ड की पगार पर डाला डाका  जरूर पढ़ें | आज का लेख पिछले एक सप्ताह में घटी घटनाओं पर आधारित है |

वैसे तो विवाद पुराना है पर जब से डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड नामक ठेकेदार को सिक्योरिटी का जिम्मा दिया  है तब से हालात बहुत ज्यादा बिगड़ गए हैं | डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड कॉलोनी की सिक्योरिटी का जिम्मा लेना ही नहीं चाहती थी क्योंकि उसकी आर्थिक क्षमता ऐसी नहीं थी कि वो ६० सिक्योरिटी गार्डों को पगार दे पाए | लेकिन कमांडर मुजावर और बीरेंद्र (वही बीरेंद्र जो नौसेना के अधिकारियों के लिए दारु तथा लड़की का बढ़िया इंतजाम करके डाकयार्ड में प्रोजेक्ट इंचार्ज बन गए हैं |) ने डायनामिक्स पर दबाव डालकर कॉलोनी की सिक्योरिटी का कॉन्ट्रैक्ट लेने पर बाध्य किया | उसे पूरा भरोसा भी दिलाया कि उसका बिल तुरंत पास हो जाया करेगा जिससे पैसे की कमी न होगी, बस मुजावर और बीरेंद्र को उनका कमीशन समय पर मिलते रहे |

पर होनी को कुछ और मंजूर था | सरकारी काम कोई जल्दी होता कहाँ है | फिर बिल कैसे जल्दी पास होगा ? बिल में वैसे भी डायनामिक्स वाले मुजावर और बीरेंद्र के साथ मिलकर बहुत फ्रॉड कर रहे थे | उनमें से कुछ फ्रॉड निम्नलिखित हैं :

१) कॉलोनी में ४० गार्ड काम कर रहे थे तो भी बिल ६० का ही जाता | जब इस बात की शिकायत हुई तो बिल वापस लाकर उसे बदल दिया गया | गार्डों की संख्या को ४३ किया गया |
२) बिल में सभी गार्डों की उपस्थिति १०० प्रतिशत दिखाई जाती | पूरे तीसों के तीस दिन – सारे गार्डों के | शायद सुपरमैन गार्ड होंगे | इसकी भी शिकायत हुई तो फिर उसे भी बदला गया |
३ ) गार्डों का प्रोविडेंट फण्ड और इन्शुरन्स का पैसा उनके अकाउंट में पूरा जमा नहीं कराया जा रहा है | वो पैसा डायनामिक्स, कमांडर मुजावर और बीरेंद्र आपस में मिल बाँटकर खा रहे हैं |
४) केंद्र सरकार ने गार्डों की न्यनतम सैलरी ६५३ रुपये प्रतिदिन निर्धारित की है, साथ में महीने में ४ दिन छुट्टी | पर नौसेना गरीब गार्डों को दिन का ३०० रुपये भी नहीं दे रही है | उनका मासिक पगार ८५०० आता है जबकि आना चाहिए १९००० -२०००० रुपये | साथ में तीसों दिन काम |

ऐसा बिल पास कैसे होगा | होना भी नहीं चाहिए | भारतीय नौसेना के कलंक रियर एडमिरल संजीव काले ने निजी दखलंदाजी करके कुछ बिलों को गैरकानूनी तरीके से पास कराया, पर अब वो एडमिरल सुपरिंटेंडेंट नहीं रहे | तो अब बिल पास होगा कैसे ? इन सब मामलों में कई बार शिकायत हो चुका है | मीडिया में छप चुका है | पर नौसेना अधिकारियों के कान पर जूं भी नहीं रेंगता | देश को इमोशनल ब्लैकमेल कर वन रैंक वन पेंशन ले रहे हैं यह डाकू |

नौसेना के  लूट-खसोट से तंग आकर पिछले शुक्रवार से कई सिक्योरिटी गार्डों ने नौकरी छोड़ दी है | पगार तो वैसे भी तीन महीने से मिला नहीं | ६-७ मार्च को तो लगभग कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं आया | सारे गेट खुले | जिसको आना है आओ और जिसको जाना है जाओ | यह हाल है नेवी कॉलोनी की सुरक्षा का | ७ मार्च को तो हमारे वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा जी सिविलियन को अपने संबोधन में कह रहे थे कि हमनें सिक्योरिटी बिलकुल टाइट कर दी है | दिन में सपना देख रहे थे शायद | या हो सकता है शराब उतरी न हो |

कल रात को यह बात मीडिया में फ़ैल गयी तो आज सुबह फ़ोन कर-करके सारे सिक्योरिटी गार्डों को दुबारा बुलाया गया | उन्हें वादा किया गया है कि उनका पगार जल्दी से जल्दी दिया जाएगा | देखते हैं इस बार कहाँ से पैसा लाकर दिया जाता है | नए एडमिरल सुपरिंटेंडेंट भी गैरकानूनी तरीके से बिल पास कराकर पैसा देंगे या कहीं और से पैसा लाएँगे |