मुर्खता की हद : डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में फॅमिली एकोमोड़ेशन के सामने बैचलर एकोमोड़ेशन बनाना

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हमारे सरकारी अधिकारी सब एक से बढ़ कर एक नगीने होते हैं | कुछ भी उलूल जुलूल फैसले लेते हैं और उनको लगता है कि उन्होंने दुनिया का सबसे बेहतरीन निर्णय लिया है | नौसेना के अधिकारी भी इससे अलग नहीं है |

अब हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को ही ले लीजिए, जब से आए हैं डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग की कायापलट करने पर तुले हैं | दर्जन भर प्रोजेक्ट एक साथ शुरू कर दिए | अब उनके इरादे अच्छे हो सकते हैं, पर निर्णय एक से बढ़कर एक मूर्खतापूर्ण |

वो कॉलोनी के पुराने गेट क्र. ३ के पास बैचलर एकोमोड़ेशन बना रहे हैं | अब इरादा तो ठीक है | नए लडके डाकयार्ड में काम पर लगते हैं, उन्हें मुंबई में रहने में बड़ी असुविधा होती है | इतनी बड़ी डाकयार्ड कॉलोनी पड़ी है, उसका उपयोग किया जाए |

पर उनका जगह का चुनाव देखिये, ठीक फॅमिली एकोमोड़ेशन के सामने | अब पता नहीं कभी संजीव जी या उनको सुझाव देने वालों में से कोई कभी हॉस्टल में रहा है या नहीं | जवान लडके अपने अंतर्वस्त्रों में वहीँ घूमेंगे | उनको किसी की पड़ी नहीं रहती | बिंदास अंडरवियर में वहीँ घूमेंगे, कोई कुछ बोले तो उनसे झगडा करेंगे | अब उनमें से कुछ कप्तान संधू के गुणोंवाले निकलें तब तो और सोने पर सुहागा | सामनेवाली इमारत में रहनेवाली स्त्रियों के लिए इमारत से बाहर निकलना शर्मिंदगीपूर्ण हो जाएगा | बाजू से ही वो सड़क गुजरती है, जहाँ से कॉलोनी के ज्यादातर लोग आते-जाते हैं  | लड़कियों पर छींटाकशी होगी | थोड़ी सी समझदारी दिखाते तो शायद यह सब कि नौबत नहीं आती | कॉलोनी में इतनी जगह है | बैचलर एकोमोड़ेशन को फॅमिली एकोमोड़ेशन से दूर बनाना चाहिए था, पर अधिकारी को जो उपाय ध्यान में आ गया वो तो बस आ गया |

इसके लिए कॉलोनी के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं है | जिसे देखो वो इस फैसले की बुराई कर रहा है | अधिकारियों को गाली दे रहा है | पर एक में भी हिम्मत नहीं कि जाए और अधिकारी के सामने यह बात बोले | अब एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट के काम में गलती निकाले कौन !!! तुरंत निशाने पर आ जाएँगे | अधिकारी के सामने सबकी पतलून गीली | सबसे बढ़िया किरदार तो डाकयार्ड के यूनियन के नेता निभा रहे हैं |  बातें इतनी बड़ी-बड़ी करेंगे जैसे लगेगा डाकयार्ड के कर्मचारियों का उनसे बड़ा हितैषी कोई नहीं | दूसरी ओर नौसेना अधिकारियों के सामने जाकर पूरी तरह दंडवत हो जाएँगे | बस उनकी हाँ में हाँ मिलाएँगे | जितने भी यह डाकयार्ड के नेता है, सबके काले कारनामे हैं | सबकी गर्दन नौसेना अधिकारियों के हाथ में हैं | इसलिए बेचारे चूहे बने रहते हैं | फिर उन्हें भी तो मलाई खानी है | कर्मचारियों के लिए लडके क्या मिलनेवाला है ? मलाई तो अधिकारी के साथ मिलकर ही खाई जा सकती है |

जिनका निर्णय है उन्हें कोई नुकसान होगा नहीं | जिन्हें परेशानी है वो बोलने की हिम्मत कर नहीं रहे | यूनियन के नेता बंदरबाँट में जुटे हैं | मैं भी यह लेख यहीं पूरा करके अपने काम में लगता हूँ |

(मुझसे [email protected] पर मेल कर संपर्क किया जा सकता है |)

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