कमांडर मुजावर का भ्रष्टाचार : डाकयार्ड कॉलोनी के शिशु विकास केंद्र के लिए कापी और किताब खरीदने में घोटाला

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इस लेख के द्वारा मैं एक बार फिर सफ़ेद वर्दीधारियों के भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा हूँ | इस बार हमारे लेख के नायक हैं एम. एच. ए. मुजावर | महाशय भारतीय नौसेना में कमांडर के पद पर हैं | आप इनसे मिलेंगे और बातें करेंगे तो लगेगा कि इनसे शरीफ आदमी कोई नहीं, पर हैं अव्वल दर्जे के चिंदीचोर | पिछले लेख में जो मैनें हंस के भेष में बगुलों के छिपे होने की बात लिखी थी, वो इनपर बिलकुल सटीक बैठती है | पैसे कमाने का कोई मौका नहीं छोड़ते, चाहे किसी भी तरीके का प्रयोग करना पड़े : साम-दाम-दंड-भेद | अब आइये बताता हूँ कि किस तरह से इन्होनें डाकयार्ड कॉलोनी में चलनेवाले शिशु विकास केंद्र को अपनी कमाई का जरिया बना रखा है |

सत्यप्रकाश अहलावत जी के साथ मिलकर कमांडर मुजावर किस तरह पालकों को लूट रहे हैं यह तो मैं पहले ही लिख चुका हूँ | यदि आपने न पढ़ा हो तो इस लिंक पर क्लिक करें : डाकयार्ड कॉलोनी कांजुरमार्ग, मुंबई में पूर्व नौसेना कर्मचारी ने मचाई लूट | आज शिशु विकास केंद्र से पैसे बनाने का उनका दूसरा तरीका बता रहा हूँ | यह तरीका मुजावरजी का पसंदीदा है, क्योंकि इसकी किसीको कानोंकान खबर तक नहीं लगती |

शिशु विकास केंद्र में आनेवाले विद्यार्थियों को विद्यालय प्रशासन कापी और किताबें देता है | इन कापी और किताबों का दाम अधिकतम मूल्य (MRP) के हिसाब से पालकों से ले लिया जाता है | उन्हें सभी कापी और किताबों की कुल कीमत बताई जाती है, वे बेचारे पूरी कीमत चुका भी देते हैं | अब यहाँ तक सुनने में तो नहीं लगता कि कुछ भ्रष्टाचार हो रहा है, किंतु यदि आपने कभी किसी दूकान से कापी खरीदी होगी और थोडा सा ध्यान उसके अधिकतम मूल्य (MRP) पर दिया होगा, तो समझ गए होंगे कि गड़बड़ क्या है | कापियों पर जो अधिकतम मूल्य (MRP) छपा होता है, दुकानदार हमसे उसकी तुलना में काफी कम पैसा लेता है | कीमत में २०% से ३०% तक का फर्क होता है | तब फिर मुजावर जी ऐसी कौन सी दूकान से कापी खरीद रहे हैं जो उन्हें अधिकतम मूल्य (MRP) पर ही मिल रही है | शिशु विकास केंद्र के सैकड़ों विद्यार्थियों के लिए एक साथ कापी और किताबें खरीदी जाती है | इतनी बड़ी मात्रा में खरीदने पर अतिरिक्त छूट मिल जाती है | साथ ही साथ किसी रिटेलर से न खरीदकर होलसेलर से कापी और किताबें खरीदी जाती है | नतीजा यह कि छपे हुए अधिकतम मूल्य (MRP)  के आधे दाम पर नेवल डाकयार्ड प्रशासन को कापी और किताबें मिल रही हैं | अब ऐसे में यह तो सोचना ही पडेगा कि तब पालकों से भी आधा दाम क्यों नहीं लिया जाता ? उन बेचारों से पूरा पैसा क्यों लिया जाता है ? बाकि पैसा किसकी जेब में जाता है ? सिर्फ मुजावर जी यह मलाई खा रहे हैं या कई और भी हैं ? शिशु विकास की प्राध्यापिका को इसमें कितना हिस्सा मिलता है ? नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों को कितना मिलता है ?

अब इनसे भी बड़े प्रश्न – मेरे लेखों पर आगबबूला होनेवाले एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी  ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) इस मामले में क्या कदम उठाएँगे ? और यह जो वर्क्स कमिटी के दस चापलूस हैं, जो प्रशासन की गोद में जा बैठे हैं, वो इस मामले में क्या करेंगे ? मुजावर से मिलकर अपना हिस्सा लेकर चुप बैठेंगे या शिशु विकास के पालकों को लुटने से बचाएँगे ?

वैसे लोकतंत्र में यह हमारा अधिकार है कि हम सरकारी कर्मचारियों से ऐसे प्रश्न करें और हमें उसका उत्तर भी मिलना चाहिए | पर बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधेगा ? नेवल डाकयार्ड प्रशासन से इन प्रश्नों का उत्तर कौन माँगेगा ? कमांडर मुजावर और नौसेना के अन्य अधिकारियों की नाराजगी कौन मोल लेगा ?

पर पाठक गण अब तक समझ गए होंगे कि डाकयार्ड कॉलोनी के शिशु विकास केंद्र में, जहाँ ३-४-५ वर्ष के मासूम बच्चें पढ़ते हैं, वहाँ पर भी लूट मची है लूट | गणवेश (यूनिफार्म) पर लूटा, कापी किताबों पर लूटा, बाकि का भी पता लगा कर बताऊँगा | मेरा पाठकों से निवेदन है कि सूचना अधिकार (RTI) के तहत एक आवेदन देकर पिछले पाँच वर्षों में शिशु विकास केंद्र के लिए खरीदे गए सारे कापियों और किताबों की रसीद माँगे | आप लोग हिम्मत करोगे तभी तो इन वर्दीधारियों को सबक सिखा पाओगे |

( पाठकों के लिए : समय न मिलने के कारण पिछले तीन दिन से कुछ लिख नहीं पाया था | पर आप सब मुझपर भरोसा रखें | जो जानकारी आप लोग मुझे मेल के द्वारा दे रहे हैं, उसका एक-एक वाक्य प्रकाशित होगा | आप सब मुझसे संपर्क बनाए रखें | आप लोगों की प्रतिक्रिया से मैं अतिउत्साहित हूँ | मुझसे संपर्क करने के लिए [email protected] पर मेल करना है |)

बेतवा युद्धपोत दुर्घटना और नेवल डाकयार्ड के नकारा अध्यक्ष एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले

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जब किसी व्यक्ति को उसकी योग्यता से अधिक मिलता है तो वो वही करने लगता है जो आजकल नौसेना के रियर एडमिरल, डाकयार्ड के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) कर रहे हैं | इतने बड़े संगठन के अध्यक्ष बन गए, उनके मातहत लगभग १२००० कर्मचारी हैं किंतु उन्हें अब तक यह नहीं पता कि उनकी प्राथमिकता क्या है |

नेवल डाकयार्ड मुंबई का काम है जहाज़ों का रखरखाव और उनकी मरम्मत | नौसेना का इतना बड़ा अधिकारी इसी लिए नियुक्त किया जाता है ताकि इस काम को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके | इसके अलावा डाकयार्ड में काम करनेवाले १२००० कर्मचारियों का ध्यान रखना भी इसी अधिकारी की जिम्मेदारी है | लेकिन वर्त्तमान एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को इन दोनों कामों से कोई लेना देना नहीं है | जहाजों के रखरखाव का काम भगवान भरोसे, कर्मचारियों का हाल भी भगवान भरोसे | जब से आए हैं डाकयार्ड में सिर्फ व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में लगे हैं | इसके पहले के दस एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट कुल मिलाकर डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग जितनी बार आए होंगे, उससे ज्यादा बार अकेले काले जी आ चुके हैं | नौसना अधिकारियों की पूरी फ़ौज लेकर पहुँच जाते हैं | ऐसा लगता है काले जी नौसेना के रियर एडमिरल नहीं डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के रियर एडमिरल हैं | और काम क्या कर रहे हैं – किरण मोरे के साथ खेल-कूद केंद्र बनाना, निजी कोचिंग क्लास के लिए विद्या संकुल बनाना, महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र | सारी व्यावसायिक गतिविधियाँ | ऊपर से सबको चेतावनी दे रखी है कि कोई भी इन कामों में विरोध नहीं करेगा | समझ ही नहीं आता कि काले जी नौसेना के अधिकारी हैं या कोई व्यवसायी ???

यदि पिछले एक महीने के काले जी के कामकाज की समय सारिणी माँगी जाए, तो उसमें मीटिंग्स के अलावा कुछ नहीं मिलेगा | वो भी ज्यादातर समय वर्क्स कमिटी के सदस्यों के साथ मीटिंग करते हुए | उन्हें बातों से शीशे में उतार रहे हैं और अपने लिए प्रशंसापत्र माँग रहे हैं | बेतवा वॉरशिप की दुर्घटना के बाद तो वर्क्स कमिटी के सदस्यों को तुरंत एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को प्रशंसापत्र दे देना चाहिए | जैसी दुर्घटना भारतीय नौसेना के इतिहास में कभी नहीं हुई थी, वैसी इन्होनें कर दिखाई, यह कोई छोटी उपलब्धि थोड़ी है |

इसके अलावा भी काले जी की कई उपलब्धियाँ है | डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में U बिल्डिंग के कुछ कमरों को कमांडर मुजावर और गोपाल कुमार ने बांग्लादेशियों को किराए पर दे दिया था | जब मामला खुला तो उन्हें भगा दिया गया | किराए पर देनेवाले दोनों व्यक्तियों पर काले जी ने कोई कार्रवाई नहीं की | बांग्लादेशी कहाँ गए, किसी को पता नहीं | मेरा तो मानना है कि बेतवा दुर्घटना की जाँच का जिम्मा केंद्रीय सतर्कता आयोग को दे देना चाहिए, हो सकता है उसकी मरम्मत और रखरखाव का काम भी काले जी ने कमांडर मुजावर और गोपाल कुमार जैसे लोगों के जरिये बांग्लादेशियों को दे दिया हो |  (कई पाठकों ने मुझसे निवेदन किया कि मैं काले जी पर इतना बड़ा आरोप न लगाऊँ | मैं उन पाठकों से कहना चाहूँगा कि यह लेख व्यंग्यात्मक शैली में लिखा गया है और वह वाक्य एक ताना मारने जैसा है | मैं संजीव काले जी पर बांग्लादेशियों से मरम्मत कराने का आरोप नहीं लगा रहा | उस वाक्य से मेरा तात्पर्य है कि जिस तरह सबूत होते हुए भी कमांडर मुजावर और गोपाल कुमार पर इतने बड़े अपराध के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, उससे भ्रष्टाचार करनेवालों की हिम्मत बढ़ती है | फिर उनके जैसे ही कुछ भ्रष्ट लोगों के जिम्मे बेतवा युद्धपोत के रखरखाव और मरम्मत का काम होगा , जिसका नतीजा आज हम सब देख रहे हैं | पाठकों का सुझाव मानते हुए मैनें उपरोक्त वाक्य काट जरूर दिया है, पर मैं अब भी दुर्घटना के लिए एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले की लापरवाही और उनकी गलत नीतियों को ही दोषी मानता हूँ |)

काले जी की अगली उपलब्धि है कप्तान संधू के कुकर्मों को सफलतापूर्वक छिपाना | इसके लिए तो काले जी ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया है | डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में संधू जी ने जो कांड किया, उसकी जाँच कमोडोर विवेक अग्रवाल कर रहे हैं | संधू जी और अग्रवाल जी में भाईयों सा प्यार है | कप्तान संधू को बचाने के लिए उन्होंने सारे सबूतों का सत्यानाश कर दिया, गवाहों का जीना हराम कर दिया | संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) को अच्छे से पता है कि क्या चल रहा है पर उनके लिए सफ़ेद वर्दीधारियों के पापों को छुपाने से बड़ा पवित्र कर्म कोई नहीं | जहाज तो डूबने के लिए ही बना है |

काले जी आप यही सब में लगे रहे | बाकि नेवल डाकयार्ड गया भाड़ में, जहाज़ों का रखरखाव और उनकी मरम्मत भी गई भाड़ में | डाकयार्ड कॉलोनी की कई इमारतें बंद पड़ी है क्योंकि उनकी मरम्मत नहीं हुई है | उनको जल्द से जल्द बनाना है | हजारों लोग घर के लिए कतार में हैं | पर आपको यह सब सोचने की जरुरत नहीं | आप बस व्यावसायिक निर्माण कराते रहें | आपको आपकी मोटी तनख्वाह और अन्य सुविधाएँ तो मिल ही रही है | बेकार में सरकारी काम के बारे में सोच के क्यों अपनी नींद खराब करना |

ऐश तू कर यारा ऐश तू कर – दुनिया गया तेल लेने ऐश तू कर |

नेवल डाकयार्ड वर्क्स कमिटी के सदस्य एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट के चापलूस बने

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वर्क्स कमिटी के सदस्यों को बेचारे कामगार बड़ी उम्मीदों से चुन के भेजते हैं | उन्हें लगता है कि चुनाव के समय हाथ जोड़-जोड़कर वोट माँगने वाले उनके साथी चुन के जाने के बाद डाकयार्ड प्रशासन से उनके लिए लड़ेंगे, उनके हितों की रक्षा करेंगे | पर हर बार की तरह इस बार भी उल्टा ही हुआ है | वर्क्स कमिटी के सदस्य जाकर प्रशासन की गोद में बैठ गए हैं | रोज घंटों-घंटों की मीटिंग हो रही है | अब पता नहीं एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट और और वर्क्स कमिटी के सदस्य कौनसे युद्ध की तैयारी कर रहे हैं | इतनी देर रोज तो प्रेमी युगल भी बात नहीं करते जितनी देर यह लोग गप्पे लड़ाते हैं |

हमारी वर्क्स कमिटी के मेम्बेर्स जाकर वहाँ जाकर एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट की बस हाँ में हाँ मिलाते रहते हैं | उनके चमत्कारी व्यक्तित्व से वो पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं | एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) ने उन्हें साफ़-साफ़ बोल दिया है कि कॉलोनी में चल रह उनके किसी भी प्रोजेक्ट पर कोई आपत्ति नहीं उठाएगा | वर्क्स कमिटी के सारे सदस्य जिनका दिल चूहों जितना ही बड़ा है, बस हाँ साब-हाँ साब ही करते रह गए | विरोध करना तो छोड़िये, ये सारे सदस्य तो अपने एडमिरल साब को प्रशंसापत्र देने के लिए भी राजी हो रहे हैं |

मैं तो सारे डाकयार्ड के कर्मचारियों से कहूँगा कि वर्क्स कमिटी के सदस्यों को पकड़-पकड़ के पूछे कि किस ख़ुशी में प्रशंसापत्र देने जा रहे हो ? और यह जो फॅमिली एकोमोड़ेशन के सामने बैचलर एकोमोड़ेशन बन रहा है, उसका वो विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं ? उनके स्वयं के घर के आगे बैचलर एकोमोड़ेशन बने तो उन्हें स्वीकार होगा क्या ? एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी अपने घर के आगे क्यों नहीं बनवा लेते | जब जवान लडके नंग-धडंग, अपने अंतर्वस्त्रों में उनके घर के सामने घूमेंगे तब उन्हें समझ आएगा | या हो सकता ऐसा दृश्य देखने में उन्हें आनंद आए |

वर्क्स कमिटी के सदस्यों को मैं कहूँगा कि आप लोग किससे डर के चुप बैठे हो ? बाहर आकर जो डाकयार्ड प्रशासन को गालियाँ देते हो उसके बजाय काले जी के मुँह पर क्यों नहीं बोलते जो बोलना है ? किससे डर रहे हो ? संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) के पद से या उनके तथाकथित राजनैतिक संबंधों से ? आप लोग बिना डरे लड़ोगे तो कर्मचारी आपका साथ देंगे | आप लोग ही बिल में घुस जाओगे, बाहर बडबड करोगे और मीटिंग में दंडवत हो जाओगे तो अगले चुनाव में मुँह दिखाने लायक नहीं बचोगे | आपको लगता है कि साधारण डाकयार्ड के कर्मचारियों को कुछ पता नहीं लगता तो इस गलतफहमी में न रहे | अब से सब पता चलेगा | डाकयार्ड प्रशासन के साथ मीटिंग में बैठकर मेरे ब्लॉग पर SHAME-SHAME न करें | आपके निकम्मेपन के कारण मुझे यह ब्लॉग चलाना पड़ रहा है |

मेरी डाकयार्ड प्रशासन से भी प्रार्थना है कि कॉलोनी के बारे में निर्णय लेने से पहले वर्क्स कमिटी के सदस्यों से और कॉलोनी के लोगों से राय ली जाए | निर्णय लेने के बाद जानकारी देने का कोई मतलब नहीं है | आप गोरे अंग्रेज और हम काले भारतीय नहीं है कि आपने निर्णय थोप दिया और हम मान लेंगे | आपकी मुर्खता की सजा भोगने यहाँ नहीं बैठे हैं | यदि हमें भुगतना पड़ा तो आप भी भुगतोगे |

(जो लोग मुझे मेल के द्वारा ढेर सारी जानकारी और कागजात दे रहे हैं, मैं उनका शुक्रगुजार हूँ | मुझ पर भरोसा बनाए रखे, उसमें की एक-एक चीज प्रकाशित करूँगा | आप जितना ज्यादा सबूत नेवल डाकयार्ड प्रशासन के विरुद्ध भेज सके उतना ज्यादा अच्छा रहेगा | मुझसे संपर्क करने के लिए मेल करें : [email protected] )

नेवल डाकयार्ड, कांजुर मार्ग, मुंबई प्रशासन ने सिक्यूरिटी गार्ड की पगार पर डाला डाका

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नेवी के एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) मेरे ब्लॉग से बहुत नाराज हैं | उन्हें लगता है कि यह ब्लॉग उन्हें बदनाम करने की साजिश है | अब खुद ही पढ़ ले उनके जूनियर अधिकारी क्या-क्या पाप कर रहे हैं | और उनमें हिम्मत है तो उनपर कार्रवाई करके बताएँ | इससे शायद उन पर कलंक न लगे | अन्यथा यदि आप आँख होते हुए भी अँधे बनोगे तो आप की भी उस पाप में शामिल ही माना जाएगा |

डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई में ठेकेदार के द्वारा ४८ सिक्यूरिटी गार्ड सुरक्षा के लिए नियुक्त किए गए हैं | नेवल डाकयार्ड प्रशासन के अनुसार उनकी पगार है दस हजार पाँच सौ रूपए (Rs. 10500/-) | वैसे तो जो न्यूनतम वेतन का नियम है उस हिसाब से उन्हें ज्यादा पगार मिलना चाहिए था, पर वो विषय फिलहाल जाने दीजिए, यहाँ मैं दूसरे मुद्दे पर लिख रहा हूँ |

बेचारे सिक्यूरिटी गार्ड से  दस हजार पाँच सौ रूपए (Rs. 10500/-) पर साइन कराया जाता है लेकिन उन्हें दिया जाता है आठ हजार रुपये | किसी भी सिक्यूरिटी गार्ड से पूछ लीजिये कि उनकी तनख्वाह कितनी है | वो तुरंत बोलेंगे कि आठ हजार रूपए (Rs. 8000/-) | बाकि दो हजार पाँच सौ रुपये कहाँ जाते हैं ? इसका जवाब कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर, कप्तान संधू और कमोडोर विवेक अग्रवाल को ही मालूम है | एक सिक्यूरिटी गार्ड के पगार में से २५००रुपये, तो ४८ सिक्यूरिटी गार्ड के पगार से कुल एक लाख बीस हजार रुपये ( २५०० * ४८ = १,२०,०००) हर महीने गायब हो रहे हैं ? किसकी जेब में यह पैसा जा रहा है काले जी ? ज़रा तीनों से पूछिए तो सही | या आपको पहले से पता है और आपने आँखों पर पट्टी बाँध रखी है ?

पगार के अलावा सिक्यूरिटी गार्ड को प्रोविडेंट फण्ड आदि अन्य सुविधाएँ भी मिलनी चाहिए | मिलती कुछ भी नहीं | कोई डाकयार्ड का बहादुर कामगार बस एक RTI लिख कर यह कागजात माँगे – सारे सिक्यूरिटी गार्ड का नाम, उनका प्रोविडेंट फण्ड नंबर, उनके अकाउंट में जो पैसा जमा कराया जाता है- उस बैंक का पासबुक, ठेकेदार को दिया जानेवाला लाभ | फिर देखिये मजा | इन सफ़ेद वर्दीधारियों का असली रंग दिख जाएगा |

काले जी, यह तो हाल है आपके डाकयार्ड का | गरीब सिक्यूरिटी गार्ड को भी लूट लिया जाता है | यदि आपको यह सब पता नहीं तो आप डाकयार्ड के चेयरमैन बनने के लायक हो नहीं | यदि पता होते हुए भी आप चुप हो तो उनके पापों के भागी हो | ऐसे में आपकी बदनामी नहीं होगी तो क्या तारीफ़ होगी ???

( पाठकों के लिए : इस बार हिंदी आसान लिखी है ताकि सबको आसानी से समझ आ जाए | बाकि आप सब मुझसे संपर्क बनाए रखें | आप लोगों की प्रतिक्रिया से मैं अतिउत्साहित हूँ | आपको पता है मुझसे संपर्क करने के लिए [email protected] पर मेल करना है |)

नेवल डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के सुपरमैन – सहायक सुरक्षा अधिकारी चीमन लांबा

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पहले तो मैं आप सब से क्षमा चाहूँगा क्योंकि कल के दिन मैंने कोई लेख नहीं लिखा | एक बेशकीमती दिन चला गया और हंस के वेश में छुपे हुए इन बगुलों की मैंने कोई पोल नहीं खोली | उम्मीद करता हूँ कि मेरा पिछला लेख डाकयार्ड कॉलोनी कांजुरमार्ग, मुंबई में पूर्व नौसेना कर्मचारी ने मचाई लूट आप सब ने जरुर पढ़ा होगा | न पढ़ा हो तो तुरंत उपरोक्त लिंक पर क्लिक करें | आप स्वयं भी पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ाएँ | इससे मेरा लिखने का उत्साह बना रहेगा |

चलिए अब पिछले लेख से आगे बढ़ते हैं | अहलावत पुराण से अब हम लांबा पुराण पर आते हैं | चीमन लांबा जी इस समय नेवल डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई के सहायक सुरक्षा अधिकारी हैं | वो सबको बड़े गर्व से बताते हैं कि “I am Ex-Navy.” जिस दिन पहली बार मैनें उनके मुँह से यह शब्द सुना था, उसी दिन से मैं उनके चमत्कारी व्यक्तित्व से प्रभावित हो गया | मैनें लोगों से उनके बारे में काफी पूछताछ की | इससे मुझे उनके व्यक्तित्व के ऐसे अनछुए पहलुओं का पता कि मैं उनका भक्त बना गया | वही सब मैं अब आपको बताने जा रहा हूँ और मुझे पूरा यकीन है कि यह लेख पूरा पढ़ते-पढ़ते आप भी चीमन लांबा जी के भक्त बन जाएँगे |

सबसे पहले तो लांबा जी की चाल देखिये | सुबह-सुबह जब वो सुरक्षा कार्यालय से प्रशासनिक कार्यालय की तरफ निकलते हैं तो उनकी गति देखकर चींटी का भी घमंड टूट जाता है | लांबा जी सुबह सुरक्षा कार्यालय से निकलते हैं और दोपहर तक प्रशासनिक कार्यालय पहुँच जाते हैं | वहाँ से कुछ मिनटों में काम पूरा करके वो दोपहर को ही प्राशानिक कार्यालय से निकल जाते हैं और शाम तक दोबारा सुरक्षा कार्यालय पहुँच जाते हैं | इस तरह उनका पूरा दिन कॉलोनी वासियों की सेवा में निकल जाता है | उनकी चुस्ती-फुर्ती के क्या कहने ! देखकर ऐसा लगता है हमारे नौसेना के अधिकारियों को इनको लायन गेट की सुरक्षा में रख लेना चाहिए | पर हमारे अधिकारियों की दरियादिली है कि उन्होंने ऐसे योग्य व्यक्ति को नेवल डाकयार्ड कॉलोनी का सुरक्षा अधिकारी बनाया है | लांबाजी से बेहतर सुरक्षा अधिकारी शायद ही किसी को मिले | उनकी छत्रछाया में पूरी डाकयार्ड कॉलोनी स्वयं को सुरक्षित महसूस करती है | ६५-७० वर्ष का सुरक्षा अधिकारी सबके भाग्य में थोड़ी होता है |

चीमन लांबा जी की एक और खासियत है | वो हरफनमौला है | वो एक साथ कई जिम्मेदारियाँ निभाने में सक्षम  हैं | जब वो कॉलोनी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी थे, उसी समय वो कॉलोनी के महाठग गोपाल कुमार (इस महान व्यक्ति की गाथा कभी और बताऊँगा) के चपरासी का काम भी करते थे और बड़ी तत्परता से अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करते थे | गोपाल कुमार की आज्ञा और मार्गदर्शन से उन्होंने वर्षों तक कॉलोनी की सुरक्षा का अत्यंत कुशलता से संचालन किया | यही कारण है कि बांग्लादेश के नागरिक तक डाकयार्ड कॉलोनी में रहकर खुद को सुरक्षित महसूस करते थे | (बांग्लादेशी वाली कहानी कभी और सुनाऊँगा |)

चीमन लांबा जी की इन योग्यताओं के बावजूद उनपर बहुत अन्याय हुआ है | एक समय वो डाकयार्ड कॉलोनी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी हुआ करते थे | उतने में यह खबर फ़ैल गई कि वे सुरक्षा कार्यालय में एक महिला सुरक्षा कर्मचारी के साथ रंगरेलियाँ मनाते हैं | लोगों को यह भी पता चल गया कि कॉलोनी में बाहर की गाड़ियों को गैरकानूनी रूप से पार्किंग करने देकर वो मोटा माल कमा रहे हैं | फिर क्या था, बेचारे की पदावनति (Demotion) कर उन्हें सहायक सुरक्षा अधिकारी बना दिया गया | इतना बड़ा अत्याचार हुआ उनके साथ | नौसेना प्रशासन को सोचना चाहिए था कि लांबा जी नौसेना के निवृत्त कर्मचारी हैं | कोई आम इंसान थोड़े ही हैं | 

सुरक्षा कार्यालय में कई आए और कई गए पर लांबा जी आज भी वहीं हिमालय की तरह अडिग हैं | हमारी तनख्वाह से कॉलोनी की सुरक्षा के लिए जो पैसा कटता है उसका इससे बेहतर उपयोग क्या हो सकता है ! मैं तो नेवल डाकयार्ड प्रशासन को सुझाव दूँगा कि तुरंत चीमन लांबा जी कीतनख्वाह दुगुनी कर दी जाए | हमारी मेहनत का पैसा जब हमारी जेब से लांबा जी की जेब में पहुँचता है तो हमें हमारा जीवन धन्य प्रतीत होता है |

चलिए चीमन लांबा पुराण भी यहीं समाप्त करता हूँ | एक ही विषय में दो लेख लिखकर मैं भी ऊब गया हूँ | अगली बार कुछ नया लिखूँगा | पाठक गण अपना आशीर्वाद मुझ पर बनाए रखें | मेरे लेख को खुद भी पढ़ें और दूसरों को भी पढ़ाएँ | फेसबुक और ट्वीटर पर लोगों के साथ शेयर करें और अपने विचारों से मुझे जरूर-जरूर अवगत कराएँ | मेरा मेल है : [email protected]

(मुझे पता चला है कि एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट संजीव काले जी ( Rear Admiral Sanjeev Kale / Admiral Superintendent Sanjeev Kale ) इस ब्लॉग में लिखी बातों से बहुत नाराज हैं | तिलमिलाए और बौखलाएँ हुए हैं | मेरी उनसे प्रार्थना है कि इतना नाराज होने की जरूरत नहीं है | इतने दिनों से हम लोग आप सफ़ेद वर्दीवालों को झेल रहे हैं | आज जब आपको आइना दिखाया जा रहा है तो बड़ी मिर्ची लग रही है | यह ब्लॉग चलता रहेगा और मैं लिखता रहूँगा, बाकि जो आपकी इच्छा हो करें |)