साइकिल चोर तथा दूध चोर बनने के बाद अब सीडी प्लेयर चोर बने नौसेना के कमांडर आय एस कुमार

दूधचोर, साइकिल चोर, सीडी प्लेयर चोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा
दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा

यदि आप नियमित रूप से ईभारत पढ़ते होंगे तो आपको नौसेना के कमांडर आय एस कुमार के बारे में पता ही होगा | यदि न पता हो तो यह दोनों लेख पढ़ लें :

  1. नौसेना का कमांडर आय एस कुमार निकला साइकिल चोर
  2. नौसेना के कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा बने दूध चोर, दिन के एक लीटर दूध के लिए अपना ईमान बेचा

अब कुमार साहब ने एक नया कारनामा किया है | वैसे नया कारनामा कहना गलत होगा | चोरी तो उनकी आदत है | डिपार्टमेंट में जितनी डायरी या नोटबुक आती है, सब उठा के घर ले जाते हैं | डिपार्टमेंट में टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ३ प्रतियाँ आती है | कुमार जी तीनों कॉपी उठा कर घर ले जाते हैं | नट बोल्ट हो या साबुन या कोई लोहे का टुकड़ा | उनसे कुछ नहीं बच सकता | उनकी इन हरकतों की वजह से जिस भी डिपार्टमेंट में वो जाते हैं, वहाँ हंगामा होता रहता है | उस डिपार्टमेंट के लोग उनके जाने के बाद भी उन्हें सालों तक याद रखते हैं |

आय एस कुमार अभी दो-तीन दिन पहले कहीं से किसी का सीडी प्लेयर उठा ले आये हैं | उसे कागज़ से पूरा कवर कर अपने कार्यालय में ही रख दिया | उनके कार्यालय के सारे कर्मचारी चिंतित ! अब क्या नया हंगामा होगा | उनमें से कुछ ने तो डिपार्टमेंट के इंचार्ज कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण से शिकायत करने की भी सोची है | लेकिन उसका कोई फायदा नहीं होने वाला | कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण खुद अतिभ्रष्ट है | नौसेना द्वारा आयोजित मेराथन में उन्होंने खूब माल बटोरा है | अब नए मेराथन की तैयारी हो रही है | कमोडोर साहब और माल बटोरेंगे | तो उनसे कुछ उम्मीद रखना बेमानी होगी |

मेरी राय में इनकोडिंग डिपार्टमेंट के कर्मचारियों एक पत्र नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट को लिखना चाहिए | उसकी एक प्रति रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को भेजनी चाहिए | उस पत्र में कमांडर आय एस कुमार के सारे कारनामे लिखे | हर एक चुराई हुई चीज के बारे में बताएँ | यदि मन में डर हो तो बिना नाम के ही भेजें लेकिन भेजें जरुर | नहीं तो पूरे इनकोडिंग डिपार्टमेंट पर चोर होने का ठप्पा लग जाएगा |

इसके अलावा पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि कमांडर आय एस कुमार के परम मित्र दूधचोर कमांडर ललित शर्मा आज कल अपने भ्रष्ट साथी सी टी ए वसंत जाधव का ट्रान्सफर रोकने में लगे हैं | वसंत जाधव का ट्रान्सफर कोचीन आया है | जाधव जी दूधचोर कमांडर ललित शर्मा और कमांडर आय एस कुमार के अभिन्न साथी है | सारे घोटाले, सारी काले कारनामे उन्होंने मिलकर साथ में किये हैं | इसलिए वो उन्हें मुंबई से कोचीन जाने नहीं देना चाहते |

देखते हैं शर्मा जी, कब तक अपने साथी को बचाएँगे | कुछ दिनों पहले जो चार्जमैन की वेकेंसी निकली थी, वसंत जाधव उसके रिक्रूटमेंट बोर्ड में मेम्बर थे | इन लोगों ने ५-५ लाख रिश्वत लेकर डाकयार्ड के कर्मचारियों को चार्जमैन बना दिया | मामले की जाँच सीबीआई कर रही है | आज नहीं तो कल सी टी ए वसंत जाधव को रिश्वतखोरी का नतीजा भुगतना पड़ेगा |

आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी मसाला किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

दवा की जगह जहर बाँटता डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई का नौसेना अस्पताल

रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा
रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा

पिछले तीस वर्षों में नौसेना के अधिकारियों का एक से बढ़कर एक घोटाला मैनें सुना और देखा है | एक से बढ़कर एक गिरी हुई हरकत | जब भी मैं सोचता हूँ कि ये लोग इतना नीचे गिर चुके हैं और इससे ज्यादा क्या गिरेंगे, तभी नौसेना के अधिकारी उससे भी बड़ी घटिया हरकत कर मुझे गलत साबित कर देते हैं | उसी का उदाहरण है यह लेख |

पाठकों में से कई लोगों को पता नहीं होगा तो उनकी जानकारी के लिए बता दूँ कि ५ फरवरी २०१९ को अन्न एवं औषध प्रशासन ( http://fda.maharashtra.gov.in/ ) ने कई दवा वितरकों पर छापे मारे और रक्षा विभाग के लिए बनाई गई लगभग साठ लाख की दवाई बरामद की | यह दवाई सेना, नौसेना और वायुसेना के अस्पतालों के लिए बनाई गई थी लेकिन दवा वितरक इस पर से CGHS का स्टाम्प मिटाकर निजी दवा दुकानों (Private Medical Stores) से बेच रहे थे | दर्जन भर FIR हुए और लगभग उतने लोग गिरफ्तार भी हुए | सभी बड़े-बड़े समाचारपत्रों में यह खबर छपी | इनमें से कुछ के लिंक दे रहा हूँ :

  1.      FDA raids traders ‘diverting’ drugs meant for defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/fda-raids-traders-diverting-drugs-meant-for-defence/articleshow/67860289.cms
  2.      E-pharma firm’s head, 12 others booked for diverting defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/e-pharma-firms-head-12-others-booked-for-diverting-defence-drugs/articleshow/68001821.cms
  3.      Two drug firms booked for ‘diverting consignments meant for defence personnel’ : https://indianexpress.com/article/cities/mumbai/two-drug-firms-booked-for-diverting-consignments-meant-for-defence-personnel-5581186/
  4.      ६० लाखांच्या औषधांची जप्ती :   https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/seizure-of-60-lakhs-%20drugs/articleshow/67889137.cms
  5.      नौदलाच्या औषधांची बाजारात विक्री : https://www.esakal.com/mumbai/sales-navy-medicines-market-169469
  6.      १३ जणांवर गुन्हा दाखल : https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/13-cases-filed-against-them/articleshow/67965649.cms

अब सवाल यह उठता है कि दवा वितरकों के पास सेना के लिए बनी इतनी दवाईयाँ आई कैसे ? इसका जवाब मैं आपको देता हूँ | दवा कंपनियाँ इन दवाइयों को बनाकर, CGHS का स्टाम्प लगाकर सेना, नौसेना तथा वायुसेना को देती है | नौसेना के अधिकारी निजी दवा वितरकों से मिलकर इसपर से CGHS का स्टाम्प मिटाते हैं | फिर उस दवा की अदला-बदली ऐसी दवाइयों से की जाती है जिनके प्रयोग की अवधी समाप्त होने को हो |

आप लोगों को पता ही होगा कि हर दवा पर उसके प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) लिखी होती है | कई बार दवाइयाँ नहीं बिकती और उनके प्रयोग की अंतिम तारीख नजदीक आ जाती है | Expiry Date के बाद वो दवा किसी काम की नहीं रहती | ऐसे में निजी दवा वितरकों को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है | ये दवा वितरक हमारी नौसेना के अधिकारियों को रिश्वत देकर इन दवाइयों को CGHS के लिए बनी दवाइयों से अदला बदली कर लेते हैं | नौसेना द्वारा उसे सिविलियन्स के लिए बने अस्पतालों में मरीजों को देने के लिए भेज दिया जाता है | आप में से जो लोग नियमित रूप से नौसेना के अस्पतालों से या CGHS से दवाईयाँ लेते हैं, उन्होंने नोट किया होगा कि उन दवाइयों की प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) नजदीक होती है |

अक्टूबर २०१८ में नौसेना ने डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई में बने नौसेना अस्पताल में इस घोटाले को पकड़ा | जाँच शुरू हुई, कई अधिकारियों के नाम आने लगे | यह भी माँग उठी कि इतने गंभीर मामले की जाँच पुलिस को दे दी जाए | लेकिन ऐसे में नौसेना के वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग निरिक्षण के बहाने से आये | उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नौसेना अधिकारियों को तुरंत जाँच बंद करने का आदेश दिया | साथ में अस्पताल प्रशासन को यह निर्देश भी दिया कि जल्दी से जल्दी, ज्यादा से ज्यादा दवाईयाँ मरीजों को देकर उन दवाइयों के स्टॉक को ख़त्म कर दिया जाये |

उसके बाद से जाँच बंद | डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग के नौसेना अस्पताल ने थोक के भाव से दवाइयाँ बाँटनी शुरू की | डॉक्टर मरीज को एक दवा के बदले चार दवा देने लगे भले मरीज को जरुरत हो या न हो | नवम्बर २०१८, दिसंबर २०१८ तथा जनवरी २०१९ यही चलता रहा | डाकयार्ड कॉलोनी के कई रहिवासियों ने, जो उस दौरान नौसेना अस्पताल गए थे, इस बात का अनुभव किया था | तीन महीने तक मरीजों की सेहत से खिलवाड़ होता रहा |

मैं डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के निवासियों से कहूँगा कि वो नौसेना के अस्पताल से कभी दवाई न ले | भले पैसा खर्चा हो, प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराये | नौसेना के अधिकारी पैसे के लिए कब हमें बेच दे, कब जहर पिला दे, इसका कोई अंदाजा नहीं |

( लेख पूरा नहीं है, अगले भाग का इंतज़ार करें | )

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

भाजपा नेता संजय शर्मा ने कांजुरमार्ग, मुंबई की नौसेना कॉलोनी में बनाया अवैध कार्यालय

संजय शर्मा महारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ
संजय शर्मा महारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ

स्वयं को मुंबई, भाजपा का महामंत्री बतानेवाले बतानेवाले संजय शर्मा नामक व्यक्ति ने कांजुरमार्ग, डाकयार्ड कॉलोनी में उत्पात मचाया हुआ है | यह कॉलोनी भारतीय नौसेना के अधिकार क्षेत्र में आता है लेकिन नौसना के अधिकारियों ने इस मामले में आँखें मूँद ली है |

डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में जोग्गर्स पाक के सामने कई इमारतों का निर्माण कार्य चल रहा है | इन इमारतों के निर्माण की जिम्मेदारी जिस बिल्डर को दी गयी है, उसने निर्माण क्षेत्र में २ कंटेनर लाकर रख दिए हैं | उनमें से एक कंटेनर को बिल्डर ने संजय शर्मा के सुपुर्द कर रखा है | उस कंटेनर में संजय शर्मा ने अपना पार्टी कार्यालय बनाया हुआ है | वह रोज दो से तीन गाड़ियाँ लेकर डाकयार्ड कॉलोनी आता है | उसके साथ हमेशा ८-१० गुंडों की फ़ौज रहती है | पूरा दिन वहीं मीटिंग | दोपहर ११-१२ बजे से रात के ११-१२ बजे तक या तो संजय शर्मा उस कार्यालय में रहता है या डाकयार्ड कॉलोनी में घूमता रहता है |

यदि किसी भी बाहरी व्यक्ति को डाकयार्ड कॉलोनी के अंदर आना है तो उसे मेन गेट के रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ती है | कई बार उन व्यक्तियों के आय कार्ड ले लिए जाते हैं और कॉलोनी से बाहर निकलते समय ही वो आय कार्ड वापस किये जाते हैं | डाकयार्ड कॉलोनी के जो रहिवासी हैं उनके रिश्तेदारों पर भी यह नियम लागू होता है | लेकिन संजय शर्मा तथा उसके गुंडों पर यह नियम लागू नहीं होता | न रजिस्टर में कोई एंट्री, न आय कार्ड देना | अपनी मर्जी से आओ, अपनी मर्जी से जाओ, अपनी मर्जी से घूमो |

अब आपको संजय शर्मा को मिली इस रियायत का कारण बताना चाहूँगा | संजय शर्मा का डाकयार्ड कॉलोनी के पूर्व सिक्यूरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी / आमचोर अवस्थी / बीविचोर अवस्थी से काफी करीबी संबंध है | अवस्थी की सहायता से संजय शर्मा बिल्डर तथा नौसेना अधिकारियों के बीच दलाली का काम करता था | बिल्डर द्वारा जो भी रिश्वत नौसेना के अधिकारियों को देनी होती है वो संजय शर्मा तथा सुरेश अवस्थी के द्वारा होते हुए नौसेना अधिकारियों तक पहुँचती है | रिश्वत देने-दिलाने वाला व्यक्ति नौसेना अधिकारियों के लिए उनके जीजा-दामाद जितना सम्मानजनक होता है | इसलिए उन्होंने संजय शर्मा को पूरी आजादी दे रखी है |

स्थानीय भाजपा नेताओं से बात करने पर पता चला है कि संजय शर्मा भांडुप, मुंबई के स्थानीय छुटभैये नेता हैं | उनका कोई जनाधार नहीं है | कुछ वर्ष पहले एक बड़ा फाइनेंसियल फ्रॉड कर उत्तर प्रदेश भाग गए थे | सालों बाद वापस आये | उसी पैसे के दम पर कुछ गुंडों को पाल कर अपनी राजनीति जमाने की कोशिश कर रहे हैं | अवस्थी की सहायता से बिल्डर के लिए दलाली कर अच्छा पैसा बनाने में सफल हुए हैं | अवस्थी के जाने के बाद सिक्यूरिटी ऑफिस के किसी ओझा नामक व्यक्ति के सहयोग से इनका दलाली का काम अब भी जारी है |

पाँच दिन बाद १७ मार्च को संजय शर्मा होली महोत्सव के नाम से एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं जिसमें सारे स्थानीय नेताओं को आमंत्रण दिया गया है | उन स्थानीय नेताओं में से ज्यादातर को संजय शर्मा के वास्तविक चरित्र के बारे में मालूम हो भी सकता है और नहीं भी | हो सकता है ये लेख उनकी आँखें खोल दे |

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

नौसेना का सिक्यूरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी निकला ठग, पुलिस वाला बनकर 90 लाख लूटे

आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ

वैसे तो यह खबर abinet.org में छप चुकी है | आप लोगों में से कई लोगों ने पढ़ भी लिया होगा लेकिन हिंदी में पढने-लिखने का अलग ही मजा है | इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ |

मामला नौसेना के कुख्यात अधिकारी सुरेश अवस्थी उर्फ़ आमचोर अवस्थी उर्फ़ बीवीचोर  अवस्थी का है | अवस्थी जी भारतीय नौसेना के आँख के दुलारे और विक्रोली, मुंबई के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) शेखर तावड़े के आँख के सितारे हैं | जब भी अवस्थी कोई कुकर्म करता है, और उसके विरुद्ध शिकायत पुलिस स्टेशन जाती है, तो नौसेना के अधिकारियों का फ़ोन तुरंत उस पुलिस स्टेशन पहुँच जाता है | जरुरत पड़ी तो दो नौसना के अधिकारी पुलिस स्टेशन भी पहुँच जाते हैं अवस्थी को बचाने | अब हमारे नौसेना के अधिकारी वैसे ही बीवीओं की अदला-बदली (Wife Swapping) के लिए कुख्यात है | अवस्थी है ही बीवीचोर, तो वो नौसेना के अधिकारियों के बीच लोकप्रिय तो होगा ही |

पर मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि ACP शेखर तावड़े को आमचोर/बीवीचोर अवस्थी से इतना प्रेम क्यों है ? वैसे तो तावड़े जी खुद अव्वल दर्जे के भ्रष्टचारी हैं किंतु अवस्थी से उनका गुप्त प्रेम समझ नहीं आता | कोई भी अवस्थी के विरुद्ध शिकायत करने पुलिस स्टेशन जाता है तो ये महाशय भी १५-२० मिनट में वहाँ पहुँच जाते हैं | लेकिन कब तक बचाएँगे ? चोर आज नहीं तो कल फँसेगा ही न | आमचोर/बीवीचोर अवस्थी भी फँस गया |

और कोई छोटी-मोटी ठगी नहीं है ! पूरे नब्बे लाख है नब्बे लाख | अवस्थी जी बने मुंबई पुलिस के एंटी नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी | घाटकोपर में रहने वाले एक व्यक्ति को उन्होंने अपने साथी के साथ मिलकर झाँसा दिया कि उसे नवी मुंबई में दो फ्लैट सस्ते में दिला सकते हैं | मामला एक करोड़ चालीस लाख पर तय हुआ – एक करोड़ रजिस्ट्रेशन से पहले और चालीस लाख रजिस्ट्रेशन के बाद | बेचारे ने नब्बे लाख नकद दे भी दिया लेकिन जब महीनों तक रजिस्ट्रेशन का मामला आगे नहीं बढ़ा तो उस व्यक्ति को शक हुआ और उसने अपने पैसे वापस माँगने शुरू किये | अवस्थी और उसके साथी ने उस व्यक्ति का नंबर ब्लॉक कर दिया और अवस्थी के साथी ने तो अपना घर भी बदल लिया |

वो बेचारा, अवस्थी और उसके साथी को ढूंढते-ढूंढते श्रीमती पराशर से मिला | श्रीमती पराशर ने बताया कि अवस्थी और उसके साथी ने उन्हें भी उसी तरीके से लूटा है | और कितनों को लूटा होगा पता नहीं | मुझे तो दो का ही पता लगा है तो आपको बता रहा हूँ | ACP शेखर तावड़े की वजह से पार्क साईट विक्रोली पुलिस स्टेशन में FIR नहीं हो पाया था | लेकिन न्यायालय के निर्देश पर पुलिस को FIR लेना पड़ा | जिस को इस मामले की पूरी जानकारी चाहिए वो यह लिंक क्लिक करके पढ़े : FIR for cheating registered against Navy’s chief security officer Suresh Awasthi, Awasthi claimed that he was officer of Anti-Narcotics Cell in Mumbai Police

इस पूरे मामले से एक बात तो साफ़ है | चोर कितना भी चालाकी दिखाये – जोर लगाये, आज नहीं तो कल पकड़ा जाएगा ही जाएगा | और जितने भी अवस्थी के साथी हैं, जिन्हें लगता है अवस्थी उन्हें बचा लेगा या वो अवस्थी को बचा लेंगे, तो वो समझ जाएँ, न अवस्थी बचेगा न उसके साथी | सबका नंबर आएगा, आज नहीं तो कल | चाहे नरक में जा छुपे, लेकिन वहाँ से भी ढूंढ़कर उन्हें सबक सिखाया जाएगा |

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

मौत के सौदागर : गरीबों की लाश पर पैसा कमाने वाले भारतीय नौसेना के भ्रष्ट अधिकारियों के कारण वृद्ध महिला की मौत

नाविक के घर की टूट कर लटकती हुई बालकनी जहाँ से उनकी माताजी गिरी थी |
नाविक के घर की टूट कर लटकती हुई बालकनी जहाँ से उनकी माताजी गिरी थी |

यदि आप ईभारत के नियमित पाठक हैं तो मेरे लेखों से आप को अंदाजा लग गया होगा कि भारतीय नौसेना के अधिकारी किस तरह से देश को लूट-खसोट कर अपनी तिजोरी भर रहे हैं | मेरी बात को साबित करते हुए आज एक और घटना आप लोगों के सामने रख रहा हूँ |

घटना २३ जून २०१६ की है, स्थान – विशाखापट्टनम | नौसेना द्वारा आबंटित मकान में एक नाविक (Sailor) का परिवार रहता था | मकान की हालत बिलकुल जर्जर | ऐसा लगता था मकान का कौन-सा हिस्सा कब टूट के गिरे पता नहीं | सेलर ने इसकी शिकायत कई बार नौसेना तथा एम. इ. एस. में किया किंतु कोई फायदा नहीं | मरम्मत का काम कराया नहीं गया | दुर्भाग्यवश उस परिवार का डर सही साबित हुआ | 23 जून 2016 की सुबह करीब 05.45 के आस पास नाविक की माताजी बालकनी में सुबह की ताजी हवा लेने बैठी थी तभी अचानक पूरी बालकनी ही दीवार से अलग होकर झूले की तरह लटक गई | उनकी माताजी कुर्सी के साथ ही नीचे गिर गई जिससे उन्हें सिर में बहुत ही गंभीर चोट आई और वो बेहोश हो गई। आनन-फानन में उन्हें नौसेना अस्पताल कल्याणी ले जाया गया जहाँ पर उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहाँ 6 दिनों तक कोमा में रहते हुए वेंटिलेटर पर असहनीय दर्द सहने के बाद सातवें दिन (29 जून 2016) उन्होंने दम तोड़ दिया।

नाविक की माताजी अस्पताल में
नाविक की माताजी अस्पताल में

अब इतनी बड़ी दुर्घटना हुई है तो आप उम्मीद कर रहे होंगे कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी लेकिन आपकी उम्मीद बिलकुल गलत है | ऐसे एक दो गरीब मरने से भारतीय नौसेना के भ्रष्ट अधिकारियों के कान पर जू भी नहीं रेंगती | ईभारत में ही मैंने आप लोगों को बताया था कि किस तरह तीन-तीन मजदूरों को मारकर भारतीय नौसेना के अधिकारी उनकी लाश पर रोटियाँ सेंक रहे हैं | यदि आपने वह लेख न पढ़ा हो तो इस लिंक पर क्लिक करे : नौसेना प्रशासन की लापरवाही से डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग, मुंबई में एक और मजदूर की मौत

बेचारे गरीब नाविक के परिवार को उम्मीद थी कि भारतीय नौसेना उन्हें जरूर इंसाफ दिलाएगी किंतु दो वर्ष से भी अधिक समय गुजरने के बाद भी न्याय दिलाना तो दूर की बात, नौसेना के अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए जाँच आयोग बैठा कर, दोषियों को और उनके गुनाहो को छुपाने में लगे हैं | कई बार लिखित आग्रह के बाद भी उपरोक्त जाँच की प्रतिलिपि पीड़ित परिवार को नही दी गई | दुर्घटना आवासीय कॉलोनी में हुई है न कि किसी रक्षा आपरेशन की जगह पर, इसलिए जाँच की रिपोर्ट पीड़ित परिवार को दी जा सकती है, सार्वजनिक भी की जा सकती है | लेकिन हराम के पैसों पर जीवित नौसेना के अधिकारी ऐसा कभी नहीं करेंगे | ऐसा करने से उनको रिश्वत देने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स पर तथा नौसेना के साथी अधिकारियों पर आँच जो आ सकती है | उनका सीधा मंत्र है “तू भी चोर – मैं भी चोर, तू भी चुप-मैं भी चुप” | वाइफ स्वैपिंग अर्थात पत्नियों की अदला-बदली करनेवाले चरित्रहीन अधिकारियों से और क्या उम्मीद की जा सकती है !

( यदि आपको नौसेना के वाइफ स्वैपिंग अर्थात पत्नियों की अदला-बदली वाले  कारनामों के बारे में पता न हो तो निम्न लेख जरूर पढ़ें  :
१) Navy wife swapping scandal: SC wants special team to probe case
२) Indian Navy lieutenant’s wife ‘forced into wife-swapping parties’ )

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका है | बेचारा नाविक बार न्याय के लिए आवेदन देने लगा, प्रधानमंत्री तथा रक्षामंत्री को पत्र लिखने लगा | इसलिए सजा के तौर पर उसे जहाज में स्थानांतरित कर दिया गया जिससे कि उसके बंदरगाह पर रहने की संभावना कम हो जाए और वो अपनी आवाज न उठा सके। नौसेना के इस तरह के व्यवहार से पीड़ित परिवार डरा-सहमा है कि कहीं उच्चाधिकरियों के संकेत पर जहाज पर नाविक की हत्या कर उसे दुर्घटना न दिखा दिया जाए |

इस पूरी घटना को जानने के बाद मैनें निश्चित किया है कि भारतीय नौसेना को मैं अब से हत्यारी नौसेना लिखा करूँगा | आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]