स्त्रीलंपट कप्तान संधू पर कार्रवाई न होने की वजह

मुझे पूरी उम्मीद है कि आप में से हर कोई कप्तान एस. एस. संधू के कुकर्मों के विषय में जरूर जानता होगा | जो लोग कप्तान संधू के कुकर्मों के विषय में न जानते हों वे Navy Captain calls woman security guard ‘mast maal’, makes indecent proposal जरूर पढ़ें | इसके अलावा उसी लेख के कमेंट सेक्शन में किसी पाठक ने यह बताया है कि कप्तान संधू पर उस घटना के कुछ माह पहले भी दो महिलाओं ने छेड़खानी का आरोप लगाया था | उन दोनों मामलों में भी जाँच कमोडोर विवेक अग्रवाल ने ही की थी | मुझे यह भी पता लगा है कि कप्तान संधू ने कुछ वर्ष पहले घाटकोपर में भी डाकयार्ड में कार्यरत किसी महिला के साथ अश्लील व्यवहार किया था | इन सबसे आप समझ गए होंगे कि मैंने कप्तान संधू को स्त्रीलंपट क्यों कहा है | 

मैं पिछले एक महीने से सोच रहा था कि ये स्त्रीलंपट कप्तान संधू बचा कैसे ? इसके खिलाफ इतने सबूत हैं – विडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, लिखित दस्तावेज, सब कुछ है | फिर भी कोई कार्रवाई नहीं ! ऐसा कैसे संभव हो सकता है ? क्या हमारा नौसेना प्रशासन इतना बेशर्म हो गया है कि सीधे-सीधे सबूत होते हुए भी उसपर कार्रवाई न करे ? क्या कमोडोर विवेक अग्रवाल कप्तान संधू के लिए इतना जोखिम उठा सकते हैं ?

इन्ही प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए मैं पिछले एक सप्ताह से मैं सब काम छोड़कर छान-बीन में जुट गया | बहुत भागा-दौड़ा, कई लोगों से बातचीत की, जेब से अच्छा-ख़ासा पैसा भी खर्च हुआ, काम पर से छुट्टी हुई, तब जाकर मेरे सामने राज खुला | अब मैं आपको पूरा विवरण देता हूँ कि किन वजहों से यह स्त्रीलंपट संधू अब भी मजे से बैठकर मलाई उड़ा रहा है !

वैसे तो संधू के बचने के लिए कई लोग जिम्मेदार हैं, पर मैं उनको तीन समूहों में विभाजित करूँगा और हर समूह के लोगों का संधू को बचाने में योगदान बताऊँगा |

कांजुर मार्ग डाकयार्ड कॉलोनी के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले तथा कमोडोर विवेक अग्रवाल

भारतीय नौसेना के इन दो कलंकों का संधू को बचाने में बड़ा योगदान है | संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को जब घटना का पता चला तो उन्होंने जाँच की जिम्मेदारी दे दी कमोडोर विवेक अग्रवाल को | कप्तान संधू उन्ही के मातहत काम करते हैं | तेरह वर्षों से कप्तान संधू की और उनकी पारिवारिक मित्रता है | वैसे बिरेन्द्र कुमार के अनुसार दोनों में कोई और संबंध भी है, जो उसने शराब पीकर चिल्ला-चिल्लाकर बताया था पर मैं उसपर नहीं जाऊँगा | एक शराबी की बात को सच मानकर लिख दूँ तो बेचारे अग्रवाल जी मुँह दिखाने लायक नहीं रहेंगे |

काले जी ने जैसे ही जाँच का जिम्मा कमोडोर अग्रवाल को सौंपा, उन्होंने जगह-जगह संधू के निर्दोष होने की घोषणा शुरू कर दी | जाँच से पहले ही मौखिक रूप से निर्दोष घोषित कर दिया | फिर उन्होंने जाँच शुरू की | प्रश्नों की सूची बनाई गई | प्रश्न इस तरह से बनाए गए कि संधू कभी दोषी साबित ही न हो | गवाहों को बुलाया गया | उनसे प्रश्न पूछे गए | सारे गवाह जानते थे कि कप्तान संधू कुछ भी करे पर कमोडोर विवेक अग्रवाल की नज़रों में वो निर्दोष ही रहेंगे | इसलिए उन मुर्ख गवाहों ने सच्चाई बताने के बजाय संधू को बचानेवाला बयान ही दिया | अब अँधे को क्या चाहिए ? दो आँख | कमोडोर अग्रवाल संधू को बचाना तो चाहते थे ही | गवाहों के बयान भी ऐसे मिले कि बन गया काम |

यहाँ तक सब कुछ कमोडोर विवेक अग्रवाल और कप्तान संधू के लिए सही चल रहा था | गड़बड़ तब हुई जब उन्होंने CCTV फुटेज देखा | कमांडर मुजावर, सुरक्षा अधिकारी शुक्ला, कमल मिश्रा, सिक्यूरिटी सुपरवाइजर तथा अन्य लोगों से बात की | अनौपचारिक रूप से उन्हें पता चल गया कि संधू पर लगे आरोप सच हैं | कुछ लोगों के पास इस बात के सबूत भी हैं | अब करें तो क्या करें | यहाँ संधू को बेगुनाह घोषित किया और वहाँ से सबूत प्रकट तो होगा तो क्या होगा !

इसी बीच नया कांड हो गया | ABI (http://www.abinet.org/) ने छाप दिया कि उनके पास संधू के खिलाफ सबूत है और इस बात के सबूत भी हैं कि कमोडोर विवेक अग्रवाल कप्तान संधू को बचाने के लिए जाँच को गलत तरीके से प्रभावित कर रहे हैं (Commodore Vivek Agrawal protecting Captain S S Sandhu by conducting shoddy investigation) | अब ऐसे में एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) की जिम्मेदारी बनती थी कि तुरंत कमोडोर अग्रवाल को जाँच से हटाएँ, उनके बजाय किसी और निष्पक्ष अधिकारी को जाँच का जिम्मा दे | ABI वालों से सबूत माँगे और उस आधार पर अपेक्षित कार्रवाई करें | पर काले जी तो बेतवा युद्धपोत को डूबाने के बाद उससे बचने के लिए बहानेबाजी करने में और अपने अंतरंग मित्र किरण मोरे को डाकयार्ड कॉलोनी कांजुरमार्ग की जमीन तोहफे में देने में व्यस्त थे | उन्हें सही जाँच कराने के लिए फुर्सत ही नहीं मिली | नतीजा यह कि कप्तान संधू अब तक दोषी घोषित नहीं हुए हैं और ऐश कर रहे हैं |

नरेंद्र कुमार और उनके साथी

यह समूह है यूनियन के पुराने नेता और प्रशासन के पुराने चमचे नरेंद्र कुमार का (कॉलोनी के दोनों महाठग गोपाल कुमार और बिरेन्द्र के भूतपूर्व माई-बाप) | सुरक्षा अधिकारी शुक्ला जी इनके चेले हैं | शुक्ला जी कप्तान संधू के विरुद्ध सबसे महत्वपूर्ण गवाहों में से ये एक थे | सारा सत्यानाश भी इन्होनें ही किया है | CCTV कैमरा कप्तान संधू ने बंद कराया था | ये गवाही दे आए कि तकनीकी खराबी के कारण खुद इन्होनें कैमरा बंद किया था | कप्तान संधू उस दिन पीकर पूरी तरह टुन्न थे | इन्होंने कह दिया कि मुझे पता नहीं कप्तान संधू ने शराब पीया था या नहीं | और भी पता नहीं क्या-क्या बोला होगा, मुझे सब पता नहीं लग पाया है |

शुक्ला जी नरेंद्र कुमार से राय मशविरा लिए बिना कुछ नहीं करते | और जैसा कि आप सब जानते हैं नरेंद्र कुमार नेवल डाकयार्ड प्रशासन के पुराने चमच्चे हैं | उन्होंने शुक्ला जी को पता नहीं क्या घुट्टी पिलाई और वो संधू के समर्थन में बयान दे आए | कमोडोर विवेक अग्रवाल जी की जगह कोई इमानदार जाँच अधिकारी होता तो वो शुक्ला जी पर CCTV कैमरा बंद करने की वजह से कार्रवाई कर देता | यदि CCTV कैमरे में तकनीकी खराबी थी तो मैकेनिक को बुलाया गया होगा, उसे ठीक कराया गया होगा | शुक्ला जी से इन सबकी रिपोर्ट माँगनी चाहिए | यदि न दे पाए तो तुरंत कार्रवाई | फिर देखिये कैसे उनके मुँह से सच्चाई निकलती है | फिर भी न बताए तो इन्हें भी कप्तान संधू की तरह आरोपी बनाकर कार्रवाई की जानी चाहिए | पर कमोडोर विवेक अग्रवाल जैसे नकारा व्यक्ति से कोई उम्मीद नहीं है | वैसे तो शुक्ला जी और उनके पूरे समूह को कप्तान संधू को बचाने की सजा मिल चुकी है पर जो बची-खुची कसर है, वो मैं अगले कुछ दिनों में निकाल दूँगा |

बिरेन्द्र, गोपाल और कमल मिश्रा

यह तीसरा समूह है जो मामले से जुड़ा हुआ है | कमल मिश्रा उस दिन कप्तान संधू के साथ ही थे | दोनों ने साथ में मिलकर राजेश बार से शराब खरीदा | साथ में शराब पिया और खाना खाया | जब कप्तान संधू सुरक्षा कार्यालय में बैठकर अश्लील टिपण्णी कर रहे थे, तब कमल मिश्रा बड़े मजे से सुनकर अपनी बत्तीसी दिखा रहे थे | ये कप्तान संधू के खिलाफ सबसे महत्त्वपूर्ण गवाह है पर उनके खिलाफ गवाही नहीं देगा | इसे भी कप्तान संधू और शुक्ला के साथ मामले में आरोपी बनाना चाहिये । बीरेंद्र पूरा मामला जानता है पर वो भी नहीं बोलेगा | बिरेन्द्र, गोपाल और कमल मिश्रा इन तीनो कुकर्मियों का माई-बाप फिलहाल कप्तान संधू है | इसलिए इस पूरे समूह से कोई उम्मीद नहीं है | वैसे तो इन्हें इनके कुकर्मों की सजा मिलनी शुरू हो गयी है पर इन्हें पूरी तरह ठिकाने लगाना जरूरी है |

अंतिम निष्कर्ष यह है कि कप्तान संधू के खिलाफ गवाह भी हैं और सबूत भी | फिर भी उनके बचने की संभावना काफी ज्यादा है | गवाहों ने झूठे बयान दिए हैं, सबूत नेवल डाकयार्ड प्रशासन तक पहुँचा ही नहीं | एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले और कमोडोर विवेक अग्रवाल सबूत जुटाना ही नहीं चाहते | उन्हें किसी भी तरह अपने सफ़ेद वर्दी वाले भाई को बचाना है | ऐसे में उम्मीद ही क्या बचती है !

( अगला लेख जरूर पढ़े जिसमें मै नौसेना के एक और रिश्वतखोर कमांडर रामचंद्र की सच्चाई बतानेवाला हूँ | )

( कुछ लोग मेल कर मुझे यह लिख रहे हैं कि मैं संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को कांजुर मार्ग डाकयार्ड कॉलोनी का एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट क्यों लिखता हूँ ? भाइयों वो उसी लायक हैं | नेवल डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट बनने की उनकी योग्यता ही नहीं है | अधिक जानकारी के लिए मेरा यह लेख पढ़ें : बेतवा युद्धपोत दुर्घटना और नेवल डाकयार्ड के नकारा अध्यक्ष एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले )

(मुझसे [email protected] पर मेल कर संपर्क किया जा सकता है | )

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