नौसेना अधिकारियों ने एक पागल को बनाया डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग का सिक्यूरिटी ऑफिसर

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जैसा कि मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ, हमारे नौसेना के अधिकारी मुर्खता भरे निर्णय लेने में माहिर होते हैं | हर बार कुछ नया-नया करते हैं | इस बार भी एक पागल को डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग का सिक्यूरिटी ऑफिसर बना दिया | गोपाल, बिरेन्द्र, संधू कम थे, जो अब ये तोरस्कर आ गया | पता नहीं कहाँ-कहाँ से चुन के नमूने ले आते हैं ! अब आप लोग भी घटना सुनिए कि मैं क्यों नए सिक्यूरिटी ऑफिसर को पागल कह रहा हूँ |

दो दिन पहले २६ दिसंबर को शाम साढ़े सात बजे के आसपास मैं मुन्ना समोसेवाले के पास बैठकर समोसे खा रहा था | आपको तो पता है कि वहाँ बड़े स्वादिष्ट समोसे मिलते हैं | मैनें एक समोसा खाया ही था कि उतने में एक लड़की अपनी स्कूटी चलाते हुए वहाँ आई और चौराहे पर अपनी स्कूटी रोक दी | स्कूटी को रोककर उसने स्टैंड लगाया ही था कि उसकी एक मित्र वहाँ आई और उसकी स्कूटी पर बैठ गई | दोनों कुछ बात कर रहे थे कि तभी वहाँ हमारे सिक्यूरिटी ऑफिसर तोरस्कर जी पहुँचे | पहुँचकर स्कूटी पर बैठी लड़की पर जोर से चीखे – “आपकी स्कूटी पर स्टीकर क्यों नहीं है ?” उनकी चीख इतनी जोरदार थी कि मेरे हाथ से समोसा नीचे गिर गया | ऐसा लगा जैसे हलाल किये जाने से पहले बकरा चीख रहा हो | समोसे का नुकसान होने के कारण मैनें उन्हें मन में दस गालियाँ दी |

अब सोचिए मेरा यह हाल था तो उस बेचारी लड़की का क्या होगा ! वो १७-१८ वर्ष से अधिक की नहीं होगी | उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम | पहले तो उसे समझने में ही वक्त लगा कि हो क्या रहा है | तब तक हमारे तोरस्कर जी दोबारा चीखे कि “बिना स्टीकर के गाड़ी नहीं चलाने का” | उनका चिल्लाना सुनकर लोग इकट्ठे हो गए | बेचारी लड़की ने जैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर कहा “अंकल धीरे बोलिए” | इसपर हमारे सिक्यूरिटी ऑफिसर दोबारा चीखे “मैं इसलिए चिल्ला रहा हूँ ताकि मैं एडवरटाइज कर पाऊँ कि जो भी ये स्टीकर नहीं लगाएगा उसे पता चल जाए |” वो लड़की उन्हें बताने की कोशिश कर रही थी कि स्कूटी उसकी नहीं है, वो सिर्फ उसपर बैठकर बात कर रही है | पर तोरस्कर जी सुनने को तैयार ही नहीं | वो अपना गुणगान किए जा रहे थे | उनका सबसे भारी डायलाग था – “मुझे यहाँ खुद ASD ने भेजा है |” वो लड़की उन्हें शांत होने को कहे जा रही थी और यह महाशय चिल्लाए जा रहे थे | अपनी पूरी भड़ास निकालने के बाद और जरुरत से ज्यादा भीड़ इकट्ठी होते देख वो वहाँ से चलते बने | बेचारी लड़की का चेहरा रुआँसा हो गया था | मुझे उस समय तक उन महाशय का नाम नहीं मालूम था | मैं वहाँ गया और लोगों से पूछा कि ये पागल आदमी था कौन ? तब पता चला कि ये नेवल डाकयार्ड प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए नए सिक्यूरिटी ऑफिसर हैं, और इनका नाम तोरस्कर है | पूरा नाम पता नहीं चला |

तो तोरस्कार जी, अगर आप यह पढ़ रहे हो तो मैं आपको बताना चाहूँगा कि अपने दिमागी पागलपन का सबूत हर जगह देना आपके लिए जरूरी नहीं है | आप रियर एडमिरल संजीव काले ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ), कमोडोर विवेक अग्रवाल और कप्तान संधू द्वारा चुने गए हैं, इतना ही यह बताने के लिए काफी है कि आप मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं | उस बेचारी बच्ची को बता रहे हैं कि आपको ASD ने चुनकर भेजा है ? उसे पता भी है क्या कि ASD कौन होता है ? और आप कान से बहरे हैं ? आपको सुनाई नहीं दिया जब वो बोली कि स्कूटी उसकी नहीं है ? स्कूटी स्टैंड पर लगी थी, कोई उसे चला नहीं रहा था | वो किसी की भी हो सकती थी | अगर वो स्कूटी उस लड़की की होती, तो भी उससे उसके पिता का नाम पूछकर, उनका फ़ोन नंबर पूछकर आपको उसके पिता से बात करनी चाहिए थी | ये उस लड़की के पिता की जिम्मेदारी है कि उस स्कूटी पर स्टीकर लगाए, उस लड़की की नहीं | आपको इतनी समझ नहीं है ? फिर आपके सिक्यूरिटी ऑफिस के आस-पास पचासों गाड़ियाँ खड़ी रहती है जिनपर स्टीकर नहीं होता | उनका आप क्या कर रहे हैं ? उन गाड़ियों पर स्टीकर कब लगेगा ? या आपको उन गाड़ियों का पैसा मिल रहा है ?

तोरस्कर जी, यदि आपको लगता है कि आपको ASD ने चुनकर यहाँ भेजा है इसलिए आप कुछ भी कर सकते हैं तो यह आपकी गलतफहमी है | जब किसी कांड में फँसोगे तो यही ASD आपको दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंकेंगे | आपसे पहले वाले सिक्यूरिटी ऑफिसर भी एक समय नेवल डाकयार्ड प्रशासन के बहुत ख़ास थे | देखे नहीं उनका क्या हुआ ? नौसेना अधिकारी सिर्फ सफ़ेद वर्दीवालों को बचाते हैं | देखिये वो स्त्रीलंपट कप्तान संधू आज तक मौज कर रहा है | भारतीय नौसेना के नाम पर कलंक लगानेवाले रियर एडमिरल संजीव काले और कमोडोर विवेक अग्रवाल अब भी आराम से बैठे हैं | पर आपको किस दिन टांग दिया जाएगा पता नहीं चलेगा | इसलिए अपना व्यवहार सुधारिए | यदि उस लड़की के पिता या भाई वहाँ होते तो आपको दो तमाचा रसीद करते | वो लड़की आपको वहीँ एक झापड़ मार देती तो और अच्छा होता | आप उस लायक हो भी | अब भी मौक़ा है, सुधर जाइये | नहीं तो कभी भी लेने के देने पड़ सकते हैं |

( पाठकों के लिए : आने वाले नव वर्ष में मैं एक से बढ़कर एक धमाके करने जा रहा हूँ | चिंदीचोर कमांडर मुजावर, रिश्वतखोर कमांडर रामचंद्र, स्त्रीलंपट कप्तान संधू, भारतीय नौसेना के कलंक कमोडोर विवेक अग्रवाल और रियर एडमिरल संजीव काले ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) की सच्चाई सामने लाकर उन्हें मुँह दिखाने लायक नहीं छोडूंगा | आप लोग भी खबरों को ज्यादा से ज्यादा फैलाने के लिए तैयार रहिये | मुझसे [email protected] पर मेल कर संपर्क किया जा सकता है | )

7 thoughts to “नौसेना अधिकारियों ने एक पागल को बनाया डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग का सिक्यूरिटी ऑफिसर”

  1. Me think ..u have all the problems of this world…..always being negative….We first have to think are we correct by self. …….We give are children’s below 18….even people’s in their early age of teenhood bikes. …what the use of it for them…..shows shining. …bad elements. …me personally seen a younger child pass away his bike on a little pub….He died. ……and ever we asked our girl ..where they go well dress..and painted. .After 7.00 pm…..no…..We all just complaint abt other……This is foolish. ……..u r sick dear……apna checkup karo

    1. Mr Anil sahu….pehli baat Ye Ki aap Hindi hi boliye….english jacchti nhi aap pe…. Dusri baat… Agar….us bechari Ladki k pitaji aap hote.. Firbhi yhi baat bolte… Ki Mr toraskar se baat krte unki is behavior k liye…. Aap logo ko puri baat Ki Jankari nhi hoti h Bas yuhi bolte ho…..agar koi aacha kaam Kr raha h uska sath dene k badle aap usse ko galat bol rhe hai.. Vaise Ghr Par aaram se baith kr dusro Ki galtiya niklna aasan h… Ek Aur baat kya aap bhi Mr toraskar k friend hai…? Jo unki tarafdari Kr rhe h… Sahi galat me Antar nhi pata?

  2. Thank God there is some one who is actually noticing all these nonsense what are going in our colony… N posting… Thumbs up….

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