नौसेना के कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा बने दूध चोर, दिन के एक लीटर दूध के लिए अपना ईमान बेचा

दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा
दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा

मुझे पता है शीर्षक पढ़ के आप लोग बड़ा अजीब महसूस कर रहे होंगे | कुछ लोगों को तो बकवास लग रहा होगा किंतु शांति से पूरा मामला पढ़िए तो आपको अंदाजा लग जाएगा कि पैसे के लिए किस हद तक हमारे नौसेना के अधिकारी गिर सकते हैं | साथ ही साथ यह मामला यह भी साफ़ कर देगा कि मजदूरों को नौसना के अधिकारी किस हिकारत भरी नज़रों से देखते हैं |

मामला है नेवल डाकयार्ड मुंबई के इनकोडिंग डिपार्टमेंट का | इस डिपार्टमेंट में नौसेना के कई अधिकारी, कई सिविलियन सुपरवाइजर-क्लर्क  तथा चौदह मजदूर हैं | नियमों के तहत पूरे नेवल डाकयार्ड, मुंबई के हर मजदूर को हर दिन दूध मिलना चाहिए | और आज तक मिलता भी है सिर्फ इनकोडिंग डिपार्टमेंट के मजदूरों को छोड़कर | लगभग ७-८ महीने पहले तक इनको भी हर दिन पाँच लीटर दूध मिलता था | लेकिन उस पाँच लीटर दूध में से एक लीटर दूध इनकोडिंग डिपार्टमेंट में कार्यरत कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा अपने लिए रख लेते थे | लंबे समय से यह चल रहा था | लेकिन ८-१० महीने पहले कुछ मजदूरों ने इसका विरोध किया तो दोनों को दूध मिलना बंद हो गया | दोनों कमांडरों ने तय किया कि इन मजदूरों को इनकी जगह दिखाते हैं |

कप्तान भूपेश अनुजा / Captain Bhupesh Anuja
कप्तान भूपेश अनेजा / Captain Bhupesh Aneja

समय बीता और दूध देनेवाले कांट्रेक्टर का कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म हुआ | कॉन्ट्रैक्ट रिन्यु करने का समय आया | कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा ने उस समय के अपने बॉस कप्तान भूपेश अनेजा को कहकर कॉन्ट्रैक्ट रिन्यु होने ही नहीं दिया | इनकोडिंग डिपार्टमेंट  के इन चौदह मजदूरों को दूध मिलना बंद | पूरे नेवल डाकयार्ड, मुंबई के हर मजदूर को दूध मिल रहा है, सिवाय इन चौदह मजदूरों के |

अब पाठक ही बताइए ऐसे चिंदी चोर और घटिया दर्जे के इंसानों के विरुद्ध लिख कर मैं गलत करता हूँ क्या ? कई लोग मुझे संदेश भेजते हैं कि नौसेना में सब ऐसे नहीं है | कुछ अधिकारी ही गलत काम करते हैं | तो मेरा उनसे कहना है कि नौसेना प्रशासन उन भ्रष्ट अधिकारीयों की गलती को सुधार तो सकता है न ? उन पर कार्रवाई तो कर ही सकता है न | लेकिन नौसेना प्रशासन तो ऐसे चोरों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा देता है |

उन चौदह मजदूरों ने नौसेना प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को कई प्रार्थना पत्र लिखे किंतु उनके कान पर जू तक नहीं रेंगी | वो करेंगे भी क्या ? वो तो खुद भ्रष्टाचार में गले तक डूबे हैं | रियर एडमिरल संजीव काले के बारे में तो कई बार लिख चुका हूँ , अब वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा के कई मामले पता चले हैं | वो भी लिखूँगा |

पाठकों की अतिरिक्त जानकारी के लिए बता दूँ कि कमांडर आय एस कुमार साईकलचोर के नाम से भी कुख्यात हैं | यदि आप उस मामले को जानना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें : नौसेना का कमांडर आय एस कुमार निकला साइकिल चोर

(  कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा के नाम संदेश : आप दोनों इतने बड़े अधिकारी होकर इतनी घटिया हरकत कर रहे हो, शर्म आती है या नहीं ? इतनी कमी पड़ रही है तो ebharat.net के मेल पर अपने घर का पता भेज दीजिये | दोनों को एक-एक लीटर दूध हर दिन मैं अपने खर्चे पर भेज दूँगा | )

( कप्तान भूपेश अनेजा के नाम संदेश : इतनी बड़ी-बड़ी ईमानदारी की बातें करके इतनी घटिया हरकत | बिल्डर के एजेंट ने आपका १५-१७ लाख काला धन हजम कर लिया था, भूल गए क्या ? उससे सबक लो | गरीबों को लूटना बंद करो | और थोड़ी शर्म बाकि हो तो मुंबई से अरब सागर नजदीक है | )

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

नौसेना का सिक्यूरिटी इंचार्ज सुरेश अवस्थी निकला ठग, पुलिस वाला बनकर 90 लाख लूटे

आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ
आमचोर अवस्थी गैरकानूनी तरीके से रखे हुए दो बंदूकों के साथ

वैसे तो यह खबर abinet.org में छप चुकी है | आप लोगों में से कई लोगों ने पढ़ भी लिया होगा लेकिन हिंदी में पढने-लिखने का अलग ही मजा है | इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ |

मामला नौसेना के कुख्यात अधिकारी सुरेश अवस्थी उर्फ़ आमचोर अवस्थी उर्फ़ बीवीचोर  अवस्थी का है | अवस्थी जी भारतीय नौसेना के आँख के दुलारे और विक्रोली, मुंबई के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) शेखर तावड़े के आँख के सितारे हैं | जब भी अवस्थी कोई कुकर्म करता है, और उसके विरुद्ध शिकायत पुलिस स्टेशन जाती है, तो नौसेना के अधिकारियों का फ़ोन तुरंत उस पुलिस स्टेशन पहुँच जाता है | जरुरत पड़ी तो दो नौसना के अधिकारी पुलिस स्टेशन भी पहुँच जाते हैं अवस्थी को बचाने | अब हमारे नौसेना के अधिकारी वैसे ही बीवीओं की अदला-बदली (Wife Swapping) के लिए कुख्यात है | अवस्थी है ही बीवीचोर, तो वो नौसेना के अधिकारियों के बीच लोकप्रिय तो होगा ही |

पर मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि ACP शेखर तावड़े को आमचोर/बीवीचोर अवस्थी से इतना प्रेम क्यों है ? वैसे तो तावड़े जी खुद अव्वल दर्जे के भ्रष्टचारी हैं किंतु अवस्थी से उनका गुप्त प्रेम समझ नहीं आता | कोई भी अवस्थी के विरुद्ध शिकायत करने पुलिस स्टेशन जाता है तो ये महाशय भी १५-२० मिनट में वहाँ पहुँच जाते हैं | लेकिन कब तक बचाएँगे ? चोर आज नहीं तो कल फँसेगा ही न | आमचोर/बीवीचोर अवस्थी भी फँस गया |

और कोई छोटी-मोटी ठगी नहीं है ! पूरे नब्बे लाख है नब्बे लाख | अवस्थी जी बने मुंबई पुलिस के एंटी नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी | घाटकोपर में रहने वाले एक व्यक्ति को उन्होंने अपने साथी के साथ मिलकर झाँसा दिया कि उसे नवी मुंबई में दो फ्लैट सस्ते में दिला सकते हैं | मामला एक करोड़ चालीस लाख पर तय हुआ – एक करोड़ रजिस्ट्रेशन से पहले और चालीस लाख रजिस्ट्रेशन के बाद | बेचारे ने नब्बे लाख नकद दे भी दिया लेकिन जब महीनों तक रजिस्ट्रेशन का मामला आगे नहीं बढ़ा तो उस व्यक्ति को शक हुआ और उसने अपने पैसे वापस माँगने शुरू किये | अवस्थी और उसके साथी ने उस व्यक्ति का नंबर ब्लॉक कर दिया और अवस्थी के साथी ने तो अपना घर भी बदल लिया |

वो बेचारा, अवस्थी और उसके साथी को ढूंढते-ढूंढते श्रीमती पराशर से मिला | श्रीमती पराशर ने बताया कि अवस्थी और उसके साथी ने उन्हें भी उसी तरीके से लूटा है | और कितनों को लूटा होगा पता नहीं | मुझे तो दो का ही पता लगा है तो आपको बता रहा हूँ | ACP शेखर तावड़े की वजह से पार्क साईट विक्रोली पुलिस स्टेशन में FIR नहीं हो पाया था | लेकिन न्यायालय के निर्देश पर पुलिस को FIR लेना पड़ा | जिस को इस मामले की पूरी जानकारी चाहिए वो यह लिंक क्लिक करके पढ़े : FIR for cheating registered against Navy’s chief security officer Suresh Awasthi, Awasthi claimed that he was officer of Anti-Narcotics Cell in Mumbai Police

इस पूरे मामले से एक बात तो साफ़ है | चोर कितना भी चालाकी दिखाये – जोर लगाये, आज नहीं तो कल पकड़ा जाएगा ही जाएगा | और जितने भी अवस्थी के साथी हैं, जिन्हें लगता है अवस्थी उन्हें बचा लेगा या वो अवस्थी को बचा लेंगे, तो वो समझ जाएँ, न अवस्थी बचेगा न उसके साथी | सबका नंबर आएगा, आज नहीं तो कल | चाहे नरक में जा छुपे, लेकिन वहाँ से भी ढूंढ़कर उन्हें सबक सिखाया जाएगा |

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

गरीब मजदूरों को लूटकर चरित्रहीन नौसैनिकों पर पैसा लुटाती भारतीय नौसेना

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यदि आप लोगों ने मेरा पिछला लेख “भारतीय रक्षा सेनाएँ तथा वन रैंक वन पेंशन की भीख” न पढ़ा हो तो अभी जाकर पढ़ें | उसमें मैनें बताया है कि किस तरह देश को इमोशनल ब्लैकमेल कर भारतीय रक्षा सेनाएँ देश का पैसा लूट रही हैं | आज उसी बात को साबित करते हुए एक उदाहरण देने जा रहा हूँ |

मुंबई के डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग में नौसेना की एक सिविलियन कॉलोनी है | अर्थात कॉलोनी तो नौसेना की है किंतु इसमें डाकयार्ड में काम करनेवाले सिविलियन ही रहते हैं | बड़ी कॉलोनी है और उसके प्रशासन के लिए एस्टेट ऑफिस है जिसका इंचार्ज एस्टेट अफसर की हैसियत से एक सिविलियन हुआ करता था | फिर नौसेना के लूटेरों को लगा कि इतनी बड़ी कॉलोनी से अच्छी कमाई हो सकती है तो एक नया पद बनाया गया प्रशासनिक अधिकारी (एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर) का | इस पद पर नौसेना का कप्तान या कमांडर रैंक का अधिकारी बैठता है |

अब सोचिये की नौसेना का काम क्या है ? देश की रक्षा या रेजिडेंशियल कॉलोनी चलाना | असल में नौसेना के अधिकारियों का मानना है कि उनका काम यह दोनों नहीं है | उनका काम है देश को लूटना, चाहे जिस तरीके से | पिछला प्रशासनिक अधिकारी कमांडर मुजावर तो रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया | लोगों को लगा चलो अब तो नौसेना के अधिकारियों को अकल आएगी पर नहीं, लूटने का मौका इतनी आसानी से कैसे जाने देंगे | अब तो दो-दो नौसेना के अधिकारी कॉलोनी में हैं, एक कमांडर और एक कप्तान | जो दो नए आये हैं, उनके किस्से कभी और बताऊँगा |

मेरे पिछले लेख से आप लोगों को मालूम हो गया होगा कि किस तरह नौसेना ठेका मजदूरों (कॉन्ट्रैक्ट लेबर) को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का ४०% से ५०% ही देती है | इसके अलावा कोई साप्ताहिक छुट्टी नहीं, कोई इनसुअरन्स नहीं | उनके प्रोविडेंट फंड का पैसा भी गबन कर जाते हैं | फिर मैनें सोचा कि नौसेना भूतपूर्व नौसेनिकों को भी तो कॉन्ट्रैक्ट पर रखती है, उन्हें कितना पैसा देती होगी ? उन्हें न्यूनतम वेतन मिल रहा है ? या उनका भी शोषण हो रहा है ?

पता करने पर मालूम पड़ा कि भूतपूर्व नौसैनिकों को तो देश का दामाद बना कर रखा गया है | उन्हें जरुरत न होते हुए भी कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा रहा है, महत्त्वपूर्ण अधिकार दिए जा रहे हैं और तनख्वाह भी सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से ज्यादा | उदाहरण के तौर पर डॉकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग मुंबई में दो भूतपूर्व नौसैनिकों राज सिंह और राम कुमार को नौसेना ने कॉन्ट्रैक्ट पर रखा है | उन्हें क्वार्टर इंचार्ज बनाया गया है | अर्थात डाकयार्ड के कर्मचारियों को डाकयार्ड कॉलोनी में जो घर मिलेंगे उन्हें एम ई एस से तैयार करवाकर देना | लेकिन दोनों करते क्या हैं ? दिन भर एस्टेट ऑफिस में सिविलियन्स पर चिल्लाना, हर काम में दखलंदाजी करना और दिन में दो बार शिशु विकास केंद्र के पास जाकर महिलाओं को घूरना | शिशु विकास केंद्र के आरंभ होने और छूटने के समय दोनों ठरकी अपना ऑफिस छोड़कर बराबर वहाँ पहुँच जाते हैं | शिशु विकास केंद्र से इनका कोई लेना-देना नहीं है, वहाँ कोई काम नहीं, लेकिन दिन में दो बार, तय समय पर दोनों वहाँ हाजिर मिलते हैं | अपने और नौसेना के घिनौने चरित्र का सार्वजनिक प्रदर्शन करते हुए | 

इस काम के लिए दोनों को पगार मिलता है २२ हजार से २३ हजार रुपये | सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन है १८ हजार से १९ हजार रुपये | गरीब मजदूरों को ८ हजार से ९ हजार रुपये देकर लूटा जाता है और राज सिंह और राम कुमार जैसे ठर्कियों पर लुटाया जाता है | मामला इतना ही नहीं है | डाकयार्ड कॉलोनी का क्वार्टर इंचार्ज महत्वपूर्ण पद है, इस पर किसी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी को बैठाना ही गलत है | सिविलियन कर्मचारी के काम को जानबूझ कर भूतपूर्व नौसैनिकों को दिया गया है ताकि कॉलोनी से पैसा कमाना आसान हो |

आप लोगों को याद होगा २०१६ में डाकयार्ड कॉलोनी के क्वार्टर्स में बांग्लादेशी रहते मिले थे | (यह लेख पढ़ें : “Civil contractor found encroaching on defence colony flats, renting these to Bangladeshis” ) वो कमांडर मुजावर, भूतपूर्व नौसैनिक और सिक्योरिटी इंचार्ज चीमन लांबा, गोपाल कुमार, क्वार्टर इंचार्ज राज सिंह और राम कुमार की मिलीभगत से ही संभव हुआ था | इसके अलावा डेमोलिशन के लिए खाली कराये गए कई इमारतों पर भी कॉन्ट्रैक्टर्स कब्जा कर बैठे थे | वो भी काम नौसेना के इन्ही बदमाशों का था | इन दोनों-तीनों का तो मैनें बस उदाहरण दिया है, बाकी व्यवस्था के कोने-कोने में यह लोग घुसे बैठे हैं, देश को जोंक की तरह चूसते हुए | 

नौसेना के अधिकारियों के काले कारनामे इतने हैं कि जितना लिखो उतना कम है | कहते हैं न हरी नाम अनंत, हरी कथा अनंता | पर मुझे तो लगता है हरी कथा का शायद अंत हो जाए, नौसेना के अधिकारियों के भ्रष्टाचार के किस्सों का अंत न होगा | इसलिए  बाकी कभी और |

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आनेवाले कुछ दिनों में पढ़े :
१) नौसेना अधिकारी निकले दवाईचोर, वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा ने मामला दबाया
२) कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण की फाइल चोर कप्तान भूपेश अनुजा को बचाने की कोशिश, खुद मैराथन घोटाले में शामिल
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नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

विक्रोली मुंबई : पैसे और नौसेना की मुफ्त शराब के लिए बिक गया पार्क साइट पुलिस का इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत

Inspector Ambaji Sawant
Inspector Ambaji Sawant

आज आप लोगों के सामने खाकी वर्दी में छुपे एक और बेईमान पुलिस कर्मचारी की पोल खोल रहा हूँ | ये महाशय विक्रोली पश्चिम में स्थित पार्क साइट पुलिस स्टेशन में निरीक्षक (इंस्पेक्टर) पद पर कार्यरत हैं, नाम है अंबाजी सावंत | नाम देखिये कितना पवित्र ! देवी माता का नाम | लेकिन ईमान उतना ही ज्यादा कलंकित |

अंबाजी सावंत को डाकयार्ड कॉलोनी के भूतपूर्व सिक्योरिटी इंचार्ज आमचोर/बीवीचोर सुरेश अवस्थी के विरुद्ध जाँच का जिम्मा दिया गया था | आमचोर अवस्थी के विरुद्ध उसी के मातहत काम करनेवाले एक सिक्योरिटी गार्ड ने चरित्रहीनता का आरोप लगाया था | आरोपों के अनुसार अवस्थी ने गार्ड की पत्नी को गैरकानूनी रूप से डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग में रखवाया हुआ था और दोनों के बीच गलत संबंध भी थे |

सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी को अवस्थी ने डाकयार्ड कॉलोनी के एम ई एस क्वार्टर क्र P/१३ में किसी मनोज कनोजिया के घर ठहराया हुआ था | इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत ने जाँच के लिए जब सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी को बुलाया तो उसने पुलिस स्टेशन में यह स्वीकार किया कि वह डाकयार्ड कॉलोनी में रह रही है और आमचोर/बीवीचोर अवस्थी उसे सिक्योरिटी सुपरवाइजर शिवा के जरिये पैसा भी देते रहते हैं |

जिन पाठकों को पता न हो उनको बता दूँ कि डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग, नौसेना के अंतर्गत आता है | यहाँ सिर्फ डाकयार्ड तथा एम ई एस के कर्मचारी और उनका परिवार ही रह सकता है | ऐसे में सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी का यह बयान कि वह डाकयार्ड कॉलोनी में रह रही है, आमचोर/बीवीचोर अवस्थी को डाकयार्ड कॉलोनी का सिक्योरिटी इंचार्ज होने के कारण मुसीबत में डाल देता | इसलिए आमचोर/बीवीचोर अवस्थी ने बचने के लिए तुरंत इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत से संपर्क किया |

अवस्थी को पता है कि अपना जमीर बेच कर पैसा कमाने के मामले में मुंबई पुलिस के कर्मचारी नौसेना के अधिकारियों को जोरदार टक्कर देते हैं | इसलिए उसने तुरंत अंबाजी सावंत की सेवा में नौसेना की कैंटीन में मिलनेवाली मुफ्त शराब की बोतलें और दस हजार रुपये हाजिर कर दिए | फिर क्या था, शराब की बोतलें देखकर अम्बाजी सावंत के मुँह से लार टपक पड़ी | उसने तुरंत अवस्थी को अपना माई-बाप मान लिया और पुरानी रिपोर्ट कचरे के डब्बे में डाल दी | तुरत-फुरत में मनोज कनोजिया को बुलाया गया, साथ में उसे कहा गया कि अड़ोस-पड़ोस के दो ख़ास मित्रों को भी ले आये | मनोज कनोजिया से बयान लिखवाया गया कि सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी उसके घर नहीं रहती | बाकी दोनों को गवाह बनाया गया | शराब और पैसा मिलने के बाद इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत की काम करने की तेजी देखते ही बनती थी |

सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी डाकयार्ड कॉलोनी में लंबे समय से रह रही थी | एम ई एस क्वार्टर में रहनेवाले किसी भी व्यक्ति को पूछो तो वो तुरंत बता देगा | सब उसे जानते हैं | अब बताइये एक शादीशुदा स्त्री पराये पुरुष के साथ एक ही कमरे वाले घर में रहे तो आधी दुनिया में प्रचार हो ही जाएगा न | लेकिन अंबाजी सावंत उस आधी दुनिया के लोगों में नहीं आते | उनके कान तक बात नोटों के रास्ते पहुँचती है | आमचोर/बीवीचोर अवस्थी के नोटों ने उनके कान में कह दिया था कि सिक्योरिटी गार्ड की पत्नी वहाँ नहीं रहती, मतलब नहीं रहती | सच्चाई क्या है, दुनिया क्या कहती है, इन सब झमेलों में वो नहीं पड़ते | उन्होंने बढ़िया सी रिपोर्ट बना दी और अवस्थी को मुसीबत से बचा लिया | आखिर पुरानी कहावत को भी तो सच साबित करना था : चोर-चोर मौसेरे भाई |

(आप लोगों की अतिरिक्त जानकारी के लिए बता दूँ कि इंस्पेक्टर अंबाजी सावंत पार्क साइट पुलिस स्टेशन के सबसे कुख्यात कर्मचारियों में से एक है | पार्क साइट पुलिस स्टेशन के जितने दलाल है वो इन्ही के द्वारा पैसों का लेन- देन करते हैं और बाकी पुलिसवालों तक हिस्सा पहुँचता है |)

भारतीय रक्षा सेनाएँ तथा वन रैंक वन पेंशन की भीख

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आज का मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध न होकर पूरी सरकारी व्यवस्था के खिलाफ है | आप लोगों को वन रैंक वन पेंशन के बारे में तो पता ही होगा | न पता हो तो मैं बता देता हूँ : वन रैंक, वन पेंशन का मतलब है कि सशस्‍त्र बलों से रिटायर होने वाले समान रैंक वाले अफसरों को समान पेंशन, भले वो कभी भी रिटायर हुए हों | यानि 1980 में रिटायर हुए कर्नल और आज रिटायर होने वाले कर्नल को एक जैसी पेंशन |

रक्षा सेनाओं की लंबे समय से यह माँग रही है कि उन्हें वन रैंक वन पेंशन योजना के तहत पेंशन मिले | इसके पीछे उनका तर्क था कि रक्षा सेवा में काम करनेवाले जल्दी रिटायर होते हैं ताकि हमारी सेना जवान रहे | चालीस-पैतालीस वर्ष होते-होते कुछ एक उच्च अधिकारियों को छोड़कर लगभग सबको रिटायर हो जाना पड़ता है | ऐसे में देश को दी गई उनकी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उनकों आर्थिक सुरक्षा दी जाए, ऐसा उनका कहना था |

कांग्रेस की सरकार लंबे समय तक इस माँग को टालती रही किंतु भाजपा सरकार ने उनकी यह माँग कुछ वर्ष पहले स्वीकार कर ली थी | तब से भारतीय रक्षा सेना के अधिकारियों को वन रैंक वन पेंशन के हिसाब से पेंशन मिलनी शुरू हो गयी है |

ज्यादातर लोग भावुक होकर इसे सही कदम बता रहे हैं किंतु मैं इस निर्णय के बिलकुल खिलाफ हूँ | हमारी रक्षा सेनाओं ने तो देश को भावुक कर पैसा वसूल लिया लेकिन क्या उनके मन में अपने गरीब देशवासियों के लिए ज़रा भी हमदर्दी या प्रेम हैं ? मैं कहूंगा बिलकुल नहीं | सरकार ने गरीबों का शोषण न हो इसके लिए न्यनतम वेतन का नियम बनाया है | इनसुअरन्स तथा प्रोविडेंट फंड का नियम बनाया है | क्या हमारी रक्षा सेनाएँ अपने पास कॉन्ट्रैक्ट पर काम करनेवाले मजदूरों – चौकीदारों तथा अन्य को न्यूनतम वेतन देती है ? उन्हें इनसुअरन्स तथा प्रोविडेंट फंड का लाभ देती है ? उन्हें नियत साप्ताहिक छुट्टी देती है ? बिलकुल-बिलकुल-बिलकुल भी नहीं |

सोचिये, सरकार ने न्यनतम वेतन तय किया है | सेना के अधिकारियों को सिर्फ उस वेतन के हिसाब से बिल बनाकर सीडीए को भेजना होता है | वहाँ से बिल पास होकर पैसा कांट्रेक्टर से होते हुए मजदूरों को मिल जाएगा | लेकिन आलसी, कामचोर,  शराब और शबाब के नशे में डूबे हुए चरित्रहीन और भ्रष्ट सेना के अधिकारी सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन का आधा वेतन ही कांट्रेक्टर को देते हैं | कांट्रेक्टर उसमें से भी पैसा काटकर मजदूरों को देते हैं | उदाहरण के तौर पर सरकार ने मुंबई में एक चौकीदार के लिए १८५०० रुपये मासिक तय किया है किंतु नौसेना की कृपा से मिलता ८५०० रुपये है | इसके अलावा कोई प्रोविडेंट फंड नहीं, कोई इन्शुअरन्स नहीं | कोई साप्ताहिक छुट्टी नहीं | महीने में तीसों दिन काम कराया जाता है | गरीबों के खून के हर कतरे को चूसकर पैसा कमाना इन कायर अधिकारियों ने अपना हक़ मान रखा है |

अब आपको बताता हूँ कि सेना के अधिकारी ऐसा करते क्यों हैं ! भारतीय सेना अपने ज्यादातर काम ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) पर दे रही है | जो-जो सरकारी नौकरियाँ खाली हो रही हैं उन्हें भरा नहीं जा रहा है | उसके बदले कॉन्ट्रैक्ट देकर काम कराया जा रहा है | कॉन्ट्रैक्ट पर काम दिया जाएगा तभी तो कांट्रेक्टर से कमीशन मिलेगा | कई बार तो सेना के अधिकारी ही अपनी पत्नी या रिश्तेदार के नाम पर कंपनी खोल कर उस कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने लगते हैं | कई बार रिटायर होने के बाद सेना के अधिकारी प्राइवेट कंपनियों के दलाल बनकर उन्हें सेना का ठेका दिलाना, उनका बिल पास कराना इत्यादि काम करने लगते हैं | कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम सेना अधिकारियों की कमाई का बहुत बड़ा जरिया है |

लेकिन कॉन्ट्रैक्ट में काम देनेपर एक डर बना रहता है | कम होती हुई सरकारी नौकरियों को कैसे न्यायोचित ठहराया जाए ! यह दिखाने के लिए कि कॉन्ट्रैक्ट से कराये गए काम काफी सस्ते में हो जाते हैं, सेना के अधिकारी मजदूरों तथा चैकीदारों को आधा वेतन देते हैं | सरकार भी इस बात से खुश है कि सस्ते में काम हो रहा है | मरता तो देश का गरीब आदमी है | कॉन्ट्रैक्ट लेने देने की इस प्रक्रिया में कई सिविलियन भी शामिल होते हैं | जिससे कभी-कभी सेना के अधिकारियों को परेशानी होती | इसलिए अब उन्होंने रिटायर्ड सेना के कर्मचारियों और अधिकारियों को सिविल पदों पर कॉन्ट्रैक्ट द्वारा भरना शुरू कर दिया है | इससे अब उनके लिए भ्रष्टाचार करना आसान हो गया है |

तो अब आप लोग ही बताइये, नौकरी के दरम्यान गरीबों का शोषण करनेवाले, कॉन्ट्रैक्टरों से रिश्वत लेनेवाले, अपनी पत्नी तथा रिश्तेदारों के नाम कंपनी खोलकर कॉन्ट्रैक्ट लेनेवाले, नौकरी से रिटायर होने के बाद प्राइवेट कंपनियों के लिए दलाली करनेवाले, या सिविलियन के पदों पर काम कर भ्र्ष्टाचार के काम को आसान बनानेवाले सेना के अधिकारियों को वन रैंक वन पेंशन देना कहाँ तक सही है ! देश के खजाने को गरीबों के लिए प्रयोग न कर देश को जोंक की तरह चूस रहे इन रिश्वतखोर सेनाधिकारियों पर खर्च करना कितनी बड़ी मूर्खता है | गरीबों को पैरों के नीचे कुचल कर, उन्हें दोयम दर्जे का इंसान मानकर, उन्हें गुलामों की तरह काम करवाकर पैसा नोचनेवाले सेना के अधिकारियों का सही इनाम जेल है, पेंशन नहीं |