पी एम सी बैंक डूबने के बाद कितना सुरक्षित है आपका पैसा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में !

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आपके और मेरे जैसे लाखों मध्यमवर्गियों के लिए अभी कुछ दिनों पहले एक बड़ी बुरी खबर आयी है | देश की सबसे सफल को ऑपरेटिव बैंकों में से एक पीएमसी बैंक लगभग डूबने के कगार पर है | लाखों लोगों की जिंदगी भर की कमाई इस बैंक में थी जो वापस मिलना लगभग नामुमकिन सा हो गया है | हर दिन पीएमसी बैंक से जुडी कोई न कोई नयी जानकारी सामने आ रही है और यह लगभग निश्चित हो गया है कि बैंक अब दिवालिया हो जायेगी | अब ऐसे में गरीबों के पैसे का क्या होगा यह भगवान को ही मालूम है | सरकार बैंक की जिम्मेदारी वापस लेते हुए लोगों को उनके पैसे की गारंटी देगी या नहीं, पता नहीं |

मुंबई में ऐसा हाल हो गया है कि लोग ऑपरेटिव बैंक में पैसा रखने से डरने लगे हैं | जिन ऑपरेटिव बैंकों के बारे में अब तक कोई गलत खबर नहीं है, लोग वहाँ से भी पैसा निकाल रहे हैं | कई ऑपरेटिव बैंकों के पास पैसे की इतनी कमी हो गई है कि वो अगले दस दिन तक पैसा नहीं दे सकते | इसका मतलब यह कि यदि कल को इन ऑपरेटिव बैंक के किसी खाताधारक को इमरजेंसी में पैसे की जरुरत पड़ गयी तो भी उसे पैसा नहीं मिलेगा | लोगों को ऑपरेटिव बैंक के नाम से डर लगने लगा है |

पीएमसी बैंक के बारे में सोचते-सोचते मेरे ध्यान में नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक आया | यह भी पीएमसी की तरह कोऑपरेटिव बैंक है | आपको तो पता है कि इस बैंक के मैनेजमेंट पर लंबे समय से नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों (NEU) का कब्जा है | पी.बी. पाणिग्राही पूरे बैंक पर कुंडली मार कर बैठे हुए हैं | समय-समय पर अपने फायदे और यूनियन के फायदे के लिए बैंक का गलत तरीके से उपयोग करने का आरोप इन पर लगता रहा है | नोटबंदी के समय जिस तरह खुलेआम नौसेना अधिकारियों के काले धन को सफ़ेद करने की कोशिश की गई थी वो सबको याद होगा | बैंक के पदाधिकारी भले कितनी भी सफाई दे, लेकिन आपको और हमको तो पता ही है कि इसी काले धन के मामले की वजह से उस समय नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट रहे संजीव काले का करियर बरबाद हो गया |

नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक के पदाधिकारी जब नौसेना को इस बात का भरोसा नहीं दिला पाए कि नोटबंदी के समय के आरोप झूठे थे, तो हम कैसे मान लें ? यदि आरोप सही नहीं थे तो संजीव काले की दुर्गति क्यों हुई ? ज़रा से कमीशन के लिए, नेवल मैनेजमेंट को खुश करने के लिए पूरे बैंक को रिस्क पर डाल दिया गया था | सोचिये उस समय यदि RBI जाँच के लिए बैंक सील कर देती तो ? या प्रवर्तन निदेशालय की रेड पड़ जाती तो ? पैसा तो आपका और हमारा अटकता | भले कुछ दिन के लिये ही सही, पर अटक तो जाता |

नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक और संजीव काले का संबंध डाकयार्ड कर्मचारियों से छुपा नहीं है | कुछ वर्ष पहले यूनियन का एक पदाधिकारी अपने रिटायरमेंट के कार्यक्रम में संजीव काले के पैर छूकर धन्यवाद देता है कि आपकी मेहरबानी से मेरा बेटा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में नौकरी पर लग गया | अब बताइये संजीव काले को धन्यवाद देने का क्या मतलब है ? नियम के हिसाब से तो बैंक में नौकरी लगवाने में काले का कोई संबंध नहीं होना चाहिए | लेकिन संजीव काले नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारी पी.बी. पाणिग्राही की सहायता से वहाँ लोगों को गैरकानूनी रूप से नौकरी पर भी लगवाते और अपना काला धन सफ़ेद भी करवाते थे |

ऐसे में मुझे तो नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक के मैनेजमेंट पर बिलकुल भरोसा नहीं रहा | कुछ दिनों पहले तक सबको लगता था कि पी एम सी बैंक से बढ़िया बैंक कोई नहीं | रोज बारह घंटे, साल के ३६५ दिन काम करनेवाला इकलौता बैंक | अब पता चला कि मैनेजमेंट अंदर ही अंदर सब सत्यानाश कर चुकी है | नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक का मैनेजमेंट भी सज्जन लोगों के हाथ में नहीं है | पता नहीं अंदर क्या चल रहा हो ? २-३ दिन में अपने परिवार मित्रों से चर्चा कर, सारे अकाउंट बंद करके अपना-अपना पैसा हम लोग बाहर निकाल रहे हैं | आप लोग अपना-अपना सोच लें |

साइकिल चोर तथा दूध चोर बनने के बाद अब सीडी प्लेयर चोर बने नौसेना के कमांडर आय एस कुमार

दूधचोर, साइकिल चोर, सीडी प्लेयर चोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा
दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा

यदि आप नियमित रूप से ईभारत पढ़ते होंगे तो आपको नौसेना के कमांडर आय एस कुमार के बारे में पता ही होगा | यदि न पता हो तो यह दोनों लेख पढ़ लें :

  1. नौसेना का कमांडर आय एस कुमार निकला साइकिल चोर
  2. नौसेना के कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा बने दूध चोर, दिन के एक लीटर दूध के लिए अपना ईमान बेचा

अब कुमार साहब ने एक नया कारनामा किया है | वैसे नया कारनामा कहना गलत होगा | चोरी तो उनकी आदत है | डिपार्टमेंट में जितनी डायरी या नोटबुक आती है, सब उठा के घर ले जाते हैं | डिपार्टमेंट में टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ३ प्रतियाँ आती है | कुमार जी तीनों कॉपी उठा कर घर ले जाते हैं | नट बोल्ट हो या साबुन या कोई लोहे का टुकड़ा | उनसे कुछ नहीं बच सकता | उनकी इन हरकतों की वजह से जिस भी डिपार्टमेंट में वो जाते हैं, वहाँ हंगामा होता रहता है | उस डिपार्टमेंट के लोग उनके जाने के बाद भी उन्हें सालों तक याद रखते हैं |

आय एस कुमार अभी दो-तीन दिन पहले कहीं से किसी का सीडी प्लेयर उठा ले आये हैं | उसे कागज़ से पूरा कवर कर अपने कार्यालय में ही रख दिया | उनके कार्यालय के सारे कर्मचारी चिंतित ! अब क्या नया हंगामा होगा | उनमें से कुछ ने तो डिपार्टमेंट के इंचार्ज कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण से शिकायत करने की भी सोची है | लेकिन उसका कोई फायदा नहीं होने वाला | कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण खुद अतिभ्रष्ट है | नौसेना द्वारा आयोजित मेराथन में उन्होंने खूब माल बटोरा है | अब नए मेराथन की तैयारी हो रही है | कमोडोर साहब और माल बटोरेंगे | तो उनसे कुछ उम्मीद रखना बेमानी होगी |

मेरी राय में इनकोडिंग डिपार्टमेंट के कर्मचारियों एक पत्र नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट को लिखना चाहिए | उसकी एक प्रति रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को भेजनी चाहिए | उस पत्र में कमांडर आय एस कुमार के सारे कारनामे लिखे | हर एक चुराई हुई चीज के बारे में बताएँ | यदि मन में डर हो तो बिना नाम के ही भेजें लेकिन भेजें जरुर | नहीं तो पूरे इनकोडिंग डिपार्टमेंट पर चोर होने का ठप्पा लग जाएगा |

इसके अलावा पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि कमांडर आय एस कुमार के परम मित्र दूधचोर कमांडर ललित शर्मा आज कल अपने भ्रष्ट साथी सी टी ए वसंत जाधव का ट्रान्सफर रोकने में लगे हैं | वसंत जाधव का ट्रान्सफर कोचीन आया है | जाधव जी दूधचोर कमांडर ललित शर्मा और कमांडर आय एस कुमार के अभिन्न साथी है | सारे घोटाले, सारी काले कारनामे उन्होंने मिलकर साथ में किये हैं | इसलिए वो उन्हें मुंबई से कोचीन जाने नहीं देना चाहते |

देखते हैं शर्मा जी, कब तक अपने साथी को बचाएँगे | कुछ दिनों पहले जो चार्जमैन की वेकेंसी निकली थी, वसंत जाधव उसके रिक्रूटमेंट बोर्ड में मेम्बर थे | इन लोगों ने ५-५ लाख रिश्वत लेकर डाकयार्ड के कर्मचारियों को चार्जमैन बना दिया | मामले की जाँच सीबीआई कर रही है | आज नहीं तो कल सी टी ए वसंत जाधव को रिश्वतखोरी का नतीजा भुगतना पड़ेगा |

आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी मसाला किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

चौकीदार नरेंद्र मोदी गरीब चौकीदारों को भारतीय नौसेना के शोषण से बचाने में असमर्थ, चौकीदारों को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की शरण में जाना पड़ा

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सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने चुनाव के उद्देश्य से भले ही चौकीदार शब्द का जोरदार प्रयोग शुरू कर दिया हो लेकिन जमीनी तौर पर वो वास्तविक चौकीदारों की किसी भी तरह से सहायता नहीं कर रहे हैं | सोशल मीडिया पर तो उनके कई समर्थक चौकीदार बन गए हैं लेकिन वास्तविक जीवन में कोई भी गरीब चौकीदारों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा |

मामला मुंबई के कांजुरमार्ग पश्चिम में स्थित डाकयार्ड कॉलोनी का है | यह कॉलोनी नौसेना के अंतर्गत आती है | इस कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी भारतीय नौसेना के कप्तान उस्मानी हैं | कॉलोनी में लगभग पैंतीस से चालीस चौकीदार काम करते हैं | लेकिन नौसेना के अधिकारी पचपन से साठ चौकीदार दिखाकर, उनका झूठा ओवरटाइम दिखाकर खूब हराम की कमाई खाते रहे हैं | यहाँ तक तो ठीक था लेकिन पिछले कुछ समय से नौसेना के अधिकारी इन चौकीदारों का पगार भी समय पर नहीं दे रहे हैं | डेढ़ वर्ष में चौकीदार ४ बार हड़ताल कर चुके हैं लेकिन नौसेना अधिकारियों के कानों पर जू भी नहीं रेंगती |

नेवी कॉलोनी में मनसे पदाधिकारी के साथ चौकीदारों की चर्चा
नेवी कॉलोनी में मनसे पदाधिकारी के साथ चौकीदारों की चर्चा

इस बार भी सारे चौकीदार १९ मार्च २०१९ से हड़ताल पर हैं | उन्हें इस बार तीन महीने की पगार नहीं मिली है | वैसे भी नौसेना उन्हें सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन का ५०% ही देती है | उनके प्रोविडेंट फण्ड और इन्सुअरंस का पैसा भी नौसेना के अधिकारी दारू तथा ऐय्याशी में उड़ा देते हैं | जो बचा हुआ आधा वेतन मिलता था वो भी पिछले तीन महीने से नहीं मिला | इस मामले की शिकायत कई बार प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री तथा नौसेना के उच्च अधिकारियों से की जा चुकी है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ | ऐसे में सिक्यूरिटी गार्डों ने अब राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से सहायता माँगी |

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पदाधिकारियों ने तुरंत सक्रिय होकर कांट्रेक्टर तथा नौसेना प्रशासन पर दबाव बनाया तो उन्होंने एक सप्ताह के अंदर पूरा वेतन देने का वादा किया है | मनसे के पदाधिकारियों ने कहा है कि यदि एक सप्ताह में वेतन नहीं मिला तो फिर वो मनसे स्टाइल में न्याय दिलाएंगे |

इस घटनाक्रम के बाद मुझे उम्मीद है कि नौसेना के भ्रष्ट अधिकारियों को थोड़ी शर्म आएगी | अपना जमीर तो वो पहले ही बेच चुके हैं, देश रोज बेच रहे हैं और गरीबों के थाली से रोटी चुराना भी जारी है | हराम की रोटी तोड़-तोड़कर उनकी बुद्धि भी भ्रष्ट हो चुकी है | ऐसा न होता तो इतनी इज्जत उछलने के बाद भी क्या वो इस तरह गरीबों का शोषण जारी रखते ?

चौकीदार नरेंद्र मोदी और उनके समर्थक चौकीदार पूरे मामले में सो ही रहे हैं | इस जन्म में उनकी नींद खुलने की उम्मीद भी नहीं है |

बाकि पाठक नौसेना अधिकारियों से ज्यादा उम्मीद न रखे, उनका नौसेना का सही चरित्र जानना है तो यह लेख जरुर पढ़ें :

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

नौसेना द्वारा गरीब सिक्यूरिटी गार्डों को लूटने का क्रम जारी, तीन महीने से तनख्वाह नहीं, सिक्यूरिटी गार्ड दस दिन से हड़ताल पर

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मामला कांजुर मार्ग मुंबई में स्थित डाकयार्ड कॉलोनी का है | यह कॉलोनी नौसेना के अंतर्गत आती है | इस कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी भारतीय नौसेना के कप्तान उस्मानी हैं | कॉलोनी में लगभग पैंतीस से चालीस सिक्यूरिटी गार्ड काम करते हैं | लेकिन नौसेना के अधिकारी पचपन से साठ सिक्यूरिटी गार्ड दिखाकर, उनका झूठा ओवरटाइम दिखाकर खूब हराम की कमाई खाते रहे हैं | यहाँ तक तो ठीक था लेकिन पिछले कुछ समय से नौसेना के अधिकारी इन सिक्यूरिटी गार्डों का पगार भी समय पर नहीं दे रहे हैं | डेढ़ वर्ष में सिक्यूरिटी गार्ड ४ बार हड़ताल कर चुके हैं लेकिन नौसेना अधिकारियों के कानों पर जू भी नहीं रेंगती |

इस बार भी सारे सिक्यूरिटी गार्ड १९ मार्च २०१९ से हड़ताल पर हैं | उन्हें इस बार तीन महीने की पगार नहीं मिली है | वैसे भी नौसेना उन्हें सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन का ५०% ही देती है | उनके प्रोविडेंट फण्ड और इन्सुअरंस का पैसा भी नौसेना के अधिकारी दारू तथा ऐय्याशी में उड़ा देते हैं | जो बचा हुआ आधा वेतन मिलता था वो भी पिछले तीन महीने से नहीं मिला |

कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी कप्तान उस्मानी का कहना है कि सिक्यूरिटी गार्डों को समय पर वेतन देना संभव ही नहीं है | उनके अनुसार सिविलियन्स को समय पर वेतन देना नौसेना के शान के खिलाफ है | कोई गरीब भूखे मरता है तो मरे, नौसेना अधिकारियों की दारू और ऐय्याशी ज्यादा जरुरी है | उनके अनुसार चीफ ऑफ़ नेवल स्टाफ सुनील लांबा सिक्यूरिटी गार्डों के वेतन के पैसे की दारू पीकर टुन्न हो गए हैं और किसी नाले में गिर गए हैं | कुछ दिनों बाद जब उनकी शराब उतरेगी और वो नाले से निकलेंगे, उसके बाद ही सिक्यूरिटी गार्डों को वेतन मिल सकेगा |

सिक्यूरिटी गार्डों का वेतन पास करनेवाले एन्कोडिंग डिपार्टमेंट के कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण को जब सिक्यूरिटी गार्डों के वेतन के बारे में पूछा गया तो वो बोले कि फिलहाल वो मेराथन घोटाले में व्यस्त हैं | उन्हें गरीब मजदूरों का चुराया हुआ दूध भी अपने घर ले जाना है | उनका यह भी मानना है कि सिक्यूरिटी गार्ड्स के बिल की जो फाइल है उसमें बहुत घोटाले हैं | तो जब तक उनका कमीशन नहीं मिलता वो उस बिल को पास नहीं करेंगे |

मुझे सुनने में आया है कि नेवल डाकयार्ड मुंबई के नए एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट रियर एडमिरल जी. श्रीनिवासन अच्छे आदमी है | पता नहीं यह सच है या नहीं | लेकिन इस लेख के माध्यम से मैं उनसे इतनी ही प्रार्थना करूँगा कि नौसेना अधिकारियों की रिश्वतखोरी के चक्कर में गरीब सिक्यूरिटी गार्डों को भूखा न मारे | उन्हें भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन दिलाएँ और वो भी समय पर दिलाएँ |

बाकि पाठक नौसेना अधिकारियों से ज्यादा उम्मीद न रखे, उनका सही चरित्र जानना है तो यह लेख जरुर पढ़ें :

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

दवा की जगह जहर बाँटता डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई का नौसेना अस्पताल

रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा
रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा

पिछले तीस वर्षों में नौसेना के अधिकारियों का एक से बढ़कर एक घोटाला मैनें सुना और देखा है | एक से बढ़कर एक गिरी हुई हरकत | जब भी मैं सोचता हूँ कि ये लोग इतना नीचे गिर चुके हैं और इससे ज्यादा क्या गिरेंगे, तभी नौसेना के अधिकारी उससे भी बड़ी घटिया हरकत कर मुझे गलत साबित कर देते हैं | उसी का उदाहरण है यह लेख |

पाठकों में से कई लोगों को पता नहीं होगा तो उनकी जानकारी के लिए बता दूँ कि ५ फरवरी २०१९ को अन्न एवं औषध प्रशासन ( http://fda.maharashtra.gov.in/ ) ने कई दवा वितरकों पर छापे मारे और रक्षा विभाग के लिए बनाई गई लगभग साठ लाख की दवाई बरामद की | यह दवाई सेना, नौसेना और वायुसेना के अस्पतालों के लिए बनाई गई थी लेकिन दवा वितरक इस पर से CGHS का स्टाम्प मिटाकर निजी दवा दुकानों (Private Medical Stores) से बेच रहे थे | दर्जन भर FIR हुए और लगभग उतने लोग गिरफ्तार भी हुए | सभी बड़े-बड़े समाचारपत्रों में यह खबर छपी | इनमें से कुछ के लिंक दे रहा हूँ :

  1.      FDA raids traders ‘diverting’ drugs meant for defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/fda-raids-traders-diverting-drugs-meant-for-defence/articleshow/67860289.cms
  2.      E-pharma firm’s head, 12 others booked for diverting defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/e-pharma-firms-head-12-others-booked-for-diverting-defence-drugs/articleshow/68001821.cms
  3.      Two drug firms booked for ‘diverting consignments meant for defence personnel’ : https://indianexpress.com/article/cities/mumbai/two-drug-firms-booked-for-diverting-consignments-meant-for-defence-personnel-5581186/
  4.      ६० लाखांच्या औषधांची जप्ती :   https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/seizure-of-60-lakhs-%20drugs/articleshow/67889137.cms
  5.      नौदलाच्या औषधांची बाजारात विक्री : https://www.esakal.com/mumbai/sales-navy-medicines-market-169469
  6.      १३ जणांवर गुन्हा दाखल : https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/13-cases-filed-against-them/articleshow/67965649.cms

अब सवाल यह उठता है कि दवा वितरकों के पास सेना के लिए बनी इतनी दवाईयाँ आई कैसे ? इसका जवाब मैं आपको देता हूँ | दवा कंपनियाँ इन दवाइयों को बनाकर, CGHS का स्टाम्प लगाकर सेना, नौसेना तथा वायुसेना को देती है | नौसेना के अधिकारी निजी दवा वितरकों से मिलकर इसपर से CGHS का स्टाम्प मिटाते हैं | फिर उस दवा की अदला-बदली ऐसी दवाइयों से की जाती है जिनके प्रयोग की अवधी समाप्त होने को हो |

आप लोगों को पता ही होगा कि हर दवा पर उसके प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) लिखी होती है | कई बार दवाइयाँ नहीं बिकती और उनके प्रयोग की अंतिम तारीख नजदीक आ जाती है | Expiry Date के बाद वो दवा किसी काम की नहीं रहती | ऐसे में निजी दवा वितरकों को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है | ये दवा वितरक हमारी नौसेना के अधिकारियों को रिश्वत देकर इन दवाइयों को CGHS के लिए बनी दवाइयों से अदला बदली कर लेते हैं | नौसेना द्वारा उसे सिविलियन्स के लिए बने अस्पतालों में मरीजों को देने के लिए भेज दिया जाता है | आप में से जो लोग नियमित रूप से नौसेना के अस्पतालों से या CGHS से दवाईयाँ लेते हैं, उन्होंने नोट किया होगा कि उन दवाइयों की प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) नजदीक होती है |

अक्टूबर २०१८ में नौसेना ने डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई में बने नौसेना अस्पताल में इस घोटाले को पकड़ा | जाँच शुरू हुई, कई अधिकारियों के नाम आने लगे | यह भी माँग उठी कि इतने गंभीर मामले की जाँच पुलिस को दे दी जाए | लेकिन ऐसे में नौसेना के वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग निरिक्षण के बहाने से आये | उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नौसेना अधिकारियों को तुरंत जाँच बंद करने का आदेश दिया | साथ में अस्पताल प्रशासन को यह निर्देश भी दिया कि जल्दी से जल्दी, ज्यादा से ज्यादा दवाईयाँ मरीजों को देकर उन दवाइयों के स्टॉक को ख़त्म कर दिया जाये |

उसके बाद से जाँच बंद | डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग के नौसेना अस्पताल ने थोक के भाव से दवाइयाँ बाँटनी शुरू की | डॉक्टर मरीज को एक दवा के बदले चार दवा देने लगे भले मरीज को जरुरत हो या न हो | नवम्बर २०१८, दिसंबर २०१८ तथा जनवरी २०१९ यही चलता रहा | डाकयार्ड कॉलोनी के कई रहिवासियों ने, जो उस दौरान नौसेना अस्पताल गए थे, इस बात का अनुभव किया था | तीन महीने तक मरीजों की सेहत से खिलवाड़ होता रहा |

मैं डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के निवासियों से कहूँगा कि वो नौसेना के अस्पताल से कभी दवाई न ले | भले पैसा खर्चा हो, प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराये | नौसेना के अधिकारी पैसे के लिए कब हमें बेच दे, कब जहर पिला दे, इसका कोई अंदाजा नहीं |

( लेख पूरा नहीं है, अगले भाग का इंतज़ार करें | )

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])