डाकयार्ड कॉलोनी के महाठग गोपाल और बिरेन्द्र ने इ-भारत को भिजवाई धमकी

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मेरा पिछला लेख : गोपाल कुमार : डाकयार्ड कॉलोनी का महाठग (Conman) — भाग एक काफी लोकप्रिय हुआ है | इसे पढ़कर कई लोगों ने खूब सराहा तो कुछ लोगों को बहुत मिर्ची लगी | कॉलोनी के दोनों कुकर्मी गोपाल और बिरेन्द्र ने भी लेख को पढ़ा | पढ़कर तिलमिला उठे और कमेंट वाले भाग में आकर धमकी देने लगे, वो भी कविता लिख लिख कर | लिखते हैं “बात निकली है ,तो दुर तक जाऐंगी ! आग तुमनें लगाई है,तो आँच तुम तक भी आऐंगी !!” और भी बहुत कुछ लिखा है | दोनों चिंदिचोरों को यह नहीं पता कि अपनी गीदड़ भभकियों से वो चूहे जैसे दिल वाले कमांडर मुजावर को डरा सकते हैं मुझे नहीं |

दोनों महामूर्ख मेरा जवाब ध्यान से पढ़ लें :
“अरे मूर्खों, यह ब्लॉग शुरू करने से पहले मुझे पता नहीं था क्या कि मुझ पर कितनी आँच आ सकती है ! जब मैं बिना नतीजे की परवाह किए एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट के विरुद्ध लिख सकता हूँ, तो तुम दोनों छछुन्दरों से डर जाऊँगा ? जब पूरे नेवल डाकयार्ड मैनेजमेंट से लड़ाई करने से मैं पीछे नहीं हटा, तो तुम दोनों किस खेत की गाजर- मूली हो ?

और जिसको संबोधन करके तुम दोनों ने यह कविता लिखी है, (वैसे कविता तो सिर्फ बिरेन्द्र ने लिखी है, गोपाल तो बस नाम का पढ़ा लिखा है | उसकी गिनती अनपढ़ गंवारों में होती है |) मुझे मालूम है एक वक्त वो तुम दोनों का माई-बाप हुआ करता था | अब तुम दोनों ने कप्तान संधू को अपना माई-बाप बनाया हुआ है | बिलकुल भरोसा रखो एक-दो दिन में तुम्हारे पुराने माई-बाप तक वो कविता पहुँच जाएगी |

और जहाँ तक तुम्हारे नए माई-बाप कप्तान संधू की बात है, उस मुर्ख को यह पता नहीं कि तुम दोनों के पापों की सजा वो भुगता रहा है | वैसे तो वो खुद भी कुकर्मी है पर उसकी जो दुर्गति हुई है वो सिर्फ और सिर्फ तुम दोनों की वजह से हुई है | यह बात तुम दोनों को अच्छे से पता है | कल तक जिस डाकयार्ड कॉलोनी को कुत्ता नहीं पूछता था आज उसकी खबर पर खबर छप रही है | किसी की उसमें अचानक इतनी दिलचस्पी क्यों आ गई ? जिस आदमी की दिलचस्पी आई है, उसकी दुश्मनी सिर्फ तुम दोनों से है | उसको तो बाकी किसी से मतलब ही नहीं है, न कप्तान संधू से, न कमांडर मुजावर से, न चीमन लांबा से और न ही कमांडर रामचंद्र | तुमने मुजावर का प्रयोग किया उसे परेशान करने, उसने मुजावर पर बन्दूक तान दी | तुमने लांबा का प्रयोग किया, लांबा भी आज तक भुगत रहा है | तुमने संधू को अपना माई-बाप बनाया, संधू की खबरें छपनें लगी | संधू पर कारवाई न होने की वजह से डाकयार्ड मैनेजमेंट की खबरें छपने लगी | अब कमांडर रामचंद्र का नंबर कब लग जाए, पता नहीं | (कैंटीन वाले कमोडोर साहब, आप लड़ाई में कूदने की मत सोचिएगा | खूब कपडे फटेंगे | )

उस अल्पबुद्धि संधू को लगता है कि उसके विरुद्ध साजिश हो रही है | उसे यह समझ नहीं आया कि उसे डाकयार्ड कॉलोनी के मच्छर भी नहीं जानते थे तो उसके खिलाफ कोई साजिश क्यों करेगा ? वो तो लांबा और मुजावर की तरह तुम दोनों और व्यक्ति विशेष की लड़ाई में कोलैटरल डैमेज है | जिस तरह आज मुजावर और लांबा उस दिन को पानी पी-पीकर कोसते हैं जब उन्होंने तुम्हारी बात मानकर उस व्यक्ति को परेशान किया और तुम्हारी दुश्मनी अपने सर ले ली, उसी तरह एक दिन संधू भी उस दिन को कोसेगा जिस दिन उसने तुम दोनों की शक्ल पहली बार देखी थी | वो दिन ज्यादा दूर नहीं है | जिस चंगू-मंगू का पुराण तुम दोनों लिखना चाहते हो, वो दोनों भी कोलैटरल डैमेज ही हैं | जिसने ABI में छपवाया उसे पता नहीं था क्या कि संधू के खिलाफ छपने पर चंगू-मंगू शहीद होंगे ? पता होने के बावजूद भी उसने छपवाया ही न ? उसकी तुम दोनों से दुश्मनी ही इतनी बड़ी है कि वो कुछ भी हो जाए पीछे नहीं हटेगा, अब चाहे तुम चंगू पुराण लिखो या मंगू पुराण |

तुम दोनों ने भी संधू का खूब फायदा उठाया | तुम दोनों के अलावा भी यूनियन के कई नेता पहुँच गए चापलूसी करने | उनको लगा यही मौका है जब प्रशासन का करीबी बन सकते हैं | सब जाकर वहाँ खबरें देने लगे | सब संधू के तलवे चाटने वहाँ कतार में खड़े हो गए | संधू को लगा कि उन जानकारियों के आधार पर वो बहुत कुछ कर लेगा | उसने करने की कोशिश भी की | अपने कप्तान होने की ताकत दिखाने लगा | नतीजा यह कि उसके खिलाफ सबूत जो कहीं दबे हुए थे वो सही जगह पहुँचने लगे | जैसे-जैसे उसने अपना पराक्रम दिखाया, वैसे-वैसे सबूतों का ढेर बढ़ने लगा | उसके कुकर्म और तुम दोनों के सुझावों ने मिलकर ऐसे हालत बना दिए हैं कि संधू और उनके वरिष्ठ अधिकारियों को रोज अपमान का घूँट पीना पड़ रहा है | नौसेना को इतनी बदनामी झेलनी पड़ रही है | कॉलोनी के लोग मजे ले-लेकर संधू के किस्से सुनाते हैं और हँसते हैं | मेरे जैसा आदमी जो एक समय एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट की ईमारत में कदम रखने की हिम्मत नहीं करता था, जिसे लगता था कमांडर कितना बड़ा आदमी होता है ! आज सब को धुन्न रहा है | मेरे जैसे कई और हैं, जिनकी हिम्मत अब खूब बढ़ चुकी है | डाकयार्ड प्रशासन को सबको झेलना पड़ेगा |

यह सारी मुसीबत तुम दोनों की खड़ी की हुई है | हर मामले में तुम दोनों हो, हर झगडा तुम्हारा है | तुम दोनों और व्यक्ति विशेष के बीच के महाभारत में हर कोई पिस रहा है | दोनों अच्छे से जानते हो मैं किसके बारे में बात कर रहा हूँ | कभी संधू को सच्चाई बताया ? परेशानी सिर्फ यह थी कि आज तक वो व्यक्ति मुझे सहयोग नहीं कर रहा था | जरूरी कागजात नहीं दे रहा था | उसे लगता था कि मैं सिर्फ नौसेना प्रशासन के विरुद्ध लिखता हूँ | इसलिए उसने मुझसे दूरी बनाए रखी थी | मैनें तुम्हारी प्रशंसा में जो लेख लिखा वो सिर्फ उस व्यक्ति के पढ़ने के लिए लिखा था | मुझे पूरी उम्मीद है कि उसने वो लेख पढ़ लिया होगा | अब तुम्हारी भेजी हुई कविता भी उसे भेज दूँगा | मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि जैसे ही उसे तुम्हारी और मेरी दुश्मनी का पता चलेगा, वो तुरंत मुझे सहयोग करना शुरू कर देगा | इससे तुम्हारे और नौसेना प्रशासन के खिलाफ बड़े-बड़े धमाके करने में मुझे काफी सहायता मिलेगी |

अब तुम दोनों कुछ भी कर लो, आग तो बुझेगी नहीं | आग एक जगह लगी भी नहीं है कि बुझ जाएगी | न वो व्यक्ति रुकेगा, न मैं और न ही तुम्हारे पुराने माई-बाप (जल्दी ही उनको तुम्हारी कविता पढ़ने मिलेगी |) तुमने धमकी में सही लिखा कि सबका इतिहास होता है | सबके इतिहास में १-२ गलतियाँ, १-२ काले अध्याय होते हैं | पर तुम दोनों के तो पूरे इतिहास पर कालिख पुती है | वैसे भी तुम २ हो और तुम्हारे खिलाफ २०२ | तुम्हारे विरुद्ध एक बात पूछो, लोग दस बताते हैं | लोग भरे बैठे हैं | बाकि मैं तो मुकाबले के लिए तैयार हूँ ही | मच्छरों हो जाए आमना-सामना |”

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