बोहरी मोहल्ले का मौलाना एजाज कश्मीरी बना भूमाफिया, ७५ वर्षीया वृद्धा की जमीन हड़पने की कोशिश

Maulana Ejaz Kashmiri
Maulana Ejaz Kashmiri

दक्षिण मुंबई में रहने वाले लोग भिंडी बाजार क्षेत्र में आनेवाले बोहरी मोहल्ले के बारे में तो जानते ही होंगे | उसी मोहल्ले में एक पुरानी मस्जिद है – हांडीवाली मस्जिद | इस मस्जिद के इमाम है मौलाना एजाज कश्मीरी जी | अब इमाम है तो इन्हें समाज में सम्माननीय दर्जा मिला हुआ है | स्थानीय लोग तो इन्हें सम्मान देते ही हैं, साथ ही साथ मीडिया में भी इनके बारे में कुछ न कुछ छपता रहता है | लेकिन २० अगस्त २०१७ को इमाम जी का नया रूप लोगों के सामने आया |

सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट (SBUT) ने बोहरी मोहल्ले के पुनर्विकास (redevelopment) की योजना बनाई है | इस योजना के तहत ही SBUT ने सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट प्रोजेक्ट (SBUP) प्रारम्भ किया है | इलाका काफी बड़ा है | उसके पुनर्विकास के लिए SBUT को काफी लोगों के सहयोग की जरुरत पड़ेगी | उन लोगों में मौलाना एजाज कश्मीरी मुख्य हैं क्योंकि उनकी मस्जिद सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट प्रोजेक्ट का एक हिसा है | बिना मौलाना जी के सहयोग के प्रोजेक्ट पूरा होना संभव नहीं है | इसलिए SBUT मौलाना जी को हर तरह से खुश रखने की कोशिश में रहती है |

यहाँ तक तो सब ठीक था | लेकिन मामला अटक गया बोहरी मोहल्ले में स्थित मस्तानी माँ की दरगाह पर | दरगाह अब तक मस्तानी माँ के वंशजों के नियंत्रण में हैं | फिलहाल ७५ वर्षीय सुगरा बेगम अपने परिवार के साथ उस दरगाह की देखभाल कर रही हैं | मौलाना एजाज कश्मीरी इस दरगाह को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं | मस्जिद का इमाम होने के नाते उन्हें लगता है कि आसपास के सारे धार्मिक स्थलों पर उनका सीधा नियंत्रण होना चाहिए | इसलिए वो पुलिस और SBUT के साथ मिलकर दरगाह पर कब्जा करने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं |

मौलाना जी ने १८ अगस्त को हांडीवाली मस्जिद में यह भाषण दिया कि वो २० अगस्त को दरवाजा तोड़कर मस्तानी माँ की दरगाह पर कब्जा कर लेंगे | दरगाह की चाभी पुनर्विकास के उद्देश्य से SBUT को दी गई है | दरगाह की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी SBUT की ही है | इसके बावजूद SBUT ने २० अगस्त की शाम को दरगाह से अपने सुरक्षा रक्षक हटा लिए व दरगाह का ताला खोल दिया ताकि मौलाना एजाज कश्मीरी उस पर आसानी से कब्जा कर सकें | मौलाना जी भी शाम को पूरी भीड़ लेकर दरगाह की ओर निकले ताकि उसपर कब्जा कर सके | उन्हें लगा ७५ वर्षीय सुगरा बेगम भीड़ से डरकर कब्जे का प्रतिरोध नहीं करेंगी | लेकिन मौलाना जी का अंदाजा गलत निकला |

सुगरा बेगम ने अपने घर के सभी बच्चों और बच्चियों को बुलाकर दरगाह के चारों ओर मानव दिवार बना लिया | उन्होंने मौलाना और उनके गुंडों को दरगाह के अंदर कदम रखने भी नहीं दिया | मामले की गंभीरता देखकर पुलिस ने बीच बचाव की कोशिश की, किंतु वो भी लगातार मौलाना जी की तरफदारी कर सुगरा बेगम पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे | मौलाना एजाज कश्मीरी, उनके गुंडे और पुलिस तीनों मिलकर भी उन्हें वहाँ से हिला न सके | आखिरकार मौलाना जी को हार मानकर वहाँ से भागना पड़ा |

सुगरा बेगम ने घटना की शिकायत मुंबई पुलिस कमिश्नर, संयुक्त पुलिस कमिश्नर तथा स्थानीय उप आयुक्त से की है | देखते हैं कि वो अपने निकम्मे पुलिसवालों और मौलाना से भूमाफिया बनने की कोशिश में लगे एजाज कश्मीरी पर क्या कार्रवाई करते हैं |

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