नौसेना द्वारा गरीब सिक्योरिटी गार्डों को लूटने का क्रम जारी, कई गार्डों ने नौकरी छोड़ी

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जैसा कि ईभारत पाठकों को पहले ही बता चुका है कि किस तरह नौसेना के अधिकारी डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग, मुंबई-७८ के गरीब सिक्योरिटी गार्डों को लूट रहे हैं | विस्तार में जानने के लिए ईभारत का पुराना लेख नेवल डाकयार्ड, कांजुर मार्ग, मुंबई प्रशासन ने सिक्यूरिटी गार्ड की पगार पर डाला डाका  जरूर पढ़ें | आज का लेख पिछले एक सप्ताह में घटी घटनाओं पर आधारित है |

वैसे तो विवाद पुराना है पर जब से डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड नामक ठेकेदार को सिक्योरिटी का जिम्मा दिया  है तब से हालात बहुत ज्यादा बिगड़ गए हैं | डायनामिक्स प्राइवेट लिमिटेड कॉलोनी की सिक्योरिटी का जिम्मा लेना ही नहीं चाहती थी क्योंकि उसकी आर्थिक क्षमता ऐसी नहीं थी कि वो ६० सिक्योरिटी गार्डों को पगार दे पाए | लेकिन कमांडर मुजावर और बीरेंद्र (वही बीरेंद्र जो नौसेना के अधिकारियों के लिए दारु तथा लड़की का बढ़िया इंतजाम करके डाकयार्ड में प्रोजेक्ट इंचार्ज बन गए हैं |) ने डायनामिक्स पर दबाव डालकर कॉलोनी की सिक्योरिटी का कॉन्ट्रैक्ट लेने पर बाध्य किया | उसे पूरा भरोसा भी दिलाया कि उसका बिल तुरंत पास हो जाया करेगा जिससे पैसे की कमी न होगी, बस मुजावर और बीरेंद्र को उनका कमीशन समय पर मिलते रहे |

पर होनी को कुछ और मंजूर था | सरकारी काम कोई जल्दी होता कहाँ है | फिर बिल कैसे जल्दी पास होगा ? बिल में वैसे भी डायनामिक्स वाले मुजावर और बीरेंद्र के साथ मिलकर बहुत फ्रॉड कर रहे थे | उनमें से कुछ फ्रॉड निम्नलिखित हैं :

१) कॉलोनी में ४० गार्ड काम कर रहे थे तो भी बिल ६० का ही जाता | जब इस बात की शिकायत हुई तो बिल वापस लाकर उसे बदल दिया गया | गार्डों की संख्या को ४३ किया गया |
२) बिल में सभी गार्डों की उपस्थिति १०० प्रतिशत दिखाई जाती | पूरे तीसों के तीस दिन – सारे गार्डों के | शायद सुपरमैन गार्ड होंगे | इसकी भी शिकायत हुई तो फिर उसे भी बदला गया |
३ ) गार्डों का प्रोविडेंट फण्ड और इन्शुरन्स का पैसा उनके अकाउंट में पूरा जमा नहीं कराया जा रहा है | वो पैसा डायनामिक्स, कमांडर मुजावर और बीरेंद्र आपस में मिल बाँटकर खा रहे हैं |
४) केंद्र सरकार ने गार्डों की न्यनतम सैलरी ६५३ रुपये प्रतिदिन निर्धारित की है, साथ में महीने में ४ दिन छुट्टी | पर नौसेना गरीब गार्डों को दिन का ३०० रुपये भी नहीं दे रही है | उनका मासिक पगार ८५०० आता है जबकि आना चाहिए १९००० -२०००० रुपये | साथ में तीसों दिन काम |

ऐसा बिल पास कैसे होगा | होना भी नहीं चाहिए | भारतीय नौसेना के कलंक रियर एडमिरल संजीव काले ने निजी दखलंदाजी करके कुछ बिलों को गैरकानूनी तरीके से पास कराया, पर अब वो एडमिरल सुपरिंटेंडेंट नहीं रहे | तो अब बिल पास होगा कैसे ? इन सब मामलों में कई बार शिकायत हो चुका है | मीडिया में छप चुका है | पर नौसेना अधिकारियों के कान पर जूं भी नहीं रेंगता | देश को इमोशनल ब्लैकमेल कर वन रैंक वन पेंशन ले रहे हैं यह डाकू |

नौसेना के  लूट-खसोट से तंग आकर पिछले शुक्रवार से कई सिक्योरिटी गार्डों ने नौकरी छोड़ दी है | पगार तो वैसे भी तीन महीने से मिला नहीं | ६-७ मार्च को तो लगभग कोई सिक्योरिटी गार्ड नहीं आया | सारे गेट खुले | जिसको आना है आओ और जिसको जाना है जाओ | यह हाल है नेवी कॉलोनी की सुरक्षा का | ७ मार्च को तो हमारे वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा जी सिविलियन को अपने संबोधन में कह रहे थे कि हमनें सिक्योरिटी बिलकुल टाइट कर दी है | दिन में सपना देख रहे थे शायद | या हो सकता है शराब उतरी न हो |

कल रात को यह बात मीडिया में फ़ैल गयी तो आज सुबह फ़ोन कर-करके सारे सिक्योरिटी गार्डों को दुबारा बुलाया गया | उन्हें वादा किया गया है कि उनका पगार जल्दी से जल्दी दिया जाएगा | देखते हैं इस बार कहाँ से पैसा लाकर दिया जाता है | नए एडमिरल सुपरिंटेंडेंट भी गैरकानूनी तरीके से बिल पास कराकर पैसा देंगे या कहीं और से पैसा लाएँगे |

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