केंद्रीय विद्यालय भांडुप, मुंबई के विद्यार्थियों ने शिक्षिका अनुपमा तिवारी को वांटेड घोषित किया

anupama-posterचलिए आज आपको डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग पश्चिम में स्थित केंद्रीय विद्यालय का एक मजेदार किस्सा सुनाता हूँ | मामला दो-तीन महीने पहले का है | विद्यालय में अनुपमा तिवारी नाम की एक शिक्षिका है | कक्षा ग्यारहवीं तथा बारहवीं के विद्यार्थियों को अर्थशास्त्र (ECONOMICS) पढ़ाती है | ठीक-ठाक पढ़ा लेती हैं किंतु उनका खुद का अर्थशास्त्र का ज्ञान थोड़ा कच्चा है | कुछ वर्षों पहले कक्षा बारहवीं के कुछ विद्यार्थियों ने बोर्ड का एक प्रश्न पूछ लिया था | अर्थशास्त्र का गणितीय प्रश्न था | बेचारी आधे घंटे तक पता नहीं क्या सोचती रही पर हल नहीं कर पायी | बोल दिया कि प्रश्न गलत है | जबकि आसान सा प्रश्न था, दो अंक का |

लेकिन उस बात को जाने दीजिये | मैं आपसे अनुपमा जी के अर्थशास्त्र के ज्ञान की चर्चा करने यह लेख नहीं लिख रहा | बल्कि उनके साथ घटी एक मजेदार घटना आपको बताना चाहता हूँ | हुआ यह कि इस वर्ष अनुपमा जी को कक्षा नौवीं का समाजशास्त्र पढ़ाने का काम भी दे दिया गया | समाजशास्त्र अर्थात इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र तथा अर्थशास्त्र | अब अर्थशास्त्र का तो ठीक है लेकिन बाकि विषय पढ़ाने का उन्हें कोई अनुभव नहीं, न ही कोई इच्छा | बेचारी एकदम से तुनक गयी | इतने वर्षों से सिर्फ २ कक्षाओं को अर्थशास्त्र पढ़ा रही थी | दिन भर में मुश्किल से दो-ढाई घंटा पढ़ाती थी बाकि समय आराम | मोटी तनख्वाह तो मिल ही रही थी |

अब कक्षा नौवीं को पूरा समाज शास्त्र पढ़ाना आसान नहीं होता | अनुपमा जी ने आधे-अधूरे मन से जैसे तैसे कुछ-कुछ पढ़ाया | पर वो काफी नहीं था और परीक्षा में २० से अधिक विद्यार्थी फेल हो गए | ओपन डे (जिस दिन अभिभावकों को उत्तर पुस्तिका दिखाई जाती है) के दिन अभिभावकों ने अनुपमा जी को खूब डाँट पिलाई | नतीजा यह हुआ कि मोहतरमा ने रोना-गाना शुरू कर दिया | अगले दिन मुख्याध्यापिका (प्रिंसिपल) के पास गयी कि जिन अभिभावकों ने उन पर चिल्लाया है उनक बच्चों को कोड ऑफ़ कंडक्ट (एक तरह की सजा) दिया जाए | मुख्याध्यापिका इस झमेले में क्यों पड़ती ? उन्होंने मना कर दिया |

उसके बाद नाराज अनुपमा जी ने कक्षा नौवीं को पढ़ाना बंद कर दिया | कई-कई दिन क्लास नहीं जाती | बच्चें घूमते-फिरते-शोर मचाते और अनुपमा जी शिक्षक रूम में आराम फरमाती | लेकिन एक दिन बच्चों को खुराफात सूझी | उन्होंने कहीं से अनुपमा जी की तस्वीर का प्रिंट आउट लिया | उसके नीचे लिख दिया वांटेड – जीवित अथवा मृत ( Wanted – Dead or Alive) | ढूँढ़नेवाले को इनाम पचास हजार डॉलर | इस पोस्टर को विद्यार्थियों ने विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगा दिया |

थोड़ी देर में पूरे विद्यालय में हँगामा मच गया | नोटिस बोर्ड के पास विद्यार्थियों की भीड़ जमा हो गयी | सब पोस्टर देख-देख कर हँस रहे थे | वैसे भी केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक अपने विद्यार्थियों के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं है | ज्यादातर की छवि खराब है | कईयों पर चरित्रहीनता का आरोप तक लग चुका है | केंद्रीय विद्यालय प्रशासन ने मामला दबाया न होता तो दो-तीन तो जेल में भी होते | अब ऐसे में अनुपमा जी का मजाक तो बनना ही था | कुछ बच्चों ने पोस्टर की फोटो खींच के व्हाट्सएप्प पर वायरल कर दिया | कुछ ही समय में पोस्टर सबके मोबाइल तक पहुँच गया | लोग भी पोस्टर देख-देख कर हँस रहे थे |

आप भी पढ़कर इस मजेदार घटना का आनंद लीजिये | बाकि अनुपमा जी को उनके कर्मों की सजा उनके विद्यार्थियों ने ही दे दी | अनुपमा तिवारी जी, याद रखिये दूसरे के लिए खोदे गए खड्डे में मनुष्य स्वयं गिरता है | जैसी करनी वैसी भरनी |

One thought to “केंद्रीय विद्यालय भांडुप, मुंबई के विद्यार्थियों ने शिक्षिका अनुपमा तिवारी को वांटेड घोषित किया”

  1. आपके नौसेना में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसिक प्रयासों के लिए साधुवाद, भगवान आप को दुष्टों से सलामत रखे और आप यों ही नौसेना के घोटाले उजागर करते रहे।

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