नौसेना अधिकारियों ने एक पागल को बनाया डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग का सिक्यूरिटी ऑफिसर

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जैसा कि मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ, हमारे नौसेना के अधिकारी मुर्खता भरे निर्णय लेने में माहिर होते हैं | हर बार कुछ नया-नया करते हैं | इस बार भी एक पागल को डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग का सिक्यूरिटी ऑफिसर बना दिया | गोपाल, बिरेन्द्र, संधू कम थे, जो अब ये तोरस्कर आ गया | पता नहीं कहाँ-कहाँ से चुन के नमूने ले आते हैं ! अब आप लोग भी घटना सुनिए कि मैं क्यों नए सिक्यूरिटी ऑफिसर को पागल कह रहा हूँ |

दो दिन पहले २६ दिसंबर को शाम साढ़े सात बजे के आसपास मैं मुन्ना समोसेवाले के पास बैठकर समोसे खा रहा था | आपको तो पता है कि वहाँ बड़े स्वादिष्ट समोसे मिलते हैं | मैनें एक समोसा खाया ही था कि उतने में एक लड़की अपनी स्कूटी चलाते हुए वहाँ आई और चौराहे पर अपनी स्कूटी रोक दी | स्कूटी को रोककर उसने स्टैंड लगाया ही था कि उसकी एक मित्र वहाँ आई और उसकी स्कूटी पर बैठ गई | दोनों कुछ बात कर रहे थे कि तभी वहाँ हमारे सिक्यूरिटी ऑफिसर तोरस्कर जी पहुँचे | पहुँचकर स्कूटी पर बैठी लड़की पर जोर से चीखे – “आपकी स्कूटी पर स्टीकर क्यों नहीं है ?” उनकी चीख इतनी जोरदार थी कि मेरे हाथ से समोसा नीचे गिर गया | ऐसा लगा जैसे हलाल किये जाने से पहले बकरा चीख रहा हो | समोसे का नुकसान होने के कारण मैनें उन्हें मन में दस गालियाँ दी |

अब सोचिए मेरा यह हाल था तो उस बेचारी लड़की का क्या होगा ! वो १७-१८ वर्ष से अधिक की नहीं होगी | उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम | पहले तो उसे समझने में ही वक्त लगा कि हो क्या रहा है | तब तक हमारे तोरस्कर जी दोबारा चीखे कि “बिना स्टीकर के गाड़ी नहीं चलाने का” | उनका चिल्लाना सुनकर लोग इकट्ठे हो गए | बेचारी लड़की ने जैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर कहा “अंकल धीरे बोलिए” | इसपर हमारे सिक्यूरिटी ऑफिसर दोबारा चीखे “मैं इसलिए चिल्ला रहा हूँ ताकि मैं एडवरटाइज कर पाऊँ कि जो भी ये स्टीकर नहीं लगाएगा उसे पता चल जाए |” वो लड़की उन्हें बताने की कोशिश कर रही थी कि स्कूटी उसकी नहीं है, वो सिर्फ उसपर बैठकर बात कर रही है | पर तोरस्कर जी सुनने को तैयार ही नहीं | वो अपना गुणगान किए जा रहे थे | उनका सबसे भारी डायलाग था – “मुझे यहाँ खुद ASD ने भेजा है |” वो लड़की उन्हें शांत होने को कहे जा रही थी और यह महाशय चिल्लाए जा रहे थे | अपनी पूरी भड़ास निकालने के बाद और जरुरत से ज्यादा भीड़ इकट्ठी होते देख वो वहाँ से चलते बने | बेचारी लड़की का चेहरा रुआँसा हो गया था | मुझे उस समय तक उन महाशय का नाम नहीं मालूम था | मैं वहाँ गया और लोगों से पूछा कि ये पागल आदमी था कौन ? तब पता चला कि ये नेवल डाकयार्ड प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए नए सिक्यूरिटी ऑफिसर हैं, और इनका नाम तोरस्कर है | पूरा नाम पता नहीं चला |

तो तोरस्कार जी, अगर आप यह पढ़ रहे हो तो मैं आपको बताना चाहूँगा कि अपने दिमागी पागलपन का सबूत हर जगह देना आपके लिए जरूरी नहीं है | आप रियर एडमिरल संजीव काले ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ), कमोडोर विवेक अग्रवाल और कप्तान संधू द्वारा चुने गए हैं, इतना ही यह बताने के लिए काफी है कि आप मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं | उस बेचारी बच्ची को बता रहे हैं कि आपको ASD ने चुनकर भेजा है ? उसे पता भी है क्या कि ASD कौन होता है ? और आप कान से बहरे हैं ? आपको सुनाई नहीं दिया जब वो बोली कि स्कूटी उसकी नहीं है ? स्कूटी स्टैंड पर लगी थी, कोई उसे चला नहीं रहा था | वो किसी की भी हो सकती थी | अगर वो स्कूटी उस लड़की की होती, तो भी उससे उसके पिता का नाम पूछकर, उनका फ़ोन नंबर पूछकर आपको उसके पिता से बात करनी चाहिए थी | ये उस लड़की के पिता की जिम्मेदारी है कि उस स्कूटी पर स्टीकर लगाए, उस लड़की की नहीं | आपको इतनी समझ नहीं है ? फिर आपके सिक्यूरिटी ऑफिस के आस-पास पचासों गाड़ियाँ खड़ी रहती है जिनपर स्टीकर नहीं होता | उनका आप क्या कर रहे हैं ? उन गाड़ियों पर स्टीकर कब लगेगा ? या आपको उन गाड़ियों का पैसा मिल रहा है ?

तोरस्कर जी, यदि आपको लगता है कि आपको ASD ने चुनकर यहाँ भेजा है इसलिए आप कुछ भी कर सकते हैं तो यह आपकी गलतफहमी है | जब किसी कांड में फँसोगे तो यही ASD आपको दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंकेंगे | आपसे पहले वाले सिक्यूरिटी ऑफिसर भी एक समय नेवल डाकयार्ड प्रशासन के बहुत ख़ास थे | देखे नहीं उनका क्या हुआ ? नौसेना अधिकारी सिर्फ सफ़ेद वर्दीवालों को बचाते हैं | देखिये वो स्त्रीलंपट कप्तान संधू आज तक मौज कर रहा है | भारतीय नौसेना के नाम पर कलंक लगानेवाले रियर एडमिरल संजीव काले और कमोडोर विवेक अग्रवाल अब भी आराम से बैठे हैं | पर आपको किस दिन टांग दिया जाएगा पता नहीं चलेगा | इसलिए अपना व्यवहार सुधारिए | यदि उस लड़की के पिता या भाई वहाँ होते तो आपको दो तमाचा रसीद करते | वो लड़की आपको वहीँ एक झापड़ मार देती तो और अच्छा होता | आप उस लायक हो भी | अब भी मौक़ा है, सुधर जाइये | नहीं तो कभी भी लेने के देने पड़ सकते हैं |

( पाठकों के लिए : आने वाले नव वर्ष में मैं एक से बढ़कर एक धमाके करने जा रहा हूँ | चिंदीचोर कमांडर मुजावर, रिश्वतखोर कमांडर रामचंद्र, स्त्रीलंपट कप्तान संधू, भारतीय नौसेना के कलंक कमोडोर विवेक अग्रवाल और रियर एडमिरल संजीव काले ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) की सच्चाई सामने लाकर उन्हें मुँह दिखाने लायक नहीं छोडूंगा | आप लोग भी खबरों को ज्यादा से ज्यादा फैलाने के लिए तैयार रहिये | मुझसे [email protected] पर मेल कर संपर्क किया जा सकता है | )

डाकयार्ड कॉलोनी के मंदिरों पर नेवल डाकयार्ड प्रशासन की काली नजर

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आप लोग भी सोच रहे होंगे कि तीन-चार दिन हो गए, इ-भारत में कोई नया लेख क्यों नहीं आया ? तो लीजिए आज आपके सामने एक नई पेशकश है | पिछले दो लेख कॉलोनी के महाठग गोपाल और बिरेन्द्र को समर्पित थे | इस बार उन कुकर्मियों को छोड़कर हम पुराने ढर्रे पर वापस आते हैं | आप तो जानते हैं कि हमारा नेवल डाकयार्ड प्रशासन आए दिन मुर्खता से भरे निर्णय लेता रहता है | मुझे उम्मीद है आपने मेरा लेख — मुर्खता की हद : डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में फॅमिली एकोमोड़ेशन के सामने बैचलर एकोमोड़ेशन बनाना जरूर पढ़ा होगा | न पढ़ा हो तो उस लिंक पर क्लिक करके जरूर पढ़े | इस बार उन्होंने क्या नई मुर्खता की है वो सुनें |

हमारे नेवल डाकयार्ड यूनियन के जितने नेता हैं, सब एक से बढ़कर एक चापलूस हैं | उनमें से एक भी ऐसा नहीं है जो डाकयार्ड प्रशासन से श्रमिकों के हित के लिए लड़े | हर नेता कामगारों के सामने बड़ी-बड़ी डींगे हाँकता है और वहाँ नौसेना अधिकारियों के सामने जाकर लेट जाता है | सबमें होड़ लगी है कि कौन बड़ा चापलूस बनेगा | हर यूनियन का नेता अधिकारी के सामने जाता है और दूसरे यूनियन के नेताओं की बुराई करना शुरू कर देता है | उनकी जड़ खोदने में लगता है | वो अधिकारी को सिर्फ वही और उतनी बात बताता है जिससे उसके विरोधी की नाव डूब जाए | सब एक दूसरे के कपडे फाड़ रहे हैं | यूनियन के एक ऐसे ही नेता जिनके भूतकाल में खूब कपडे फट चुके हैं उन्होंने नौसेना अधिकारियों के कान में यह बात डाल दी कि डाकयार्ड कॉलोनी में जितने मंदिर हैं, सबके चढ़ावे में खूब पैसा आता है | मंदिर जिन-जिन लोगों के नियंत्रण में हैं वो लोग इस पैसे से खूब ऐश कर रहे हैं | यह वाक्य सुनते ही हमारे नौसेना अधिकारियों की कौड़ी जैसी आँखें फूल के पकौड़े जितनी हो गई | कान के कच्चे उन अधिकारियों ने इस बात पर तुरंत भरोसा भी कर लिया | अब उन्हें ये बर्दास्त नहीं हुआ कि नौसेना की जमीन पर उनके अलावा कोई और पैसा कमा ले और उन्हें हिस्सा भी न मिले !!! तुरत-फुरत में उन्होंने अपने खुराफाती दिमाग को काम पर लगाया | यूनियन के अपने चापलूसों को भी काम पर लगाया और पूरी योजना तैयार कर ली |

पाँच दिसंबर २०१६ को यूनियन और नौसेना की मीटिंग हुई | मीटिंग में शामिल यूनियन के नेताओं के नाम देखिये : रविन्द्र यादव, ऐश्वर्या रतुरी, बी पी कोयंडे , हरीश शेट्टी, पी बी पाणिग्राही, ऍफ़ वाय कलावे आदि आदि आदि | मीटिंग के दौरान प्रशासन ने यह प्रस्ताव पेश किया कि कॉलोनी के मंदिरों में चढ़ावे के तौर पर जो पैसा आता है उसके बेहतर इस्तेमाल के लिए एक समिति बनाई जाए | इस समिति की अध्यक्षता कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर करेंगे | अर्थात मंदिर में चढ़ाया जानेवाला पैसा अब सीधे समिति के पास जाएगा | सारे यूनियन के नेता इस बात पर तुरंत सहमत हो गए | वैसे भी उन चूहों में इतनी हिम्मत ही नहीं है कि प्रशासन की मर्जी के विरुद्ध एक शब्द कहे | और इस मामले में तो आदेश सीधे हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) की तरफ से आया था | तो सब यूनियन के नेताओं ने हाँ में हाँ मिलाने में ही समझदारी मानी |

मीटिंग का निष्कर्ष ये निकला कि अब से हमारे कॉलोनी के मंदिर डाकयार्ड प्रशासन चलाएगा | मंदिरों के दानपेटियों की चाभी प्रशासनिक अधिकारी रखेंगे | मंदिरों में जो भर-भर के पैसा आता है उसका इस्तेमाल कर के मंदिरों की बढ़िया देखभाल की जाएगी | जितनी कुशलता से बेतवा युद्धपोत का रखरखाव किया गया था, उतनी ही कुशलता से मंदिरों का भी रखरखाव किया जाएगा | मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा कॉलोनी के सहायक सुरक्षा अधिकारी चीमन लांबा उर्फ़ सुपरमैन को दिया गया है | उन्हें यह विशेष आदेश है कि कप्तान संधू को मंदिर के आस-पास फटकने तक न दे, वो किसी भी समय कोई भी कांड कर सकते हैं | गोपाल और बिरेन्द्र को यह अधिकार है कि वो जब चाहे तब, कॉलोनी के किसी भी मंदिर को किराए पर दे सकते हैं और उसका पैसा अपनी जेब में डाल सकते हैं | हो सकता है चार-पाँच बांग्लादेशियों को बुलाकर, उन्हें मंदिरों में पुजारी भी नियुक्त कर दिया जाए (आपको तो पता है हमारे नौसेना के अधिकारियों को बांग्लादेशी बहुत प्रिय हैं) | डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) के नेतृत्व में लिए गए इस क्रांतिकारी निर्णय से मैं तो बहुत खुश हूँ और मुझे पूरी उम्मीद है कि डाकयार्ड कॉलोनी के लोग भी इस निर्णय की भूरी-भूरी प्रशंसा करेंगे |

(बस मुझे यहाँ एक बात का भय है | जब डाकयार्ड कॉलोनी , कांजुर मार्ग के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी  ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale )को सच्चाई पता चलेगी, तब क्या होगा ? कॉलोनी के किसी भी मंदिर की आरती और दानपेटी में कुल मिलाकर इतना पैसा भी नहीं आता कि वहाँ ठीक से साफसफाई कराई जा सके | यह बात काले जी को पता चले और वो अपने खबरची को झूठी खबर देने के कारण पीट-पीटकर दोनों पैरों से लंगड़ा बना दे  तो …. !!! हे भगवान, दया करना उस खबरची पर  |)

इस महत्त्वपूर्ण निर्णय का श्रेय संजीव काले जी के साथ साथ यूनियन के नेता पी बी पाणिग्राही को भी जाता है | उन्होंने मीटिंग के पहले ही प्रशासन को इस बात का आश्वासन दे दिया था कि वो और उनकी यूनियन पूरी तरह इस प्रस्ताव का समर्थन करेगी | मंदिरों की चाभियाँ जो आज कॉलोनी के तुच्छ लोगों के हाथ में हैं, वो नौसेना के महान अधिकारियों के हाथ में जाएगी | ऐसा श्री पी बी पाणिग्राही जी के कारण ही संभव हो सका है | ऐसे कुशल नेता को हम सबको ह्रदय से धन्यवाद देना चाहिए | मैं खुद यह बात सबको बताऊँगा और आप सब से भी यह प्रार्थना करूँगा कि आप लोग कॉलोनी के हर एक व्यक्ति को यह बात बताएँ | कॉलोनी के ओडिशा समुदाय के व्यक्ति तो यह बात सुनकर ख़ुशी से फूले नहीं समाएँगे | शिवमंदिर उनके हाथों से निकलकर, डाकयार्ड प्रशासन के कुशल हाथों में जानेवाला है, वो भी उन्ही के नेता के कारण, इससे बड़ी ख़ुशी की बात क्या होगी !! वाह-वाह !!!

Shri P. B. Panigrahi, Jindabad.
President,  NEU Jindabad.

डाकयार्ड कॉलोनी के महाठग गोपाल और बिरेन्द्र ने इ-भारत को भिजवाई धमकी

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मेरा पिछला लेख : गोपाल कुमार : डाकयार्ड कॉलोनी का महाठग (Conman) — भाग एक काफी लोकप्रिय हुआ है | इसे पढ़कर कई लोगों ने खूब सराहा तो कुछ लोगों को बहुत मिर्ची लगी | कॉलोनी के दोनों कुकर्मी गोपाल और बिरेन्द्र ने भी लेख को पढ़ा | पढ़कर तिलमिला उठे और कमेंट वाले भाग में आकर धमकी देने लगे, वो भी कविता लिख लिख कर | लिखते हैं “बात निकली है ,तो दुर तक जाऐंगी ! आग तुमनें लगाई है,तो आँच तुम तक भी आऐंगी !!” और भी बहुत कुछ लिखा है | दोनों चिंदिचोरों को यह नहीं पता कि अपनी गीदड़ भभकियों से वो चूहे जैसे दिल वाले कमांडर मुजावर को डरा सकते हैं मुझे नहीं |

दोनों महामूर्ख मेरा जवाब ध्यान से पढ़ लें :
“अरे मूर्खों, यह ब्लॉग शुरू करने से पहले मुझे पता नहीं था क्या कि मुझ पर कितनी आँच आ सकती है ! जब मैं बिना नतीजे की परवाह किए एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट के विरुद्ध लिख सकता हूँ, तो तुम दोनों छछुन्दरों से डर जाऊँगा ? जब पूरे नेवल डाकयार्ड मैनेजमेंट से लड़ाई करने से मैं पीछे नहीं हटा, तो तुम दोनों किस खेत की गाजर- मूली हो ?

और जिसको संबोधन करके तुम दोनों ने यह कविता लिखी है, (वैसे कविता तो सिर्फ बिरेन्द्र ने लिखी है, गोपाल तो बस नाम का पढ़ा लिखा है | उसकी गिनती अनपढ़ गंवारों में होती है |) मुझे मालूम है एक वक्त वो तुम दोनों का माई-बाप हुआ करता था | अब तुम दोनों ने कप्तान संधू को अपना माई-बाप बनाया हुआ है | बिलकुल भरोसा रखो एक-दो दिन में तुम्हारे पुराने माई-बाप तक वो कविता पहुँच जाएगी |

और जहाँ तक तुम्हारे नए माई-बाप कप्तान संधू की बात है, उस मुर्ख को यह पता नहीं कि तुम दोनों के पापों की सजा वो भुगता रहा है | वैसे तो वो खुद भी कुकर्मी है पर उसकी जो दुर्गति हुई है वो सिर्फ और सिर्फ तुम दोनों की वजह से हुई है | यह बात तुम दोनों को अच्छे से पता है | कल तक जिस डाकयार्ड कॉलोनी को कुत्ता नहीं पूछता था आज उसकी खबर पर खबर छप रही है | किसी की उसमें अचानक इतनी दिलचस्पी क्यों आ गई ? जिस आदमी की दिलचस्पी आई है, उसकी दुश्मनी सिर्फ तुम दोनों से है | उसको तो बाकी किसी से मतलब ही नहीं है, न कप्तान संधू से, न कमांडर मुजावर से, न चीमन लांबा से और न ही कमांडर रामचंद्र | तुमने मुजावर का प्रयोग किया उसे परेशान करने, उसने मुजावर पर बन्दूक तान दी | तुमने लांबा का प्रयोग किया, लांबा भी आज तक भुगत रहा है | तुमने संधू को अपना माई-बाप बनाया, संधू की खबरें छपनें लगी | संधू पर कारवाई न होने की वजह से डाकयार्ड मैनेजमेंट की खबरें छपने लगी | अब कमांडर रामचंद्र का नंबर कब लग जाए, पता नहीं | (कैंटीन वाले कमोडोर साहब, आप लड़ाई में कूदने की मत सोचिएगा | खूब कपडे फटेंगे | )

उस अल्पबुद्धि संधू को लगता है कि उसके विरुद्ध साजिश हो रही है | उसे यह समझ नहीं आया कि उसे डाकयार्ड कॉलोनी के मच्छर भी नहीं जानते थे तो उसके खिलाफ कोई साजिश क्यों करेगा ? वो तो लांबा और मुजावर की तरह तुम दोनों और व्यक्ति विशेष की लड़ाई में कोलैटरल डैमेज है | जिस तरह आज मुजावर और लांबा उस दिन को पानी पी-पीकर कोसते हैं जब उन्होंने तुम्हारी बात मानकर उस व्यक्ति को परेशान किया और तुम्हारी दुश्मनी अपने सर ले ली, उसी तरह एक दिन संधू भी उस दिन को कोसेगा जिस दिन उसने तुम दोनों की शक्ल पहली बार देखी थी | वो दिन ज्यादा दूर नहीं है | जिस चंगू-मंगू का पुराण तुम दोनों लिखना चाहते हो, वो दोनों भी कोलैटरल डैमेज ही हैं | जिसने ABI में छपवाया उसे पता नहीं था क्या कि संधू के खिलाफ छपने पर चंगू-मंगू शहीद होंगे ? पता होने के बावजूद भी उसने छपवाया ही न ? उसकी तुम दोनों से दुश्मनी ही इतनी बड़ी है कि वो कुछ भी हो जाए पीछे नहीं हटेगा, अब चाहे तुम चंगू पुराण लिखो या मंगू पुराण |

तुम दोनों ने भी संधू का खूब फायदा उठाया | तुम दोनों के अलावा भी यूनियन के कई नेता पहुँच गए चापलूसी करने | उनको लगा यही मौका है जब प्रशासन का करीबी बन सकते हैं | सब जाकर वहाँ खबरें देने लगे | सब संधू के तलवे चाटने वहाँ कतार में खड़े हो गए | संधू को लगा कि उन जानकारियों के आधार पर वो बहुत कुछ कर लेगा | उसने करने की कोशिश भी की | अपने कप्तान होने की ताकत दिखाने लगा | नतीजा यह कि उसके खिलाफ सबूत जो कहीं दबे हुए थे वो सही जगह पहुँचने लगे | जैसे-जैसे उसने अपना पराक्रम दिखाया, वैसे-वैसे सबूतों का ढेर बढ़ने लगा | उसके कुकर्म और तुम दोनों के सुझावों ने मिलकर ऐसे हालत बना दिए हैं कि संधू और उनके वरिष्ठ अधिकारियों को रोज अपमान का घूँट पीना पड़ रहा है | नौसेना को इतनी बदनामी झेलनी पड़ रही है | कॉलोनी के लोग मजे ले-लेकर संधू के किस्से सुनाते हैं और हँसते हैं | मेरे जैसा आदमी जो एक समय एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट की ईमारत में कदम रखने की हिम्मत नहीं करता था, जिसे लगता था कमांडर कितना बड़ा आदमी होता है ! आज सब को धुन्न रहा है | मेरे जैसे कई और हैं, जिनकी हिम्मत अब खूब बढ़ चुकी है | डाकयार्ड प्रशासन को सबको झेलना पड़ेगा |

यह सारी मुसीबत तुम दोनों की खड़ी की हुई है | हर मामले में तुम दोनों हो, हर झगडा तुम्हारा है | तुम दोनों और व्यक्ति विशेष के बीच के महाभारत में हर कोई पिस रहा है | दोनों अच्छे से जानते हो मैं किसके बारे में बात कर रहा हूँ | कभी संधू को सच्चाई बताया ? परेशानी सिर्फ यह थी कि आज तक वो व्यक्ति मुझे सहयोग नहीं कर रहा था | जरूरी कागजात नहीं दे रहा था | उसे लगता था कि मैं सिर्फ नौसेना प्रशासन के विरुद्ध लिखता हूँ | इसलिए उसने मुझसे दूरी बनाए रखी थी | मैनें तुम्हारी प्रशंसा में जो लेख लिखा वो सिर्फ उस व्यक्ति के पढ़ने के लिए लिखा था | मुझे पूरी उम्मीद है कि उसने वो लेख पढ़ लिया होगा | अब तुम्हारी भेजी हुई कविता भी उसे भेज दूँगा | मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि जैसे ही उसे तुम्हारी और मेरी दुश्मनी का पता चलेगा, वो तुरंत मुझे सहयोग करना शुरू कर देगा | इससे तुम्हारे और नौसेना प्रशासन के खिलाफ बड़े-बड़े धमाके करने में मुझे काफी सहायता मिलेगी |

अब तुम दोनों कुछ भी कर लो, आग तो बुझेगी नहीं | आग एक जगह लगी भी नहीं है कि बुझ जाएगी | न वो व्यक्ति रुकेगा, न मैं और न ही तुम्हारे पुराने माई-बाप (जल्दी ही उनको तुम्हारी कविता पढ़ने मिलेगी |) तुमने धमकी में सही लिखा कि सबका इतिहास होता है | सबके इतिहास में १-२ गलतियाँ, १-२ काले अध्याय होते हैं | पर तुम दोनों के तो पूरे इतिहास पर कालिख पुती है | वैसे भी तुम २ हो और तुम्हारे खिलाफ २०२ | तुम्हारे विरुद्ध एक बात पूछो, लोग दस बताते हैं | लोग भरे बैठे हैं | बाकि मैं तो मुकाबले के लिए तैयार हूँ ही | मच्छरों हो जाए आमना-सामना |”

गोपाल कुमार : डाकयार्ड कॉलोनी का महाठग (Conman) — भाग एक

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गोपाल कुमार (दाएँ – right ) तथा बिरेन्द्र कुमार (बाएँ – left ) [ जी हाँ, वही कुप्रसिद्ध बिरेन्द्र कुमार जिसकी कप्तान संधू ने लड़की और शराब का बढ़िया इंतजाम करने के लिए तारीफ़ की थी | चोर-चोर मौसेरे भाई | ]
आज का लेख आपको डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई के महाठग गोपाल कुमार से परिचित कराएगा | उन्हें कॉलोनी का नटवरलाल भी कह सकते हैं | वैसे डाकयार्ड कॉलोनी के काफी लोग गोपाल कुमार के कर्मों से परिचित हैं किंतु मैं यहाँ विस्तार में बताने जा रहा हूँ | सबके लिए इस लेख में कोई न कोई नई जानकारी अवश्य होगी |

गोपाल कुमार लंबे समय तक (लगभग छः से सात वर्ष) डाकयार्ड कॉलोनी के सुरक्षा विभाग (Security Office) में काम करते रहे | वो सबको कहते फिरते थे कि “पाँच वर्ष में तो सरकार भी बदल जाती है, मुझे तो छः साल होने जा रहा है |” इस वाक्य से उनके कहने का तात्पर्य था कि कॉलोनी से किसीका भी तबादला (Transfer) हो सकता है पर उनका नहीं | लोगों को लगता भी ऐसा था | नौसेना के अधिकारियों, पुलिस, स्थानीय नेताओं तथा अपराधियों पर उनकी तगड़ी पकड़ थी | इन ६-७ वर्षों में गोपाल कुमार ने कॉलोनी में खूब कुकर्म किए, खूब माल बनाया | उसके कारनामों का थोडा बहुत ब्योरा मैं आप लोगों के सामने रख रहा हूँ :

१) गोपाल कुमार डाकयार्ड कॉलोनी में नौसेना अधिकारियों, राजनेताओं और पुलिस के सबसे मुख्य दलाल रहे हैं | कॉलोनी के ठेकेदारों, दुकानदारों तथा अन्य लोगों से पैसा इकठ्ठा कर उसे नौसेना के अधिकारियों तक पहुँचाना इनका मुख्य काम रहा है | पुलिसवालों को कानूनी या गैरकानूनी रूप से किसी व्यक्ति को कहीं ठहराना हो, या उन्हें शराब की जरूरत हो या उन्हें डाकयार्ड के कैंटीन से सस्ता सामान चाहिए, तो गोपाल कुमार उनका यह काम तुरंत कर देते थे | डाकयार्ड कॉलोनी की बंद पड़ी ईमारतें और कैंटीन पुलिसवालों की सेवा में सदा तत्पर रहती थी | कॉलोनी की अंदरूनी खबरें राजनेताओं तक मिनटों में पहुँच जाती थी | इसका श्रेय भी गोपाल कुमार को ही जाता है |

२) ठेकेदारों को कॉलोनी की जमीन और बंद पड़ी ईमारतें किराए पर देकर गोपाल कुमार ने खूब माल बटोरा | ईमारत U की पूरी पहली मंजिल, ईमारत K का कमरा क्र. ७, ईमारत क्र. २०२ के सामने का स्टोर, नाले और न्यू इंग्लिश स्कूल के बीच बने गोदाम, ईमारत क्र. ४२, ईमारत क्र. १७४ तथा ईमारत क्र. ६१ के कई कमरों को उन्होंने किराए पर दे रखा था | इनमें से कई मामलों के सबूत नेवल डाकयार्ड प्रशासन (प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर और कमोडोर विवेक अग्रवाल के पास है | (संजीव काले जी इस बात को नोट कीजिए |) कुल मिलाकर १००-१५० व्यक्ति गोपाल कुमार की मेहरबानी से डाकयार्ड कॉलोनी में गैरकानूनी ढंग से रहते थे | इसके बावजूद गोपाल कुमार पर कारवाई न होना, नौसेना अधिकारियों के इस भ्रष्टाचार में शामिल होने का सबसे बड़ा सबूत है |

इसमें सबसे कुख्यात मामला ईमारत U का है, जिसकी पहली मंजिल में गोपाल कुमार ने बांग्लादेशियों को ठहरा दिया था | नौसेना की ईमारत में बांग्लादेशी रह रहे हैं, यह बात देश की सुरक्षा के लिए यह बहुत बड़ा खतरा हैं | नौसेना के उच्च अधिकारियों को मामले की पूरी जानकारी है | मामला सामने आने पर गोपाल कुमार का तबादला कर दिया गया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई | तबादला भी डाकयार्ड के ऐसे सेंटर में किया गया जहाँ का मेनेजर गोपाल कुमार के जान पहचान का है | उसे उसके पेरेंट्स सेंटर वापस नहीं भेजा गया | गोपाल कुमार वहाँ आराम से बैठकर मुफ्त की तनख्वाह उड़ा रहे हैं | नौसेना के अधिकारियों ने इतने दिन गोपाल की सहायता से जो पैसे कमाए थे, उसे इस मामले में बचाकर उन्होंने अपना कर्ज उतार दिया |

३) गोपाल कुमार के समय में कॉलोनी में खूब पेड़ कटे | वैसे कट तो अब भी रहे हैं | आप सब को यह बात पता ही है | पर आपको यह नहीं पता होगा कि उन लकड़ियों को बेच के खूब पैसे मिले हैं, जिसमें से ज्यादातर पैसा नौसेना के अधिकारियों तथा गोपाल कुमार ने आपस में बाँट लिए |

४) डाकयार्ड कॉलोनी की जमीन पर कई बार गैरकानूनी कब्जे की कोशिश हुई है | इसमें से एक बड़ी कोशिश कॉलोनी के अयप्पा मंदिर के पीछे स्थित फुले नगर से हुई | कॉलनी की जमीन पर कब्जा कर बहुत सारे घर बनाए व बेच दिए गए | गोपाल कुमार और सुरक्षा अधिकारी चीमन लांबा को उस पैसे में हिस्सा मिला है | अब घर रातोंरात तो बनते नहीं | घर बनने के दरम्यान हमारे कमांडर मुजावर जी घोड़े बेचकर सो रहे थे | इतने सारे घर जब बनकर तैयार हो गए और बिक गए, तब उनकी नींद खुली | महानगरपालिका में शिकायत कर उन घरों को तोडा गया | बेचारे खरीदने वाले गरीब लोग फँस गए |

५) गोपाल कुमार ने कॉलोनी में आने-जाने के लिए कई लोगों को गैरकानूनी तरीके से गेटपास बनाकर दिए | उस समय के सिक्यूरिटी इंचार्ज चीमन लांबा और प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर को यह बात पता है | पर कमांडर मुजावर में इतनी हिम्मत नहीं कि गोपाल कुमार पर कार्रवाई करें |

६) गोपाल कुमार की मेहरबानी से कॉलोनी अपराधियों और नशेड़ियों का अड्डा बन गया था | वो बिंदास्त कॉलोनी के मख्य बाजार के दुकानों के बीच बैठकर, प्रशासनिक कार्यालय और सेंट ज़ेवियर विद्यालय के बीच की सड़क पर बैठकर, जोग्गर्स पार्क में बैठकर नशा करते थे | इसके अलावा वो छुपकर कॉलोनी की बंद पड़ी ईमारतों में, जंगलों में बैठकर भी नशा करते हैं | छुपकर नशा करना तो समझ आता है पर मुख्य बाजार में, प्रशासनिक कार्यालय के पास नशा करने की हिम्मत उनमें कहाँ से आई ? यह हमारे गोपाल कुमार की मेहरबानी थी | गोपाल कुमार को जब भी कोई गलत काम करना हो, यह नशेडी उनके लिए कर देते और बदले में उन्हें मौजमस्ती की छूट मिल जाती | आप सब ने ध्यान दिया होगा कि जब से गोपाल कुमार का कॉलोनी से तबादला हुआ है तब से मुख्य बाजार में, प्रशासनिक कार्यालय के पास और जोग्गर्स पार्क में बैठकर नशा करनेवालों की संख्या न के बराबर हो गई है | नशेडी अब भी बहुत हैं पर वो खुलकर, लोगों के बीच बैठकर नशा करने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं |

७) कॉलोनी में काफी पहले एक महिला को मुख्य बाजार में दूकान मिला हुआ था | उसका नाम मुझे याद नहीं | उसने गोपाल कुमार पर लैंगिक शोषण की कोशिश का आरोप लगाया था | गोपाल कुमार ने नौसेना के अधिकारियों और पुलिस के साथ मिलकर घर से और दूकान से उसका सामान फेंक दिया था | उसे डाकयार्ड कॉलोनी से निकाल दिया | एक असहाय महिला के ऊपर इतना बड़ा अत्याचार ! यह मामला बड़ा विस्फोटक है | सामने आ जाए तो नौसेना मुँह दिखाने लायक नहीं रहेगी | पर मेरा उस महिला से संपर्क नहीं हो पाया है | कॉलोनी में एक व्यक्ति के पास इस मामले के सारे कागजात है, पर उससे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है | मैं कोशिश में लगा हुआ हूँ | यदि उस महिला या व्यक्ति से संपर्क हो जाए तो मान के चलिए इन सफ़ेद वर्दीधारियों के मुँह पर कालिख पुत जाएगी |

८) कॉलोनी में एक महिला ने दहेज़ की प्रताड़ना के कारण दो बार आत्महत्या का प्रयत्न किया था | उसके ससुर डाकयार्ड के कर्मचारी और गोपाल कुमार के मित्र थे | वो महिला शिकायत के लिए जब पुलिस स्टेशन गई तो गोपाल कुमार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर प्राथमिकी दर्ज नहीं होने दी | इस मामले की शिकायत महिला ने डाकयार्ड प्रशासन से भी किया किंतु नौसेना के नकारा अधिकारियों ने कुछ नहीं किया | इस मामले में भी महिला मेरे संपर्क में नहीं है और कॉलोनी में जिसके पास शिकायत की प्रति है उससे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है | नहीं तो उस प्रति को यहीं छापकर नौसेना और गोपाल कुमार के पापों का पूरा भंडाफोड़ करता | वैसे भी नौसेना के अधिकारी पुलिस स्टेशन में फ़ोन करके बहुत सारे गलत काम करवाते हैं | कैंटीन से सस्ता सामान मिलने और नौसेना के अधिकारी होने के कारण पुलिस उन्हें सहयोग भी करती है | (इसका विवरण और उदाहरण कभी और दूँगा |)

( यह लेख बड़ा लंबा हो गया है | बहुत कुछ बाकी रह गया है पर लिखते-लिखते मैं ऊब गया हूँ | इसलिए बाकी भाग दो बनाकर कभी और लिखूँगा | आप लोग यह लेख सब तक पहुँचाकर इन पापियों के कुकर्मों का पर्दाफ़ाश करने में मुझे सहयोग कीजिए | मुझसे संपर्क करने के लिए मेल करें : [email protected] )

नौसेना के अधिकारियों का भ्रष्टाचार/मुर्खता और डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग की बंद पड़ी इमारतें

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पिछले कुछ दिनों से डाकयार्ड कॉलोनी में जिस गति से निर्माण कार्य चल रहा है उसे देखकर नेवल डाकयार्ड प्रशासन पर गर्व करने का मन करता है | बातों-बातों में बेचलर एकोमोड़ेशन बनके तैयार | किरण मोरे जी की खेल-कूद अकादमी का काम युद्धस्तर पर जारी है | प्रधानमंत्री मोदी को यदि पता चल जाए कि सरकारी विभाग में भी इतनी तेजी से काम हो सकता है तो हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) का मंत्री बनना तय | इतना कार्यक्षम व्यक्ति दशकों में मुश्किल से एक बार पैदा होता है |

लेकिन जैसे ही हम लोग डाकयार्ड कॉलोनी की इमारतों की ओर मुड़ते हैं, हमें कुछ और ही दिखाई देता है | कॉलोनी में दर्जनों इमारतें मरम्मत के नाम पर बंद पड़ी हैं | कई तो वर्षों से बंद पड़ी है | K से लेकर U  तक आधे से ज्यादा इमारतें रहने योग्य नहीं है | कई इमारतों में आधे घर भी भरे नहीं है | इमारतों का हाल देखने पर ऐसा लगता है जैसे ५०० वर्ष पुराने खँडहर हो | इसके अलावा कम्युनिटी हॉल के पास की तथा बाजार के पीछे की कई इमारतें बंद पड़ी है | ये इमारतें किसी को नहीं दिखती |

डाकयार्ड कर्मचारियों ने कॉलोनी में घर मिले इसलिए लंबी कतार लगा रखी है | इंतज़ार करते हुए सालों बीत गए | कॉलोनी में मुश्किल से एक कमरा किराए पर मिलता है, उसके लिए भी शेयरिंग फॉर्म भरना पड़ता है | कॉलोनी के बाहर रहो तो किराया इतना महँगा कि आधी पगार गायब हो जाए | अंबरनाथ-बदलापुर जाकर रहना पड़ता है | वहाँ से काम पर आने-जाने के लिए घंटों मेहनत | पर कर्मचारियों की इन सब तकलीफों से नौसेना के अधिकारियों को क्या ! उनके लिए तो इमारतें जितने ज्यादा दिन बंद रहे उतना अच्छा | बंद पड़ी इमारतों को ठेकेदारों को किराए पर देकर मोटा माल कमाया जा रहा था | सैकड़ों की संख्या में ठेकेदार के आदमी कॉलोनी की इन बंद पड़ी इमारतों में रहते थे | उनसे हर महीने लाखों रुपये की हर महीने कमाई हो रही थी | पर जब से बांग्लादेशियों के रहने की बात पता चली है तब से ठेकेदारों को किराए पर कमरे देना काफी कम हो गया है | बेचारों की कमाई का जरिया लगभग बंद हो गया है |

अब यह हमारे वर्क्स कमिटी के सदस्यों की जिम्मेदारी है कि जाकर काले जी से पूछे कि उनकी प्राथमिकता क्या है ? कर्मचारियों के लिए घर या किरण मोरे जी की खेल-कूद अकादमी ? व्यावसायिक निर्माण में वो इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहे हैं ? बंद पडी इमारतों का निर्माण कार्य कब शुरू होगा और कब पूरा होगा ? यदि बेचलर एकोमोड़ेशन और खेल-कूद अकादमी इतनी तेजी से बन सकती है तो कॉलोनी की इमारतों का निर्माण कार्य तेजी से क्यों नहीं हो सकता ? कॉलोनी का हर काम यदि एम.ई.एस. की वजह से रुका हुआ है तो यह दोनों काम क्यों नहीं रुका ?

वर्क्स कमिटी के सदयों को नेवल डाकयार्ड प्रशासन से यह सब जवाब लेकर डाकयार्ड के कर्मचारियों को बताना चाहिए | यदि वे यह काम नहीं करते तो यह डाकयार्ड के कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि उन पर दवाब बनाएँ | नेताओं को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाना हमारा काम है | फिर भी यदि वो न माने तो अगले चुनाव में उनका ख़ास ध्यान रखा जाए | वोट माँगने तो वो आएँगे ही | बाकि नौसेना के अधिकारियों से कोई उम्मीद नहीं है | उन्हें हमारी हितों की नहीं पड़ी है | भ्रष्टाचार कहो या मुर्खता, पर वो सिर्फ मलाई वाले काम पर ध्यान देते हैं | आपको और हम को तब तक भुगतना है जब तक हम उनके खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटाते | सफ़ेद वर्दी में छुपे ये जोंक देश की रक्षा करे या न करे किंतु हमारा खून और पैसा जरूर चूस रहे हैं | आनेवाली पीढ़ी को इनकी गुलामी से बचाना है तो आज इनका विरोध करना ही पड़ेगा |

(पाठकगण :  मुझसे संपर्क करने के लिए [email protected] पर मेल कर सकते हैं |)