कमांडर मुजावर का भ्रष्टाचार : डाकयार्ड कॉलोनी के शिशु विकास केंद्र के लिए कापी और किताब खरीदने में घोटाला

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इस लेख के द्वारा मैं एक बार फिर सफ़ेद वर्दीधारियों के भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा हूँ | इस बार हमारे लेख के नायक हैं एम. एच. ए. मुजावर | महाशय भारतीय नौसेना में कमांडर के पद पर हैं | आप इनसे मिलेंगे और बातें करेंगे तो लगेगा कि इनसे शरीफ आदमी कोई नहीं, पर हैं अव्वल दर्जे के चिंदीचोर | पिछले लेख में जो मैनें हंस के भेष में बगुलों के छिपे होने की बात लिखी थी, वो इनपर बिलकुल सटीक बैठती है | पैसे कमाने का कोई मौका नहीं छोड़ते, चाहे किसी भी तरीके का प्रयोग करना पड़े : साम-दाम-दंड-भेद | अब आइये बताता हूँ कि किस तरह से इन्होनें डाकयार्ड कॉलोनी में चलनेवाले शिशु विकास केंद्र को अपनी कमाई का जरिया बना रखा है |

सत्यप्रकाश अहलावत जी के साथ मिलकर कमांडर मुजावर किस तरह पालकों को लूट रहे हैं यह तो मैं पहले ही लिख चुका हूँ | यदि आपने न पढ़ा हो तो इस लिंक पर क्लिक करें : डाकयार्ड कॉलोनी कांजुरमार्ग, मुंबई में पूर्व नौसेना कर्मचारी ने मचाई लूट | आज शिशु विकास केंद्र से पैसे बनाने का उनका दूसरा तरीका बता रहा हूँ | यह तरीका मुजावरजी का पसंदीदा है, क्योंकि इसकी किसीको कानोंकान खबर तक नहीं लगती |

शिशु विकास केंद्र में आनेवाले विद्यार्थियों को विद्यालय प्रशासन कापी और किताबें देता है | इन कापी और किताबों का दाम अधिकतम मूल्य (MRP) के हिसाब से पालकों से ले लिया जाता है | उन्हें सभी कापी और किताबों की कुल कीमत बताई जाती है, वे बेचारे पूरी कीमत चुका भी देते हैं | अब यहाँ तक सुनने में तो नहीं लगता कि कुछ भ्रष्टाचार हो रहा है, किंतु यदि आपने कभी किसी दूकान से कापी खरीदी होगी और थोडा सा ध्यान उसके अधिकतम मूल्य (MRP) पर दिया होगा, तो समझ गए होंगे कि गड़बड़ क्या है | कापियों पर जो अधिकतम मूल्य (MRP) छपा होता है, दुकानदार हमसे उसकी तुलना में काफी कम पैसा लेता है | कीमत में २०% से ३०% तक का फर्क होता है | तब फिर मुजावर जी ऐसी कौन सी दूकान से कापी खरीद रहे हैं जो उन्हें अधिकतम मूल्य (MRP) पर ही मिल रही है | शिशु विकास केंद्र के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए एक साथ कापी और किताबें खरीदी जाती है | इतनी बड़ी मात्रा में खरीदने पर अतिरिक्त छूट मिल जाती है | साथ ही साथ किसी रिटेलर से न खरीदकर होलसेलर से कापी और किताबें खरीदी जाती है | नतीजा यह कि छपे हुए अधिकतम मूल्य (MRP)  के आधे दाम पर नेवल डाकयार्ड प्रशासन को कापी और किताबें मिल रही हैं | अब ऐसे में यह तो सोचना ही पडेगा कि तब पालकों से भी आधा दाम क्यों नहीं लिया जाता ? उन बेचारों से पूरा पैसा क्यों लिया जाता है ? बाकि पैसा किसकी जेब में जाता है ? सिर्फ मुजावर जी यह मलाई खा रहे हैं या कई और भी हैं ? शिशु विकास की प्राध्यापिका को इसमें कितना हिस्सा मिलता है ? नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों को कितना मिलता है ?

अब इनसे भी बड़े प्रश्न – मेरे लेखों पर आगबबूला होनेवाले एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी  ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) इस मामले में क्या कदम उठाएँगे ? और यह जो वर्क्स कमिटी के दस चापलूस हैं, जो प्रशासन की गोद में जा बैठे हैं, वो इस मामले में क्या करेंगे ? मुजावर से मिलकर अपना हिस्सा लेकर चुप बैठेंगे या शिशु विकास के पालकों को लुटने से बचाएँगे ?

वैसे लोकतंत्र में यह हमारा अधिकार है कि हम सरकारी कर्मचारियों से ऐसे प्रश्न करें और हमें उसका उत्तर भी मिलना चाहिए | पर बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधेगा ? नेवल डाकयार्ड प्रशासन से इन प्रश्नों का उत्तर कौन माँगेगा ? कमांडर मुजावर और नौसेना के अन्य अधिकारियों की नाराजगी कौन मोल लेगा ?

पर पाठक गण अब तक समझ गए होंगे कि डाकयार्ड कॉलोनी के शिशु विकास केंद्र में, जहाँ ३-४-५ वर्ष के मासूम बच्चें पढ़ते हैं, वहाँ पर भी लूट मची है लूट | गणवेश (यूनिफार्म) पर लूटा, कापी किताबों पर लूटा, बाकि का भी पता लगा कर बताऊँगा | मेरा पाठकों से निवेदन है कि सूचना अधिकार (RTI) के तहत एक आवेदन देकर पिछले पाँच वर्षों में शिशु विकास केंद्र के लिए खरीदे गए सारे कापियों और किताबों की रसीद माँगे | आप लोग हिम्मत करोगे तभी तो इन वर्दीधारियों को सबक सिखा पाओगे |

( पाठकों के लिए : समय न मिलने के कारण पिछले तीन दिन से कुछ लिख नहीं पाया था | पर आप सब मुझपर भरोसा रखें | जो जानकारी आप लोग मुझे मेल के द्वारा दे रहे हैं, उसका एक-एक वाक्य प्रकाशित होगा | आप सब मुझसे संपर्क बनाए रखें | आप लोगों की प्रतिक्रिया से मैं अतिउत्साहित हूँ | मुझसे संपर्क करने के लिए [email protected] पर मेल करना है |)

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