पठान गैंग की सहायता से शिवसेना नेता ने किया पवई के फूटपाथ पर कब्जा, पुलिस और महानगरपालिका कार्रवाई करने मे असमर्थ

जामराज मोमिन खान उर्फ मुक्का भाई शिवसेना नेता दशरथ घाड़ी के साथ
जामराज मोमिन खान उर्फ मुक्का भाई शिवसेना नेता दशरथ घाड़ी के साथ

मेरे पिछले लेखों द्वारा मैनें आप लोगों को बताया था कि किस तरह शिवसेना नेता दशरथ घाड़ी ने आरे के जंगल को डम्पिंग ग्राउन्ड बनाकर और वहाँ गैरकानूनी निर्माण कार्य कर के करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए हैं | दशरथ घाड़ी शिवसेना के महाराष्ट्र राज्य माथाड़ी आणि जनरल कामगार सेना का संयुक्त सचिव है | यदि आपने मेरे उन लेखों को न पढ़ा हो तो यह रहे लिंक :

आरे बचाओ के नाम पर मुंबई वासियों के साथ धोखा, शिवसेना नेता ने बनाया आरे को डम्पिंग ग्राउंड

भू माफिया शिवसेना नेता द्वारा आरे की जमीन पर गैरकानूनी कब्जा, आरे बचाओ के नाम पर एक और धोखा

इस लेख द्वारा मैं आपको बताऊँगा कि शिवसेना नेता दशरथ घाड़ी ने आरे के अंदर ही नहीं, उसके बाहर भी अपनी आपराधिक गतिविधियाँ जारी रखी है। इस विडिओ मे आपको फूटपाथ पर जो दर्जन भर झोंपड़े दिख रहे हैं , इसे बनाया है पठान गैंग के सदस्य जामराज मोमिन खान उर्फ मुक्का भाई ने इस जगह का पूरा पता है : Adjacent to L&T gate no 3, infront of Milind Nagar, Powai, Mumbai

ऊपर दिए गए विडिओ को ध्यान से देखिए | ब्रिज के नीचे से जीतने बने झोंपड़े दिख रहे है, सब जामराज मोमिन खान ने बनाया है। ऐसे सैकड़ों झोंपड़े उसने चाँदीवली, गौतम नगर, भीम नगर, फ़िल्टर पाड़ा और मोरारजी नगर मे भी बनाए है। यह झोंपड़े 15-20 लाख मे बिकते हैं । मेरे अन्य लेखों में मैं उन जगहों की फोटो और विडिओ भी पब्लिश करूँगा। विडिओ के अंत मे, जहाँ कैमरा फोकस किया गया था, वो जामराज मोमिन खान का अड्डा है। वही बैठकर वो शिवसेना नेता दशरथ घाड़ी के लिए पैसे की वसूली करता है। दशरथ घाड़ी के लिए कन्नन चिन्ना दुराई जो काम आरे के अंदर करता है, वही काम जामराज मोमिन खान आरे के बाहर के इलाकों मे करता है।

जामराज मोमिन खान पवई मे सक्रिय पठान गैंग का सदस्य है। इस गैंग की मुखिया उसकी बहन फरीदा है जो स्थानीय लोगों के बीच लेडी डॉन के नाम से जानी जाती है। इस गैंग के सदस्यों पर कितने मामले चल रहे हैं उसकी गिनती मुश्किल है। हफ्ता वसूली, ड्रग्स बेचना, जमीन पर गैरकानूनी कब्जा जैसे अनगिनत मामले हैं जिसमे यह गैंग शामिल है। अभी-अभी दो दिन पहले इस गैंग के दो सदस्यों को हत्या के जुर्म मे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस गैंग का पवई और आस-पास के इलाकों मे इतना आतंक है कि इनका नाम सुनते ही पवई पुलिस अपने कान बंद कर लेती है। अब इन्हें शिवसेना नेता दशरथ घाड़ी का आशीर्वाद भी प्राप्त है। शिवसेना की सरकार भी है। इसलिए पठान गैंग की हिम्मत अब सातवे आसमान पर है। पवई पुलिस उन पर कोई कार्रवाई करने से पहले पचास बार सोचती है।

जामराज मोमिन खान उर्फ मुक्का भाई को शिवसेना ही नहीं काँग्रेस के नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है। ऊपर दिए विडिओ को देखिए। इसमें जामराज मोमिन खान काँग्रेस नेता सुभाष शेरेकर के साथ हिजड़ों के नृत्य मे उन पर पैसा उड़ा रहे है। सुभाष शेरेकर अंधेरी तालुका, वार्ड क्र 121 के ब्लॉक अध्यक्ष है। उनकी भी पठान गैंग से अच्छी दोस्ती है और इन अनाधिकृत झोंपड़ों के निर्माण से उनको भी हिस्सा मिलता है।

ऐसा नहीं है कि पुलिस या महानगरपालिका बिल्कुल कार्रवाई नहीं करती। विडिओ मे दिखाए झोंपड़ों को शुरुवात मे 2 बार तोड़ा गया। उसके बाद पेपर पर पुलिस और महानगरपालिका की जिम्मेदारी खत्म हो गई। आपके और हमारे लिए बनाया फूटपाथ दशरथ घाड़ी और मुक्का भाई की सेवा मे समर्पित हो गया।

आज के लिए इतना ही | आगे के लेखों मे पठान गैंग के कारनामों को पूरे विवरण के साथ बताऊँगा।

पवई के पठान गैंग की मुखिया, लेडी डॉन फरीदा (बाईं तरफ)
पवई के पठान गैंग की मुखिया, लेडी डॉन फरीदा (बाईं तरफ)

आरे बचाओ के नाम पर असामाजिक तत्वों द्वारा मुंबई का विकास रोकने की साज़िश

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आप में से कई लोगों ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया तथा समाचारपत्रों द्वारा आरे बचाओ मुहिम के बारे में सुना होगा | जंगल को बचाने के नाम पर खूब बयानबाज़ी और प्रदर्शन हो रहा है | ऊपरी तौर पर देखने पर यह लगता है कि यह लोग मुंबई के शुभचिंतक है | शहर का जंगल बचाने के लिए मेहनत कर रहे हैं | लेकिन यदि मामले का गहराई से अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि पूरा आंदोलन एक छलावा मात्र है | इसमें शामिल तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता मुंबई का भला करने के बजाय उसका नुकसान ज्यादा कर रहे हैं | 

हम सब जानते हैं कि मुंबई की इस विशाल आबादी की वजह से हमारे यातायात के साधनों पर प्रचंड दबाव है | हर वर्ष औसतन दो हजार लोग सिर्फ और सिर्फ लोकल ट्रेन की दुर्घटनाओं में मर रहे हैं | इसके अलावा तीन हजार से चार हजार लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है | इन आंकड़ों से आप लोग साफ़ समझ सकते हैं कि हम लोगों को यातायात के नए साधनों की कितनी ज्यादा जरुरत है | हमकों जल्दी से जल्दी शहर में यातायात के नए साधनों का निर्माण करना ही करना है | 

ऐसे में मेट्रो रेल का प्लान बना | बाकी सरकारी कामों की तरह इसकी रफ़्तार भी काफी धीमी रही | जैसे-तैसे अँधेरी से घाटकोपर के बीच एक लाइन का काम पूरा हुआ | अभी चार और लाइन का काम चल रहा है | लेकिन जबसे यह मेट्रो का काम शुरू हुआ है, तब से इसपर कुछ तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ग्रहण लगाना शुरू कर दिया | कुछ कार्यकर्ताओं ने कोर्ट में केस कर दिया कि मेट्रो को काम दिन में नहीं होना चाहिए, इससे यातायात बाधित होता है | कुछ ने केस कर दिया कि मेट्रो का काम रात में नहीं होना चाहिए क्योंकि शांति भंग होती है | सोचिये इन कार्यकर्ताओं के मूर्खता की हद कितनी है ! मेट्रो का काम दिन में नहीं, रात में नहीं, तो होगा कब ? इस चक्कर में एक वर्ष काम अटका रहा | 

वहाँ से मामला निकला तो इन तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक और शिगूफा छेड़ दिया कि आरे में मेट्रो कारशेड न बनाया जाए | मेट्रो कारशेड तथा अन्य कारणों से वहाँ २७०० पेड़ काटने पड़ रहे हैं | उसी मुद्दे को भावनात्मक तूल देकर वो मेट्रो कारशेड का काम रुकवाने पर तुले हुए हैं | कारशेड आरे में नहीं तो कहाँ बनाया जाए, इसका उन मूर्खों के पास कोई जवाब नहीं है | वो सिर्फ और सिर्फ आरे में हो रहे मेट्रो कारशेड को रुकवाना चाहते हैं | उनसे ज्यादा जोर देकर पूछो कि आरे में नहीं तो कहाँ कारशेड बनाया जाए ? तो उनमें से कुछ दबी जबान में कहते हैं कि कांजुर मार्ग खाली जमीन पर कारशेड बनना चाहिए | पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि यह तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता कांजुर मार्ग की जिस जमीन पर कारशेड बनाने के लिए कह रहे हैं वो व्यक्तिगत संपत्ति है | उसपर कोर्ट में केस चल रहा है | कोर्ट ने उसपर किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगाया हुआ है | यदि सरकार कारशेड के लिए वो जमीन लेने भी जाए तो भी दो से तीन साल लग जाएँगे | ऊपर से पांच हजार करोड़ से ज्यादा का मुआवजा देना पद जाएगा | इसके अलावा आरे में कारशेड बनाने के लिए जो ग्यारह हजार करोड़ खर्च हुआ है, वो भी बर्बाद समझिये | 

आरे बचाओ के नाम पर यह मुर्ख कार्यकर्ता चाहते हैं कि सोलह हजार करोड़ फूँक दिए जाएँ | २७०० पेड़ की बजाय दूसरी जगह पाँच हजार पेड़ लगाकर दस वर्ष उसकी देखभाल करने पर भी सौ करोड़ खर्च नहीं होगा | लेकिन ऐसा करने से इन नकली कार्यकर्ताओं को नाम और शोहरत कहाँ से मिलेगी ? इनके अहंकार की संतुष्टि कैसे होगी ? इसलिए यह लोग अड़े हैं कि किसी भी तरह कारशेड का काम रुकवाया जाए | मेरी सरकार से प्रार्थना है कि ऐसे नकली समाजिक कार्यकर्ताओं के फेर में न पढ़कर जल्दी से जल्दी मेट्रो का काम शुरू करे ताकि हमारे यातायात के साधनों पर बोझ कम हो | आज के लिए इतना ही | फिलहाल इतना ही, लेख बड़ा हो रहा है | अगले लेख में इन नकली समाजिक कार्यकर्ताओं की मूर्खता का और विस्तार से पर्दाफ़ाश करूँगा |