सुर्यानगर, विक्रोली में सब-इंस्पेक्टर अनिल केकन की गुंडागर्दी, ट्रांसपोर्टर को बिना वजह पीटा

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वर्दी वाला गुंडा : सब इंस्पेक्टर अनिल केकन

वैसे तो पुलिसवालों की गुंडागर्दी कोई नई बात नहीं है | यह आप लोग भी जानते हैं और मैं भी | आये दिन न्यूज़ चैनलों और अखबारों में इनके काले कारनामें पढने को मिलते रहते हैं | मेरा आज का यह लेख एक ऐसे ही खाकी वर्दी वाले को समर्पित है | नाम है अनिल केकन |

पहले आप लोगों को अनिल केकन जी का परिचय दे दूँ | यह पार्क साईट पुलिस स्टेशन में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं | पुलिस की नौकरी में मुश्किल से पांच-सात वर्ष हुए होंगे, पर हैं बड़े होशियार | कम समय में ही वर्दी का इस्तेमाल कर कमाई करने के कई तरीकों का पता लगा लिया है | तीन-चार छुटभैय्ये राजनेता और ब्लैकमेलर केकन जी के एजेंट हैं | इनके ड्यूटी पर आते ही उनकी भी ड्यूटी शुरू हो जाती है | कोई भी मामला हो, वो किसी और पुलिसवाले के पास न जाकर सीधे अनिल केकन जी के पास ही आना चाहिए, यह उन एजेंटों की जिम्मेदारी है | केकन जी अपनी वर्दी और डंडे की ताकत का इस्तेमाल कर उस मामले को निपटाते हैं और लोगों से पैसा वसूलते हैं | उस कमाई का सत्तर प्रतिशत वो अपने पास रखते हैं और तीस प्रतिशत अपने उस एजेंट को देते हैं जो मामला लेकर आया था | इस तरह उनकी कमाई की दूकान बढ़िया चल रही है |

अब आप पूछोगे इसमें नया क्या है ? लगभग हर पुलिसवाला यह काम करता है | पार्क साईट पुलिस तो ऐसे कामों के लिए पहले से बदनाम है | इंस्पेक्टर पूरी, इंस्पेक्टर चौघुले, इंस्पेक्टर सकपाल, इंस्पेक्टर कुलकर्णी सब यही काम करके खूब माल कमाया | केकन जी ने ऐसा नया क्या कर दिया ? तो आपको बता दूँ हमारे अनिल केकन जी बाकी वर्दी वालों से भी दो कदम आगे हैं | बाकी पुलिस वाले जिनको मारते-पीटते हैं या जिनसे वसूली करते हैं, उन बेचारों को यह तो पता रहता है कि मार क्यों पड़ रही है या पैसा क्यों देना पड़ रहा है | केकन जी के मामले में तो वो भी नहीं | वो जब मन आया, लोगों को पुलिस स्टेशन बुलाकर पीट देते हैं | पूछने पर यह भी नहीं बताते कि मामला क्या है | यह अनिल केकन जी का स्टाइल है |

हाल ही की एक घटना ले लीजिये | विक्रोली सुर्यानगर के एक रहीवासी हैं पुरुषोत्तम सिंह | उनका ट्रांसपोर्टेशन का काम है | दिनांक १८ मई को रात ११.१५ बजे के आस-पास एक हवलदार उनके घर आया और बोला कि उसे केकन साहब ने पुलिस स्टेशन बुलाया है | पुरुषोत्तम जी ने कारण पूछा तो उस हवलदार ने कुछ बताया नहीं | इससे पुरुषोत्तम जी के मन में थोडा डर जागा | अब पुलिस स्टेशन जाने से कौन नहीं डरेगा ! सबको पता है कि वो खाकी वर्दी पहन कर क़ानून की आड़ में जनता को लूटने वालों का अड्डा है | फिर भी जैसे-तैसे हिम्मत करके पुरुषोत्तम जी रात को ११.४५ के आसपास पुलिस स्टेशन गये |

जैसे ही उन्होंने पुलिस स्टेशन के अंदर कदम रखा, हमारे अनिल केकन जी ने बिना कोई बात किये एक के बाद एक तीन झापड़ जड़ दिए | उनकी मार खाकर बेचारे पुरुषोत्तम जी को तो चक्कर आ गया | पाँच-दस मिनट तक तो उन्हें समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या ? तबियत संभली तो केकन जी से पूछा की उन्होंने क्यों मारा ? तो केकन जी उन्हें पुलिस स्टेशन के अंदर वाले भाग में ले गए और फिर से पिटाई की | साथ में खूब गालियाँ भी दी | बेचारे पुरुषोत्तम जी पूछते रह गए पर केकन जी सिर्फ गालियों, लातों और झापड़ों से जवाब दे रहे थे | रात को लगभग १.१५ तक पीटने के बाद उन्होंने पुरुषोत्तम जी को घर जाने दिया |

पुरुषोत्तम जी तब से रोज पार्क साईट पुलिस स्टेशन का चक्कर लगाते हैं, बस यह जानने की सब इंस्पेक्टर केकन ने उन्हें मारा क्यों ! पर उन्हें अब तक इस बात का जवाब नहीं मिला | केकन जी के हाथ में वर्दी और डंडा है, इसलिए उनके मन में किसी का डर नहीं हैं | वो सोच रहे हैं कि कोई उनका क्या कर लेगा |

तो केकन जी, आजकल पावडर वाले नोट, मोबाइल कैमरा, स्टिंग ऑपरेशन, आर.टी.आई., मीडिया आदि का ज़माना है | इन वजहों से कई वर्दी वाले आसमान से जमीन पर आ चुके हैं | ज्यादा जानकारी चाहिए तो रिटायर हो चुके इंस्पेक्टर पुरी से पूछ लीजिये | किसी दिन आपका नंबर न लग जाए | अगर पुरुषोत्तम जी ने कुछ गलती की भी थी, तो आपको मारने का हक़ किसने दिया ? वो तो धंधा करते हैं | पार्क साईट नहीं तो कहीं और जाकर करेंगे |  आपकी नौकरी गई तो आपका क्या होगा ? चौकीदार से ज्यादा और कुछ नहीं बन पाओगे | कामचोरी और मुफ्त की कमाई खाने की आदत के कारण किसी और काम के लायक तो बचे नहीं हो | इसलिए वक्त रहते संभल जाओ |

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