पी एम सी बैंक डूबने के बाद कितना सुरक्षित है आपका पैसा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में !

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आपके और मेरे जैसे लाखों मध्यमवर्गियों के लिए अभी कुछ दिनों पहले एक बड़ी बुरी खबर आयी है | देश की सबसे सफल को ऑपरेटिव बैंकों में से एक पीएमसी बैंक लगभग डूबने के कगार पर है | लाखों लोगों की जिंदगी भर की कमाई इस बैंक में थी जो वापस मिलना लगभग नामुमकिन सा हो गया है | हर दिन पीएमसी बैंक से जुडी कोई न कोई नयी जानकारी सामने आ रही है और यह लगभग निश्चित हो गया है कि बैंक अब दिवालिया हो जायेगी | अब ऐसे में गरीबों के पैसे का क्या होगा यह भगवान को ही मालूम है | सरकार बैंक की जिम्मेदारी वापस लेते हुए लोगों को उनके पैसे की गारंटी देगी या नहीं, पता नहीं |

मुंबई में ऐसा हाल हो गया है कि लोग ऑपरेटिव बैंक में पैसा रखने से डरने लगे हैं | जिन ऑपरेटिव बैंकों के बारे में अब तक कोई गलत खबर नहीं है, लोग वहाँ से भी पैसा निकाल रहे हैं | कई ऑपरेटिव बैंकों के पास पैसे की इतनी कमी हो गई है कि वो अगले दस दिन तक पैसा नहीं दे सकते | इसका मतलब यह कि यदि कल को इन ऑपरेटिव बैंक के किसी खाताधारक को इमरजेंसी में पैसे की जरुरत पड़ गयी तो भी उसे पैसा नहीं मिलेगा | लोगों को ऑपरेटिव बैंक के नाम से डर लगने लगा है |

पीएमसी बैंक के बारे में सोचते-सोचते मेरे ध्यान में नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक आया | यह भी पीएमसी की तरह कोऑपरेटिव बैंक है | आपको तो पता है कि इस बैंक के मैनेजमेंट पर लंबे समय से नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों (NEU) का कब्जा है | पी.बी. पाणिग्राही पूरे बैंक पर कुंडली मार कर बैठे हुए हैं | समय-समय पर अपने फायदे और यूनियन के फायदे के लिए बैंक का गलत तरीके से उपयोग करने का आरोप इन पर लगता रहा है | नोटबंदी के समय जिस तरह खुलेआम नौसेना अधिकारियों के काले धन को सफ़ेद करने की कोशिश की गई थी वो सबको याद होगा | बैंक के पदाधिकारी भले कितनी भी सफाई दे, लेकिन आपको और हमको तो पता ही है कि इसी काले धन के मामले की वजह से उस समय नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट रहे संजीव काले का करियर बरबाद हो गया |

नेवल डाकयार्ड कोऑपरेटिव बैंक के पदाधिकारी जब नौसेना को इस बात का भरोसा नहीं दिला पाए कि नोटबंदी के समय के आरोप झूठे थे, तो हम कैसे मान लें ? यदि आरोप सही नहीं थे तो संजीव काले की दुर्गति क्यों हुई ? ज़रा से कमीशन के लिए, नेवल मैनेजमेंट को खुश करने के लिए पूरे बैंक को रिस्क पर डाल दिया गया था | सोचिये उस समय यदि RBI जाँच के लिए बैंक सील कर देती तो ? या प्रवर्तन निदेशालय की रेड पड़ जाती तो ? पैसा तो आपका और हमारा अटकता | भले कुछ दिन के लिये ही सही, पर अटक तो जाता |

नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक और संजीव काले का संबंध डाकयार्ड कर्मचारियों से छुपा नहीं है | कुछ वर्ष पहले यूनियन का एक पदाधिकारी अपने रिटायरमेंट के कार्यक्रम में संजीव काले के पैर छूकर धन्यवाद देता है कि आपकी मेहरबानी से मेरा बेटा नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक में नौकरी पर लग गया | अब बताइये संजीव काले को धन्यवाद देने का क्या मतलब है ? नियम के हिसाब से तो बैंक में नौकरी लगवाने में काले का कोई संबंध नहीं होना चाहिए | लेकिन संजीव काले नेवल एम्प्लाइज यूनियन के पदाधिकारी पी.बी. पाणिग्राही की सहायता से वहाँ लोगों को गैरकानूनी रूप से नौकरी पर भी लगवाते और अपना काला धन सफ़ेद भी करवाते थे |

ऐसे में मुझे तो नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक के मैनेजमेंट पर बिलकुल भरोसा नहीं रहा | कुछ दिनों पहले तक सबको लगता था कि पी एम सी बैंक से बढ़िया बैंक कोई नहीं | रोज बारह घंटे, साल के ३६५ दिन काम करनेवाला इकलौता बैंक | अब पता चला कि मैनेजमेंट अंदर ही अंदर सब सत्यानाश कर चुकी है | नेवल डाकयार्ड को ऑपरेटिव बैंक का मैनेजमेंट भी सज्जन लोगों के हाथ में नहीं है | पता नहीं अंदर क्या चल रहा हो ? २-३ दिन में अपने परिवार मित्रों से चर्चा कर, सारे अकाउंट बंद करके अपना-अपना पैसा हम लोग बाहर निकाल रहे हैं | आप लोग अपना-अपना सोच लें |

नौसेना ने की डाकयार्ड कर्मचारियों के बच्चों को घर से निकालने की तैयारी

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डाकयार्ड के कायर और मुर्ख कर्मचारियों के बुरे दिन कभी भी शुरू हो सकते हैं | मै कई बार लिख चूका हूँ कि ये सफ़ेद वर्दी वाले हंस के भेष में छुपे बगुले हैं जो सिर्फ लूटना जानते हैं | पर मुर्ख डाकयार्ड कर्मचारी व उनके भ्रष्ट यूनियन प्रतिनिधि अपना सिर रेत में छुपाकर बैठे हैं | नतीजा एक-एक कर सामने आ रहा है |

डाकयार्ड कॉलोनी की जमीन को गैरकानूनी तरीके से अपनी पत्नी के मित्र किरण मोरे को तोहफे में देनेवाले भारतीय नौसेना के कलंक एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी के आशीर्वाद से डाकयार्ड कर्मचारियों के बच्चों को घर से निकालने की तैयारी हो चुकी है |

नौसेना ने पवई तथा उल्हासनगर के डाकयार्ड कर्मचारियों के लिए यह आदेश जारी कर दिया है कि वो अपने पुत्र तथा पुत्रियों को अपने घर पर नहीं रख सकते यदि वे विवाहित हो या २५ वर्ष पूरे कर चुके हो | वैसे तो यह नियम पहले भी था पर केवल एम.ई.एस. के कर्मचारियों को परेशान करने के लिए ही प्रयोग किया जाता था | अब डाकयार्ड कर्मचारियों के बच्चों पर भी यह नियम लागू होगा | फिलहाल तक डाकयार्ड कर्मचारियों के बच्चों को २५ वर्ष पूरे होने पर भी एक वर्ष के लिए कॉलोनी का गेट पास बनाकर मिल जाता था | अब से बनकर नहीं मिलेगा | घरों में नौसेना के डाकू जब शराब पीकर रात को ग्यारह-बारह बजे चेकिंग के लिए आएँगे तो अपने बच्चों को छुपाते फिरना |

मैं नौसेना के खिलाफ अपनी आवाज दुबारा मुखर करने जा रहा हूँ | डाकयार्ड के सारे यूनियन वाले तो नौसेना प्रशासन की गोद में जा बैठे हैं | लाल बावटा का पी.बी. पाणिग्राही तो दिन रात एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले के तलवे चाट रहा है क्योंकि उसकी जोरदार कमाई चल रही है | लाल बावटा पूरी तरह हफ्ता वसूली यूनियन बन चुकी है | कॉलोनी में होनेवाले गलत कामों को न रोकने के बदले उसके पदाधिकारी पैसा ले चुके हैं | उनसे कोई उम्मीद नहीं | बाकी यूनियन वाले डरकर अपने घर में दुबक कर बैठे हैं |

डाकयार्ड कमर्चारियों के लिए अब निर्णय का समय आ चूका है | या तो वो डाकयार्ड प्रशासन से खुद लड़ना सीख ले या तो फिर कोई ईमानदार और किसी भी हालत में डाकयार्ड प्रशासन से समझौता न करनेवाला कोई नया यूनियन का नेता ढूँढे | नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब कमांडर मुजावर, कमांडर रामचंद्र, एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जैसे भ्रष्ट लोगों का लात डाकयार्ड कर्मचारियों के पेट पर पड़ेगा |

डाकयार्ड कॉलोनी के मंदिरों पर नेवल डाकयार्ड प्रशासन की काली नजर

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आप लोग भी सोच रहे होंगे कि तीन-चार दिन हो गए, इ-भारत में कोई नया लेख क्यों नहीं आया ? तो लीजिए आज आपके सामने एक नई पेशकश है | पिछले दो लेख कॉलोनी के महाठग गोपाल और बिरेन्द्र को समर्पित थे | इस बार उन कुकर्मियों को छोड़कर हम पुराने ढर्रे पर वापस आते हैं | आप तो जानते हैं कि हमारा नेवल डाकयार्ड प्रशासन आए दिन मुर्खता से भरे निर्णय लेता रहता है | मुझे उम्मीद है आपने मेरा लेख — मुर्खता की हद : डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में फॅमिली एकोमोड़ेशन के सामने बैचलर एकोमोड़ेशन बनाना जरूर पढ़ा होगा | न पढ़ा हो तो उस लिंक पर क्लिक करके जरूर पढ़े | इस बार उन्होंने क्या नई मुर्खता की है वो सुनें |

हमारे नेवल डाकयार्ड यूनियन के जितने नेता हैं, सब एक से बढ़कर एक चापलूस हैं | उनमें से एक भी ऐसा नहीं है जो डाकयार्ड प्रशासन से श्रमिकों के हित के लिए लड़े | हर नेता कामगारों के सामने बड़ी-बड़ी डींगे हाँकता है और वहाँ नौसेना अधिकारियों के सामने जाकर लेट जाता है | सबमें होड़ लगी है कि कौन बड़ा चापलूस बनेगा | हर यूनियन का नेता अधिकारी के सामने जाता है और दूसरे यूनियन के नेताओं की बुराई करना शुरू कर देता है | उनकी जड़ खोदने में लगता है | वो अधिकारी को सिर्फ वही और उतनी बात बताता है जिससे उसके विरोधी की नाव डूब जाए | सब एक दूसरे के कपडे फाड़ रहे हैं | यूनियन के एक ऐसे ही नेता जिनके भूतकाल में खूब कपडे फट चुके हैं उन्होंने नौसेना अधिकारियों के कान में यह बात डाल दी कि डाकयार्ड कॉलोनी में जितने मंदिर हैं, सबके चढ़ावे में खूब पैसा आता है | मंदिर जिन-जिन लोगों के नियंत्रण में हैं वो लोग इस पैसे से खूब ऐश कर रहे हैं | यह वाक्य सुनते ही हमारे नौसेना अधिकारियों की कौड़ी जैसी आँखें फूल के पकौड़े जितनी हो गई | कान के कच्चे उन अधिकारियों ने इस बात पर तुरंत भरोसा भी कर लिया | अब उन्हें ये बर्दास्त नहीं हुआ कि नौसेना की जमीन पर उनके अलावा कोई और पैसा कमा ले और उन्हें हिस्सा भी न मिले !!! तुरत-फुरत में उन्होंने अपने खुराफाती दिमाग को काम पर लगाया | यूनियन के अपने चापलूसों को भी काम पर लगाया और पूरी योजना तैयार कर ली |

पाँच दिसंबर २०१६ को यूनियन और नौसेना की मीटिंग हुई | मीटिंग में शामिल यूनियन के नेताओं के नाम देखिये : रविन्द्र यादव, ऐश्वर्या रतुरी, बी पी कोयंडे , हरीश शेट्टी, पी बी पाणिग्राही, ऍफ़ वाय कलावे आदि आदि आदि | मीटिंग के दौरान प्रशासन ने यह प्रस्ताव पेश किया कि कॉलोनी के मंदिरों में चढ़ावे के तौर पर जो पैसा आता है उसके बेहतर इस्तेमाल के लिए एक समिति बनाई जाए | इस समिति की अध्यक्षता कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर करेंगे | अर्थात मंदिर में चढ़ाया जानेवाला पैसा अब सीधे समिति के पास जाएगा | सारे यूनियन के नेता इस बात पर तुरंत सहमत हो गए | वैसे भी उन चूहों में इतनी हिम्मत ही नहीं है कि प्रशासन की मर्जी के विरुद्ध एक शब्द कहे | और इस मामले में तो आदेश सीधे हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) की तरफ से आया था | तो सब यूनियन के नेताओं ने हाँ में हाँ मिलाने में ही समझदारी मानी |

मीटिंग का निष्कर्ष ये निकला कि अब से हमारे कॉलोनी के मंदिर डाकयार्ड प्रशासन चलाएगा | मंदिरों के दानपेटियों की चाभी प्रशासनिक अधिकारी रखेंगे | मंदिरों में जो भर-भर के पैसा आता है उसका इस्तेमाल कर के मंदिरों की बढ़िया देखभाल की जाएगी | जितनी कुशलता से बेतवा युद्धपोत का रखरखाव किया गया था, उतनी ही कुशलता से मंदिरों का भी रखरखाव किया जाएगा | मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा कॉलोनी के सहायक सुरक्षा अधिकारी चीमन लांबा उर्फ़ सुपरमैन को दिया गया है | उन्हें यह विशेष आदेश है कि कप्तान संधू को मंदिर के आस-पास फटकने तक न दे, वो किसी भी समय कोई भी कांड कर सकते हैं | गोपाल और बिरेन्द्र को यह अधिकार है कि वो जब चाहे तब, कॉलोनी के किसी भी मंदिर को किराए पर दे सकते हैं और उसका पैसा अपनी जेब में डाल सकते हैं | हो सकता है चार-पाँच बांग्लादेशियों को बुलाकर, उन्हें मंदिरों में पुजारी भी नियुक्त कर दिया जाए (आपको तो पता है हमारे नौसेना के अधिकारियों को बांग्लादेशी बहुत प्रिय हैं) | डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) के नेतृत्व में लिए गए इस क्रांतिकारी निर्णय से मैं तो बहुत खुश हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है कि डाकयार्ड कॉलोनी के लोग भी इस निर्णय की भूरी-भूरी प्रशंसा करेंगे |

(बस मुझे यहाँ एक बात का भय है | जब डाकयार्ड कॉलोनी , कांजुर मार्ग के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी  ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale )को सच्चाई पता चलेगी, तब क्या होगा ? कॉलोनी के किसी भी मंदिर की आरती और दानपेटी में कुल मिलाकर इतना पैसा भी नहीं आता कि वहाँ ठीक से साफसफाई कराई जा सके | यह बात काले जी को पता चले और वो अपने खबरची को झूठी खबर देने के कारण पीट-पीटकर दोनों पैरों से लंगड़ा बना दे  तो …. !!! हे भगवान, दया करना उस खबरची पर  |)

इस महत्त्वपूर्ण निर्णय का श्रेय संजीव काले जी के साथ साथ यूनियन के नेता पी बी पाणिग्राही को भी जाता है | उन्होंने मीटिंग के पहले ही प्रशासन को इस बात का आश्वासन दे दिया था कि वो और उनकी यूनियन पूरी तरह इस प्रस्ताव का समर्थन करेगी | मंदिरों की चाभियाँ जो आज कॉलोनी के तुच्छ लोगों के हाथ में हैं, वो नौसेना के महान अधिकारियों के हाथ में जाएगी | ऐसा श्री पी बी पाणिग्राही जी के कारण ही संभव हो सका है | ऐसे कुशल नेता को हम सबको ह्रदय से धन्यवाद देना चाहिए | मैं खुद यह बात सबको बताऊँगा और आप सब से भी यह प्रार्थना करूँगा कि आप लोग कॉलोनी के हर एक व्यक्ति को यह बात बताएँ | कॉलोनी के ओडिशा समुदाय के व्यक्ति तो यह बात सुनकर ख़ुशी से फूले नहीं समाएँगे | शिवमंदिर उनके हाथों से निकलकर, डाकयार्ड प्रशासन के कुशल हाथों में जानेवाला है, वो भी उन्ही के नेता के कारण, इससे बड़ी ख़ुशी की बात क्या होगी !! वाह-वाह !!!

Shri P. B. Panigrahi, Jindabad.
President,  NEU Jindabad.