गोपाल कुमार : डाकयार्ड कॉलोनी का महाठग (Conman) — भाग एक

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गोपाल कुमार (दाएँ – right ) तथा बिरेन्द्र कुमार (बाएँ – left ) [ जी हाँ, वही कुप्रसिद्ध बिरेन्द्र कुमार जिसकी कप्तान संधू ने लड़की और शराब का बढ़िया इंतजाम करने के लिए तारीफ़ की थी | चोर-चोर मौसेरे भाई | ]
आज का लेख आपको डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई के महाठग गोपाल कुमार से परिचित कराएगा | उन्हें कॉलोनी का नटवरलाल भी कह सकते हैं | वैसे डाकयार्ड कॉलोनी के काफी लोग गोपाल कुमार के कर्मों से परिचित हैं किंतु मैं यहाँ विस्तार में बताने जा रहा हूँ | सबके लिए इस लेख में कोई न कोई नई जानकारी अवश्य होगी |

गोपाल कुमार लंबे समय तक (लगभग छः से सात वर्ष) डाकयार्ड कॉलोनी के सुरक्षा विभाग (Security Office) में काम करते रहे | वो सबको कहते फिरते थे कि “पाँच वर्ष में तो सरकार भी बदल जाती है, मुझे तो छः साल होने जा रहा है |” इस वाक्य से उनके कहने का तात्पर्य था कि कॉलोनी से किसीका भी तबादला (Transfer) हो सकता है पर उनका नहीं | लोगों को लगता भी ऐसा था | नौसेना के अधिकारियों, पुलिस, स्थानीय नेताओं तथा अपराधियों पर उनकी तगड़ी पकड़ थी | इन ६-७ वर्षों में गोपाल कुमार ने कॉलोनी में खूब कुकर्म किए, खूब माल बनाया | उसके कारनामों का थोडा बहुत ब्योरा मैं आप लोगों के सामने रख रहा हूँ :

१) गोपाल कुमार डाकयार्ड कॉलोनी में नौसेना अधिकारियों, राजनेताओं और पुलिस के सबसे मुख्य दलाल रहे हैं | कॉलोनी के ठेकेदारों, दुकानदारों तथा अन्य लोगों से पैसा इकठ्ठा कर उसे नौसेना के अधिकारियों तक पहुँचाना इनका मुख्य काम रहा है | पुलिसवालों को कानूनी या गैरकानूनी रूप से किसी व्यक्ति को कहीं ठहराना हो, या उन्हें शराब की जरूरत हो या उन्हें डाकयार्ड के कैंटीन से सस्ता सामान चाहिए, तो गोपाल कुमार उनका यह काम तुरंत कर देते थे | डाकयार्ड कॉलोनी की बंद पड़ी ईमारतें और कैंटीन पुलिसवालों की सेवा में सदा तत्पर रहती थी | कॉलोनी की अंदरूनी खबरें राजनेताओं तक मिनटों में पहुँच जाती थी | इसका श्रेय भी गोपाल कुमार को ही जाता है |

२) ठेकेदारों को कॉलोनी की जमीन और बंद पड़ी ईमारतें किराए पर देकर गोपाल कुमार ने खूब माल बटोरा | ईमारत U की पूरी पहली मंजिल, ईमारत K का कमरा क्र. ७, ईमारत क्र. २०२ के सामने का स्टोर, नाले और न्यू इंग्लिश स्कूल के बीच बने गोदाम, ईमारत क्र. ४२, ईमारत क्र. १७४ तथा ईमारत क्र. ६१ के कई कमरों को उन्होंने किराए पर दे रखा था | इनमें से कई मामलों के सबूत नेवल डाकयार्ड प्रशासन (प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर और कमोडोर विवेक अग्रवाल के पास है | (संजीव काले जी इस बात को नोट कीजिए |) कुल मिलाकर १००-१५० व्यक्ति गोपाल कुमार की मेहरबानी से डाकयार्ड कॉलोनी में गैरकानूनी ढंग से रहते थे | इसके बावजूद गोपाल कुमार पर कारवाई न होना, नौसेना अधिकारियों के इस भ्रष्टाचार में शामिल होने का सबसे बड़ा सबूत है |

इसमें सबसे कुख्यात मामला ईमारत U का है, जिसकी पहली मंजिल में गोपाल कुमार ने बांग्लादेशियों को ठहरा दिया था | नौसेना की ईमारत में बांग्लादेशी रह रहे हैं, यह बात देश की सुरक्षा के लिए यह बहुत बड़ा खतरा हैं | नौसेना के उच्च अधिकारियों को मामले की पूरी जानकारी है | मामला सामने आने पर गोपाल कुमार का तबादला कर दिया गया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई | तबादला भी डाकयार्ड के ऐसे सेंटर में किया गया जहाँ का मेनेजर गोपाल कुमार के जान पहचान का है | उसे उसके पेरेंट्स सेंटर वापस नहीं भेजा गया | गोपाल कुमार वहाँ आराम से बैठकर मुफ्त की तनख्वाह उड़ा रहे हैं | नौसेना के अधिकारियों ने इतने दिन गोपाल की सहायता से जो पैसे कमाए थे, उसे इस मामले में बचाकर उन्होंने अपना कर्ज उतार दिया |

३) गोपाल कुमार के समय में कॉलोनी में खूब पेड़ कटे | वैसे कट तो अब भी रहे हैं | आप सब को यह बात पता ही है | पर आपको यह नहीं पता होगा कि उन लकड़ियों को बेच के खूब पैसे मिले हैं, जिसमें से ज्यादातर पैसा नौसेना के अधिकारियों तथा गोपाल कुमार ने आपस में बाँट लिए |

४) डाकयार्ड कॉलोनी की जमीन पर कई बार गैरकानूनी कब्जे की कोशिश हुई है | इसमें से एक बड़ी कोशिश कॉलोनी के अयप्पा मंदिर के पीछे स्थित फुले नगर से हुई | कॉलनी की जमीन पर कब्जा कर बहुत सारे घर बनाए व बेच दिए गए | गोपाल कुमार और सुरक्षा अधिकारी चीमन लांबा को उस पैसे में हिस्सा मिला है | अब घर रातोंरात तो बनते नहीं | घर बनने के दरम्यान हमारे कमांडर मुजावर जी घोड़े बेचकर सो रहे थे | इतने सारे घर जब बनकर तैयार हो गए और बिक गए, तब उनकी नींद खुली | महानगरपालिका में शिकायत कर उन घरों को तोडा गया | बेचारे खरीदने वाले गरीब लोग फँस गए |

५) गोपाल कुमार ने कॉलोनी में आने-जाने के लिए कई लोगों को गैरकानूनी तरीके से गेटपास बनाकर दिए | उस समय के सिक्यूरिटी इंचार्ज चीमन लांबा और प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर को यह बात पता है | पर कमांडर मुजावर में इतनी हिम्मत नहीं कि गोपाल कुमार पर कार्रवाई करें |

६) गोपाल कुमार की मेहरबानी से कॉलोनी अपराधियों और नशेड़ियों का अड्डा बन गया था | वो बिंदास्त कॉलोनी के मख्य बाजार के दुकानों के बीच बैठकर, प्रशासनिक कार्यालय और सेंट ज़ेवियर विद्यालय के बीच की सड़क पर बैठकर, जोग्गर्स पार्क में बैठकर नशा करते थे | इसके अलावा वो छुपकर कॉलोनी की बंद पड़ी ईमारतों में, जंगलों में बैठकर भी नशा करते हैं | छुपकर नशा करना तो समझ आता है पर मुख्य बाजार में, प्रशासनिक कार्यालय के पास नशा करने की हिम्मत उनमें कहाँ से आई ? यह हमारे गोपाल कुमार की मेहरबानी थी | गोपाल कुमार को जब भी कोई गलत काम करना हो, यह नशेडी उनके लिए कर देते और बदले में उन्हें मौजमस्ती की छूट मिल जाती | आप सब ने ध्यान दिया होगा कि जब से गोपाल कुमार का कॉलोनी से तबादला हुआ है तब से मुख्य बाजार में, प्रशासनिक कार्यालय के पास और जोग्गर्स पार्क में बैठकर नशा करनेवालों की संख्या न के बराबर हो गई है | नशेडी अब भी बहुत हैं पर वो खुलकर, लोगों के बीच बैठकर नशा करने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं |

७) कॉलोनी में काफी पहले एक महिला को मुख्य बाजार में दूकान मिला हुआ था | उसका नाम मुझे याद नहीं | उसने गोपाल कुमार पर लैंगिक शोषण की कोशिश का आरोप लगाया था | गोपाल कुमार ने नौसेना के अधिकारियों और पुलिस के साथ मिलकर घर से और दूकान से उसका सामान फेंक दिया था | उसे डाकयार्ड कॉलोनी से निकाल दिया | एक असहाय महिला के ऊपर इतना बड़ा अत्याचार ! यह मामला बड़ा विस्फोटक है | सामने आ जाए तो नौसेना मुँह दिखाने लायक नहीं रहेगी | पर मेरा उस महिला से संपर्क नहीं हो पाया है | कॉलोनी में एक व्यक्ति के पास इस मामले के सारे कागजात है, पर उससे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है | मैं कोशिश में लगा हुआ हूँ | यदि उस महिला या व्यक्ति से संपर्क हो जाए तो मान के चलिए इन सफ़ेद वर्दीधारियों के मुँह पर कालिख पुत जाएगी |

८) कॉलोनी में एक महिला ने दहेज़ की प्रताड़ना के कारण दो बार आत्महत्या का प्रयत्न किया था | उसके ससुर डाकयार्ड के कर्मचारी और गोपाल कुमार के मित्र थे | वो महिला शिकायत के लिए जब पुलिस स्टेशन गई तो गोपाल कुमार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर प्राथमिकी दर्ज नहीं होने दी | इस मामले की शिकायत महिला ने डाकयार्ड प्रशासन से भी किया किंतु नौसेना के नकारा अधिकारियों ने कुछ नहीं किया | इस मामले में भी महिला मेरे संपर्क में नहीं है और कॉलोनी में जिसके पास शिकायत की प्रति है उससे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है | नहीं तो उस प्रति को यहीं छापकर नौसेना और गोपाल कुमार के पापों का पूरा भंडाफोड़ करता | वैसे भी नौसेना के अधिकारी पुलिस स्टेशन में फ़ोन करके बहुत सारे गलत काम करवाते हैं | कैंटीन से सस्ता सामान मिलने और नौसेना के अधिकारी होने के कारण पुलिस उन्हें सहयोग भी करती है | (इसका विवरण और उदाहरण कभी और दूँगा |)

( यह लेख बड़ा लंबा हो गया है | बहुत कुछ बाकी रह गया है पर लिखते-लिखते मैं ऊब गया हूँ | इसलिए बाकी भाग दो बनाकर कभी और लिखूँगा | आप लोग यह लेख सब तक पहुँचाकर इन पापियों के कुकर्मों का पर्दाफ़ाश करने में मुझे सहयोग कीजिए | मुझसे संपर्क करने के लिए मेल करें : [email protected] )

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