गरीब मजदूरों को लूटकर चरित्रहीन नौसैनिकों पर पैसा लुटाती भारतीय नौसेना

Admiral-sunil-lanba
यदि आप लोगों ने मेरा पिछला लेख “भारतीय रक्षा सेनाएँ तथा वन रैंक वन पेंशन की भीख” न पढ़ा हो तो अभी जाकर पढ़ें | उसमें मैनें बताया है कि किस तरह देश को इमोशनल ब्लैकमेल कर भारतीय रक्षा सेनाएँ देश का पैसा लूट रही हैं | आज उसी बात को साबित करते हुए एक उदाहरण देने जा रहा हूँ |

मुंबई के डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में नौसेना की एक सिविलियन कॉलोनी है | अर्थात कॉलोनी तो नौसेना की है किंतु इसमें डाकयार्ड में काम करनेवाले सिविलियन ही रहते हैं | बड़ी कॉलोनी है और उसके प्रशासन के लिए एस्टेट ऑफिस है जिसका इंचार्ज एस्टेट अफसर की हैसियत से एक सिविलियन हुआ करता था | फिर नौसेना के लूटेरों को लगा कि इतनी बड़ी कॉलोनी से अच्छी कमाई हो सकती है तो एक नया पद बनाया गया प्रशासनिक अधिकारी (एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर) का | इस पद पर नौसेना का कप्तान या कमांडर रैंक का अधिकारी बैठता है |

अब सोचिये की नौसेना का काम क्या है ? देश की रक्षा या रेजिडेंशियल कॉलोनी चलाना | असल में नौसेना के अधिकारियों का मानना है कि उनका काम यह दोनों नहीं है | उनका काम है देश को लूटना, चाहे जिस तरीके से | पिछला प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर तो रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया | लोगों को लगा चलो अब तो नौसेना के अधिकारियों को अकल आएगी पर नहीं, लूटने का मौका इतनी आसानी से कैसे जाने देंगे | अब तो दो-दो नौसेना के अधिकारी कॉलोनी में हैं, एक कमांडर और एक कप्तान | जो दो नए आये हैं, उनके किस्से कभी और बताऊँगा |

मेरे पिछले लेख से आप लोगों को मालूम हो गया होगा कि किस तरह नौसेना ठेका मजदूरों (कॉन्ट्रैक्ट लेबर) को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का ४०% से ५०% ही देती है | इसके अलावा कोई साप्ताहिक छुट्टी नहीं, कोई इनसुअरन्स नहीं | उनके प्रोविडेंट फंड का पैसा भी गबन कर जाते हैं | फिर मैनें सोचा कि नौसेना भूतपूर्व नौसेनिकों को भी तो कॉन्ट्रैक्ट पर रखती है, उन्हें कितना पैसा देती होगी ? उन्हें न्यूनतम वेतन मिल रहा है ? या उनका भी शोषण हो रहा है ?

पता करने पर मालूम पड़ा कि भूतपूर्व नौसैनिकों को तो देश का दामाद बना कर रखा गया है | उन्हें जरुरत न होते हुए भी कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा रहा है, महत्त्वपूर्ण अधिकार दिए जा रहे हैं और तनख्वाह भी सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से ज्यादा | उदाहरण के तौर पर डॉकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग मुंबई में दो भूतपूर्व नौसैनिकों राज सिंह और राम कुमार को नौसेना ने कॉन्ट्रैक्ट पर रखा है | उन्हें क्वार्टर इंचार्ज बनाया गया है | अर्थात डाकयार्ड के कर्मचारियों को डाकयार्ड कॉलोनी में जो घर मिलेंगे उन्हें एम ई एस से तैयार करवाकर देना | लेकिन दोनों करते क्या हैं ? दिन भर एस्टेट ऑफिस में सिविलियन्स पर चिल्लाना, हर काम में दखलंदाजी करना और दिन में दो बार शिशु विकास केंद्र के पास जाकर महिलाओं को घूरना | शिशु विकास केंद्र के आरंभ होने और छूटने के समय दोनों ठरकी अपना ऑफिस छोड़कर बराबर वहाँ पहुँच जाते हैं | शिशु विकास केंद्र से इनका कोई लेना-देना नहीं है, वहाँ कोई काम नहीं, लेकिन दिन में दो बार, तय समय पर दोनों वहाँ हाजिर मिलते हैं | अपने और नौसेना के घिनौने चरित्र का सार्वजनिक प्रदर्शन करते हुए | 

इस काम के लिए दोनों को पगार मिलता है २२ हजार से २३ हजार रुपये | सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन है १८ हजार से १९ हजार रुपये | गरीब मजदूरों को ८ हजार से ९ हजार रुपये देकर लूटा जाता है और राज सिंह और राम कुमार जैसे ठर्कियों पर लुटाया जाता है | मामला इतना ही नहीं है | डाकयार्ड कॉलोनी का क्वार्टर इंचार्ज महत्वपूर्ण पद है, इस पर किसी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को बैठाना ही गलत है | सिविलियन कर्मचारी के काम को जानबूझ कर भूतपूर्व नौसैनिकों को दिया गया है ताकि कॉलोनी से पैसा कमाना आसान हो |

आप लोगों को याद होगा २०१६ में डाकयार्ड कॉलोनी के क्वार्टर्स में बांग्लादेशी रहते मिले थे | (यह लेख पढ़ें : “Civil contractor found encroaching on defence colony flats, renting these to Bangladeshis” ) वो कमांडर मुजावर, भूतपूर्व नौसैनिक और सिक्योरिटी इंचार्ज चीमन लांबा, गोपाल कुमार, क्वार्टर इंचार्ज राज सिंह और राम कुमार की मिलीभगत से ही संभव हुआ था | इसके अलावा डेमोलिशन के लिए खाली कराये गए कई इमारतों पर भी कॉन्ट्रैक्टर्स कब्जा कर बैठे थे | वो भी काम नौसेना के इन्ही बदमाशों का था | इन दोनों-तीनों का तो मैनें बस उदाहरण दिया है, बाकी व्यवस्था के कोने-कोने में यह लोग घुसे बैठे हैं, देश को जोंक की तरह चूसते हुए | 

नौसेना के अधिकारियों के काले कारनामे इतने हैं कि जितना लिखो उतना कम है | कहते हैं न हरी नाम अनंत, हरी कथा अनंता | पर मुझे तो लगता है हरी कथा का शायद अंत हो जाए, नौसेना के अधिकारियों के भ्रष्टाचार के किस्सों का अंत न होगा | इसलिए  बाकी कभी और |

——————————————————————————————————————————————

आनेवाले कुछ दिनों में पढ़े :
१) नौसेना अधिकारी निकले दवाईचोर, वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा ने मामला दबाया
२) कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण की फाइल चोर कप्तान भूपेश अनुजा को बचाने की कोशिश, खुद मैराथन घोटाले में शामिल
——————————————————————————————————————————————
नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

One thought to “गरीब मजदूरों को लूटकर चरित्रहीन नौसैनिकों पर पैसा लुटाती भारतीय नौसेना”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *