नौसेना के भ्रष्ट कमांडर रामचंद्र की डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग को नए तरीके से लूटने की तैयारी

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वैसे तो हमारी नौसेना में भ्रष्टाचारियों की कोई कमी नहीं है | सब एक से बढ़ कर एक भरे हुए हैं | किसी ने भ्रष्टाचार में ग्रेजुएशन किया है तो किसी ने पीएच.डी. | अब हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी को ही लीजिये | डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग की जगह अपने मित्र किरण मोरे को स्पोर्ट्स अकादमी के नाम पर तोहफे में दे रहे हैं | उसके लिए उन्हें कितना अपमान सहना पड़ा ! पर काले जी इतनी मोटी चमड़ी के हो गए हैं कि इतने अपमान के बावजूद भी अपने निर्णय पर अड़े हुए हैं |

उन्ही की तरह के, पर पद में उनसे काफी छोटे एक और नौसेना के अधिकारी हैं, कमांडर रामचंद्र | ये कमोडोर विवेक अग्रवाल के मातहत, वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं | कमांडर रामचंद्र दूसरों पर जातिविषयक टिप्पणी करने के लिए कुख्यात हैं | भ्रष्टाचार में इतने डूबे हुए हैं कि इन्हें डाकू कहना डाकुओं का भी अपमान करना है | कॉलोनी में टयूसन और कोचिंग क्लास के लिए जगह देते समय बड़ी धाँधली कर रहे थे और रंगे हाथों पकडे गए (अगले लेख में इस विषय में विस्तार से लिखूँगा ) | उस समय काफी अपमानित भी हुए थे किंतु जहाँ पैसा दिखता हो वहाँ कमांडर साहब को मान-अपमान की कोई परवाह नहीं | उस समय मलाई न खा पाने की कसर कमांडर साहब ने दूसरी तरह से पूरी की |

जैसा कि आप सब जानते हैं कि हमारी कॉलोनी में टयूसन और कोचिंग क्लास के लिए नौसेना ने दो कमरे दिए हैं | उसमें से एक कमरा दिया गया है अंतर्यामी जी को और दूसरा गुरु क्लासेज को | आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ने पहले ६ कमरे बनाने का निर्णय लिया था | तीन कमरे अंतर्यामी जी को और तीन कमरे आस्था ट्युटोरियल्स को | पर आस्था ट्युटोरियल्स ने नौसेना जैसी भ्रष्ट संस्था से संबंध न रखने का निश्चय किया | साथ ही नौसेना की इज्जत तार-तार करते हुए उनके भ्रष्टाचार की सच्चाई उजागर कर दी तो काले जी ने बहुत अपमानित महसूस किया और अपनी योजना बदल दी | अब काले जी ने छः के बदले सिर्फ दो कमरे बनवाये | एक कमरा अंतर्यामी जी को दिया गया और दूसरे कमरे के लिए कोचिंग क्लास खोजने का काम कमांडर रामचंद्र को दिया गया |

वैसे कोचिंग क्लास के आवेदकों में तीन और नाम थे | दूसरा कमरा उन में से किसी एक को दिया जा सकता था | पर उनमें से कोई भी कमांडर रामचंद्र जी का परिचित न था | इसलिए उन्होंने गुरु जी क्लास से संपर्क किया | उन्हें कॉलोनी में सस्ते दाम पर जगह दिलाने और अन्य तरह से सहयोग का वादा किया | बदले में विद्यार्थियों से मिले कुल फीस में अपना १५% कमीशन निश्चित किया | गुरु जी क्लास वाले भी राजी हो गए | राम ने मिलाई जोड़ी एक अँधा – एक कोढ़ी | फिर क्या था, बातों-बातों में दूसरा कमरा गुरु जी क्लास को दे दिया गया |

गुरु जी क्लास वाला भी रंगा सियार निकला | उसने देखा कि मजदूरों की कॉलोनी है, IIT का नाम सुनते ही सब चमत्कृत हो जाते हैं | इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए उन्होंने झूठे विज्ञापनों की झड़ी लगा दी | कॉलोनी में दर्जनों जगह बैनर लग गए कि कॉलोनी में गुरु जी क्लास खुल रहा है, जिसमें सिखाने वाले शिक्षक IITians होंगे | पाँचवी से बारहवी तक CBSE की पढाई, ओलिंपियाड की तैयारी, IIT के लिए मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास (पर्सनालिटी डेवलपमेंट), यह सब उस एक कमरे में छः – सात घंटे में होने जा रहा है | अब आठ-आठ कक्षाएँ उस एक कमरे में ६-७ घंटों के भीतर कैसे चलेंगी, यह तो भगवान को ही पता है | और तो और इसके लिए अभिभावकों को दूसरे कोचिंग क्लास की तुलना में दुगुनी या ढाई गुना फीस देनी होगी |

मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि जितने भी शिक्षक गुरु जी क्लास में हैं, उनमें से एक भी IITian नहीं है | क्लास का मालिक या क्लास संभालने वालों में कोई एक IITian  हो सकता है पर सिखाने वालों में एक भी नहीं होगा | सारे शिक्षक औसत दर्जे के होंगे | अच्छा शिक्षक खुद का कोचिंग क्लास चलाएगा या तो फिर बड़े कोचिंग क्लास में पढ़ाएगा और खूब पैसा बनाएगा | वो इस टुच्चे से गुरू जी क्लास में क्यों पढ़ाएगा ? IIT तो छोडिये, गुरु जी क्लास के शिक्षकों में से किसी एक ने भी अपनी जिंदगी में कभी किसी ओलिंपियाड की परीक्षा पास की है क्या ? जो बच्चों को ओलिंपियाड का सिखाएँगे ? झूठ का जाल बुनकर कॉलोनी वासियों से पैसा ऐंठा जा रहा है | इस पैसे की रबड़ी बँटेगी तीन लोगों के बीच – कमांडर रामचंद्र, कमांडर मुजावर और गुरु जी क्लास | डाकुओं से कम नहीं हैं ये लोग |

वैसे तो कमांडर रामचंद्र जैसे जातिवादी और कमांडर मुजावर जैसे धर्मांध व्यक्ति की नौसेना में तो क्या हमारे समाज में भी कोई जगह नहीं होनी चाहिए | पर करे क्या ! समाज में जहर घोलनेवाले और समाज को लूटनेवाले ये लोग अच्छे-अच्छे पदों पर बैठे हैं | आप और हम इतने डरपोक बने बैठे हैं कि इनके खिलाफ आवाज भी नहीं उठाते | हम यदि हिम्मत कर ऐसे लोगों के विरुद्ध खड़े हो जाएँ ये लोग मुँह दिखाने लायक नहीं बचेंगे |

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