भ्रष्ट नौसेना, डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग के सिक्यूरिटी गार्डों को तनख्वाह देने में असमर्थ

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डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में दुबारा हंगामा होने के आसार दिख रहे हैं | जैसा कि पाठक गण जानते हैं कि कुछ महीनों पहले डाकयार्ड कॉलोनी के सिक्यूरिटी गार्डों ने समय पर वेतन न मिलने तथा अन्य कारणों से हड़ताल कर दिया था | उसके बाद काफी हंगामा बरपा | जाँच भी बैठी | हमारे कांजुर मार्ग डाकयार्ड कॉलोनी के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी खुद आकर सिक्यूरिटी गार्डों से बात कर के गए | कोई कमांडर भी जाँच के लिए आये थे | उन्होंने भी सिक्यूरिटी गार्डों से पूछताछ की और काफी कुछ लिख कर लेकर गए | इन सबसे लगा चलो बेचारे सिक्यूरिटी गार्डों के अब अच्छे दिन आ जायेंगे | लेकिन अब पता चला कि हमने इन सफ़ेदपोश डाकुओं से कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगा रखी थी |

बेचारे सिक्यूरिटी गार्डों की तनख्वाह उन्हें १० तारीख को मिलनी थी | वो तो समय पर नहीं मिला | मिलेगा भी कैसे ? जिस सिक्यूरिटी एजेंसी डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, उसकी इतनी आर्थिक क्षमता ही नहीं है कि वो ४०-५० सिक्यूरिटी गार्डों को तनख्वाह दे पाए | बेचारे को कमांडर मुजावर और बिरेन्द्र ने जबरदस्ती यहाँ का काम दे दिया है | एक समय वो दोनों का ख़ास दोस्त था | अब वो दोनों की परछाई से भी दूर भागता है | उसे झूठा भरोसा दिलाया गया कि उसका बिल जल्दी से पास करा देंगे और उस पैसे से वो सिक्यूरिटी गार्डों को तनख्वाह दे देगा | पर बिल ऐसे कैसे पास हो जाएगा ? बिल में तो कितने घोटाले हैं | वो भी तब जब पूरा मामला काले जी की जानकारी में है |

डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड से पहले जिस आलसिक्योर प्रोटेक्सन सर्विस को कॉन्ट्रैक्ट मिला था, उसका साथ महीने का ३४ लाख का बिल बाकी है | उस बिल में दस घोटाले हैं | न किसी सिक्यूरिटी गार्ड का प्रोविडेंट फण्ड नंबर न इन्सुरेंस नंबर | बिल ५१ सिक्यूरिटी गार्डों का बना कर भेजा गया है पर कॉलोनी में कभी भी ४१-४२ से ज्यादा सिक्यूरिटी गार्डों ने काम नहीं किया | कम से कम १० सिक्यूरिटी गार्डों का नकली बिल जमा कराया गया है | उनमें से कुछ सिक्यूरिटी गार्ड तो ऐसे हैं कि उन्होंने सालों से कॉलोनी में काम नहीं किया पर बिल में उनका नाम है | वो आलसिक्योर प्रोटेक्सन सर्विस और डाकयार्ड प्रशासन से इतने नाराज हैं कि उनके खिलाफ कहीं भी शिकायत करने को तैयार बैठे हैं |

डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड वाले ने कहीं से इंतजाम कर सारे सिक्यूरिटी गार्डों को आठ दिन देरी से ४००० रुपये दिए हैं | बाकी पैसा एक सप्ताह में देगा, ऐसा बोला है | अब पता नहीं कैसे इंतजाम कर के देगा | उसका बिल पास होना तो मुश्किल है | उसके बिल में भी काफी घोटाले हैं | वो कभी बाद में बताउँगा |

आलसिक्योर का बिल पुराना है | जब तक उसका बिल पास नहीं होता, डायनामिक्स का कैसे पास होगा ? हो गया तो भी इस बार मेरे पास इतने ठोस सबूत और गवाह हैं कि मैं इस मामले को विजिलेंस में जरूर दूँगा और फिर कोर्ट में भी खीचूँगा | डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड, आलसिक्योर प्रोटेक्सन सर्विस और जिन सिक्यूरिटी ऑफिसर का बिल पर हस्ताक्षर है, सबको तकलीफ होनी ही है | आज नहीं तो कल | तोरस्कर जी आप को कमांडर मुजावर बचाने नहीं आएगा | क्यों गलत बिल पर हस्ताक्षर किया आपने ?

घाटकोपर के रिश्वतखोर पुलिस कांस्टेबल ताजने ने आरोपी को पुलिस स्टेशन से भगाया

ghatkopar-police-stationआज पढ़िए मुंबई पुलिस के भ्रष्ट कर्मचारियों का एक नया कारनामा | जैसा कि पाठक गण जानते हैं कि रिश्वतखोरी में मुंबई पुलिस पहले ही सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है | पहले वो बेईमानी का काम परदे के पीछे से किया करते थे | आजकल उनकी इतनी हिम्मत बढ़ गयी है कि खुले आम रिश्वत खोरी करने लगे हैं | आपको सात जून को घटी ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ |

विद्याविहार के स्टेशन रोड के आस-पास एक रिक्शा चालाक ने अपनी लापरवाही से बाइक सवार को ठोकर मार दिया और फिर बिना रुके अपनी रिक्शा घुमाई और ट्राफिक की विपरीत दिशा में रिक्शा चलाकर भागने लगा | वो लगभग १०० मीटर ही भागा होगा कि आस पास के लोगों ने उसे दौड़कर पकड़ लिया | कांस्टेबल ताजने भी वहीँ आसपास थे | वो तुरंत मौके पर पहुँचे और उन्होंने रिक्शाचालक को पकड़ लिया | दुर्घटना में बाइक सवार कृष्णा पुजारी को चोट लगी और बाइक को भी काफी नुकसान पहुँचा |

कांस्टेबल ताज़ने ने बाइक सवार को पुलिस स्टेशन आने को कहा और खुद उस रिक्शाचालक के रिक्शा में बैठकर पुलिस स्टेशन की तरफ निकले | बाइक सवार ने ताजने जी से कहा कि रिक्शाचालक एक बार भागने की कोशिश कर चूका है | दोबारा कर सकता है | तो वो बोले “मैं कोई हिजड़ा हूँ क्या जो ये मुझ से छूटकर भाग जाएगा ?”

उसके बाद बाइक चालक, कांस्टेबल ताज़ने और रिक्शाचालक तीनों पुलिस स्टेशन पहुँचे | पुलिस स्टेशन के बाहर कांस्टेबल ताज़ने ने रिक्शाचालक से कुछ बातचीत की और वो वहीँ से चला गया | उसे पुलिस स्टेशन के अंदर कदम तक रखने की जरुरत नहीं पड़ी | इसके विपरीत बाइक सवार को घंटों पुलिस स्टेशन में बिठाए रखा | सब इंस्पेक्टर पारधी ने बाइक सवार को कहा कि वो FIR कराने के झंझट में न गिरे | इससे उसकी बाइक महीनों तक पुलिस के कब्जे में रहेगी | उसे बार-बार पुलिस स्टेशन आना पड़ेगा, कोर्ट जाना पड़ेगा | वो बाइक सवार को लगातार FIR न करने का सुझाव देते रहे |

लेकिन फिर भी बाइक सवार FIR कराने पर अड़ा रहा | तो उसे मेडिकल के लिए भेजा गया | मेडिकल कराकर आने के बाद सब इंस्पेक्टर पारधी ने यह कहकर FIR करने से मना कर दिया कि सीनियर इंस्पेक्टर ने FIR लेने से मना किया है | इससे नाराज होकर बाइक सवार ने पारधी जी से पूछा कि “आरोपी को तो आप लोगों ने छोड़ दिया है, कार्रवाई कैसे करेंगे ?” तो वो बोले कि “उसका रिक्शा यहीं है | कभी तो लेने आएगा | तब उसे दुबारा पकड़ लेंगे |”

यह सब होते-होते बारह से चार बज गए | आरोपी पुलिस स्टेशन से गायब और पीड़ित व्यक्ति परेशान होता रहा | इस तरह से हमारी घाटकोपर पुलिस काम करती है | कांस्टेबल ताजने ने कहा था वो हिजड़ा नहीं है | अब उनका बिना मेडिकल कराये इस बात की पुष्टि तो नहीं हो सकती | पर वो एक नंबर के रिश्वतखोर हैं इसमें कोई शक नहीं है | दिन दहाड़े आरोपी को पुलिस स्टेशन से भगाकर माल कमा रहे हैं | उनके साथ-साथ सब इंस्पेक्टर पारधी को भी सरकारी तनख्वाह कम पड़ रही है | बेचारे रिश्वत के पैसे से घर चला रहे हैं | भगवान ही बचाए घाटकोपर की जनता को ऐसे भ्रष्ट पुलिसवालों से |

सुर्यानगर, विक्रोली में सब-इंस्पेक्टर अनिल केकन की गुंडागर्दी, ट्रांसपोर्टर को बिना वजह पीटा

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वर्दी वाला गुंडा : सब इंस्पेक्टर अनिल केकन

वैसे तो पुलिसवालों की गुंडागर्दी कोई नई बात नहीं है | यह आप लोग भी जानते हैं और मैं भी | आये दिन न्यूज़ चैनलों और अखबारों में इनके काले कारनामें पढने को मिलते रहते हैं | मेरा आज का यह लेख एक ऐसे ही खाकी वर्दी वाले को समर्पित है | नाम है अनिल केकन |

पहले आप लोगों को अनिल केकन जी का परिचय दे दूँ | यह पार्क साईट पुलिस स्टेशन में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं | पुलिस की नौकरी में मुश्किल से पांच-सात वर्ष हुए होंगे, पर हैं बड़े होशियार | कम समय में ही वर्दी का इस्तेमाल कर कमाई करने के कई तरीकों का पता लगा लिया है | तीन-चार छुटभैय्ये राजनेता और ब्लैकमेलर केकन जी के एजेंट हैं | इनके ड्यूटी पर आते ही उनकी भी ड्यूटी शुरू हो जाती है | कोई भी मामला हो, वो किसी और पुलिसवाले के पास न जाकर सीधे अनिल केकन जी के पास ही आना चाहिए, यह उन एजेंटों की जिम्मेदारी है | केकन जी अपनी वर्दी और डंडे की ताकत का इस्तेमाल कर उस मामले को निपटाते हैं और लोगों से पैसा वसूलते हैं | उस कमाई का सत्तर प्रतिशत वो अपने पास रखते हैं और तीस प्रतिशत अपने उस एजेंट को देते हैं जो मामला लेकर आया था | इस तरह उनकी कमाई की दूकान बढ़िया चल रही है |

अब आप पूछोगे इसमें नया क्या है ? लगभग हर पुलिसवाला यह काम करता है | पार्क साईट पुलिस तो ऐसे कामों के लिए पहले से बदनाम है | इंस्पेक्टर पूरी, इंस्पेक्टर चौघुले, इंस्पेक्टर सकपाल, इंस्पेक्टर कुलकर्णी सब यही काम करके खूब माल कमाया | केकन जी ने ऐसा नया क्या कर दिया ? तो आपको बता दूँ हमारे अनिल केकन जी बाकी वर्दी वालों से भी दो कदम आगे हैं | बाकी पुलिस वाले जिनको मारते-पीटते हैं या जिनसे वसूली करते हैं, उन बेचारों को यह तो पता रहता है कि मार क्यों पड़ रही है या पैसा क्यों देना पड़ रहा है | केकन जी के मामले में तो वो भी नहीं | वो जब मन आया, लोगों को पुलिस स्टेशन बुलाकर पीट देते हैं | पूछने पर यह भी नहीं बताते कि मामला क्या है | यह अनिल केकन जी का स्टाइल है |

हाल ही की एक घटना ले लीजिये | विक्रोली सुर्यानगर के एक रहीवासी हैं पुरुषोत्तम सिंह | उनका ट्रांसपोर्टेशन का काम है | दिनांक १८ मई को रात ११.१५ बजे के आस-पास एक हवलदार उनके घर आया और बोला कि उसे केकन साहब ने पुलिस स्टेशन बुलाया है | पुरुषोत्तम जी ने कारण पूछा तो उस हवलदार ने कुछ बताया नहीं | इससे पुरुषोत्तम जी के मन में थोडा डर जागा | अब पुलिस स्टेशन जाने से कौन नहीं डरेगा ! सबको पता है कि वो खाकी वर्दी पहन कर क़ानून की आड़ में जनता को लूटने वालों का अड्डा है | फिर भी जैसे-तैसे हिम्मत करके पुरुषोत्तम जी रात को ११.४५ के आसपास पुलिस स्टेशन गये |

जैसे ही उन्होंने पुलिस स्टेशन के अंदर कदम रखा, हमारे अनिल केकन जी ने बिना कोई बात किये एक के बाद एक तीन झापड़ जड़ दिए | उनकी मार खाकर बेचारे पुरुषोत्तम जी को तो चक्कर आ गया | पाँच-दस मिनट तक तो उन्हें समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या ? तबियत संभली तो केकन जी से पूछा की उन्होंने क्यों मारा ? तो केकन जी उन्हें पुलिस स्टेशन के अंदर वाले भाग में ले गए और फिर से पिटाई की | साथ में खूब गालियाँ भी दी | बेचारे पुरुषोत्तम जी पूछते रह गए पर केकन जी सिर्फ गालियों, लातों और झापड़ों से जवाब दे रहे थे | रात को लगभग १.१५ तक पीटने के बाद उन्होंने पुरुषोत्तम जी को घर जाने दिया |

पुरुषोत्तम जी तब से रोज पार्क साईट पुलिस स्टेशन का चक्कर लगाते हैं, बस यह जानने की सब इंस्पेक्टर केकन ने उन्हें मारा क्यों ! पर उन्हें अब तक इस बात का जवाब नहीं मिला | केकन जी के हाथ में वर्दी और डंडा है, इसलिए उनके मन में किसी का डर नहीं हैं | वो सोच रहे हैं कि कोई उनका क्या कर लेगा |

तो केकन जी, आजकल पावडर वाले नोट, मोबाइल कैमरा, स्टिंग ऑपरेशन, आर.टी.आई., मीडिया आदि का ज़माना है | इन वजहों से कई वर्दी वाले आसमान से जमीन पर आ चुके हैं | ज्यादा जानकारी चाहिए तो रिटायर हो चुके इंस्पेक्टर पुरी से पूछ लीजिये | किसी दिन आपका नंबर न लग जाए | अगर पुरुषोत्तम जी ने कुछ गलती की भी थी, तो आपको मारने का हक़ किसने दिया ? वो तो धंधा करते हैं | पार्क साईट नहीं तो कहीं और जाकर करेंगे |  आपकी नौकरी गई तो आपका क्या होगा ? चौकीदार से ज्यादा और कुछ नहीं बन पाओगे | कामचोरी और मुफ्त की कमाई खाने की आदत के कारण किसी और काम के लायक तो बचे नहीं हो | इसलिए वक्त रहते संभल जाओ |

डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के सिक्यूरिटी ऑफिसर चीमन लांबा ने किया ३००० रुपये का भ्रष्टाचार

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काफी दिनों से पाठकों के लिए मैनें कुछ मजेदार लिखा नहीं | उस कसर को पूरी करने के लिए इस बार बढ़िया जानकारी लेकर आया हूँ | आप सब हमारे कॉलोनी के सिक्यूरिटी ऑफिसर चीमन लांबाजी को तो जानते ही होंगे |

अब आप पूछेंगे कि लांबा जैसा आलसी, निकम्मा और चरित्रहीन व्यक्ति दुबारा सिक्यूरिटी ऑफिसर कैसे बन गया ? तो इस बात को याद रखे वो एक्स नेवी है | सफ़ेद वर्दी वाला होने से उसके सारे पाप माफ़ हैं | वैसे तो तोरस्कर को सिक्यूरिटी ऑफिसर बनाकर भेजा गया है पर अभी तक उनको चार्ज नहीं मिला है | लांबा से चार्ज माँगने की बेचारे में हिम्मत भी नहीं | अपने एक्स नेवी होने की धौंस दिखाकर लांबा जी सिर्फ मोर्निंग शिफ्ट करते हैं और सिक्यूरिटी ऑफिसर बनकर बैठे रहते हैं | एक बार उनकी शिफ्ट ख़त्म हुई, उसके बाद कॉलोनी में आग भी लग जाए, वो फ़ोन नहीं उठाते |

अब लांबा जी का नया कारनामा सुनिए | कुछ महीनों पहले उन्होंने सुरक्षा कार्यालय में रंग लगवाया था | लांबा जी ने एक ठेकेदार पर दबाव बनाकर उससे मुफ्त में काम करवा लिया | उस ठेकेदार का नाम तो मैंने पता नहीं लगाया पर आर उसका कोई सुपरवाइजर है – काशीनाथ नाम का | १-२ दिन में ठेकेदार का नाम भी पता लगा लूँगा |

अब सुरक्षा कार्यालय में रंग तो लगा, वो भी बिना पैसे का, साथ ही उसका बिल भी बन गया | चीमन लांबा जी ने कांजुर मार्ग के ही किसी दूकान से ३००० रुपये का नकली बिल बनाकर कमांडर मुजावर के कार्यालय से पैसे भी पास करा लिए | तो इस तरह चिंदिचोरी में मुजावर को टक्कर देते हुए चीमन लांबा ने अपने लिए चाय-पानी का इंतजाम कर लिया | वैसे भी जब से कॉलोनी का महाठग गोपाल गया है, तब से लांबा जी के लिए कमाई मुश्किल हो गई थी |

मैं इसके लिए लांबा जी को दोष भी नहीं दूँगा | वो देख रहे हैं कि किस तरह हमारी कॉलोनी के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी डंके की चोट पर कॉलोनी की इतनी बड़ी जमीन अपने मित्र किरण मोरे को तोहफे में दे रहे हैं | कमांडर मुजावर तो डकैत बन चुके हैं, फिर भी उनका कुछ नहीं होता | तो ३००० रुपये की चोरी से लांबा जी का क्या होगा | ऐश कीजिये लांबा जी – ऐश | आखिर पेशे से आप भी तो सफ़ेद डाकू ही थे |

नौसेना के भ्रष्ट कमांडर रामचंद्र की डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग को नए तरीके से लूटने की तैयारी

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वैसे तो हमारी नौसेना में भ्रष्टाचारियों की कोई कमी नहीं है | सब एक से बढ़ कर एक भरे हुए हैं | किसी ने भ्रष्टाचार में ग्रेजुएशन किया है तो किसी ने पीएच.डी. | अब हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी को ही लीजिये | डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग की जगह अपने मित्र किरण मोरे को स्पोर्ट्स अकादमी के नाम पर तोहफे में दे रहे हैं | उसके लिए उन्हें कितना अपमान सहना पड़ा ! पर काले जी इतनी मोटी चमड़ी के हो गए हैं कि इतने अपमान के बावजूद भी अपने निर्णय पर अड़े हुए हैं |

उन्ही की तरह के, पर पद में उनसे काफी छोटे एक और नौसेना के अधिकारी हैं, कमांडर रामचंद्र | ये कमोडोर विवेक अग्रवाल के मातहत, वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं | कमांडर रामचंद्र दूसरों पर जातिविषयक टिप्पणी करने के लिए कुख्यात हैं | भ्रष्टाचार में इतने डूबे हुए हैं कि इन्हें डाकू कहना डाकुओं का भी अपमान करना है | कॉलोनी में टयूसन और कोचिंग क्लास के लिए जगह देते समय बड़ी धाँधली कर रहे थे और रंगे हाथों पकडे गए (अगले लेख में इस विषय में विस्तार से लिखूँगा ) | उस समय काफी अपमानित भी हुए थे किंतु जहाँ पैसा दिखता हो वहाँ कमांडर साहब को मान-अपमान की कोई परवाह नहीं | उस समय मलाई न खा पाने की कसर कमांडर साहब ने दूसरी तरह से पूरी की |

जैसा कि आप सब जानते हैं कि हमारी कॉलोनी में टयूसन और कोचिंग क्लास के लिए नौसेना ने दो कमरे दिए हैं | उसमें से एक कमरा दिया गया है अंतर्यामी जी को और दूसरा गुरु क्लासेज को | आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ने पहले ६ कमरे बनाने का निर्णय लिया था | तीन कमरे अंतर्यामी जी को और तीन कमरे आस्था ट्युटोरियल्स को | पर आस्था ट्युटोरियल्स ने नौसेना जैसी भ्रष्ट संस्था से संबंध न रखने का निश्चय किया | साथ ही नौसेना की इज्जत तार-तार करते हुए उनके भ्रष्टाचार की सच्चाई उजागर कर दी तो काले जी ने बहुत अपमानित महसूस किया और अपनी योजना बदल दी | अब काले जी ने छः के बदले सिर्फ दो कमरे बनवाये | एक कमरा अंतर्यामी जी को दिया गया और दूसरे कमरे के लिए कोचिंग क्लास खोजने का काम कमांडर रामचंद्र को दिया गया |

वैसे कोचिंग क्लास के आवेदकों में तीन और नाम थे | दूसरा कमरा उन में से किसी एक को दिया जा सकता था | पर उनमें से कोई भी कमांडर रामचंद्र जी का परिचित न था | इसलिए उन्होंने गुरु जी क्लास से संपर्क किया | उन्हें कॉलोनी में सस्ते दाम पर जगह दिलाने और अन्य तरह से सहयोग का वादा किया | बदले में विद्यार्थियों से मिले कुल फीस में अपना १५% कमीशन निश्चित किया | गुरु जी क्लास वाले भी राजी हो गए | राम ने मिलाई जोड़ी एक अँधा – एक कोढ़ी | फिर क्या था, बातों-बातों में दूसरा कमरा गुरु जी क्लास को दे दिया गया |

गुरु जी क्लास वाला भी रंगा सियार निकला | उसने देखा कि मजदूरों की कॉलोनी है, IIT का नाम सुनते ही सब चमत्कृत हो जाते हैं | इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए उन्होंने झूठे विज्ञापनों की झड़ी लगा दी | कॉलोनी में दर्जनों जगह बैनर लग गए कि कॉलोनी में गुरु जी क्लास खुल रहा है, जिसमें सिखाने वाले शिक्षक IITians होंगे | पाँचवी से बारहवी तक CBSE की पढाई, ओलिंपियाड की तैयारी, IIT के लिए मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास (पर्सनालिटी डेवलपमेंट), यह सब उस एक कमरे में छः – सात घंटे में होने जा रहा है | अब आठ-आठ कक्षाएँ उस एक कमरे में ६-७ घंटों के भीतर कैसे चलेंगी, यह तो भगवान को ही पता है | और तो और इसके लिए अभिभावकों को दूसरे कोचिंग क्लास की तुलना में दुगुनी या ढाई गुना फीस देनी होगी |

मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जितने भी शिक्षक गुरु जी क्लास में हैं, उनमें से एक भी IITian नहीं है | क्लास का मालिक या क्लास संभालने वालों में कोई एक IITian  हो सकता है पर सिखाने वालों में एक भी नहीं होगा | सारे शिक्षक औसत दर्जे के होंगे | अच्छा शिक्षक खुद का कोचिंग क्लास चलाएगा या तो फिर बड़े कोचिंग क्लास में पढ़ाएगा और खूब पैसा बनाएगा | वो इस टुच्चे से गुरू जी क्लास में क्यों पढ़ाएगा ? IIT तो छोडिये, गुरु जी क्लास के शिक्षकों में से किसी एक ने भी अपनी जिंदगी में कभी किसी ओलिंपियाड की परीक्षा पास की है क्या ? जो बच्चों को ओलिंपियाड का सिखाएँगे ? झूठ का जाल बुनकर कॉलोनी वासियों से पैसा ऐंठा जा रहा है | इस पैसे की रबड़ी बँटेगी तीन लोगों के बीच – कमांडर रामचंद्र, कमांडर मुजावर और गुरु जी क्लास | डाकुओं से कम नहीं हैं ये लोग |

वैसे तो कमांडर रामचंद्र जैसे जातिवादी और कमांडर मुजावर जैसे धर्मांध व्यक्ति की नौसेना में तो क्या हमारे समाज में भी कोई जगह नहीं होनी चाहिए | पर करे क्या ! समाज में जहर घोलनेवाले और समाज को लूटनेवाले ये लोग अच्छे-अच्छे पदों पर बैठे हैं | आप और हम इतने डरपोक बने बैठे हैं कि इनके खिलाफ आवाज भी नहीं उठाते | हम यदि हिम्मत कर ऐसे लोगों के विरुद्ध खड़े हो जाएँ ये लोग मुँह दिखाने लायक नहीं बचेंगे |