नेवल डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के सुपरमैन – सहायक सुरक्षा अधिकारी चीमन लांबा

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पहले तो मैं आप सब से क्षमा चाहूँगा क्योंकि कल के दिन मैंने कोई लेख नहीं लिखा | एक बेशकीमती दिन चला गया और हंस के वेश में छुपे हुए इन बगुलों की मैंने कोई पोल नहीं खोली | उम्मीद करता हूँ कि मेरा पिछला लेख डाकयार्ड कॉलोनी कांजुरमार्ग, मुंबई में पूर्व नौसेना कर्मचारी ने मचाई लूट आप सब ने जरुर पढ़ा होगा | न पढ़ा हो तो तुरंत उपरोक्त लिंक पर क्लिक करें | आप स्वयं भी पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ाएँ | इससे मेरा लिखने का उत्साह बना रहेगा |

चलिए अब पिछले लेख से आगे बढ़ते हैं | अहलावत पुराण से अब हम लांबा पुराण पर आते हैं | चीमन लांबा जी इस समय नेवल डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई के सहायक सुरक्षा अधिकारी हैं | वो सबको बड़े गर्व से बताते हैं कि “I am Ex-Navy.” जिस दिन पहली बार मैनें उनके मुँह से यह शब्द सुना था, उसी दिन से मैं उनके चमत्कारी व्यक्तित्व से प्रभावित हो गया | मैनें लोगों से उनके बारे में काफी पूछताछ की | इससे मुझे उनके व्यक्तित्व के ऐसे अनछुए पहलुओं का पता कि मैं उनका भक्त बना गया | वही सब मैं अब आपको बताने जा रहा हूँ और मुझे पूरा यकीन है कि यह लेख पूरा पढ़ते-पढ़ते आप भी चीमन लांबा जी के भक्त बन जाएँगे |

सबसे पहले तो लांबा जी की चाल देखिये | सुबह-सुबह जब वो सुरक्षा कार्यालय से प्रशासनिक कार्यालय की तरफ निकलते हैं तो उनकी गति देखकर चींटी का भी घमंड टूट जाता है | लांबा जी सुबह सुरक्षा कार्यालय से निकलते हैं और दोपहर तक प्रशासनिक कार्यालय पहुँच जाते हैं | वहाँ से कुछ मिनटों में काम पूरा करके वो दोपहर को ही प्राशानिक कार्यालय से निकल जाते हैं और शाम तक दोबारा सुरक्षा कार्यालय पहुँच जाते हैं | इस तरह उनका पूरा दिन कॉलोनी वासियों की सेवा में निकल जाता है | उनकी चुस्ती-फुर्ती के क्या कहने ! देखकर ऐसा लगता है हमारे नौसेना के अधिकारियों को इनको लायन गेट की सुरक्षा में रख लेना चाहिए | पर हमारे अधिकारियों की दरियादिली है कि उन्होंने ऐसे योग्य व्यक्ति को नेवल डाकयार्ड कॉलोनी का सुरक्षा अधिकारी बनाया है | लांबाजी से बेहतर सुरक्षा अधिकारी शायद ही किसी को मिले | उनकी छत्रछाया में पूरी डाकयार्ड कॉलोनी स्वयं को सुरक्षित महसूस करती है | ६५-७० वर्ष का सुरक्षा अधिकारी सबके भाग्य में थोड़ी होता है |

चीमन लांबा जी की एक और खासियत है | वो हरफनमौला है | वो एक साथ कई जिम्मेदारियाँ निभाने में सक्षम  हैं | जब वो कॉलोनी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी थे, उसी समय वो कॉलोनी के महाठग गोपाल कुमार (इस महान व्यक्ति की गाथा कभी और बताऊँगा) के चपरासी का काम भी करते थे और बड़ी तत्परता से अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करते थे | गोपाल कुमार की आज्ञा और मार्गदर्शन से उन्होंने वर्षों तक कॉलोनी की सुरक्षा का अत्यंत कुशलता से संचालन किया | यही कारण है कि बांग्लादेश के नागरिक तक डाकयार्ड कॉलोनी में रहकर खुद को सुरक्षित महसूस करते थे | (बांग्लादेशी वाली कहानी कभी और सुनाऊँगा |)

चीमन लांबा जी की इन योग्यताओं के बावजूद उनपर बहुत अन्याय हुआ है | एक समय वो डाकयार्ड कॉलोनी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी हुआ करते थे | उतने में यह खबर फ़ैल गई कि वे सुरक्षा कार्यालय में एक महिला सुरक्षा कर्मचारी के साथ रंगरेलियाँ मनाते हैं | लोगों को यह भी पता चल गया कि कॉलोनी में बाहर की गाड़ियों को गैरकानूनी रूप से पार्किंग करने देकर वो मोटा माल कमा रहे हैं | फिर क्या था, बेचारे की पदावनति (Demotion) कर उन्हें सहायक सुरक्षा अधिकारी बना दिया गया | इतना बड़ा अत्याचार हुआ उनके साथ | नौसेना प्रशासन को सोचना चाहिए था कि लांबा जी नौसेना के निवृत्त कर्मचारी हैं | कोई आम इंसान थोड़े ही हैं | 

सुरक्षा कार्यालय में कई आए और कई गए पर लांबा जी आज भी वहीं हिमालय की तरह अडिग हैं | हमारी तनख्वाह से कॉलोनी की सुरक्षा के लिए जो पैसा कटता है उसका इससे बेहतर उपयोग क्या हो सकता है ! मैं तो नेवल डाकयार्ड प्रशासन को सुझाव दूँगा कि तुरंत चीमन लांबा जी कीतनख्वाह दुगुनी कर दी जाए | हमारी मेहनत का पैसा जब हमारी जेब से लांबा जी की जेब में पहुँचता है तो हमें हमारा जीवन धन्य प्रतीत होता है |

चलिए चीमन लांबा पुराण भी यहीं समाप्त करता हूँ | एक ही विषय में दो लेख लिखकर मैं भी ऊब गया हूँ | अगली बार कुछ नया लिखूँगा | पाठक गण अपना आशीर्वाद मुझ पर बनाए रखें | मेरे लेख को खुद भी पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ाएँ | फेसबुक और ट्वीटर पर लोगों के साथ शेयर करें और अपने विचारों से मुझे जरूर-जरूर अवगत कराएँ | मेरा मेल है : [email protected]

(मुझे पता चला है कि एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) इस ब्लॉग में लिखी बातों से बहुत नाराज हैं | तिलमिलाए और बौखलाएँ हुए हैं | मेरी उनसे प्रार्थना है कि इतना नाराज होने की जरूरत नहीं है | इतने दिनों से हम लोग आप सफ़ेद वर्दीवालों को झेल रहे हैं | आज जब आपको आइना दिखाया जा रहा है तो बड़ी मिर्ची लग रही है | यह ब्लॉग चलता रहेगा और मैं लिखता रहूँगा, बाकि जो आपकी इच्छा हो करें |)

 

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