मुंबई के पार्कसाइट विक्रोली में नितिन देशमुख गिरोह का आतंक, महिला को दिन दहाड़े लूटा

Nitin Deshmukh (left) Tadipar Criminal Jigar Murkar (right)
Nitin Deshmukh (left) Tadipar Criminal Jigar Murkar (right)

मुंबई का पार्क साइट विक्रोली क्षेत्र कोरोना और लॉकडाउन के समय में अपराधियों के लिए स्वर्ग बन गया है | आए दिन मारपीट, लूटपाट और चोरी की घटनाएँ सामने आ रही हैं | कोरोना के कारण सुनसान पड़ी सड़कों और गलियों के कारण अपराधियों का काम आसान हो गया है | पार्कसाइट पुलिस इन अपराधियों को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है | कई मामलों में तो पुलिस अपराधियों को बचाने का काम भी कर रही है |

ऐसा ही एक घटना अभी सप्ताह भर पहले हुई है | 28 जून को शाम 5 बजे के दौरान जिगर मुरकर, गणेश निवाते, ऋषिकेश बागुल व मनोज त्रिभुवन नामक चार अपराधियों ने दिन दहाड़े एक महिला को लूट लिया था | महिला ने गले में सोने की चेन पहनी थी, उसी पर इन अपराधियों की नजर थी | महिला ने जब विरोध किया तो छीना झपटी में चारों अपराधियों ने महिला को काफी मारा-पीटा | महिला की आवाज सुनकर उसकी सहायता करने गए राजेश केवट नामक एक व्यक्ति को भी खूब पिटाई कर दी |

पीड़ित महिला अपने साथ हुई घटना की शिकायत दर्ज कराने पार्क साइट पुलिस स्टेशन पहुँची | पुलिस ने जैसे ही चारों अपराधियों जिगर मुरकर, गणेश निवाते, ऋषिकेश बागुल व मनोज त्रिभुवन का नाम सुना, वैसे ही पुलिस के हाथ पाँव ठंडे पड़ गए | उन्होने घटना की शिकायत दर्ज करने से साफ इन्कार कर दिया | पुलिस जानती थी कि यह चारों नितिन देशमुख गिरोह के सदस्य है | इन चारों पर पहले से पार्क साइट पुलिस स्टेशन में कई मामले दर्ज है | जिगर मुरकर को तो लंबे समय के लिए मुंबई से तड़ीपार भी किया गया था | इन चारों को अब नितिन देशमुख का आशीर्वाद भी प्राप्त है | नितिन देशमुख मुंबई राष्ट्रवादी युवक काँग्रेस के कार्याध्यक्ष है और मंत्री जितेंद्र आवहाड़ के काफी करीबी हैं | मंत्रीजी सोशल मीडिया पर नितिन देशमुख को अपना भाई भी बता चुके हैं |

नितिन देशमुख अपने गिरोह के सदस्यों को बचाने के लिए समय-समय पर पार्क साइट पुलिस को फोन कर उन पर दबाव बनाते रहते हैं | इसलिए पार्क साइट पुलिस को पहले से पता था कि चारों अपराधी नितिन देशमुख गिरोह के हैं | उन्होने मामला दर्ज करने से साफ इंकार कर दिया | लेकिन नितिन देशमुख गिरोह के दुर्भाग्य से पीड़ित महिला आरपीआई पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता निकली | उसने स्थानीय समाजसेवकों के साथ मिलकर पुलिस पर इतना दबाव बनाया कि घटना के दूसरे दिन 29 जून को पुलिस को तड़ीपार जिगर मुरकर और उसके साथियों के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज करनी पड़ी |

एक महिला के साथ हुई मारपीट और लूटपाट के मामले मे एफ़आईआर दर्ज करने में पार्कसाइट पुलिस को 24 घंटे से अधिक समय क्यों लगा, इस बात का पुलिस कोई जवाब नहीं दे रही है | सोचिए वो महिला यदि आरपीआई पार्टी की कार्यकर्ता न होकर, कोई आम महिला होती तो ? न एफ़आईआर हो पाता और न कभी न्याय मिल पाता |

इस लेख में इतना ही | अगले लेख में मैं आपको बताऊंगा कि अपने गिरोह के सदस्यों के विरुद्ध हुए एफ़आईआर से बौखलाए नितिन देशमुख ने किस तरह पुलिस के साथ मिलकर पीड़ित महिला को प्रताड़ित करना शुरू किया है |

पी एम सी बैंक डूबने के बाद कितना सुरक्षित है आपका पैसा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में !

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आपके और मेरे जैसे लाखों मध्यमवर्गियों के लिए अभी कुछ दिनों पहले एक बड़ी बुरी खबर आयी है | देश की सबसे सफल को ऑपरेटिव बैंकों में से एक पीएमसी बैंक लगभग डूबने के कगार पर है | लाखों लोगों की जिंदगी भर की कमाई इस बैंक में थी जो वापस मिलना लगभग नामुमकिन सा हो गया है | हर दिन पीएमसी बैंक से जुडी कोई न कोई नयी जानकारी सामने आ रही है और यह लगभग निश्चित हो गया है कि बैंक अब दिवालिया हो जायेगी | अब ऐसे में गरीबों के पैसे का क्या होगा यह भगवान को ही मालूम है | सरकार बैंक की जिम्मेदारी वापस लेते हुए लोगों को उनके पैसे की गारंटी देगी या नहीं, पता नहीं |

मुंबई में ऐसा हाल हो गया है कि लोग ऑपरेटिव बैंक में पैसा रखने से डरने लगे हैं | जिन ऑपरेटिव बैंकों के बारे में अब तक कोई गलत खबर नहीं है, लोग वहाँ से भी पैसा निकाल रहे हैं | कई ऑपरेटिव बैंकों के पास पैसे की इतनी कमी हो गई है कि वो अगले दस दिन तक पैसा नहीं दे सकते | इसका मतलब यह कि यदि कल को इन ऑपरेटिव बैंक के किसी खाताधारक को इमरजेंसी में पैसे की जरुरत पड़ गयी तो भी उसे पैसा नहीं मिलेगा | लोगों को ऑपरेटिव बैंक के नाम से डर लगने लगा है |

पीएमसी बैंक के बारे में सोचते-सोचते मेरे ध्यान में नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक आया | यह भी पीएमसी की तरह कोऑपरेटिव बैंक है | आपको तो पता है कि इस बैंक के मैनेजमेंट पर लंबे समय से नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों (NEU) का कब्जा है | पी.बी. पाणिग्राही पूरे बैंक पर कुंडली मार कर बैठे हुए हैं | समय-समय पर अपने फायदे और यूनियन के फायदे के लिए बैंक का गलत तरीके से उपयोग करने का आरोप इन पर लगता रहा है | नोटबंदी के समय जिस तरह खुलेआम नौसेना अधिकारियों के काले धन को सफ़ेद करने की कोशिश की गई थी वो सबको याद होगा | बैंक के पदाधिकारी भले कितनी भी सफाई दे, लेकिन आपको और हमको तो पता ही है कि इसी काले धन के मामले की वजह से उस समय नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट रहे संजीव काले का करियर बरबाद हो गया |

नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक के पदाधिकारी जब नौसेना को इस बात का भरोसा नहीं दिला पाए कि नोटबंदी के समय के आरोप झूठे थे, तो हम कैसे मान लें ? यदि आरोप सही नहीं थे तो संजीव काले की दुर्गति क्यों हुई ? ज़रा से कमीशन के लिए, नेवल मैनेजमेंट को खुश करने के लिए पूरे बैंक को रिस्क पर डाल दिया गया था | सोचिये उस समय यदि RBI जाँच के लिए बैंक सील कर देती तो ? या प्रवर्तन निदेशालय की रेड पड़ जाती तो ? पैसा तो आपका और हमारा अटकता | भले कुछ दिन के लिये ही सही, पर अटक तो जाता |

नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक और संजीव काले का संबंध डाकयार्ड कर्मचारियों से छुपा नहीं है | कुछ वर्ष पहले यूनियन का एक पदाधिकारी अपने रिटायरमेंट के कार्यक्रम में संजीव काले के पैर छूकर धन्यवाद देता है कि आपकी मेहरबानी से मेरा बेटा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में नौकरी पर लग गया | अब बताइये संजीव काले को धन्यवाद देने का क्या मतलब है ? नियम के हिसाब से तो बैंक में नौकरी लगवाने में काले का कोई संबंध नहीं होना चाहिए | लेकिन संजीव काले नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारी पी.बी. पाणिग्राही की सहायता से वहाँ लोगों को गैरकानूनी रूप से नौकरी पर भी लगवाते और अपना काला धन सफ़ेद भी करवाते थे |

ऐसे में मुझे तो नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक के मैनेजमेंट पर बिलकुल भरोसा नहीं रहा | कुछ दिनों पहले तक सबको लगता था कि पी एम सी बैंक से बढ़िया बैंक कोई नहीं | रोज बारह घंटे, साल के ३६५ दिन काम करनेवाला इकलौता बैंक | अब पता चला कि मैनेजमेंट अंदर ही अंदर सब सत्यानाश कर चुकी है | नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक का मैनेजमेंट भी सज्जन लोगों के हाथ में नहीं है | पता नहीं अंदर क्या चल रहा हो ? २-३ दिन में अपने परिवार मित्रों से चर्चा कर, सारे अकाउंट बंद करके अपना-अपना पैसा हम लोग बाहर निकाल रहे हैं | आप लोग अपना-अपना सोच लें |

साइकिल चोर तथा दूध चोर बनने के बाद अब सीडी प्लेयर चोर बने नौसेना के कमांडर आय एस कुमार

दूधचोर, साइकिल चोर, सीडी प्लेयर चोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा
दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा

यदि आप नियमित रूप से ईभारत पढ़ते होंगे तो आपको नौसेना के कमांडर आय एस कुमार के बारे में पता ही होगा | यदि न पता हो तो यह दोनों लेख पढ़ लें :

  1. नौसेना का कमांडर आय एस कुमार निकला साइकिल चोर
  2. नौसेना के कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा बने दूध चोर, दिन के एक लीटर दूध के लिए अपना ईमान बेचा

अब कुमार साहब ने एक नया कारनामा किया है | वैसे नया कारनामा कहना गलत होगा | चोरी तो उनकी आदत है | डिपार्टमेंट में जितनी डायरी या नोटबुक आती है, सब उठा के घर ले जाते हैं | डिपार्टमेंट में टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ३ प्रतियाँ आती है | कुमार जी तीनों कॉपी उठा कर घर ले जाते हैं | नट बोल्ट हो या साबुन या कोई लोहे का टुकड़ा | उनसे कुछ नहीं बच सकता | उनकी इन हरकतों की वजह से जिस भी डिपार्टमेंट में वो जाते हैं, वहाँ हंगामा होता रहता है | उस डिपार्टमेंट के लोग उनके जाने के बाद भी उन्हें सालों तक याद रखते हैं |

आय एस कुमार अभी दो-तीन दिन पहले कहीं से किसी का सीडी प्लेयर उठा ले आये हैं | उसे कागज़ से पूरा कवर कर अपने कार्यालय में ही रख दिया | उनके कार्यालय के सारे कर्मचारी चिंतित ! अब क्या नया हंगामा होगा | उनमें से कुछ ने तो डिपार्टमेंट के इंचार्ज कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण से शिकायत करने की भी सोची है | लेकिन उसका कोई फायदा नहीं होने वाला | कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण खुद अतिभ्रष्ट है | नौसेना द्वारा आयोजित मेराथन में उन्होंने खूब माल बटोरा है | अब नए मेराथन की तैयारी हो रही है | कमोडोर साहब और माल बटोरेंगे | तो उनसे कुछ उम्मीद रखना बेमानी होगी |

मेरी राय में इनकोडिंग डिपार्टमेंट के कर्मचारियों एक पत्र नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट को लिखना चाहिए | उसकी एक प्रति रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को भेजनी चाहिए | उस पत्र में कमांडर आय एस कुमार के सारे कारनामे लिखे | हर एक चुराई हुई चीज के बारे में बताएँ | यदि मन में डर हो तो बिना नाम के ही भेजें लेकिन भेजें जरुर | नहीं तो पूरे इनकोडिंग डिपार्टमेंट पर चोर होने का ठप्पा लग जाएगा |

इसके अलावा पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि कमांडर आय एस कुमार के परम मित्र दूधचोर कमांडर ललित शर्मा आज कल अपने भ्रष्ट साथी सी टी ए वसंत जाधव का ट्रान्सफर रोकने में लगे हैं | वसंत जाधव का ट्रान्सफर कोचीन आया है | जाधव जी दूधचोर कमांडर ललित शर्मा और कमांडर आय एस कुमार के अभिन्न साथी है | सारे घोटाले, सारी काले कारनामे उन्होंने मिलकर साथ में किये हैं | इसलिए वो उन्हें मुंबई से कोचीन जाने नहीं देना चाहते |

देखते हैं शर्मा जी, कब तक अपने साथी को बचाएँगे | कुछ दिनों पहले जो चार्जमैन की वेकेंसी निकली थी, वसंत जाधव उसके रिक्रूटमेंट बोर्ड में मेम्बर थे | इन लोगों ने ५-५ लाख रिश्वत लेकर डाकयार्ड के कर्मचारियों को चार्जमैन बना दिया | मामले की जाँच सीबीआई कर रही है | आज नहीं तो कल सी टी ए वसंत जाधव को रिश्वतखोरी का नतीजा भुगतना पड़ेगा |

आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी मसाला किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

दवा की जगह जहर बाँटता डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई का नौसेना अस्पताल

रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा
रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा

पिछले तीस वर्षों में नौसेना के अधिकारियों का एक से बढ़कर एक घोटाला मैनें सुना और देखा है | एक से बढ़कर एक गिरी हुई हरकत | जब भी मैं सोचता हूँ कि ये लोग इतना नीचे गिर चुके हैं और इससे ज्यादा क्या गिरेंगे, तभी नौसेना के अधिकारी उससे भी बड़ी घटिया हरकत कर मुझे गलत साबित कर देते हैं | उसी का उदाहरण है यह लेख |

पाठकों में से कई लोगों को पता नहीं होगा तो उनकी जानकारी के लिए बता दूँ कि ५ फरवरी २०१९ को अन्न एवं औषध प्रशासन ( http://fda.maharashtra.gov.in/ ) ने कई दवा वितरकों पर छापे मारे और रक्षा विभाग के लिए बनाई गई लगभग साठ लाख की दवाई बरामद की | यह दवाई सेना, नौसेना और वायुसेना के अस्पतालों के लिए बनाई गई थी लेकिन दवा वितरक इस पर से CGHS का स्टाम्प मिटाकर निजी दवा दुकानों (Private Medical Stores) से बेच रहे थे | दर्जन भर FIR हुए और लगभग उतने लोग गिरफ्तार भी हुए | सभी बड़े-बड़े समाचारपत्रों में यह खबर छपी | इनमें से कुछ के लिंक दे रहा हूँ :

  1.      FDA raids traders ‘diverting’ drugs meant for defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/fda-raids-traders-diverting-drugs-meant-for-defence/articleshow/67860289.cms
  2.      E-pharma firm’s head, 12 others booked for diverting defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/e-pharma-firms-head-12-others-booked-for-diverting-defence-drugs/articleshow/68001821.cms
  3.      Two drug firms booked for ‘diverting consignments meant for defence personnel’ : https://indianexpress.com/article/cities/mumbai/two-drug-firms-booked-for-diverting-consignments-meant-for-defence-personnel-5581186/
  4.      ६० लाखांच्या औषधांची जप्ती :   https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/seizure-of-60-lakhs-%20drugs/articleshow/67889137.cms
  5.      नौदलाच्या औषधांची बाजारात विक्री : https://www.esakal.com/mumbai/sales-navy-medicines-market-169469
  6.      १३ जणांवर गुन्हा दाखल : https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/13-cases-filed-against-them/articleshow/67965649.cms

अब सवाल यह उठता है कि दवा वितरकों के पास सेना के लिए बनी इतनी दवाईयाँ आई कैसे ? इसका जवाब मैं आपको देता हूँ | दवा कंपनियाँ इन दवाइयों को बनाकर, CGHS का स्टाम्प लगाकर सेना, नौसेना तथा वायुसेना को देती है | नौसेना के अधिकारी निजी दवा वितरकों से मिलकर इसपर से CGHS का स्टाम्प मिटाते हैं | फिर उस दवा की अदला-बदली ऐसी दवाइयों से की जाती है जिनके प्रयोग की अवधी समाप्त होने को हो |

आप लोगों को पता ही होगा कि हर दवा पर उसके प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) लिखी होती है | कई बार दवाइयाँ नहीं बिकती और उनके प्रयोग की अंतिम तारीख नजदीक आ जाती है | Expiry Date के बाद वो दवा किसी काम की नहीं रहती | ऐसे में निजी दवा वितरकों को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है | ये दवा वितरक हमारी नौसेना के अधिकारियों को रिश्वत देकर इन दवाइयों को CGHS के लिए बनी दवाइयों से अदला बदली कर लेते हैं | नौसेना द्वारा उसे सिविलियन्स के लिए बने अस्पतालों में मरीजों को देने के लिए भेज दिया जाता है | आप में से जो लोग नियमित रूप से नौसेना के अस्पतालों से या CGHS से दवाईयाँ लेते हैं, उन्होंने नोट किया होगा कि उन दवाइयों की प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) नजदीक होती है |

अक्टूबर २०१८ में नौसेना ने डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई में बने नौसेना अस्पताल में इस घोटाले को पकड़ा | जाँच शुरू हुई, कई अधिकारियों के नाम आने लगे | यह भी माँग उठी कि इतने गंभीर मामले की जाँच पुलिस को दे दी जाए | लेकिन ऐसे में नौसेना के वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग निरिक्षण के बहाने से आये | उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नौसेना अधिकारियों को तुरंत जाँच बंद करने का आदेश दिया | साथ में अस्पताल प्रशासन को यह निर्देश भी दिया कि जल्दी से जल्दी, ज्यादा से ज्यादा दवाईयाँ मरीजों को देकर उन दवाइयों के स्टॉक को ख़त्म कर दिया जाये |

उसके बाद से जाँच बंद | डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग के नौसेना अस्पताल ने थोक के भाव से दवाइयाँ बाँटनी शुरू की | डॉक्टर मरीज को एक दवा के बदले चार दवा देने लगे भले मरीज को जरुरत हो या न हो | नवम्बर २०१८, दिसंबर २०१८ तथा जनवरी २०१९ यही चलता रहा | डाकयार्ड कॉलोनी के कई रहिवासियों ने, जो उस दौरान नौसेना अस्पताल गए थे, इस बात का अनुभव किया था | तीन महीने तक मरीजों की सेहत से खिलवाड़ होता रहा |

मैं डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के निवासियों से कहूँगा कि वो नौसेना के अस्पताल से कभी दवाई न ले | भले पैसा खर्चा हो, प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराये | नौसेना के अधिकारी पैसे के लिए कब हमें बेच दे, कब जहर पिला दे, इसका कोई अंदाजा नहीं |

( लेख पूरा नहीं है, अगले भाग का इंतज़ार करें | )

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भाजपा नेता संजय शर्मा ने कांजुरमार्ग, मुंबई की नौसेना कॉलोनी में बनाया अवैध कार्यालय

संजय शर्मा महारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ
संजय शर्मा महारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ

स्वयं को मुंबई, भाजपा का महामंत्री बतानेवाले बतानेवाले संजय शर्मा नामक व्यक्ति ने कांजुरमार्ग, डाकयार्ड कॉलोनी में उत्पात मचाया हुआ है | यह कॉलोनी भारतीय नौसेना के अधिकार क्षेत्र में आता है लेकिन नौसना के अधिकारियों ने इस मामले में आँखें मूँद ली है |

डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में जोग्गर्स पाक के सामने कई इमारतों का निर्माण कार्य चल रहा है | इन इमारतों के निर्माण की जिम्मेदारी जिस बिल्डर को दी गयी है, उसने निर्माण क्षेत्र में २ कंटेनर लाकर रख दिए हैं | उनमें से एक कंटेनर को बिल्डर ने संजय शर्मा के सुपुर्द कर रखा है | उस कंटेनर में संजय शर्मा ने अपना पार्टी कार्यालय बनाया हुआ है | वह रोज दो से तीन गाड़ियाँ लेकर डाकयार्ड कॉलोनी आता है | उसके साथ हमेशा ८-१० गुंडों की फ़ौज रहती है | पूरा दिन वहीं मीटिंग | दोपहर ११-१२ बजे से रात के ११-१२ बजे तक या तो संजय शर्मा उस कार्यालय में रहता है या डाकयार्ड कॉलोनी में घूमता रहता है |

यदि किसी भी बाहरी व्यक्ति को डाकयार्ड कॉलोनी के अंदर आना है तो उसे मेन गेट के रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ती है | कई बार उन व्यक्तियों के आय कार्ड ले लिए जाते हैं और कॉलोनी से बाहर निकलते समय ही वो आय कार्ड वापस किये जाते हैं | डाकयार्ड कॉलोनी के जो रहिवासी हैं उनके रिश्तेदारों पर भी यह नियम लागू होता है | लेकिन संजय शर्मा तथा उसके गुंडों पर यह नियम लागू नहीं होता | न रजिस्टर में कोई एंट्री, न आय कार्ड देना | अपनी मर्जी से आओ, अपनी मर्जी से जाओ, अपनी मर्जी से घूमो |

अब आपको संजय शर्मा को मिली इस रियायत का कारण बताना चाहूँगा | संजय शर्मा का डाकयार्ड कॉलोनी के पूर्व सिक्यूरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी / आमचोर अवस्थी / बीविचोर अवस्थी से काफी करीबी संबंध है | अवस्थी की सहायता से संजय शर्मा बिल्डर तथा नौसेना अधिकारियों के बीच दलाली का काम करता था | बिल्डर द्वारा जो भी रिश्वत नौसेना के अधिकारियों को देनी होती है वो संजय शर्मा तथा सुरेश अवस्थी के द्वारा होते हुए नौसेना अधिकारियों तक पहुँचती है | रिश्वत देने-दिलाने वाला व्यक्ति नौसेना अधिकारियों के लिए उनके जीजा-दामाद जितना सम्मानजनक होता है | इसलिए उन्होंने संजय शर्मा को पूरी आजादी दे रखी है |

स्थानीय भाजपा नेताओं से बात करने पर पता चला है कि संजय शर्मा भांडुप, मुंबई के स्थानीय छुटभैये नेता हैं | उनका कोई जनाधार नहीं है | कुछ वर्ष पहले एक बड़ा फाइनेंसियल फ्रॉड कर उत्तर प्रदेश भाग गए थे | सालों बाद वापस आये | उसी पैसे के दम पर कुछ गुंडों को पाल कर अपनी राजनीति जमाने की कोशिश कर रहे हैं | अवस्थी की सहायता से बिल्डर के लिए दलाली कर अच्छा पैसा बनाने में सफल हुए हैं | अवस्थी के जाने के बाद सिक्यूरिटी ऑफिस के किसी ओझा नामक व्यक्ति के सहयोग से इनका दलाली का काम अब भी जारी है |

पाँच दिन बाद १७ मार्च को संजय शर्मा होली महोत्सव के नाम से एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं जिसमें सारे स्थानीय नेताओं को आमंत्रण दिया गया है | उन स्थानीय नेताओं में से ज्यादातर को संजय शर्मा के वास्तविक चरित्र के बारे में मालूम हो भी सकता है और नहीं भी | हो सकता है ये लेख उनकी आँखें खोल दे |

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])