नौसेना के दूधचोर कमांडर ललित शर्मा द्वारा मजदूरों का शोषण जारी, अपनी चोरी पकड़ी जाने पर ले रहे हैं बदला

दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा
दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा

उम्मीद है कि आप पाठकों ने दूधचोर कमांडर ललित शर्मा के बारे में मेरा पिछला लेख पढ़ा होगा | न पढ़ा हो तो कृपया यह लिंक क्लिक करके पढ़ लें : नौसेना के कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा बने दूध चोर, दिन के एक लीटर दूध के लिए अपना ईमान बेचा |

मुझे लगा मेरे पिछले लेख के बाद शर्मिंदगी की वजह से कमांडर ललित शर्मा के व्यवहार में थोडा बहुत सुधार जरूर होगा, वो नेवल डाकयार्ड मुंबई के मजदूरों को तंग करना बंद कर देंगे | लेकिन मेरी वो उम्मीद हवा के झोंके के साथ बह गई | हमारे नौसेना अधिकारी इंसानियत कब का बेच खाए हैं | देश की सुरक्षा तो वो रोज टुकड़ों-टुकड़ों में बेच ही रहे हैं | हमारे ललित शर्मा जी भी अपनी ख्याति के अनुरूप ही निकले |

मेरे पिछले लेख लिखने के बाद से बेचारे आग बबूला हैं | सारे सिविलियन्स पर गुस्सा निकाल रहे हैं | खासकर मजदूरों पर | सबका ओवरटाइम बंद कर दिया गया है | सुबह सबको ठीक नौ बजे आना जरुरी है और शाम को भी कोई समय से एक मिनट पहले अपनी जगह से नहीं हिल सकता | लंच टाइम आधे घंटे से एक मिनट ऊपर नहीं | एकदम कड़ाई से समय की पाबंदी और सबसे काम के एक-एक मिनट का हिसाब ले रहे हैं | बीच-बीच में जब भी उनके दिमाग पर फितूर चढ़ता है, अचानक खड़े होकर सिविलियन्स पर चिल्लाने लगते हैं कि तुम सबने मेरे साथ गद्दारी की है | मजदूरों के मोबाइल फ़ोन के प्रयोग पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गयी है, सिर्फ नौसेना के भ्रष्ट अधिकारी ही मोबाइल फ़ोन का प्रयोग कर सकते हैं | कमांडर ललित शर्मा ने मजदूरों को सीधे-सीधे धमकी भी दे दी है कि भले पूरे नेवल डाकयार्ड मुंबई का दूध बंद करना पड़े लेकिन मैं तुम लोगों को दूध मिलने नहीं दूँगा |

अब जहाँ तक समय की पाबंदी वाली बात है, वो तो शर्मा जी ने अच्छा ही किया है | सबको अनुशासन में ला दिया | ज्यादातर सरकारी नौकर कामचोर होते हैं, समय बरबाद करते हैं | उनसे कड़ाई से काम करवाना अच्छी बात है | लेकिन परेशानी यह है कि उसी कार्यालय में काम करनेवाले नौसेना के अधिकारियों पर यह नियम लागू नहीं हो रहा | वो अपनी मर्जी से अपने समय पर आते हैं, अपने मर्जी से चले जाते हैं | खुद ललित शर्मा नौ के बजाय ग्यारह से बारह बजे के बीच में ही आते हैं | रोज दो से तीन घंटा लेट | सुबह नौ से ग्यारह बजे तक वो नकली बिल पास करने का उपाय सोचते हैं | बाकी पूरा दिन मजदूरों को परेशान करने का उपाय सोचने में लगाते हैं जैसे – मोबाइल प्रयोग पर पाबंदी या दूध बंदी |

पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि सी.सी.टी.वी. घोटाले में लक्ष्मी सेल्स नामक कंपनी से संजीव काले तथा भूपेश अनेजा के साथ ललित शर्मा ने भी मोटी रिश्वत ली है | यदि आपने सी.सी.टी.वी. घोटाले के बारे में न पढ़ा हो तो यह लिंक क्लिक करके पढ़ें : नौसेना के रिश्वतखोर कप्तान भूपेश अनुजा ने सीसीटीवी कैमरों का नकली बिल पास किया, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए फाइल चुराया | इस घोटाले में ललित शर्मा के रोल के बारे में किसी और दिन लिखूँगा |

तो दूधचोर / कामचोर ललित शर्मा जी सुधर जाइए | भगवान आपको पहले से आपके कर्मों की सजा दे रहा है | हराम का पैसा और मजदूर की हाय आपको कभी चैन से सोने नहीं देगी | और किसी ने आपके साथ गद्दारी नहीं की है | मजदूरों का दूध छीन कर आपने उनके साथ अन्याय किया है और इनकोडिंग डिपार्टमेंट में बैठकर फ्रॉड बिल पास कर देश के साथ आप गद्दारी कर रहे हो |

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भाजपा नेता संजय शर्मा ने कांजुरमार्ग, मुंबई की नौसेना कॉलोनी में बनाया अवैध कार्यालय

संजय शर्मा महारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ
संजय शर्मा महारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ

स्वयं को मुंबई, भाजपा का महामंत्री बतानेवाले बतानेवाले संजय शर्मा नामक व्यक्ति ने कांजुरमार्ग, डाकयार्ड कॉलोनी में उत्पात मचाया हुआ है | यह कॉलोनी भारतीय नौसेना के अधिकार क्षेत्र में आता है लेकिन नौसना के अधिकारियों ने इस मामले में आँखें मूँद ली है |

डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में जोग्गर्स पाक के सामने कई इमारतों का निर्माण कार्य चल रहा है | इन इमारतों के निर्माण की जिम्मेदारी जिस बिल्डर को दी गयी है, उसने निर्माण क्षेत्र में २ कंटेनर लाकर रख दिए हैं | उनमें से एक कंटेनर को बिल्डर ने संजय शर्मा के सुपुर्द कर रखा है | उस कंटेनर में संजय शर्मा ने अपना पार्टी कार्यालय बनाया हुआ है | वह रोज दो से तीन गाड़ियाँ लेकर डाकयार्ड कॉलोनी आता है | उसके साथ हमेशा ८-१० गुंडों की फ़ौज रहती है | पूरा दिन वहीं मीटिंग | दोपहर ११-१२ बजे से रात के ११-१२ बजे तक या तो संजय शर्मा उस कार्यालय में रहता है या डाकयार्ड कॉलोनी में घूमता रहता है |

यदि किसी भी बाहरी व्यक्ति को डाकयार्ड कॉलोनी के अंदर आना है तो उसे मेन गेट के रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ती है | कई बार उन व्यक्तियों के आय कार्ड ले लिए जाते हैं और कॉलोनी से बाहर निकलते समय ही वो आय कार्ड वापस किये जाते हैं | डाकयार्ड कॉलोनी के जो रहिवासी हैं उनके रिश्तेदारों पर भी यह नियम लागू होता है | लेकिन संजय शर्मा तथा उसके गुंडों पर यह नियम लागू नहीं होता | न रजिस्टर में कोई एंट्री, न आय कार्ड देना | अपनी मर्जी से आओ, अपनी मर्जी से जाओ, अपनी मर्जी से घूमो |

अब आपको संजय शर्मा को मिली इस रियायत का कारण बताना चाहूँगा | संजय शर्मा का डाकयार्ड कॉलोनी के पूर्व सिक्यूरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी / आमचोर अवस्थी / बीविचोर अवस्थी से काफी करीबी संबंध है | अवस्थी की सहायता से संजय शर्मा बिल्डर तथा नौसेना अधिकारियों के बीच दलाली का काम करता था | बिल्डर द्वारा जो भी रिश्वत नौसेना के अधिकारियों को देनी होती है वो संजय शर्मा तथा सुरेश अवस्थी के द्वारा होते हुए नौसेना अधिकारियों तक पहुँचती है | रिश्वत देने-दिलाने वाला व्यक्ति नौसेना अधिकारियों के लिए उनके जीजा-दामाद जितना सम्मानजनक होता है | इसलिए उन्होंने संजय शर्मा को पूरी आजादी दे रखी है |

स्थानीय भाजपा नेताओं से बात करने पर पता चला है कि संजय शर्मा भांडुप, मुंबई के स्थानीय छुटभैये नेता हैं | उनका कोई जनाधार नहीं है | कुछ वर्ष पहले एक बड़ा फाइनेंसियल फ्रॉड कर उत्तर प्रदेश भाग गए थे | सालों बाद वापस आये | उसी पैसे के दम पर कुछ गुंडों को पाल कर अपनी राजनीति जमाने की कोशिश कर रहे हैं | अवस्थी की सहायता से बिल्डर के लिए दलाली कर अच्छा पैसा बनाने में सफल हुए हैं | अवस्थी के जाने के बाद सिक्यूरिटी ऑफिस के किसी ओझा नामक व्यक्ति के सहयोग से इनका दलाली का काम अब भी जारी है |

पाँच दिन बाद १७ मार्च को संजय शर्मा होली महोत्सव के नाम से एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं जिसमें सारे स्थानीय नेताओं को आमंत्रण दिया गया है | उन स्थानीय नेताओं में से ज्यादातर को संजय शर्मा के वास्तविक चरित्र के बारे में मालूम हो भी सकता है और नहीं भी | हो सकता है ये लेख उनकी आँखें खोल दे |

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नौसेना के कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा बने दूध चोर, दिन के एक लीटर दूध के लिए अपना ईमान बेचा

दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा
दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा

मुझे पता है शीर्षक पढ़ के आप लोग बड़ा अजीब महसूस कर रहे होंगे | कुछ लोगों को तो बकवास लग रहा होगा किंतु शांति से पूरा मामला पढ़िए तो आपको अंदाजा लग जाएगा कि पैसे के लिए किस हद तक हमारे नौसेना के अधिकारी गिर सकते हैं | साथ ही साथ यह मामला यह भी साफ़ कर देगा कि मजदूरों को नौसना के अधिकारी किस हिकारत भरी नज़रों से देखते हैं |

मामला है नेवल डाकयार्ड मुंबई के इनकोडिंग डिपार्टमेंट का | इस डिपार्टमेंट में नौसेना के कई अधिकारी, कई सिविलियन सुपरवाइजर-क्लर्क  तथा चौदह मजदूर हैं | नियमों के तहत पूरे नेवल डाकयार्ड, मुंबई के हर मजदूर को हर दिन दूध मिलना चाहिए | और आज तक मिलता भी है सिर्फ इनकोडिंग डिपार्टमेंट के मजदूरों को छोड़कर | लगभग ७-८ महीने पहले तक इनको भी हर दिन पाँच लीटर दूध मिलता था | लेकिन उस पाँच लीटर दूध में से एक लीटर दूध इनकोडिंग डिपार्टमेंट में कार्यरत कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा अपने लिए रख लेते थे | लंबे समय से यह चल रहा था | लेकिन ८-१० महीने पहले कुछ मजदूरों ने इसका विरोध किया तो दोनों को दूध मिलना बंद हो गया | दोनों कमांडरों ने तय किया कि इन मजदूरों को इनकी जगह दिखाते हैं |

कप्तान भूपेश अनुजा / Captain Bhupesh Anuja
कप्तान भूपेश अनेजा / Captain Bhupesh Aneja

समय बीता और दूध देनेवाले कांट्रेक्टर का कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हुआ | कॉन्ट्रैक्ट रिन्यु करने का समय आया | कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा ने उस समय के अपने बॉस कप्तान भूपेश अनेजा को कहकर कॉन्ट्रैक्ट रिन्यु होने ही नहीं दिया | इनकोडिंग डिपार्टमेंट  के इन चौदह मजदूरों को दूध मिलना बंद | पूरे नेवल डाकयार्ड, मुंबई के हर मजदूर को दूध मिल रहा है, सिवाय इन चौदह मजदूरों के |

अब पाठक ही बताइए ऐसे चिंदी चोर और घटिया दर्जे के इंसानों के विरुद्ध लिख कर मैं गलत करता हूँ क्या ? कई लोग मुझे संदेश भेजते हैं कि नौसेना में सब ऐसे नहीं है | कुछ अधिकारी ही गलत काम करते हैं | तो मेरा उनसे कहना है कि नौसेना प्रशासन उन भ्रष्ट अधिकारीयों की गलती को सुधार तो सकता है न ? उन पर कार्रवाई तो कर ही सकता है न | लेकिन नौसेना प्रशासन तो ऐसे चोरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देता है |

उन चौदह मजदूरों ने नौसेना प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को कई प्रार्थना पत्र लिखे किंतु उनके कान पर जू तक नहीं रेंगी | वो करेंगे भी क्या ? वो तो खुद भ्रष्टाचार में गले तक डूबे हैं | रियर एडमिरल संजीव काले के बारे में तो कई बार लिख चुका हूँ , अब वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा के कई मामले पता चले हैं | वो भी लिखूँगा |

पाठकों की अतिरिक्त जानकारी के लिए बता दूँ कि कमांडर आय एस कुमार साईकलचोर के नाम से भी कुख्यात हैं | यदि आप उस मामले को जानना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें : नौसेना का कमांडर आय एस कुमार निकला साइकिल चोर

(  कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा के नाम संदेश : आप दोनों इतने बड़े अधिकारी होकर इतनी घटिया हरकत कर रहे हो, शर्म आती है या नहीं ? इतनी कमी पड़ रही है तो ebharat.net के मेल पर अपने घर का पता भेज दीजिये | दोनों को एक-एक लीटर दूध हर दिन मैं अपने खर्चे पर भेज दूँगा | )

( कप्तान भूपेश अनेजा के नाम संदेश : इतनी बड़ी-बड़ी ईमानदारी की बातें करके इतनी घटिया हरकत | बिल्डर के एजेंट ने आपका १५-१७ लाख काला धन हजम कर लिया था, भूल गए क्या ? उससे सबक लो | गरीबों को लूटना बंद करो | और थोड़ी शर्म बाकि हो तो मुंबई से अरब सागर नजदीक है | )

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नौसेना का सिक्यूरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी निकला ठग, पुलिस वाला बनकर 90 लाख लूटे

आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ

वैसे तो यह खबर abinet.org में छप चुकी है | आप लोगों में से कई लोगों ने पढ़ भी लिया होगा लेकिन हिंदी में पढने-लिखने का अलग ही मजा है | इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ |

मामला नौसेना के कुख्यात अधिकारी सुरेश अवस्थी उर्फ़ आमचोर अवस्थी उर्फ़ बीवीचोर  अवस्थी का है | अवस्थी जी भारतीय नौसेना के आँख के दुलारे और विक्रोली, मुंबई के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) शेखर तावड़े के आँख के सितारे हैं | जब भी अवस्थी कोई कुकर्म करता है, और उसके विरुद्ध शिकायत पुलिस स्टेशन जाती है, तो नौसेना के अधिकारियों का फ़ोन तुरंत उस पुलिस स्टेशन पहुँच जाता है | जरुरत पड़ी तो दो नौसना के अधिकारी पुलिस स्टेशन भी पहुँच जाते हैं अवस्थी को बचाने | अब हमारे नौसेना के अधिकारी वैसे ही बीवीओं की अदला-बदली (Wife Swapping) के लिए कुख्यात है | अवस्थी है ही बीवीचोर, तो वो नौसेना के अधिकारियों के बीच लोकप्रिय तो होगा ही |

पर मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि ACP शेखर तावड़े को आमचोर/बीवीचोर अवस्थी से इतना प्रेम क्यों है ? वैसे तो तावड़े जी खुद अव्वल दर्जे के भ्रष्टचारी हैं किंतु अवस्थी से उनका गुप्त प्रेम समझ नहीं आता | कोई भी अवस्थी के विरुद्ध शिकायत करने पुलिस स्टेशन जाता है तो ये महाशय भी १५-२० मिनट में वहाँ पहुँच जाते हैं | लेकिन कब तक बचाएँगे ? चोर आज नहीं तो कल फँसेगा ही न | आमचोर/बीवीचोर अवस्थी भी फँस गया |

और कोई छोटी-मोटी ठगी नहीं है ! पूरे नब्बे लाख है नब्बे लाख | अवस्थी जी बने मुंबई पुलिस के एंटी नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी | घाटकोपर में रहने वाले एक व्यक्ति को उन्होंने अपने साथी के साथ मिलकर झाँसा दिया कि उसे नवी मुंबई में दो फ्लैट सस्ते में दिला सकते हैं | मामला एक करोड़ चालीस लाख पर तय हुआ – एक करोड़ रजिस्ट्रेशन से पहले और चालीस लाख रजिस्ट्रेशन के बाद | बेचारे ने नब्बे लाख नकद दे भी दिया लेकिन जब महीनों तक रजिस्ट्रेशन का मामला आगे नहीं बढ़ा तो उस व्यक्ति को शक हुआ और उसने अपने पैसे वापस माँगने शुरू किये | अवस्थी और उसके साथी ने उस व्यक्ति का नंबर ब्लॉक कर दिया और अवस्थी के साथी ने तो अपना घर भी बदल लिया |

वो बेचारा, अवस्थी और उसके साथी को ढूंढते-ढूंढते श्रीमती पराशर से मिला | श्रीमती पराशर ने बताया कि अवस्थी और उसके साथी ने उन्हें भी उसी तरीके से लूटा है | और कितनों को लूटा होगा पता नहीं | मुझे तो दो का ही पता लगा है तो आपको बता रहा हूँ | ACP शेखर तावड़े की वजह से पार्क साईट विक्रोली पुलिस स्टेशन में FIR नहीं हो पाया था | लेकिन न्यायालय के निर्देश पर पुलिस को FIR लेना पड़ा | जिस को इस मामले की पूरी जानकारी चाहिए वो यह लिंक क्लिक करके पढ़े : FIR for cheating registered against Navy’s chief security officer Suresh Awasthi, Awasthi claimed that he was officer of Anti-Narcotics Cell in Mumbai Police

इस पूरे मामले से एक बात तो साफ़ है | चोर कितना भी चालाकी दिखाये – जोर लगाये, आज नहीं तो कल पकड़ा जाएगा ही जाएगा | और जितने भी अवस्थी के साथी हैं, जिन्हें लगता है अवस्थी उन्हें बचा लेगा या वो अवस्थी को बचा लेंगे, तो वो समझ जाएँ, न अवस्थी बचेगा न उसके साथी | सबका नंबर आएगा, आज नहीं तो कल | चाहे नरक में जा छुपे, लेकिन वहाँ से भी ढूंढ़कर उन्हें सबक सिखाया जाएगा |

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गरीब मजदूरों को लूटकर चरित्रहीन नौसैनिकों पर पैसा लुटाती भारतीय नौसेना

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यदि आप लोगों ने मेरा पिछला लेख “भारतीय रक्षा सेनाएँ तथा वन रैंक वन पेंशन की भीख” न पढ़ा हो तो अभी जाकर पढ़ें | उसमें मैनें बताया है कि किस तरह देश को इमोशनल ब्लैकमेल कर भारतीय रक्षा सेनाएँ देश का पैसा लूट रही हैं | आज उसी बात को साबित करते हुए एक उदाहरण देने जा रहा हूँ |

मुंबई के डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में नौसेना की एक सिविलियन कॉलोनी है | अर्थात कॉलोनी तो नौसेना की है किंतु इसमें डाकयार्ड में काम करनेवाले सिविलियन ही रहते हैं | बड़ी कॉलोनी है और उसके प्रशासन के लिए एस्टेट ऑफिस है जिसका इंचार्ज एस्टेट अफसर की हैसियत से एक सिविलियन हुआ करता था | फिर नौसेना के लूटेरों को लगा कि इतनी बड़ी कॉलोनी से अच्छी कमाई हो सकती है तो एक नया पद बनाया गया प्रशासनिक अधिकारी (एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर) का | इस पद पर नौसेना का कप्तान या कमांडर रैंक का अधिकारी बैठता है |

अब सोचिये की नौसेना का काम क्या है ? देश की रक्षा या रेजिडेंशियल कॉलोनी चलाना | असल में नौसेना के अधिकारियों का मानना है कि उनका काम यह दोनों नहीं है | उनका काम है देश को लूटना, चाहे जिस तरीके से | पिछला प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर तो रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया | लोगों को लगा चलो अब तो नौसेना के अधिकारियों को अकल आएगी पर नहीं, लूटने का मौका इतनी आसानी से कैसे जाने देंगे | अब तो दो-दो नौसेना के अधिकारी कॉलोनी में हैं, एक कमांडर और एक कप्तान | जो दो नए आये हैं, उनके किस्से कभी और बताऊँगा |

मेरे पिछले लेख से आप लोगों को मालूम हो गया होगा कि किस तरह नौसेना ठेका मजदूरों (कॉन्ट्रैक्ट लेबर) को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का ४०% से ५०% ही देती है | इसके अलावा कोई साप्ताहिक छुट्टी नहीं, कोई इनसुअरन्स नहीं | उनके प्रोविडेंट फंड का पैसा भी गबन कर जाते हैं | फिर मैनें सोचा कि नौसेना भूतपूर्व नौसेनिकों को भी तो कॉन्ट्रैक्ट पर रखती है, उन्हें कितना पैसा देती होगी ? उन्हें न्यूनतम वेतन मिल रहा है ? या उनका भी शोषण हो रहा है ?

पता करने पर मालूम पड़ा कि भूतपूर्व नौसैनिकों को तो देश का दामाद बना कर रखा गया है | उन्हें जरुरत न होते हुए भी कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा रहा है, महत्त्वपूर्ण अधिकार दिए जा रहे हैं और तनख्वाह भी सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से ज्यादा | उदाहरण के तौर पर डॉकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग मुंबई में दो भूतपूर्व नौसैनिकों राज सिंह और राम कुमार को नौसेना ने कॉन्ट्रैक्ट पर रखा है | उन्हें क्वार्टर इंचार्ज बनाया गया है | अर्थात डाकयार्ड के कर्मचारियों को डाकयार्ड कॉलोनी में जो घर मिलेंगे उन्हें एम ई एस से तैयार करवाकर देना | लेकिन दोनों करते क्या हैं ? दिन भर एस्टेट ऑफिस में सिविलियन्स पर चिल्लाना, हर काम में दखलंदाजी करना और दिन में दो बार शिशु विकास केंद्र के पास जाकर महिलाओं को घूरना | शिशु विकास केंद्र के आरंभ होने और छूटने के समय दोनों ठरकी अपना ऑफिस छोड़कर बराबर वहाँ पहुँच जाते हैं | शिशु विकास केंद्र से इनका कोई लेना-देना नहीं है, वहाँ कोई काम नहीं, लेकिन दिन में दो बार, तय समय पर दोनों वहाँ हाजिर मिलते हैं | अपने और नौसेना के घिनौने चरित्र का सार्वजनिक प्रदर्शन करते हुए | 

इस काम के लिए दोनों को पगार मिलता है २२ हजार से २३ हजार रुपये | सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन है १८ हजार से १९ हजार रुपये | गरीब मजदूरों को ८ हजार से ९ हजार रुपये देकर लूटा जाता है और राज सिंह और राम कुमार जैसे ठर्कियों पर लुटाया जाता है | मामला इतना ही नहीं है | डाकयार्ड कॉलोनी का क्वार्टर इंचार्ज महत्वपूर्ण पद है, इस पर किसी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को बैठाना ही गलत है | सिविलियन कर्मचारी के काम को जानबूझ कर भूतपूर्व नौसैनिकों को दिया गया है ताकि कॉलोनी से पैसा कमाना आसान हो |

आप लोगों को याद होगा २०१६ में डाकयार्ड कॉलोनी के क्वार्टर्स में बांग्लादेशी रहते मिले थे | (यह लेख पढ़ें : “Civil contractor found encroaching on defence colony flats, renting these to Bangladeshis” ) वो कमांडर मुजावर, भूतपूर्व नौसैनिक और सिक्योरिटी इंचार्ज चीमन लांबा, गोपाल कुमार, क्वार्टर इंचार्ज राज सिंह और राम कुमार की मिलीभगत से ही संभव हुआ था | इसके अलावा डेमोलिशन के लिए खाली कराये गए कई इमारतों पर भी कॉन्ट्रैक्टर्स कब्जा कर बैठे थे | वो भी काम नौसेना के इन्ही बदमाशों का था | इन दोनों-तीनों का तो मैनें बस उदाहरण दिया है, बाकी व्यवस्था के कोने-कोने में यह लोग घुसे बैठे हैं, देश को जोंक की तरह चूसते हुए | 

नौसेना के अधिकारियों के काले कारनामे इतने हैं कि जितना लिखो उतना कम है | कहते हैं न हरी नाम अनंत, हरी कथा अनंता | पर मुझे तो लगता है हरी कथा का शायद अंत हो जाए, नौसेना के अधिकारियों के भ्रष्टाचार के किस्सों का अंत न होगा | इसलिए  बाकी कभी और |

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आनेवाले कुछ दिनों में पढ़े :
१) नौसेना अधिकारी निकले दवाईचोर, वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा ने मामला दबाया
२) कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण की फाइल चोर कप्तान भूपेश अनुजा को बचाने की कोशिश, खुद मैराथन घोटाले में शामिल
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