नौसेना के रिश्वतखोर कप्तान भूपेश अनुजा ने सीसीटीवी कैमरों का नकली बिल पास किया, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए फाइल चुराया

कप्तान भूपेश अनुजा / Captain Bhupesh Anuja
कप्तान भूपेश अनुजा / Captain Bhupesh Anuja

मेरे पुराने लेख पढ़कर आप लोगों को पहले ही पता लग गया होगा कि किस तरह भारतीय नौसेना के अधिकारी हमारे देश को लूट रहे हैं | ऐसे कई मामले मैं पहले ही छाप चूका हूँ | आज एक नया उदाहरण आप लोगों के सामने रख रहा हूँ |

आज से लगभग साल भर पहले नेवल डाकयार्ड मुंबई के उस समय के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट संजीव काले के सिर पर भूत चढ़ा कि डीजीएम (कॉम) के कार्यालय को स्थानांतरित किया जाए | वैसे भी उनका ध्यान युद्धपोतों के रखरखाव पर कम, कमर्शियल काम करने पर ज्यादा रहता था | उसीमें तो कमीशन मिलता था | उन्होंने अपने कार्यालय के पास ही डीजीएम (कॉम) का नया कार्यालय बनवाया | निर्माण कार्य के कई कामों का ठेका लक्ष्मी सेल्स नामक कंपनी को दिया गया है |

आपको लक्ष्मी सेल्स के बारे में बता दूँ | इस कंपनी को डाकयार्ड के बड़े-बड़े ठेके मिलते हैं | इसकी पेमेंट की फाइल भी बड़ी जल्दी नौसेना और फिर पीसीडीए से पास हो जाती है | छोटे-मोटे ठेकेदार जहाँ महीनों अपना बिल पास कराने के लिए परेशान रहते हैं | इनका काम कुछ दिनों में ही हो जाता है | नौसेना और पीसीडीए के कई बड़े अधिकारियों को इस कंपनी ने अपने पगार पर रखा हुआ है | ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट मिलना और उनका बिल पास होना बड़ी मामूली बात है |

लक्ष्मी सेल्स ने डीजीएम (कॉम) कार्यालय के निर्माण कार्य के दौरान बहुत सारा फर्जीवाड़ा किया है | काम में लगनेवाली बहुत सारी चीजों को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया है और बिल पास करा लिया है | इसमें से सीसीटीवी कैमरे के बारे में मुझे जानकारी मिली है | नए कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे असल में पुराने कार्यालय से लाकर लगाए गए हैं | लेकिन लक्ष्मी सेल्स ने बिल में यह दिखाया है कि उसने कार्यालय में नए सीसीटीवी कैमरे इनस्टॉल किये हैं | इन कैमरों का बिल लगभग १०-१५ लाख का बना था | रियर एडमिरल सुपरिंटेंडेंट संजीव काले के दबाव में भूपेश अनुजा ने उस फाइल को पास कर दिया | जबकि मामला उनके ही डिपार्टमेंट का है | वो रोज देख रहे थे कि पुराने सीसीटीवी कैमरे ही लगे हैं लेकिन संजीव काले का दबाव था; और लक्ष्मी सेल्स से मिली रिश्वत ने उनके जमीर को खरीद लिया था | बिल पास |

वैसे तो पूरा मामला दब जाता लेकिन डीजीएम (कॉम) कार्यालय के कर्मचारियों में पिछले कुछ महीनों से आपस में झगड़ा काफी बढ़ गया है | वो लोग दुसरो से अपने सहकर्मियों की बुराई कर रहे हैं | इससे यह मामला धीरे-धीरे दुसरे डिपार्टमेंट के कर्मचारियों को पता चलना शुरू हो गया और मेरे कान तक पहुँचा | डिपार्टमेंट के एक कर्मचारी ने तो इसी भ्रष्टाचार के मामले का सहारा लेकर नौसेना प्रशासन को ब्लैकमेल किया; और अन्य मामलों में अपने ऊपर हो रही अनुशासन की कार्रवाई को भी स्थगित करवा लिया |

कप्तान भूपेश अनुजा को भी आनेवाले खतरे का अंदाजा लग गया | उन्होंने चुपचाप डिपार्टमेंट से मामले की फाइल चुरा ली | उस फाइल को लेकर कहाँ छुपाया है यह मुझे नहीं पता; लेकिन इतना जरूर पता है कि यदि भ्रष्टाचार के मामले की जाँच कोई ईमानदार संस्था या व्यक्ति करे तो रियर एडमिरल संजीव काले और कप्तान भूपेश अनुजा का जेल जाना तय है |

इस पूरे मामले को जानने के बाद मुझे मन में बहुत हँसी आयी, वो भी कप्तान भूपेश अनुजा पर | ईमानदारी की बड़ी-बड़ी डींगें मारता था लेकिन चोर निकला | इसलिए अबसे भूपेश अनुजा को मैं कैमरा चोर / फाइल चोर भूपेश अनुजा लिखा करूँगा |

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