डाकयार्ड कॉलोनी कांजुरमार्ग, मुंबई में पूर्व नौसेना कर्मचारी ने मचाई लूट

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आज का लेख भ्रष्टाचार के नाम | नौसेना के अधिकारी यह कोशिश करते रहते हैं कि नौसेना से निवृत्त (Retire) होनेवाले जो अधिकारी या कर्मचारी है उनके लिए कुछ ऐसे इंतजाम किये जाए जिससे निवृत्ति के बाद भी उन्हें कुछ कमाई होते रहे | इसी तर्ज पर उन्हें नौसेना के इलाकों में छोटी-मोटी दुकाने दे दी जाती है, कभी-कभी नौसेना में जिन ठेकेदारों को काम दिया जाता है उन्हें बोलकर उनके पास काम पर रखवा दिया जाता है | कुछ निवृत्त अधिकारी खुद ठेकेदार बन जाते हैं और नौसेना से ठेका लेने लगते हैं | यह सब काफी आम बात है |

अब यह सुनने में तो कुछ ख़ास गलत नहीं लगता, पर सरकारी कामों में कुछ गलत न हो यह बहुत मुश्किल है  | नौसेना के निवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को एडजस्ट करने के नाम पर ऐसे-ऐसे कुकर्म हो रहे हैं कि क्या बताऊँ !!! मैं आज इस लेख में बस एक छोटा सा उदाहरण दूँगा |

एक निवृत्त नौसेना के कर्मचारी है सत्यप्रकाश अहलावत जी | उनकी पत्नी के नाम पर नेवल डाकयार्ड प्रशासन ने डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग, मुंबई में  सिलाई की एक दूकान दे रखी है | अब यहाँ तक तो ठीक है | (वैसे तो ठीक यहाँ पर भी नहीं है, वो कभी और लिखूँगा |) अब अहलावत जी को लगता है कि वो भूतपूर्व नौसेना कर्मचारी है तो डाकयार्ड कॉलोनी उन्हीं की मिलकियत है | कॉलोनी में पच्चीसों दुकानें हैं, किसी दूकान वाले की हिम्मत नहीं कि अपनी दूकान को बड़ा करे | नेवल डाकयार्ड प्रशासन तुरंत कार्रवाई करेगा | पर अहलावतजी ने अपनी दूकान को गैरकानूनी तरीके से दस फूट आगे बढ़ा रखा है | किसी की मजाल कि उसे तोड़े !!! कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर को सब पता है | कप्तान संधू तो अहलावत जी के ख़ास दोस्त है, उनकी दूकान के खुद चक्कर लगा चुके हैं | खुद देख चुके हैं गैरकानूनी है, पर वो भी सोच रहे होंगे कि “अपना नौसेना वाला भाई है | इसे तो हर हाल में बचाना है | यह भी मलाई खा रहा है, मैं भी खा रहा हूँ | आज उस पर कार्रवाई के लिए बोलूँगा तो कल मुझ पर भी कार्रवाई होगी |” वैसे भी कप्तान संधू जैसे गुणवान और चरित्रवान व्यक्ति से ज्यादा उम्मीद बेमानी है |

कमोडोर विवेक अग्रवाल और एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) भी कॉलोनी का नियमित दौरा करते करते हैं | उनको नेवल डाकयार्ड में सुपरवाइजरों की कैंटीन तो दिखी है पर अहलावत का गैरकानूनी निर्माण आज तक नहीं दिखा | बेचारे सुपरवाइजरों की कैंटीन पर ताला लगवा दिया | लोगों की रोटी खानेवाली जगह पर ताला लगवाने की हिम्मत सब में नहीं होती | उसके लिए कमोडोर विवेक अग्रवाल और एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जैसा जीगर चाहिए | दोनों का कहना था कि सुपरवाइजरों की कैंटीन और उनका कार्यालय दोनों गैरकानूनी है | तो अब नेवल डाकयार्ड प्रशासन क्यों नहीं उच्च न्यायालय जा रहा ? क्यों CAT कोर्ट के आदेश के बाद AINTSSA से समझौता कर लिया ? अब वो कार्यालय गैरकानूनी नहीं रहा क्या ?

अब बात यहीं तक रहती तो भी ठीक था | इसके आगे भी सुनिए कि अहलावतजी और नेवल डाकयार्ड प्रशासन क्या गुल खिला रहे हैं | डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई में बच्चों के लिए शिशु विकास केंद्र है | वहाँ पढ़नेवाले बच्चों के लिए यूनिफार्म सिलाने का कॉन्ट्रैक्ट सबसे कम बोली लगानेवाले को दिया जाता था | इस बार ऐसा कुछ नहीं किया गया | जिन भी बच्चों का वहाँ प्रवेश हुआ, सबके माता-पिता को यूनिफार्म लेने अहलावतजी की दूकान पर भेज दिया गया | अहलावतजी की चाँदी ही चाँदी | सिर्फ कपडे ही नहीं, बच्चों के लिए शिशु विकास केंद्र में लगनेवाली हर चीज अहलावतजी की दूकान पर बिकने लगी | कोई भी चीज चाहिए तो अभिभावकों को बस एक ही दूकान का पता दिया जाता है | जबकि नियम के अनुसार अहलावतजी की दूकान पर वो सारी चीजें बिक ही नहीं सकती | नौसेना ने उन्हें उन चीजों को बेचने की अनुमति नहीं दी है | कॉलोनी का कोई और दुकानवाला इस तरह अपना व्यवसाय बदले तो तुरंत उस दूकान पर कार्रवाई हो जाएगी | पर अहलावतजी की दूकान को कोई छू नहीं सकता | वो नौसेना के निवृत्त कर्मचारी हैं | कोई आम इंसान थोड़े ही हैं | 

नेवल डाकयार्ड प्रशासन को शर्म से डूब मरना चाहिए | विद्यालय को भी नहीं छोड़ा |

चलिए लंबा लेख हो गया | अहलावत पुराण यहीं ख़त्म करता हूँ | पर आप लोग मेरी वेबसाइट का पता http://ebharat.net/ जरुर याद रखें और रोज पढ़ें | बहुत कुछ लिखना बाकी है | मैं इन सफ़ेद वर्दीधारियों के पापकर्म उजागर करता रहूँगा |

मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

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