कार्यकर्ताओं की अनदेखी और पैसे का घमंड ले डूबा चंदन शर्मा को, सुर्यानगर से पत्नी चुनाव हारी

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Chandan Sharma and Sudhir Singh

जैसा कि आप सब जानते हैं कल चुनाव के नतीजे का दिन था | कई लोगों को जीत की ख़ुशी मिली तो कईयों को हार का गम झेलना पड़ा | कई दिग्गज, जिन्हें कभी हराना असंभव माना जाता था, उन्हें भी हार का मुँह देखना पड़ा | ऐसे लोगों में से एक है वार्ड क्र. १२० के राष्ट्रवादी कांग्रेस की उम्मीदवार चारु चन्दन शर्मा |

आप लोगों की जानकारी के लिए बता दूँ चारु शर्मा के पति चंदन शर्मा लंबे समय से पवई के नगरसेवक रहे हैं | उनकी लोकप्रियता का यह आलम था कि लोग कहते थे हाथी का पैर हिलाया जा सकता है पर चंदन शर्मा को पवई में हराया नहीं जा सकता | शर्मा जी भी खुद को किसी राजा से कम नहीं समझते थे | पैसे का जोर और लोकप्रियता दोनों उनके सर चढ़कर बोलता था | वो शायद भूल गए थे कि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता |

वक्त ने करवट बदला | उनका चुनाव क्षेत्र जिस विभाग में आता था उसमें परिवर्तन हुआ | पवई का काफी भाग उनके क्षेत्र से अलग हो गया और विक्रोली पश्चिम का सुर्यानगर उसमें जुड़ गया | उनका विभाग भी महिलाओं के लिए आरक्षित हो गया | इसलिए इस बार उन्होंने पार्टी से अपनी पत्नी को टिकट दिला दिया | पर मुख्य परेशानी यह थी कि इस बार का चुनाव क्षेत्र शर्मा जी के लिए काफी नया था | और इतने दिन आसानी से चुनाव जीतने के कारण चंदन शर्मा जी चुनाव लड़ने की कला भी भूल गए थे |

पार्टी से टिकट मिलते ही चंदन शर्मा जी ने सुर्यानगर में अपना जादू चलाना शुरू किया | पैसे का जोर दिखने लगा | जिस तरह गुड को चींटियाँ घेर लेती है, उसी तरह सुर्यानगर के कई तथाकथित राजनैतिक कार्यकर्ताओं ने चंदन शर्मा को घेर लिया | शर्मा जी ने पैसा भी दोनों हाथों से बहाया | नतीजा – बड़ी-बड़ी रैलियाँ निकलने लगी | शर्मा जी को लगा कि उन्होंने मैदान मार ही लिया | उन्हें यह बात समझ में नहीं आई कि जिन लोगों को वो साथ में लेकर घूम रहे हैं उनकी समाज में छवि अच्छी नहीं है | उनके बोलने पर तो उनके घरवाले भी वोट नहीं देंगे, दूसरों की तो छोडिये |

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Amjad Ali

सुर्यानगर में राष्ट्रवादी कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में सुधीर सिंह और अमजद अली का नाम गिना जाता है | अपनी स्वच्छ छवि के कारण ये दोनों स्थानीय लोगों में काफी लोकप्रिय हैं | उन्होंने देखा कि चंदन शर्मा का व्यवहार पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मानजनक नहीं है | वो ऐसे लोगों से घिरे रहते हैं जिनका पार्टी से अब तक कोई लेना-देना नहीं था | जो सिर्फ पैसे की उम्मीद से चंदन शर्मा से जुड़े थे | उन्होंने यह बात शर्मा जी को समझाने की कोशिश की पर कोई लाभ नहीं हुआ | उनके घमंड ने उनका कान बंद कर रखा था, उन्होंने एक न सुनी | चंदन शर्मा अपनी हरकतों से बार-बार यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि उन्हें पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं की कोई जरूरत नहीं है | वो अपने पैसे के दम पर चुनाव जीत लेंगे |

चंदन शर्मा के इस व्यवहार से नाराज होकर सुधीर सिंह और अमजद अली ने चुनाव में उनका पूरी तरह बहिष्कार कर दिया | दोनों एक बार भी चंदन शर्मा के प्रचार के लिए नहीं उतरे | अन्य स्थानीय कार्यकर्ता भी सुधीर सिंह से सहमत थे पर उन्होंने सीधे तौर पर चंदन शर्मा से कुछ नहीं कहा | वो मूक रूप से असहयोग करते रहे | कोई समझदार व्यक्ति होता तो कार्यकर्ताओं के ठंडे व्यवहार से स्थिति भाँप लेता, पर पैसे का घमंड चंदन शर्मा जी को न कुछ देखने दे रहा था और न सुनने |

इन सब का कुल मिलाकर जो नतीजा होना था वही हुआ | वार्ड क्र. १२० से चारु चंदन शर्मा चुनाव हार गई, वो भी एक बड़े अंतर से | शर्मा जी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वो इतने बड़े अंतर से चुनाव हार सकते हैं | पर उनके लिए यह बहुत बड़ा सबक है | पैसे के दम पर छुटपूंजें अपराधियों और बेरोजगारों की सेना लेकर घूमने से चुनाव नहीं जीता जाता | वर्षों से पार्टी के साथ ईमानदारी से जुड़े कार्यकर्ताओं की अनदेखी करना बहुत बड़ी बेवकूफी है | उम्मीद है चंदन शर्मा जी इस बात को अगले चुनाव तक याद रखेंगे |