मौत के सौदागर : गरीबों की लाश पर पैसा कमाने वाले भारतीय नौसेना के भ्रष्ट अधिकारियों के कारण वृद्ध महिला की मौत

नाविक के घर की टूट कर लटकती हुई बालकनी जहाँ से उनकी माताजी गिरी थी |
नाविक के घर की टूट कर लटकती हुई बालकनी जहाँ से उनकी माताजी गिरी थी |

यदि आप ईभारत के नियमित पाठक हैं तो मेरे लेखों से आप को अंदाजा लग गया होगा कि भारतीय नौसेना के अधिकारी किस तरह से देश को लूट-खसोट कर अपनी तिजोरी भर रहे हैं | मेरी बात को साबित करते हुए आज एक और घटना आप लोगों के सामने रख रहा हूँ |

घटना २३ जून २०१६ की है, स्थान – विशाखापट्टनम | नौसेना द्वारा आबंटित मकान में एक नाविक (Sailor) का परिवार रहता था | मकान की हालत बिलकुल जर्जर | ऐसा लगता था मकान का कौन-सा हिस्सा कब टूट के गिरे पता नहीं | सेलर ने इसकी शिकायत कई बार नौसेना तथा एम. इ. एस. में किया किंतु कोई फायदा नहीं | मरम्मत का काम कराया नहीं गया | दुर्भाग्यवश उस परिवार का डर सही साबित हुआ | 23 जून 2016 की सुबह करीब 05.45 के आस पास नाविक की माताजी बालकनी में सुबह की ताजी हवा लेने बैठी थी तभी अचानक पूरी बालकनी ही दीवार से अलग होकर झूले की तरह लटक गई | उनकी माताजी कुर्सी के साथ ही नीचे गिर गई जिससे उन्हें सिर में बहुत ही गंभीर चोट आई और वो बेहोश हो गई। आनन-फानन में उन्हें नौसेना अस्पताल कल्याणी ले जाया गया जहाँ पर उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहाँ 6 दिनों तक कोमा में रहते हुए वेंटिलेटर पर असहनीय दर्द सहने के बाद सातवें दिन (29 जून 2016) उन्होंने दम तोड़ दिया।

नाविक की माताजी अस्पताल में
नाविक की माताजी अस्पताल में

अब इतनी बड़ी दुर्घटना हुई है तो आप उम्मीद कर रहे होंगे कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी लेकिन आपकी उम्मीद बिलकुल गलत है | ऐसे एक दो गरीब मरने से भारतीय नौसेना के भ्रष्ट अधिकारियों के कान पर जू भी नहीं रेंगती | ईभारत में ही मैंने आप लोगों को बताया था कि किस तरह तीन-तीन मजदूरों को मारकर भारतीय नौसेना के अधिकारी उनकी लाश पर रोटियाँ सेंक रहे हैं | यदि आपने वह लेख न पढ़ा हो तो इस लिंक पर क्लिक करे : नौसेना प्रशासन की लापरवाही से डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुरमार्ग, मुंबई में एक और मजदूर की मौत

बेचारे गरीब नाविक के परिवार को उम्मीद थी कि भारतीय नौसेना उन्हें जरूर इंसाफ दिलाएगी किंतु दो वर्ष से भी अधिक समय गुजरने के बाद भी न्याय दिलाना तो दूर की बात, नौसेना के अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए जाँच आयोग बैठा कर, दोषियों को और उनके गुनाहो को छुपाने में लगे हैं | कई बार लिखित आग्रह के बाद भी उपरोक्त जाँच की प्रतिलिपि पीड़ित परिवार को नही दी गई | दुर्घटना आवासीय कॉलोनी में हुई है न कि किसी रक्षा आपरेशन की जगह पर, इसलिए जाँच की रिपोर्ट पीड़ित परिवार को दी जा सकती है, सार्वजनिक भी की जा सकती है | लेकिन हराम के पैसों पर जीवित नौसेना के अधिकारी ऐसा कभी नहीं करेंगे | ऐसा करने से उनको रिश्वत देने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स पर तथा नौसेना के साथी अधिकारियों पर आँच जो आ सकती है | उनका सीधा मंत्र है “तू भी चोर – मैं भी चोर, तू भी चुप-मैं भी चुप” | वाइफ स्वैपिंग अर्थात पत्नियों की अदला-बदली करनेवाले चरित्रहीन अधिकारियों से और क्या उम्मीद की जा सकती है !

( यदि आपको नौसेना के वाइफ स्वैपिंग अर्थात पत्नियों की अदला-बदली वाले  कारनामों के बारे में पता न हो तो निम्न लेख जरूर पढ़ें  :
१) Navy wife swapping scandal: SC wants special team to probe case
२) Indian Navy lieutenant’s wife ‘forced into wife-swapping parties’ )

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका है | बेचारा नाविक बार न्याय के लिए आवेदन देने लगा, प्रधानमंत्री तथा रक्षामंत्री को पत्र लिखने लगा | इसलिए सजा के तौर पर उसे जहाज में स्थानांतरित कर दिया गया जिससे कि उसके बंदरगाह पर रहने की संभावना कम हो जाए और वो अपनी आवाज न उठा सके। नौसेना के इस तरह के व्यवहार से पीड़ित परिवार डरा-सहमा है कि कहीं उच्चाधिकरियों के संकेत पर जहाज पर नाविक की हत्या कर उसे दुर्घटना न दिखा दिया जाए |

इस पूरी घटना को जानने के बाद मैनें निश्चित किया है कि भारतीय नौसेना को मैं अब से हत्यारी नौसेना लिखा करूँगा | आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected]

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