नेवल डाकयार्ड सुपरवाइजर एसोसिएशन (AINTSSA) के पदाधिकारी दोबारा मुर्ख बने

aintssaनेवल डाकयार्ड सुपरवाइजर एसोसिएशन  (AINTSSA) के पदाधिकारी whtsapp पर एक मेसेज खूब भेज रहे हैं :

Salute to the Indian judiciary system. our Judiciary system has proved it again as to why it is the best system in the world. In a land mark decision on our ad interim protection, the Hon. CAT, in it’s 16 page order, has directed the respondents to take appropriate action to comply with the ad-interim order of status quo ante within two days from the date of receipt of the order. Accordingly, our AINTSSA office, which was sealed by the order of the Estate officer will be opened at 10.30 hrs on 28th Nov(Monday). All r requested to visit the office for redressal of grievances as was being done till 18th Nov 16. Thanks to Dockyard administration for compliance of the order of Hon. CAT, Bombay, Mumbai.

अब यह पढ़िए | डाकयार्ड प्रशासन को धन्यवाद दे रहे हैं कि न्यायालय की आज्ञा के अनुसार वो उनका कार्यालय खोलकर दे रहे हैं | कोर्ट से आर्डर आकर दो दिन बीत गए थे, यही प्रशासन घास भी नहीं डाल रहा था | वो तो Contemp of Court की नोटिस देने की नौबत आई, तब जाकर एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट ने कार्यालय खोलने की अनुमति दी | अब ऐसे प्रशासन को धन्यवाद देने का क्या मतलब ???

मेसेज तो यह फैलाना चाहिए था कि अपनी लोकतांत्रिक शक्तियों का उपयोग कर, नौसेना के अधिकारियों को उनकी जगह दिखाकर AINTSSA अपना हक़ छीन के लाइ है | आगे से कोई अधिकारी सुपरवाइजरों के अधिकारों पर डाका डालने की हिम्मत न करे |

ऐसा करने के बजाय नौसेना प्रशासन को धन्यवाद दिया जा रहा है | ऊपर से AINTSSA के पदाधिकारी एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट से समझौता कर आए | उन्होंने AINTSSA का कार्यालय खुलवाकर कोई मेहरबानी नहीं की | कार्यालय कोर्ट के आदेश से खुला है, उनकी दया से नहीं | फिर कप्तान संधू का क्या ? वो जो दारु पीकर इतनी गालियाँ दे गया, क्या एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट उसपर कोई कार्रवाई करने जा रहे हैं ? या उसके सारे पाप माफ़ हो गए ? कोई डाकयार्ड का साधरण कर्मचारी शराब पीकर किसी नौसेना वाले को गाली दे देता तो उसकी नौकरी चली जाती | यहाँ कप्तान संधू ऐश कर रहे हैं | अब AINTSSA के पदाधिकारियों में लड़ने की हिम्मत ही न हो तो कोई क्या करे |

उन्हें यह कहकर आना चाहिए था कि जब तक गालियाँ देने वाले कप्तान संधू पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक प्रशासन से कोई बात नहीं होगी | प्रशासन से कोई सहयोग नहीं किया जाएगा | न्यायालयने दो दिन में कार्यालय खोलने कहा था, यहाँ ५ दिन में खुल रहा है | Contemp of Court की नोटिस देकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कारवाई के लिए कोर्ट जाना चाहिए | यही मौका था दिखाने का कि यह लोकतंत्र है, नौसेना का कोई अधिकारी यदि यह समझता है कि उसकी सफ़ेद वर्दी उसे हमसे बड़ा बनाती है तो वो गलत है |

एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट ने बुलाकर थोडा डाँटा, थोडा पुचकारा तो बेचारे पदाधिकारी सब भूल गए | पिछले समझौते का नतीजा भी भूल गए | उनको लगता है – “इतना बड़ा साहब हमसे बुलाकर बात कर रहा है, हमारा जीवन धन्य हो गया |” यही हाल है यूनियन का भी और AINTSSA का भी | इसीलिए नौसेना के अधिकारी कामगारों और सुपरवाइजरों से ऐसा व्यवहार करते हैं | और हमारे चूहे जैसे दिल वाले साथी उन्हीं अधिकारियों को अपना माई-बाप बना बैठे हैं | अधिकारी इन्हें अपनी गोल-मोल बातों से बेवकूफ बनाते हैं और यह बनते हैं | ऐसे संघर्ष आगे नहीं बढ़ता |

इसे पढ़नेवाले सभी नेवल डाकयार्ड के कर्मचारियों को मेरा आवाहन है, अपना आत्मसम्मान मत बेचो | इन वर्दीवालों से के विरुद्ध बोलना और लिखना सीखो | देश के रक्षक होने के नाम पर यह नौसेना वाले हमें गुलाम बना कर रखने का प्रयत्न कर रहे हैं | इनका विरोध करो, हर कदम पर विरोध करो |

(मुझसे [email protected] पर मेल कर संपर्क किया जा सकता है |)

मुर्खता की हद : डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में फॅमिली एकोमोड़ेशन के सामने बैचलर एकोमोड़ेशन बनाना

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हमारे सरकारी अधिकारी सब एक से बढ़ कर एक नगीने होते हैं | कुछ भी उलूल जुलूल फैसले लेते हैं और उनको लगता है कि उन्होंने दुनिया का सबसे बेहतरीन निर्णय लिया है | नौसेना के अधिकारी भी इससे अलग नहीं है |

अब हमारे एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को ही ले लीजिए, जब से आए हैं डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग की कायापलट करने पर तुले हैं | दर्जन भर प्रोजेक्ट एक साथ शुरू कर दिए | अब उनके इरादे अच्छे हो सकते हैं, पर निर्णय एक से बढ़कर एक मूर्खतापूर्ण |

वो कॉलोनी के पुराने गेट क्र. ३ के पास बैचलर एकोमोड़ेशन बना रहे हैं | अब इरादा तो ठीक है | नए लडके डाकयार्ड में काम पर लगते हैं, उन्हें मुंबई में रहने में बड़ी असुविधा होती है | इतनी बड़ी डाकयार्ड कॉलोनी पड़ी है, उसका उपयोग किया जाए |

पर उनका जगह का चुनाव देखिये, ठीक फॅमिली एकोमोड़ेशन के सामने | अब पता नहीं कभी संजीव जी या उनको सुझाव देने वालों में से कोई कभी हॉस्टल में रहा है या नहीं | जवान लडके अपने अंतर्वस्त्रों में वहीँ घूमेंगे | उनको किसी की पड़ी नहीं रहती | बिंदास अंडरवियर में वहीँ घूमेंगे, कोई कुछ बोले तो उनसे झगडा करेंगे | अब उनमें से कुछ कप्तान संधू के गुणोंवाले निकलें तब तो और सोने पर सुहागा | सामनेवाली इमारत में रहनेवाली स्त्रियों के लिए इमारत से बाहर निकलना शर्मिंदगीपूर्ण हो जाएगा | बाजू से ही वो सड़क गुजरती है, जहाँ से कॉलोनी के ज्यादातर लोग आते-जाते हैं  | लड़कियों पर छींटाकशी होगी | थोड़ी सी समझदारी दिखाते तो शायद यह सब कि नौबत नहीं आती | कॉलोनी में इतनी जगह है | बैचलर एकोमोड़ेशन को फॅमिली एकोमोड़ेशन से दूर बनाना चाहिए था, पर अधिकारी को जो उपाय ध्यान में आ गया वो तो बस आ गया |

इसके लिए कॉलोनी के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं है | जिसे देखो वो इस फैसले की बुराई कर रहा है | अधिकारियों को गाली दे रहा है | पर एक में भी हिम्मत नहीं कि जाए और अधिकारी के सामने यह बात बोले | अब एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट के काम में गलती निकाले कौन !!! तुरंत निशाने पर आ जाएँगे | अधिकारी के सामने सबकी पतलून गीली | सबसे बढ़िया किरदार तो डाकयार्ड के यूनियन के नेता निभा रहे हैं |  बातें इतनी बड़ी-बड़ी करेंगे जैसे लगेगा डाकयार्ड के कर्मचारियों का उनसे बड़ा हितैषी कोई नहीं | दूसरी ओर नौसेना अधिकारियों के सामने जाकर पूरी तरह दंडवत हो जाएँगे | बस उनकी हाँ में हाँ मिलाएँगे | जितने भी यह डाकयार्ड के नेता है, सबके काले कारनामे हैं | सबकी गर्दन नौसेना अधिकारियों के हाथ में हैं | इसलिए बेचारे चूहे बने रहते हैं | फिर उन्हें भी तो मलाई खानी है | कर्मचारियों के लिए लडके क्या मिलनेवाला है ? मलाई तो अधिकारी के साथ मिलकर ही खाई जा सकती है |

जिनका निर्णय है उन्हें कोई नुकसान होगा नहीं | जिन्हें परेशानी है वो बोलने की हिम्मत कर नहीं रहे | यूनियन के नेता बंदरबाँट में जुटे हैं | मैं भी यह लेख यहीं पूरा करके अपने काम में लगता हूँ |

(मुझसे [email protected] पर मेल कर संपर्क किया जा सकता है |)

पश्चिमी नौसेना कमांड के अधिकारियों द्वारा अपने साथी को बचाने के लिए कुचक्र

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अभी कुछ दिनों पहले (२५ अक्तूबर २०१६), मुंबई के नेवल डाकयार्ड में नौसेना के कप्तान एस. एस. संधू तथा नेवल डाकयार्ड के सुपरवाइजरों में जोरदार झगड़ा हुआ था | सुपरवाइजरों का आरोप था कि कप्तान संधू ने शराब के नशे में धुत होकर उन्हें खूब गालियाँ दी | कप्तान संधू का कहना था कि सुपरवाइजरों की कैंटीन गैरकानूनी है, उसे बंद कराने का निर्देश उन्हें एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले ने दिया था |

सच जो भी हो, भगवान को ही पता है पर नौसेना के अधिकारियों ने बड़ी चालाकी से मामले को निपटाया | सुपरवाइजर इस बात पर अड़े थे कि कप्तान संधू की चिकित्सक जाँच कराई जाए | कप्तान संधू उनकी इस माँग से डर कर नेवल डाकयार्ड छोड़ कर भाग गए | सुपरवाइजरों ने एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) के सामने मामला उठाने का निश्चय किया किंतु वो कार्यालय में नहीं थे | कमोडोर लेखी ने मामले में बीच बचाव किया | उन्होंने कप्तान संधू को डाकयार्ड वापस बुलाया | दोनों पक्षों में सुलह कराया | सुपरवाइजरों को इस बात के लिए राजी कराया गया कि वो संधू की पुलिस में शिकायत नहीं करेंगे, न ही वे उनकी चिकित्सकीय जाँच की माँग करेंगे | इसके बदले सुपरवाइजरों को आश्वासन दिया गया कि उनकी कैंटीन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी | दोनों पक्ष सुलह पर राजी हो गए | पर सुपरवाइजरों को अंदाजा नहीं था कि उनके लिए भविष्य में क्या छुपा है |

कुछ दिनों में कमोडोर विवेक अग्रवाल जो कि कप्तान संधू के अन्तरंग मित्र हैं, काम पर वापस आए | उन्होंने एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को मामले की जानकारी दी | सुपरवाइजरों पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया | ८ सुपरवाइजरों पर आरोपपत्र दाखिल किया गया और एक दिन की नोटिस देकर उनकी कैंटीन को बंद कर दिया गया | उनके एसोसिएशन कार्यालय पर ताला लगा दिया गया |

अब बेचारे सुपरवाइजर क्या करते ! वो नौसेना अधिकारीयों की गोल-मोल बातों में आकर फँस चुके थे | अब ४-५ दिन बाद कप्तान संधू की चिकित्सकीय जाँच करवा के कुछ मिलनेवाला तो था नहीं | तीर कमान से निकल चुका था | वो जाकर कमोडोर लेखी से मिले पर उन्होंने भी अपनी असमर्थता प्रकट की | बेचारे हर तरफ से नाउम्मीद होकर न्यायालय की शरण गए | न्यायालय में पहली ही सुनवाई में सुपरवाइजरों को राहत मिली और नौसेना के आदेशों पर स्थगन दे दिया गया | कैंटीन और कार्यालय दोबारा खुलने जा रहा है |

उम्मीद है इस घटना से सुपरवाइजर सबक लेंगे और अगली बार नौसेना अधिकारियों पर भरोसा करने से पहले सौ बार सोचेंगे |

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भारतीय नौसेना और मेरा अनुभव – विषय

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यह ब्लॉग पूरी तरह भारतीय नौसेना को समर्पित है | मैं बचपन से जिस स्थान पर रहा, पला – बढ़ा, उस स्थान का नौसेना से सीधा संबंध रहा है | भारतीय नौसेना से जुड़े कई लोगों से मेरी मुलाक़ात होती रही | मुझे उनके विषय में काफी जानकारियाँ मिली, कई अच्छी बुरी चीजें जानने को मिली | एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण राष्ट्रवाद की भावना मुझमें बहुत प्रबल है, वैसे भी उसके सिवा हम लोगों के पास है ही क्या !!!!

भारतीय सेना के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है | देश के प्रति अत्यधिक प्रेम होने के बावजूद मुझे पता नहीं कि मैं सैनिकों की तरह अपने प्राणों को संकट में डाल पाउँगा या नहीं |  देश के लिए उन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगाया है, मैं उन्हें अपने ह्रदय से धन्यवाद देता हूँ और भगवान् से उनके मंगल की सदैव प्रार्थना करूँगा |

भारतीय सेना के प्रति इस सम्मान के बावजूद मैनें इन वर्षों में यह महसूस किया है कि हमारे समाज में जो कमियाँ है, हमारी सेना भी उन कमियों का प्रतिबिम्ब ही है | देश भक्ति की भावना को छोड़ दिया जाए तो उनमें और हममें अत्यधिक दूरियाँ भी है | देश के सिपाही होने के कारण हम उन्हें सम्मान देते हैं किंतु इसके बावजूद सब कुछ ठीक नहीं है |

मेरा अनुभव है कि हमारे समाज में शक्तिशाली और कमजोरों में, धनी और गरीबों में जो संबंध है वही संबंध सैनिकों तथा असैनिकों में है | समाज का धनी व प्रभावशाली तबका कमजोरों और गरीबों को हेय दृष्टी से देखता है, हमारे सैनिक भाई भी असैनिकों को लगभग इसी दृष्टी से देखते हैं | धनी व्यक्तियों को भले यह अनुभव नहीं हुआ हो, पर मैनें वर्षों तक यह अनुभव किया है | मेरे कई परिचितों का भी यही अनुभव है |

मेरा यह ब्लॉग पूरी तरह उन अनुभवों को समर्पित है | आप इतनी बातों से अंदाजा लगा चुके होंगे कि मैं जो लिखने जा रहा हूँ वो हमारी सेना (नौसेना) की प्रशंसा में तो नहीं है | मेरे और मेरे अपनों के कटु अनुभवों का पूरा कच्चा चिट्ठा इस ब्लॉग में मैं खोलने जा रहा हूँ | मुझे पता है कि इस तरह की नकारात्मक विषय पर पूरा ब्लॉग लिखना बहुत सुखद अनुभव नहीं है, पर मेरा विद्रोही मन मुझे चुप बैठने नहीं देता | इसलिए मैं लिखुंगा और शायद शब्द ऐसे तीखे होंगे कि भारतीय नौसेना तिलमिला जाए | देखते हैं भविष्य की यात्रा कैसी होगी !!!!!

(मुझसे [email protected] पर मेल कर संपर्क किया जा सकता है |)