मनोज कोटक : नया सांसद, नई उम्मीद – ईशान्य मुंबई

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अभी कुछ दिनों पहले समाप्त हुए लोकसभा चुनावों ने ईशान्य मुंबई को मनोज कोटक के रूप में एक नया सांसद दिया है | इस समय केंद्र में भी भाजपा की सरकार है | राज्य में भी भाजपा की सरकार है | मनोज कोटक भी भाजपा से ही हैं | ऐसे में स्थानीय लोगों की उम्मीदें उनसे काफी ज्यादा हैं |

मनोज कोटक सांसद बनने से पहले ३ बार नगरसेवक चुने जा चुके हैं | ऐसे में उन्हें राजनीति और समाज कार्य दोनों का तगड़ा अनुभव है | ज्यादातर नेता चुनाव के बाद एक लंबे समय तक आराम के मूड में रहते हैं | उन्हें सक्रिय होने में समय लगता है | लेकिन मनोज कोटक ने जो सक्रियता चुनाव के समय दिखाई थी, चुनाव के बाद भी उसी तरह सक्रिय है | फेसबुक में उनके आधिकारिक पेज https://www.facebook.com/ManojKotakBJP/ को देखने पर इस बात की साफ़ झलक मिलती है |

चुनाव जीते अभी कुछ दिन ही हुए हैं लेकिन उन्होंने भांडुप रेलवे स्टेशन को लाल बहादुर शास्त्री रोड से जोड़ने के लिए ईश्वर नगर के रास्ते एक नई सड़क के निर्माण के लिए काम शुरू कर दिया है | ३ जून को उन्होंने महानगरपालिका अधिकारी, पुलिस अधिकारी, स्थानीय विधायक और नगरसेवकों के साथ मिलकर उस क्षेत्र का निरिक्षण किया है | उम्मीद है यह काम जल्दी से जल्दी शुरू होगा | इस काम के होते ही भांडुप पश्चिम से भांडुप रेलवे स्टेशन की तरफ जानेवाले यात्रियों को काफी आराम मिलेगा | इसके अलावा पवई तालाब के पास वृक्षारोपण तथा सफाई अभियान में भी वो शामिल हुए हैं | रोज किसी न किसी जनसंपर्क अभियान में शामिल होकर वो बाकी नेताओं के लिए बढ़िया उदाहरण पेश कर रहे हैं |

मैं स्वयं उनके पास कुछ स्थानीय समस्याओं को लेकर जानेवाला हूँ | इससें तीन मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित है :

  • लाल बहादुर शास्त्री मार्ग पर फूटपाथ बनाने का काम चल रहा है | लेकिन यह फूटपाथ कई जगह खंडित है तो कई जगह कांट्रेक्टर ने पत्थर, मिटटी, पेवर ब्लाक के टुकड़े रख छोड़े हैं, तो कई जगह उन फूटपाथों पर अभी से अतिक्रमण हो चुका है | दक्षिण मुंबई में बने फूटपाथों से तुलना करने पर हमको पता चलता है कि किस तरह दोयम दर्जे का काम हुआ है |
  • मेट्रो के काम की वजह से लाल बहादुर शास्त्री मार्ग पूरी तरह जाम रहता है | मेट्रो के काम को गति देकर जल्दी से जल्दी रास्ता साफ़ किया जाए | २०१९ की वर्षा तो इस सड़क से गुजरने वालों के लिए भयंकर गुजरेगी ही | २०२० में भी ऐसा न हो, इसकी कोशिश करनी है |
  • कांजुर मार्ग पूर्व में बने डंपिंग के कारण कांजुर पूर्व तथा विक्रोली पूर्व के निवासियों का जीना दूभर हो गया है | सब लोग चाहते हैं कि इस डंपिंग ग्राउंड को हटाया जाए | मुझे पता है कि इस समस्या का समाधान मुश्किल है | लेकिन क्या पता मनोज कोटक इस समस्या को सुलझाने के लिए कोई दूरगामी उपाय खोज लें |

इसके अलावा कुछ छोटे-मोटे स्थानीय मुद्दे हैं | जो एक-एक कर उनके सामने ले जाऊँगा | इस दिशा में आगे जो भी प्रगति होगी, उसकी जानकारी पाठकों को देता रहूँगा |

चौकीदार नरेंद्र मोदी गरीब चौकीदारों को भारतीय नौसेना के शोषण से बचाने में असमर्थ, चौकीदारों को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की शरण में जाना पड़ा

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सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने चुनाव के उद्देश्य से भले ही चौकीदार शब्द का जोरदार प्रयोग शुरू कर दिया हो लेकिन जमीनी तौर पर वो वास्तविक चौकीदारों की किसी भी तरह से सहायता नहीं कर रहे हैं | सोशल मीडिया पर तो उनके कई समर्थक चौकीदार बन गए हैं लेकिन वास्तविक जीवन में कोई भी गरीब चौकीदारों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा |

मामला मुंबई के कांजुरमार्ग पश्चिम में स्थित डाकयार्ड कॉलोनी का है | यह कॉलोनी नौसेना के अंतर्गत आती है | इस कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी भारतीय नौसेना के कप्तान उस्मानी हैं | कॉलोनी में लगभग पैंतीस से चालीस चौकीदार काम करते हैं | लेकिन नौसेना के अधिकारी पचपन से साठ चौकीदार दिखाकर, उनका झूठा ओवरटाइम दिखाकर खूब हराम की कमाई खाते रहे हैं | यहाँ तक तो ठीक था लेकिन पिछले कुछ समय से नौसेना के अधिकारी इन चौकीदारों का पगार भी समय पर नहीं दे रहे हैं | डेढ़ वर्ष में चौकीदार ४ बार हड़ताल कर चुके हैं लेकिन नौसेना अधिकारियों के कानों पर जू भी नहीं रेंगती |

नेवी कॉलोनी में मनसे पदाधिकारी के साथ चौकीदारों की चर्चा
नेवी कॉलोनी में मनसे पदाधिकारी के साथ चौकीदारों की चर्चा

इस बार भी सारे चौकीदार १९ मार्च २०१९ से हड़ताल पर हैं | उन्हें इस बार तीन महीने की पगार नहीं मिली है | वैसे भी नौसेना उन्हें सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन का ५०% ही देती है | उनके प्रोविडेंट फण्ड और इन्सुअरंस का पैसा भी नौसेना के अधिकारी दारू तथा ऐय्याशी में उड़ा देते हैं | जो बचा हुआ आधा वेतन मिलता था वो भी पिछले तीन महीने से नहीं मिला | इस मामले की शिकायत कई बार प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री तथा नौसेना के उच्च अधिकारियों से की जा चुकी है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ | ऐसे में सिक्यूरिटी गार्डों ने अब राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना से सहायता माँगी |

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पदाधिकारियों ने तुरंत सक्रिय होकर कांट्रेक्टर तथा नौसेना प्रशासन पर दबाव बनाया तो उन्होंने एक सप्ताह के अंदर पूरा वेतन देने का वादा किया है | मनसे के पदाधिकारियों ने कहा है कि यदि एक सप्ताह में वेतन नहीं मिला तो फिर वो मनसे स्टाइल में न्याय दिलाएंगे |

इस घटनाक्रम के बाद मुझे उम्मीद है कि नौसेना के भ्रष्ट अधिकारियों को थोड़ी शर्म आएगी | अपना जमीर तो वो पहले ही बेच चुके हैं, देश रोज बेच रहे हैं और गरीबों के थाली से रोटी चुराना भी जारी है | हराम की रोटी तोड़-तोड़कर उनकी बुद्धि भी भ्रष्ट हो चुकी है | ऐसा न होता तो इतनी इज्जत उछलने के बाद भी क्या वो इस तरह गरीबों का शोषण जारी रखते ?

चौकीदार नरेंद्र मोदी और उनके समर्थक चौकीदार पूरे मामले में सो ही रहे हैं | इस जन्म में उनकी नींद खुलने की उम्मीद भी नहीं है |

बाकि पाठक नौसेना अधिकारियों से ज्यादा उम्मीद न रखे, उनका नौसेना का सही चरित्र जानना है तो यह लेख जरुर पढ़ें :

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

नौसेना द्वारा गरीब सिक्यूरिटी गार्डों को लूटने का क्रम जारी, तीन महीने से तनख्वाह नहीं, सिक्यूरिटी गार्ड दस दिन से हड़ताल पर

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मामला कांजुर मार्ग मुंबई में स्थित डाकयार्ड कॉलोनी का है | यह कॉलोनी नौसेना के अंतर्गत आती है | इस कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी भारतीय नौसेना के कप्तान उस्मानी हैं | कॉलोनी में लगभग पैंतीस से चालीस सिक्यूरिटी गार्ड काम करते हैं | लेकिन नौसेना के अधिकारी पचपन से साठ सिक्यूरिटी गार्ड दिखाकर, उनका झूठा ओवरटाइम दिखाकर खूब हराम की कमाई खाते रहे हैं | यहाँ तक तो ठीक था लेकिन पिछले कुछ समय से नौसेना के अधिकारी इन सिक्यूरिटी गार्डों का पगार भी समय पर नहीं दे रहे हैं | डेढ़ वर्ष में सिक्यूरिटी गार्ड ४ बार हड़ताल कर चुके हैं लेकिन नौसेना अधिकारियों के कानों पर जू भी नहीं रेंगती |

इस बार भी सारे सिक्यूरिटी गार्ड १९ मार्च २०१९ से हड़ताल पर हैं | उन्हें इस बार तीन महीने की पगार नहीं मिली है | वैसे भी नौसेना उन्हें सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन का ५०% ही देती है | उनके प्रोविडेंट फण्ड और इन्सुअरंस का पैसा भी नौसेना के अधिकारी दारू तथा ऐय्याशी में उड़ा देते हैं | जो बचा हुआ आधा वेतन मिलता था वो भी पिछले तीन महीने से नहीं मिला |

कॉलोनी के प्रशासनिक अधिकारी कप्तान उस्मानी का कहना है कि सिक्यूरिटी गार्डों को समय पर वेतन देना संभव ही नहीं है | उनके अनुसार सिविलियन्स को समय पर वेतन देना नौसेना के शान के खिलाफ है | कोई गरीब भूखे मरता है तो मरे, नौसेना अधिकारियों की दारू और ऐय्याशी ज्यादा जरुरी है | उनके अनुसार चीफ ऑफ़ नेवल स्टाफ सुनील लांबा सिक्यूरिटी गार्डों के वेतन के पैसे की दारू पीकर टुन्न हो गए हैं और किसी नाले में गिर गए हैं | कुछ दिनों बाद जब उनकी शराब उतरेगी और वो नाले से निकलेंगे, उसके बाद ही सिक्यूरिटी गार्डों को वेतन मिल सकेगा |

सिक्यूरिटी गार्डों का वेतन पास करनेवाले एन्कोडिंग डिपार्टमेंट के कमोडोर स्वामीनाथन बालकृष्ण को जब सिक्यूरिटी गार्डों के वेतन के बारे में पूछा गया तो वो बोले कि फिलहाल वो मेराथन घोटाले में व्यस्त हैं | उन्हें गरीब मजदूरों का चुराया हुआ दूध भी अपने घर ले जाना है | उनका यह भी मानना है कि सिक्यूरिटी गार्ड्स के बिल की जो फाइल है उसमें बहुत घोटाले हैं | तो जब तक उनका कमीशन नहीं मिलता वो उस बिल को पास नहीं करेंगे |

मुझे सुनने में आया है कि नेवल डाकयार्ड मुंबई के नए एडमिरल सुपरिन्टेन्डेन्ट रियर एडमिरल जी. श्रीनिवासन अच्छे आदमी है | पता नहीं यह सच है या नहीं | लेकिन इस लेख के माध्यम से मैं उनसे इतनी ही प्रार्थना करूँगा कि नौसेना अधिकारियों की रिश्वतखोरी के चक्कर में गरीब सिक्यूरिटी गार्डों को भूखा न मारे | उन्हें भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन दिलाएँ और वो भी समय पर दिलाएँ |

बाकि पाठक नौसेना अधिकारियों से ज्यादा उम्मीद न रखे, उनका सही चरित्र जानना है तो यह लेख जरुर पढ़ें :

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])

दवा की जगह जहर बाँटता डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई का नौसेना अस्पताल

रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा
रिटायर्ड वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा

पिछले तीस वर्षों में नौसेना के अधिकारियों का एक से बढ़कर एक घोटाला मैनें सुना और देखा है | एक से बढ़कर एक गिरी हुई हरकत | जब भी मैं सोचता हूँ कि ये लोग इतना नीचे गिर चुके हैं और इससे ज्यादा क्या गिरेंगे, तभी नौसेना के अधिकारी उससे भी बड़ी घटिया हरकत कर मुझे गलत साबित कर देते हैं | उसी का उदाहरण है यह लेख |

पाठकों में से कई लोगों को पता नहीं होगा तो उनकी जानकारी के लिए बता दूँ कि ५ फरवरी २०१९ को अन्न एवं औषध प्रशासन ( http://fda.maharashtra.gov.in/ ) ने कई दवा वितरकों पर छापे मारे और रक्षा विभाग के लिए बनाई गई लगभग साठ लाख की दवाई बरामद की | यह दवाई सेना, नौसेना और वायुसेना के अस्पतालों के लिए बनाई गई थी लेकिन दवा वितरक इस पर से CGHS का स्टाम्प मिटाकर निजी दवा दुकानों (Private Medical Stores) से बेच रहे थे | दर्जन भर FIR हुए और लगभग उतने लोग गिरफ्तार भी हुए | सभी बड़े-बड़े समाचारपत्रों में यह खबर छपी | इनमें से कुछ के लिंक दे रहा हूँ :

  1.      FDA raids traders ‘diverting’ drugs meant for defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/fda-raids-traders-diverting-drugs-meant-for-defence/articleshow/67860289.cms
  2.      E-pharma firm’s head, 12 others booked for diverting defence : https://mumbaimirror.indiatimes.com/mumbai/crime/e-pharma-firms-head-12-others-booked-for-diverting-defence-drugs/articleshow/68001821.cms
  3.      Two drug firms booked for ‘diverting consignments meant for defence personnel’ : https://indianexpress.com/article/cities/mumbai/two-drug-firms-booked-for-diverting-consignments-meant-for-defence-personnel-5581186/
  4.      ६० लाखांच्या औषधांची जप्ती :   https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/seizure-of-60-lakhs-%20drugs/articleshow/67889137.cms
  5.      नौदलाच्या औषधांची बाजारात विक्री : https://www.esakal.com/mumbai/sales-navy-medicines-market-169469
  6.      १३ जणांवर गुन्हा दाखल : https://maharashtratimes.indiatimes.com/mumbai-news/13-cases-filed-against-them/articleshow/67965649.cms

अब सवाल यह उठता है कि दवा वितरकों के पास सेना के लिए बनी इतनी दवाईयाँ आई कैसे ? इसका जवाब मैं आपको देता हूँ | दवा कंपनियाँ इन दवाइयों को बनाकर, CGHS का स्टाम्प लगाकर सेना, नौसेना तथा वायुसेना को देती है | नौसेना के अधिकारी निजी दवा वितरकों से मिलकर इसपर से CGHS का स्टाम्प मिटाते हैं | फिर उस दवा की अदला-बदली ऐसी दवाइयों से की जाती है जिनके प्रयोग की अवधी समाप्त होने को हो |

आप लोगों को पता ही होगा कि हर दवा पर उसके प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) लिखी होती है | कई बार दवाइयाँ नहीं बिकती और उनके प्रयोग की अंतिम तारीख नजदीक आ जाती है | Expiry Date के बाद वो दवा किसी काम की नहीं रहती | ऐसे में निजी दवा वितरकों को भारी नुकसान होने की संभावना रहती है | ये दवा वितरक हमारी नौसेना के अधिकारियों को रिश्वत देकर इन दवाइयों को CGHS के लिए बनी दवाइयों से अदला बदली कर लेते हैं | नौसेना द्वारा उसे सिविलियन्स के लिए बने अस्पतालों में मरीजों को देने के लिए भेज दिया जाता है | आप में से जो लोग नियमित रूप से नौसेना के अस्पतालों से या CGHS से दवाईयाँ लेते हैं, उन्होंने नोट किया होगा कि उन दवाइयों की प्रयोग की अंतिम तारीख ( Expiry Date ) नजदीक होती है |

अक्टूबर २०१८ में नौसेना ने डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग, मुंबई में बने नौसेना अस्पताल में इस घोटाले को पकड़ा | जाँच शुरू हुई, कई अधिकारियों के नाम आने लगे | यह भी माँग उठी कि इतने गंभीर मामले की जाँच पुलिस को दे दी जाए | लेकिन ऐसे में नौसेना के वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर वाईस एडमिरल गिरीश लूथरा डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग निरिक्षण के बहाने से आये | उन्होंने अस्पताल प्रशासन और नौसेना अधिकारियों को तुरंत जाँच बंद करने का आदेश दिया | साथ में अस्पताल प्रशासन को यह निर्देश भी दिया कि जल्दी से जल्दी, ज्यादा से ज्यादा दवाईयाँ मरीजों को देकर उन दवाइयों के स्टॉक को ख़त्म कर दिया जाये |

उसके बाद से जाँच बंद | डाकयार्ड कॉलोनी कांजुर मार्ग के नौसेना अस्पताल ने थोक के भाव से दवाइयाँ बाँटनी शुरू की | डॉक्टर मरीज को एक दवा के बदले चार दवा देने लगे भले मरीज को जरुरत हो या न हो | नवम्बर २०१८, दिसंबर २०१८ तथा जनवरी २०१९ यही चलता रहा | डाकयार्ड कॉलोनी के कई रहिवासियों ने, जो उस दौरान नौसेना अस्पताल गए थे, इस बात का अनुभव किया था | तीन महीने तक मरीजों की सेहत से खिलवाड़ होता रहा |

मैं डाकयार्ड कॉलोनी, कांजुर मार्ग के निवासियों से कहूँगा कि वो नौसेना के अस्पताल से कभी दवाई न ले | भले पैसा खर्चा हो, प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराये | नौसेना के अधिकारी पैसे के लिए कब हमें बेच दे, कब जहर पिला दे, इसका कोई अंदाजा नहीं |

( लेख पूरा नहीं है, अगले भाग का इंतज़ार करें | )

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नौसेना के दूधचोर कमांडर ललित शर्मा द्वारा मजदूरों का शोषण जारी, अपनी चोरी पकड़ी जाने पर ले रहे हैं बदला

दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा
दूधचोर कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा

उम्मीद है कि आप पाठकों ने दूधचोर कमांडर ललित शर्मा के बारे में मेरा पिछला लेख पढ़ा होगा | न पढ़ा हो तो कृपया यह लिंक क्लिक करके पढ़ लें : नौसेना के कमांडर आय एस कुमार तथा कमांडर ललित शर्मा बने दूध चोर, दिन के एक लीटर दूध के लिए अपना ईमान बेचा |

मुझे लगा मेरे पिछले लेख के बाद शर्मिंदगी की वजह से कमांडर ललित शर्मा के व्यवहार में थोडा बहुत सुधार जरूर होगा, वो नेवल डाकयार्ड मुंबई के मजदूरों को तंग करना बंद कर देंगे | लेकिन मेरी वो उम्मीद हवा के झोंके के साथ बह गई | हमारे नौसेना अधिकारी इंसानियत कब का बेच खाए हैं | देश की सुरक्षा तो वो रोज टुकड़ों-टुकड़ों में बेच ही रहे हैं | हमारे ललित शर्मा जी भी अपनी ख्याति के अनुरूप ही निकले |

मेरे पिछले लेख लिखने के बाद से बेचारे आग बबूला हैं | सारे सिविलियन्स पर गुस्सा निकाल रहे हैं | खासकर मजदूरों पर | सबका ओवरटाइम बंद कर दिया गया है | सुबह सबको ठीक नौ बजे आना जरुरी है और शाम को भी कोई समय से एक मिनट पहले अपनी जगह से नहीं हिल सकता | लंच टाइम आधे घंटे से एक मिनट ऊपर नहीं | एकदम कड़ाई से समय की पाबंदी और सबसे काम के एक-एक मिनट का हिसाब ले रहे हैं | बीच-बीच में जब भी उनके दिमाग पर फितूर चढ़ता है, अचानक खड़े होकर सिविलियन्स पर चिल्लाने लगते हैं कि तुम सबने मेरे साथ गद्दारी की है | मजदूरों के मोबाइल फ़ोन के प्रयोग पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गयी है, सिर्फ नौसेना के भ्रष्ट अधिकारी ही मोबाइल फ़ोन का प्रयोग कर सकते हैं | कमांडर ललित शर्मा ने मजदूरों को सीधे-सीधे धमकी भी दे दी है कि भले पूरे नेवल डाकयार्ड मुंबई का दूध बंद करना पड़े लेकिन मैं तुम लोगों को दूध मिलने नहीं दूँगा |

अब जहाँ तक समय की पाबंदी वाली बात है, वो तो शर्मा जी ने अच्छा ही किया है | सबको अनुशासन में ला दिया | ज्यादातर सरकारी नौकर कामचोर होते हैं, समय बरबाद करते हैं | उनसे कड़ाई से काम करवाना अच्छी बात है | लेकिन परेशानी यह है कि उसी कार्यालय में काम करनेवाले नौसेना के अधिकारियों पर यह नियम लागू नहीं हो रहा | वो अपनी मर्जी से अपने समय पर आते हैं, अपने मर्जी से चले जाते हैं | खुद ललित शर्मा नौ के बजाय ग्यारह से बारह बजे के बीच में ही आते हैं | रोज दो से तीन घंटा लेट | सुबह नौ से ग्यारह बजे तक वो नकली बिल पास करने का उपाय सोचते हैं | बाकी पूरा दिन मजदूरों को परेशान करने का उपाय सोचने में लगाते हैं जैसे – मोबाइल प्रयोग पर पाबंदी या दूध बंदी |

पाठकों की जानकारी के लिए बता दूँ कि सी.सी.टी.वी. घोटाले में लक्ष्मी सेल्स नामक कंपनी से संजीव काले तथा भूपेश अनेजा के साथ ललित शर्मा ने भी मोटी रिश्वत ली है | यदि आपने सी.सी.टी.वी. घोटाले के बारे में न पढ़ा हो तो यह लिंक क्लिक करके पढ़ें : नौसेना के रिश्वतखोर कप्तान भूपेश अनुजा ने सीसीटीवी कैमरों का नकली बिल पास किया, भ्रष्टाचार छुपाने के लिए फाइल चुराया | इस घोटाले में ललित शर्मा के रोल के बारे में किसी और दिन लिखूँगा |

तो दूधचोर / कामचोर ललित शर्मा जी सुधर जाइए | भगवान आपको पहले से आपके कर्मों की सजा दे रहा है | हराम का पैसा और मजदूर की हाय आपको कभी चैन से सोने नहीं देगी | और किसी ने आपके साथ गद्दारी नहीं की है | मजदूरों का दूध छीन कर आपने उनके साथ अन्याय किया है और इनकोडिंग डिपार्टमेंट में बैठकर फ्रॉड बिल पास कर देश के साथ आप गद्दारी कर रहे हो |

(आजके लिए इतना ही काफी है | बाकी किसी और दिन | नौसेना के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी के लिए पढ़ते रहिये ebharat.net | मुझसे संपर्क करके अपने विचार जरुर बताएँ | मेरा मेल है : [email protected])