नौसेना के अधिकारियों का भ्रष्टाचार/मुर्खता और डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग की बंद पड़ी इमारतें

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पिछले कुछ दिनों से डाकयार्ड कॉलोनी में जिस गति से निर्माण कार्य चल रहा है उसे देखकर नेवल डाकयार्ड प्रशासन पर गर्व करने का मन करता है | बातों-बातों में बेचलर एकोमोड़ेशन बनके तैयार | किरण मोरे जी की खेल-कूद अकादमी का काम युद्धस्तर पर जारी है | प्रधानमंत्री मोदी को यदि पता चल जाए कि सरकारी विभाग में भी इतनी तेजी से काम हो सकता है तो हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) का मंत्री बनना तय | इतना कार्यक्षम व्यक्ति दशकों में मुश्किल से एक बार पैदा होता है |

लेकिन जैसे ही हम लोग डाकयार्ड कॉलोनी की इमारतों की ओर मुड़ते हैं, हमें कुछ और ही दिखाई देता है | कॉलोनी में दर्जनों इमारतें मरम्मत के नाम पर बंद पड़ी हैं | कई तो वर्षों से बंद पड़ी है | K से लेकर U  तक आधे से ज्यादा इमारतें रहने योग्य नहीं है | कई इमारतों में आधे घर भी भरे नहीं है | इमारतों का हाल देखने पर ऐसा लगता है जैसे ५०० वर्ष पुराने खँडहर हो | इसके अलावा कम्युनिटी हॉल के पास की तथा बाजार के पीछे की कई इमारतें बंद पड़ी है | ये इमारतें किसी को नहीं दिखती |

डाकयार्ड कर्मचारियों ने कॉलोनी में घर मिले इसलिए लंबी कतार लगा रखी है | इंतज़ार करते हुए सालों बीत गए | कॉलोनी में मुश्किल से एक कमरा किराए पर मिलता है, उसके लिए भी शेयरिंग फॉर्म भरना पड़ता है | कॉलोनी के बाहर रहो तो किराया इतना महँगा कि आधी पगार गायब हो जाए | अंबरनाथ-बदलापुर जाकर रहना पड़ता है | वहाँ से काम पर आने-जाने के लिए घंटों मेहनत | पर कर्मचारियों की इन सब तकलीफों से नौसेना के अधिकारियों को क्या ! उनके लिए तो इमारतें जितने ज्यादा दिन बंद रहे उतना अच्छा | बंद पड़ी इमारतों को ठेकेदारों को किराए पर देकर मोटा माल कमाया जा रहा था | सैकड़ों की संख्या में ठेकेदार के आदमी कॉलोनी की इन बंद पड़ी इमारतों में रहते थे | उनसे हर महीने लाखों रुपये की हर महीने कमाई हो रही थी | पर जब से बांग्लादेशियों के रहने की बात पता चली है तब से ठेकेदारों को किराए पर कमरे देना काफी कम हो गया है | बेचारों की कमाई का जरिया लगभग बंद हो गया है |

अब यह हमारे वर्क्स कमिटी के सदस्यों की जिम्मेदारी है कि जाकर काले जी से पूछे कि उनकी प्राथमिकता क्या है ? कर्मचारियों के लिए घर या किरण मोरे जी की खेल-कूद अकादमी ? व्यावसायिक निर्माण में वो इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहे हैं ? बंद पडी इमारतों का निर्माण कार्य कब शुरू होगा और कब पूरा होगा ? यदि बेचलर एकोमोड़ेशन और खेल-कूद अकादमी इतनी तेजी से बन सकती है तो कॉलोनी की इमारतों का निर्माण कार्य तेजी से क्यों नहीं हो सकता ? कॉलोनी का हर काम यदि एम.ई.एस. की वजह से रुका हुआ है तो यह दोनों काम क्यों नहीं रुका ?

वर्क्स कमिटी के सदयों को नेवल डाकयार्ड प्रशासन से यह सब जवाब लेकर डाकयार्ड के कर्मचारियों को बताना चाहिए | यदि वे यह काम नहीं करते तो यह डाकयार्ड के कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि उन पर दवाब बनाएँ | नेताओं को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाना हमारा काम है | फिर भी यदि वो न माने तो अगले चुनाव में उनका ख़ास ध्यान रखा जाए | वोट माँगने तो वो आएँगे ही | बाकि नौसेना के अधिकारियों से कोई उम्मीद नहीं है | उन्हें हमारी हितों की नहीं पड़ी है | भ्रष्टाचार कहो या मुर्खता, पर वो सिर्फ मलाई वाले काम पर ध्यान देते हैं | आपको और हम को तब तक भुगतना है जब तक हम उनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटाते | सफ़ेद वर्दी में छुपे ये जोंक देश की रक्षा करे या न करे किंतु हमारा खून और पैसा जरूर चूस रहे हैं | आनेवाली पीढ़ी को इनकी गुलामी से बचाना है तो आज इनका विरोध करना ही पड़ेगा |

(पाठकगण :  मुझसे संपर्क करने के लिए [email protected] पर मेल कर सकते हैं |)

 

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